Padosan Taai ki Chut Ki Khujli

यहाँ से कहानी में ट्विस्ट आया। मैं तो उनको सिर्फ देख कर अपना लण्ड हिला लेता था पर वे इस बारे में क्या सोचती थीं।

दोस्तो, कपड़े उतरने के बाद सभी कहानियां एक जैसी होती है और यह मेरी रियल कहानी है.. तो मैं इसे विस्तार से लिखना चाहूँगा।

घर में अगर एक टीवी हो तो अक्सर दो भाइयों में रिमोट को लेकर झगड़ा होता रहता है.. वो ही मेरे साथ भी था।

पड़ोसन ने अपने घर बुलाया
एक दिन संतोष ताई हमारे घर आईं और हम दोनों भाई आपस में झगड़ रहे थे। उन्होंने मम्मी से कारण पूछा.. तो मम्मी ने उन्हें बताया कि रिमोट की लड़ाई है।

संतोष ताई ने मुझे बुलाया और बोलीं- बेटा ऐसे झगड़ा नहीं करते.. तू चाहे तो हमारे घर आकर टीवी देख सकता है.. वैसे भी वो बंद पड़ा रहता है।
मैंने मम्मी की तरफ देखा तो मम्मी बोलीं- चला जा.. कम से कम तुम लोगों का ये रोज़-रोज़ का ड्रामा बंद हो।

मैं उनके घर टीवी देखने जाने लगा उनका टीवी एक ऊंची जगह पर था इसीलिए मैं टीवी उनके बिस्तर पर लेट कर देखता था।

एक दिन संतोष ताई दोपहर के वक़्त टीवी वाले कमरे में आईं। उनको सोना था.. पर बिस्तर पर मैं लेटा हुआ था उन्होंने मुझसे कहा- बेटा थोड़ा सा खिसक.. मुझे भी सोना है।
मैं उठने लगा तो उन्होंने कहा- तुम लेटे रहो.. टीवी देख लो।

मैंने वैसा ही किया।
थोड़े समय बाद उन्होंने अपनी एक टाँग मेरे ऊपर डाल दी तो मैं वहाँ से उठ कर चेयर पर बैठ गया पर मेरा लंड खड़ा हो गया।
कुछ पल बाद मैं फिर से जाकर लेट गया.. पर मैंने कुछ किया नहीं।

उन्होंने आँखें खोलीं और वो बोलीं- कमरे का गेट बंद कर दो.. बाहर से हवा आ रही है।
मैंने गेट बंद किया और कुर्सी पर बैठ गया।
उन्होंने बोला- तू पूरा बुद्धू है।

मैं समझ गया कि उन्हें मुझसे चुदवाना है।
मैंने बोला- ताई, मैं बुद्धू नहीं हूँ।

मैं उठा और उनका पेटीकोट ऊपर कर दिया, वो ज़्यादातर पेटीकोट और ब्लाउज़ ही पहनती थीं।

चूत चुसाई
वो लेटी रहीं.. मैं उनकी जांघों पर किस करने लगा, मेरे सामने उनका भोसड़ा था.. पर टांगें बंद थीं।
मैंने उनकी टाँगें हाथों से खोलनी चाहीं.. तो उन्होंने अपनी टाँगें खोल दीं।

अपनी जीभ मैंने उनके दाने पर रख कर चूत को चूस लिया। वो सिहर उठीं.. उनकी चूत भी थोड़ी सी गीली थी।

मैंने उनकी चूत को अपने दोनों हाथों से खोल कर चूसा और मैं बीच-बीच में उनके दाने को भी चाट रहा था। उन्होंने मेरे सर पर हाथ रख कर मेरे मुँह को चूत पर दबाया तो मेरी साँस घुटने लगी.. क्योंकि वो मोटी थीं।

उनके हाथ मैंने मेरे हाथों से हटाए और फिर से चूत चूसने लगा। कुछ ही मिनट के बाद उन्होंने अपनी चूत से एकदम से गर्म और लिसलिसे पानी की धार मेरे मुँह पर छोड़ दी।
मैंने अपना मुँह उनके पेटीकोट से पौंछा।

कुछ पल बाद फिर से चूत चाटते हुए मैं हट गया।
उन्होंने मुझे अपने मुँह के पास बुलाया।
मैं नीचे फर्श पर उनके मुँह के पास जाकर खड़ा हो गया।

उन्होंने मेरा लंड मेरी पैन्ट से निकाला और अपने हाथ से सहलाने लगीं।
मेरा प्री-कम निकला हुआ था, मैंने उनसे लंड चाटने को कहा.. तो उन्होंने मना कर दिया।
पर मैं उनके सर के पीछे हाथ ले गया और उन्होंने मेरे लंड के टोपे को मुँह में ले लिया।

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