पड़ोसन भाभी ने दी चूत और गांद

एक बार अगर आपके पड़ोस में कोई एक हॉट आंड सेक्सी भाभी रहने आ गयी, तो आप कैसे अपने आप को और अपने लंड को काबू कर सकते है? मेरा नाम सौरभ है, और मेरी उमर 23 साल है. कॉलेज में पढ़ता हू, और जिम रोज़ जाता हू. कॉलेज में सारी लड़कियाँ मारती है मुझ पर. कुछ लड़कियों की सील मेरे लंड ने तोड़ दी है.

कुछ वक़्त से लड़कियाँ छोड़ने का मॅन नही था. और ठीक उसी वक़्त मेरे पड़ोस में एक कपल रहने आया. कुछ ही दीनो में उनकी और मेरी मम्मी की अची जान-पहचान हो गयी. उसकी वजह से हम फॅमिली मेंबर्ज़ को भी वो लोग पहचानते थे. रोज़ सुबा 8 बजे भाभी के पति नाइट ड्यूटी करके वापस आते, और शाम 7 बजे फिर ड्यूटी पर निकल जाते.

एक रोज़ मम्मी ने घर पर पाव भाजी बनाई, तो बाजू में देने को कहा. मैं पाव भाजी लेकर उनके घर गया. वाहा खिड़की से झँकते हुए देखा तो भाभी बेड पर लेती हुई थी. वो अपने हाथो से अपनी सारी को उपर उठाए, अपनी छूट में उंगली डाले मास्टरबेट कर रही थी.

वो दृश्या देख कर एक झटके में मेरा लंड खड़ा हो गया. उस दिन के बाद रात दिन मुझे बस उनके ही सपने आते थे. ये फीलिंग कुछ और ही थी. इतनी लड़कियों को नंगा देख चुका था, और उनकी छूट की चुदाई कर चुका था. पर ना-जाने भाभी जी में ऐसी कों सी बात थी, जो मेरे ज़हन से निकल ही नही रही थी.

भाभी जी 34-28-34 की थी. उनका रंग गोरा था, और उनके ब्लाउस के उपर से उनके बूब्स बड़े-बड़े सॉफ नज़र आ रहे थे. उनकी उभरी हुई गांद और गोरी कमर हाए, क्या मस्त लगती थी भाभी. मेरा लंड तो उनके बारे में सोच कर ही खड़ा हो जाता. मैं अब उनको लुभाने की कोशिश में लग गया. रोज़ जैसे ही वो बाहर आती, तब मैं जान-बूझ कर किसी बहाने से बाहर आता.

कभी शर्ट उतार कर एक्सर्साइज़ करता, तो कभी सिर्फ़ चड्डी में कोई काम करने लगता. भाभी से नज़र मिलती तो मुस्कुरा देता, और भाभी भी अब मुझे भाव देने लगी थी.

एक रोज़ मेरे घर कोई नही था, तो मैने सोचा बाजू में टांक-झाँक करनी चाहिए. शायद उस दिन जैसा कुछ देखने को मिल जाए तो आँखें तृप्त हो जाएँगी. मैं भाभी जी के बेडरूम में देखने लगा. वाहा कोई नही था. मैं और इधर-उधर से देखने लगा तो भाभी ने मुझे पकड़ लिया. भाभी ने मुझे घर के अंदर लेके दरवाज़ा बंद किया.

भाभी: ये क्या ताका-झाकी चल रही है?

मैं: कुछ नही भाभी. बस ऐसे ही.

भाभी: सब समझ में आ रहा है. आज कल खूब बॉडी बनाई जेया रही है.

मैं: हा बस ऐसे ही. हेल्ती और फिट रहना चाहिए.

भाभी: हेल्ती रहना है या कॉलेज में लड़कियों के लिए चल रहा है सब?

मैं: नही भाभी. ऐसा तो कुछ नही.

भाभी: ज़रा मुझे भी तो दिखाओ अपनी बॉडी.

ये कह के भाभी सोफे पर बैठ गयी. मेरा तो जैसे सपना पूरा हो गया. मैने भी अकड़ते हुए शान मारते हुए अपनी त-शर्ट उतरी, और बॉडी दिखाने लगा.

भाभी: अब जब दिखा ही रहे हो, तो पंत भी उतार दो.

मेरी आँखें बड़ी हो गयी. भाभी को कैसे बतौ की पंत तो उतार दूँगा, पर उनको देख कर जो लंड खड़ा हुआ था उसका क्या? तो मैं पलट गया, और उनकी तरफ पीठ करके अपनी पंत उतार दी. अंदर सिर्फ़ ब्रीफ थी. मैं सिर्फ़ चड्डी में भाभी जी के सामने काढ़ा था.

भाभी मेरे करीब आई, और मेरे सामने खड़ी हो गयी. मेरा खड़ा लंड ब्रीफ में से सॉफ दिख रहा था. भाभी ने उसे देखा और मुस्कुराइ. मैं शर्मा गया. पर भाभी ने कहा-

भाभी: कोई बात नही, जवानी का जोश है सब. समझ सकती हू.

भाभी ने मेरे और मेरे सेक्स अफेर्स के बारे में पूछा. और मैं भी उन्हे अपनी सेक्स स्टोरीस के बारे में बताने लगा, की कैसे मैने कितनी लड़कियों को छोड़ा था. भाभी ने बात करते-करते मेरे लंड पर हाथ रख दिया, और उनके छूटे ही छ्होटा चेतन टाइट हो गया.

उन्होने चड्डी के उपर से उसे सहलाया, और लंड में से एक बूँद निकल कर बाहर गिर गयी. भाभी ने बेड पर मुझे बिताया और खुद नीचे दोनो पैरों के बीच में बैठ गयी. सारी का पल्लू पीछे करते हुए कमर में घुसाया. बालों का जूड़ा बनाया, और सीधा अपने मूह से मेरे लंड को चड्डी के उपर से काटा.

मेरे मूह से आ आ फक निकल गया. भाभी ने ब्रीफ को नीचे खिसकाया, और मैने उसे अपनी गांद से नीचे करके उतार दिया. मैं नंगा बैठा हुआ था. भाभी अपने होंठो से मेरे लंड के आजू-बाजू उपर और नीचे किस और टंग से लीक करने लगी.

साथ ही अपने हाथो से मेरी दोनो गोटियों से खेलने लगी. साथ ही उनके हाथो की उंगलियाँ मेरी गांद के दरार में जाती, और मेरी गांद के च्छेद को छेड़ती. ये एक अलग ही कमाल का अनुभव था. थोड़ी देर बाद वो मेरा लंड मूह में ले-जेया कर चूसने लगी. कुछ मिंटो बाद ही मुझे ऐसे लगा की मेरा कम निकल जाएगा, तो मैं बोल पड़ा-

मैं: भाभी निकल जाएगा.

भाभी: चिंता मत करो, निकालने नही दूँगी.

भाभी ने लगभग 15-20 मिनिट तक मेरा लंड चूसा, और मेरा कम निकालने नही दिया. मैं समझ गया की कुवारि लड़कियों को सील तोड़ने में से ज़्यादा मज़ा तो भाभी के साथ है. और क्यूँ ना हो, इन्हे एक्सपीरियेन्स जो होता है. ये सब देख कर मैं समझ तो गया था की भाभी अपने पति का लंड लेने में एक्सपर्ट थी. और ये सब भला एक्सपीरियेन्स से हो तो आता है.

वरना किसी लड़की को मूह में लेने के लिए मानने में ही आधा टाइम वेस्ट हो जाता है. भाभी ने मेरा कम अपने मूह में ले लिया, और पूरा आखरी बूँद तक मैं भाभी के मूह में ही झाड़ गया. हाए ये आनंद ही कुछ और था. मैं लेता हुआ भाभी को देख रहा था. भाभी जी भी मेरे सामने खध्ि-खध्ि अपने कपड़े उतारने लगी. एक-एक करके भाभी खुद नंगी हो गयी.

उनके गोल-गोल बड़े-बड़े बूब्स देखते ही मेरा लंड वापस खड़ा हो गया. अभी 10-15 मिनिट हुए ही नही थे, की मैं उनके बूब्स पर झपट पड़ा. उन्हे बेड पर लिटा कर किसी छ्होटे बच्चे की तरह मूह में बूब्स लेकर चूसने लगा. बूब्स को दबाने और ज़ोर-ज़ोर से मसालने लगा.

मेरे हैवान की भाँति ज़ोर लगाने और मसालने के बावजूद भाभी चीखने या चिल्लाने नही लगी. मैं समझ गया की भाभी के पति उनको ऐसे ही परेशन करते होंगे. तो अब उनको आदत हो गयी होगी. कुछ देर बाद नीचे छूट की तरफ गया. फिर मैने छूट चाटना शुरू किया. छूट का पानी निकल कर मेरे मूह पर आ गया.

भाभी को मिशनरी पोज़िशन में सेट करके मैने अपना लंड डाला. कुछ धक्को में ही मेरा लंड उनकी छूट में था. कुछ देर चुदाई चली. मैने भाभी को डॉगी बनाया. हाए, माँगी गांद मेरे सामने थी. मैं अपने हाथो को कंट्रोल नही कर पाया, और सतत करके उनकी गांद पर तमाचा मार दिया.

भाभी को भी मज़ा आया. मैने फिर दो-चार तमाचे जड़ दिए, और फिर लंड उनकी छूट में फिरसे डाल दिया. उनकी कमर और गांद पकड़ कर जाम कर चुदाई शुरू की. 15-20 मिनिट की लगातार चुदाई के बाद मैं रुक गया, क्यूंकी मुझे अभी आयेज और करने का मॅन था. भाभी बिल्कुल ताकि नही थी. भाभी को मैने पूछा की ऐसे ही उनके पति आपको छोड़ते थे क्या?

उन्होने कहा: वो जवानी में कस्स कर छोड़ते थे. इतना छोड़ते थे की मैं रो देती थी उनके सामने. चुड-चुड कर मैं एक्सपर्ट बन गयी हू. पर आज कल वो ज़्यादा वक़्त नही दे पाते.

तो मैने कहा: कोई नही भाभी, मैं हू ना.

कुछ वक़्त बाद मैने भाभी को कहा की मुझे उनकी गांद मारनी थी. तो भाभी टेबल के पास गयी. टेबल पर उल्टी बेंड हो गयी और मेरे लंड का अपनी गांद से स्वागत करने लगी. मैने फिर उनकी गांद पकड़ी, और अपना लंड उनकी गांद में डाल दिया. उनकी गांद मैने 20-25 मिनिट तक मारी और उसके बाद उनकी गांद पर ही सारा कम निकाल दिया.

इस चुदाई में अलग ही मज़ा था. ना बाकी लड़कियों की तरह कीच-कीच, ना कोई रोक-टोक. भाभी को छोड़ना एक एक्सपीरियेन्स वाली के साथ सेक्स करने जैसा था. जो लंड माँगता वो उसे मिलता. फिर चाहे मूह में डालो, छूट में या गांद में. कोई भी झंझट नही.

उस रात वही सो गया मैं और सुबा जब उनके पति आए, तो मैं पीछे के रास्ते से नंगा भागता हुआ अपने घर आ गया. फिर उस दिन के बाद मैने भाभी को काई बार छोड़ा. भाभी को छोड़ने के बाद मुझे कॉलेज की वो वर्जिन लड़कियों में कोई इंटेरेस्ट नही रहा.

अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो जवानिकजोश@आउटलुक.कॉम पर प्रतिकारिया भेजे. आपकी ईद सेफ रहेगी, उर अगर आपको कहानी पसंद आई हो, तो मैं और एक्सपीरियेन्स शेर ज़रूर करूँगा. आपको भी कभी भाभी को छोड़ने का मौका मिले, तो छ्चोढिएगा नही. अपने लंड की इक्चा ज़रूर पूरी कीजिएगा.

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