नौकरानी की मालिक के बेटे से चुदाई की कहानी

सुबा मैं जल्दी उठ गयी. दादी मा अभी सोई हुई थी, तो मैं उठ कर किचन में चली गयी, जहा सुमन भाभी पहले से ही मौजूद थी. वो छाई-नाश्ता बना रही थी, तो मैं भी उनका हाथ बताने लगी.

सुमन: अंजलि तुमको इस घर में कैसा लग रहा है, अछा तो लग रहा है ना?

अंजलि: हा सुमन भाभी, बहुत अछा लग रहा है. मुझे तो यहा मज़ा आ रहा है.

सुमन: चलो अछा है, किसी को तो हमारे साथ मज़ा आ रहा है.

अंजलि: हा सुमन भाभी, बहुत देर से मुझे आपसे एक बात पूछनी थी.

सुमन: हा पूच्छो बिल्कुल, जो पूछना हो.

अंजलि: सुमन भाभी मैं ये पूछना चाहती थी, की राकेश भैया आपको किस तरह से करते है?

सुमन: क्या प्यार? वो तो प्यार मुझसे हर तरह से करते है.

अंजलि: भाभी प्यार नही, वो-वो?

सुमन: ओह अछा चुदाई, तो ऐसे बोलो ना. वो तो हर तरीके से करते है. हर रात अलग-अलग तरीके से मुझे छोड़ते है, और जब छोड़ते है ना, तो मेरी हालत खराब कर देते है. मेरी छूट लाल हो जाती है, और सूजन भी आ जाती है, जब वो मेरी छूट में अपना लंड डाल कर मुझे घपा-घाप छोड़ते है तब.

अंजलि: अछा, मतलब राकेश भैया का लंड तगड़ा है, जिससे आपकी छूट की हालत खराब कर देते है.

सुमन: हा, लेकिन अंजलि तुम ये सब क्यूँ पूच रही हो? क्या तुमने कभी किसी के साथ अपनी छूट की चुदाई करवाई है?

अंजलि: हा भाभी एक बार करवाई थी अपने दोस्त के साथ गाओं में.

सुमन: अंजलि तुम्हे चुदाई करके मज़ा आया था?

अंजलि: हा सुमन भाभी, बहुत मज़ा आया था. जब उस चुदाई को याद करती हू, तो मेरी छूट गीली हो जाती है नीचे से.

सुमन: इसका मतलब तू बड़ी चुड़क्कड़ है अंजलि, और तुझे चुदाई बहुत पसंद है. देखती हू मैं, यहा पर किसी के साथ तेरा जुगाड़ करा दूँगी.

अंजलि: ठीक है सुमन भाभी.

और मैं उन्हे ज़्यादा और कुछ नही बोली. अगर मैं और कुछ बोलती, तो मैं पकड़ी जाती, इसलिए मैं चुप ही रही. और हम दोनो मिल कर ही नाश्ता बनाने लगे, और फिर सारे घर वालो को नाश्ता दिया. मैने भी नाश्ता किया. फिर मैं वापस किचन में चली गयी बर्तन ढोने के लिए.

नेक्स्ट दोपहर को मैं हॉल में बैठी थी. तभी राकेश वाहा आया, और मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गया. कुछ देर के बाद वो मुझसे बोला.

राकेश: अंजलि क्या बात है, तुम मुझसे बात ही नही कर रही हो? क्या कोई परेशानी है तुमको मुझसे बात करने में?

अंजलि (अब मैं उसको क्या बोलती? वैसे मुझे राकेश अछा तो लग रहा था, लेकिन वो एक शादी-शुदा मर्द था, और उपर से प्रीतम जी का बेटा था. तो मैने राकेश से कभी बात नही की): ऐसी कोई बात नही है, बस ऐसे ही.

राकेश: अंजलि तुम बहुत प्यारी हो. काश मेरी पत्नी भी तुम्हारे जैसी होती. अगर तुम मेरी पत्नी होती, तो मैं तुमसे बहुत प्यार करता. तुम बहुत-बहुत प्यारी हो. मैं ना चाहते हुए भी तुम्हारी तरफ आकर्षित हो रहा हू. अंजलि मैं क्या करूँ?

अंजलि: राकेश थॅंक योउ मेरे लिए इतना बोलने के लिए. और तुम कुंवारे होते तब भी मैं तुमसे शादी नही करती, क्यूंकी मैं एक नौकरानी हू.

राकेश: अगर होता तो मैं तुमसे शादी कर लेता, और मुझे कोई फराक नही पड़ता की तुम नौकरानी हो या रानी. मुझे तो बस तुमसे प्यार हो गया है. ई लोवे योउ मेरी जान मेरी अंजलि.

वो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे ई लोवे योउ, ई लोवे योउ बोलने लगा.

राकेश: प्लीज़ अंजलि बताओ तुम मुझसे प्यार करती हो ना? और तुम यहा डॅडी के साथ कैसे आई इस घर में, पूरा बताओ मुझे प्लीज़.

अंजलि: ठीक है राकेश, मैं सब कुछ बतौँगी. लेकिन तुम वादा करो, की तुम घर में किसी और को कुछ भी नही बताओगे.

राकेश: अंजलि मैं तुमसे प्यार करता हू, और वादा करता हू की मैं घर में किसी और को कुछ भी नही बतौँगा. ये बात सिर्फ़ मेरे तक रहेगी.

अंजलि: तो सुनो राकेश. मैं इस घर में तुम्हारे डॅडी की बीवी बन कर आई हू, और 3-4 साल से मैं उनके साथ सेक्स कर रही हू.

राकेश: ओह बाप रे! ये तुम क्या बोल रही हो अंजलि तुम्हे पता है?

अंजलि: हा राकेश, मैं सब सच बोल रही हू. तुम्हारे डॅडी ने मेरी बहुत हेल्प की थी, उसके बदले में मैने अपना सब कुछ उनको दे दिया. यहा तक की इस घर में नौकरानी बन कर आ गयी. असल में मैं उनकी बीवी हू.

राकेश: अछा लेकिन मुझे नही लगता की डॅडी तुमको खुश कर पाते होंगे. वैसे डॅडी है बहुत हरामी आदमी. काश मैं डॅडी की जगह होता, और तुम्हे यहा लेकर आता. फिर सब के सामने तुमसे शादी करता, और तुम्हे एक बीवी का दर्जा देता, उनकी नौकरानी का नही.

अंजलि: ठीक है राकेश, जो हुआ सो हुआ. छ्चोढो उनको, कोई दूसरी बात करो. और वैसे भी तुम्हारे डॅडी ने मेरे लिए बहुत कुछ किया है. चलो हम कोई नयी बात करते है.

राकेश: हा ठीक है अंजलि, चलो मुझे ये बताओ तुम कितनी हॉट आंड सेक्सी हो. वो मुझे आज बताओ.

अंजलि: अछा तुम ये कहना चाह रहे हो, की प्रीतम जी को मैने किस तरह चरमसुख दिया?

राकेश: हा बिल्कुल अंजलि, तुम सही सोच रही हो. चलो जल्दी करो, मुझसे और इंतेज़ार नही होता.

अंजलि (साला ये बहुत हरामी है): लेकिन राकेश हम तो कोई नही बात करने वाले थे. तुम तो मुझसे मेरी छूट माँग रहे हो.

राकेश: नही अंजलि, तुम पहले मुझे अपना दीदार करा दो. छूट माँगने की बात तो बाद की है, जैसे तुमने डॅडी को आकर्षित किया, वैसे ही क्या मुझे आकर्षित कर पति हो?

अंजलि: चलो ठीक है. मैं एक बार तुम्हे भी अपने दर्शन करवा देती हू. फिर देखना तुम किस तरह मेरे पीछे आकर्षित होकर अपना लंड हाथ में लेकर हिलने लगते हो.

फिर मैं उठी, और अपनी सारी उतार डाली, और उसके सामने ब्लाउस और पेटिकोट में खड़ी हो गयी. उसने मुझे देख कर अपने दोनो हाथ मूह पर रख लिए, और मुझसे बोला-

राकेश: वाउ अंजलि तुम्हारा जिस्म तो बहुत सेक्सी है. इसको देख कर तो कोई भी मर्द आकर्षित हो जाएगा. तुम तो मेरे कहने से भी ज़्यादा हॉट हो. तुम बहुत गरम लड़की हो.

मुझे लग रहा था उसका लंड खड़ा हो गया था मेरे जिस्म को देख कर. और अब वो खुद पर कंट्रोल नही कर पाएँगा, और मेरे साथ कुछ भी कर सकता था.

राकेश: चलो अंजलि अब अपने ब्लाउस और पेटिकोट को भी उतरो. मैं तुम्हे बिकिनी में देखना चाहता हू.

फिर मैने भी ब्लाउस और पेटिकोट उतार दिया, और मैं बिकिनी में खड़ी हो गयी उसके सामने. मुझे कुछ मालूम नही था, की मैं क्या कर रही थी. बस जो वो बोल रहा था, मैं कर रही थी.

और फिर राकेश उठा और मेरे पीछे आ कर खड़ा हो गया, और अपने हाथ मेरे बूब्स पर रख कर मेरे बूब्स को दबाने लगा.

अंजलि: ये तुम क्या कर रहे हो राकेश? छ्चोढो मुझे हाथ मत लगाओ मुझे राकेश प्लीज़.

राकेश: अंजलि मुझे सब कुछ दिखा कर अब बोलती हो छ्चोढो मुझे. अब तो मैं तुम्हे नही छ्चोढने वाला.

अंजलि: राकेश मैं तो सिर्फ़ तुम्हे आकर्षित कर रही थी अपनी और, और कुछ नही. बस इतना ही चाहती थी मैं तो.

राकेश: ये सब ठीक है अंजलि. लेकिन तुम्हारा जिस्म तो कुछ और ही कह रहा है मुझसे.

अब मैं चुप-छाप खड़ी थी. उसने मेरी ब्रा का हुक पीछे से खोल दिया, और मेरे ना चाहते हुए भी मेरी ब्रा निकाल दी. फिर वो अपने दोनो हाथो से मेरे बूब्स के निपल्स को मसालने लगा.

राकेश: अंजलि तुम्हारे बूब्स के निपल्स बहुत कड़क और गरम है. लगता है डॅडी ने रात को तुम्हे बहुत छोड़ा है. अब तुम मुझे रोकने की कोशिश मत करना. अब मैं नही रकुँगा, और तुम्हे छोड़ कर ही दूं लूँगा. और आज जी भर कर तुम्हे छोड़ूँगा. आन मैं तुम्हारे मूह से सिर्फ़ आह आह ऑश सुनना चाहता हू, और कोई शब्द नही, ठीक है?

मैं अभी चुप थी, और वो मेरे आयेज की तरफ आ गया, और मेरे बूब्स के निपल्स अपने मूह में लेकर चूसने लगा. उसका एक हाथ मेरी जांगो पर आके, मेरी पनटी के उपर से मेरी छूट को सहला रहा था.

मैं ये सब रोकना चाहती थी, लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. इसलिए मैं उसको रोक नही पाई, और वो अपना काम करता रहा.

राकेश: अंजलि मुझे पता है अब तुम्हे भी मज़ा आ रहा है. और देखो तुम्हारी छूट इतना पानी छ्चोढ़ रही है की तुम्हारी पनटी भी गीली हो गयी है.

आहह आह अब मैं चाह कर भी रोकना नही चाहती थी उसको. और फिर राकेश ने मेरी पनटी भी उतार दी, और अपनी एक उंगली मेरी छूट में घुसा कर अंदर-बाहर करने लगा.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी छूट बहुत गीली हो गयी थी, और पानी छ्चोढ़ रही थी बार बार, जो राकेश अपनी उंगली की मदद से चाट गया,

फिर राकेश ने मुझे सोफे पर उल्टी करके झुका दिया, और मेरे पीछे से खड़े-खड़े मेरी छूट को अपनी जीभ से चाटने लगा, अपने दोनो हाथो से मेरी गांद को पकड़ कर. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, उसकी जीभ मेरी छूट पर घूम रही थी, तो मुझे गुदगुदी भी हो रही थी, और अछा भी लग रहा था.

फिर मैने राकेश के सर को अपनी छूट पर दबाया अपना हाथ पीछे करके, और बोली-

अंजलि: और छातो, और छातो मुझे, और ज़ोर से छातो मेरी छूट को. राकेश मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. छ्चोढना मत ऐसे ही चाट-ते रहो मेरी छूट को ह ह ऑश आह ऑश आह.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था अपनी छूट चटवाने में. इससे पहले इस तरह कभी किसी ने मेरी छूट नही छाती थी, जो राकेश चाट रहा था. वो अपना पूरा सर मेरी जांघों के बीच में दबाए हुए मेरी छूट चाट रहा था.

उसकी नाक भी मेरी छूट को टच हो रही थी और मेरी छूट गीली होकर पानी छ्चोढ़ रही थी. छूट बहुत गीली हो गयी थी, और गरम भी हो चुकी थी. अब मुझे लंड चाहिए था मेरी छूट में.

राकेश: अंजलि मुझे लगता है अब तुम्हारी छूट मेरा लंड माँग रही है. तभी तो इतनी गीली होकर पानी छ्चोढ़ रही है. अब तुम तैयार हो जाओ मेरा लंड अपनी छूट में लेने के लिए.

अंजलि: राकेश मैं तो कब से तैयार हू. तुम उठो, और मेरी छूट में अपना लंड डालो और मुझे छोड़ो.

राकेश: हा ठीक है अंजलि. लेकिन पहले तुम्हे मेरे लंड को अपने मूह में लेकर चूसना पड़ेगा. उसके बाद मैं तुम्हारी छूट में अपना लंड डाल कर तुम्हे छोड़ूँगा.

अंजलि: हा मुझे भी तुम्हारा लंड चूसना है.

और फिर मैं राकेश का लंड अपने मूह में ले कर चूसने लगी घुटनो के बाल बैठ कर. राकेश का लंड बहुत गरम और टाइट था लोहे की रोड की तरह. उसका गुलाबी टोपा स्वादिष्ट बहुत था, और मज़ा आ रहा था.

राकेश: वाउ अंजलि, तुम तो बड़े आचे तरीके से लंड चूस्टी हो. सुमन ने कभी इस तरह से मेरा लंड नही चूसा. तुम बड़ी चुड़क्कड़ लड़की हो. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है अपना लंड चुसवाने में. तुम्हारे नरम-नरम होंठ, और ये तुम्हारी गरम-गरम साँसे मुझे मेरे लंड पर महसूस हो रही है. तुम ऐसे ही मेरा लंड चूस्टी रहो अंजलि. रुकना मत, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.

करीब 10 से 15 मिनिट तक मैने राकेश का लंड अपने मूह में लेकर चूसा. मेरा मूह और होंठ अब दुखने लगे थे. उसका लंड बहुत हार्ड हो गया था, और अब मेरी छूट की बारी थी.

तो राकेश ने मुझे घोड़ी बना दिया, और खुद घुटनो के बाल मेरे पीछे आ गया, और अपना लंड मेरी छूट पर सेट किया, और मुझसे बोला.

राकेश: अंजलि अब तुम तैयार हो जाओ. मैं तुम्हारी छूट में अपना लंड घुसने वाला हू, और तुम्हे छोड़ने वाला हू.

अंजलि: राकेश मैं तैयार हू, तुम डालो मेरी छूट में अपना लंड.

और फिर राकेश पहले अपना लंड अपने हाथ में पकड़ कर मेरी छूट के उपर रगड़ने लगा. उसका गरम-गरम टोपा मेरी गरम छूट के होंठो को टच कर रहा था, और फिर आहिस्ते-आहिस्ते वो अपना लंड मेरी छूट में घुसने लगा.

देखते ही देखते उसने पूरा लंड मेरी छूट में घुसा दिया, और अपनी पूरी ताक़त से मुझे घपा-घाप छोड़ने लगा. मेरे मूह से ह आह उफ़फ्फ़ ऑश उफ़फ्फ़ की सिसकियाँ निकालने लगी.

वो मेरे दोनो बूब्स को पकड़ कर अपने हाथो से पीछे घुटनो के बाल बैठ कर घपा-घाप मुझे छोड़ रहा था. उसका पूरा लंड मेरी छूट की गहराई तक टच हो रहा था.

वो एक झटके में लंड अंदर डालता, और फिर निकालता. धक्के पर धक्का मार रहा था वो, और मेरी छूट भी फूफा-फूफा की आवाज़ निकाल रही थी. मेरे मूह से ह ह ह ऑश उफफफ्फ़ की आवाज़ निकल रही थी.

राकेश: अंजलि तुम्हारी छूट एक-दूं रस्स से भारी है. इतनी मस्त छूट मुझे ज़िंदगी में पहली बार मिली है. मैं यकीन से कह सकता हू, की डॅडी ने तुम्हे बहुत छोड़ा होगा. क्यूंकी ऐसी छूट जिस आदमी को मिल जाए, वो तो बस दिन रात चुदाई करता रहेगा.

अंजलि: और राकेश तुम बड़े कमीने हो, जो अपने डॅडी की बीवी को छोड़ रहे हो. बस इतना है की तुम्हारा लंड तुम्हारे डॅडी से बहुत हार्ड और लंबा है, जो मेरी छूट की गहराई तक जेया रहा है. और तुम जैसे मेरी छूट को छोड़ रहे हो, ऐसे कभी तुम्हारे डॅडी ने मुझे नही छोड़ा है. बस तुम मुझे ऐसे ही छोड़ते रहो, और मज़ा दो मुझे अपने लंड का.

मुझे यकीन नही हो रहा था, की राकेश इतनी अची तरह से चुदाई करता था. और फिर हमने सेक्स पोज़िशन चेंज की. अब राकेश सीधा लेता, और मैं उसके उपर काउ गर्ल के स्टाइल में आ गयी. उसका लंड अपनी छूट में लेकर उपर-नीचे ज़ोर-ज़ोर से उछालने लगी. ऐसे तो उसका लंड मेरी छूट में और अंदर जाने लगा.

राकेश: अंजलि तुम एक बार बोलो, की राकेश मुझे छोड़ो, आज से मैं तुम्हारी बीवी हू. तुम मेरे पति हो.

अंजलि: अभी कुछ मत बोलने को कहो. बस तुम मुझे ऐसे ही छोड़ो.

राकेश: नही पहले तुम मुझे कहो. मैं तुम्हारे मूह से सुनना चाहता हू. अंजलि मुझे बोलो तुम.

अंजलि: हा राकेश, तुम मेरे पति हो. मैं तुम्हारी पत्नी हू, और आज से हर रात मैं तुमसे अपनी छूट की चुदाई कार्ओौनगी. बस अब खुश? अब जल्दी से मुझे और अपने गरम-गरम माल से मेरी छूट को भर दो.

राकेश: हा, अब मैं खुश हुआ. और मुझे भी छूट के अंदर ही अपना माल गिरने में मज़ा आता है बाहर नही. मैं तुम्हारी छूट के अंदर झड़ने वाला हू.

अंजलि: हा राकेश, मेरा भी होने वाला है. आह ऑश उफ़फ्फ़ ऑश उफ़फ्फ़.

और फिर राकेश ने मेरी छूट के अंदर अपना गरम-गरम माल निकाल दिया. उसका माल बहुत गाढ़ा था, जो उसका लंड बाहर निकालने के बाद भी मेरी छूट से बाहर निकल रहा था काफ़ी देर तक.

और फिर हम दोनो एक-दूसरे को किस करके वही बेड पर लेट गये कुछ देर के लिए.

इसके आयेज की कहानी, नेक्स्ट पार्ट में.

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