कामवाली की बेटी की हार्डकोर चुदाई

naukrani ki beti ki chudaiये हिंदी पोर्न स्टोरीज  के ऊपर मेरी पहली कहानी हे. मैंने यहाँ पर बहुत कहानियाँ पढ़ के अपने लंड को हिलाया हुआ हे. मैं अक्सर रात को कहानी पढ़ के अपने लंड हिला के सोता हूँ. अब मेरे बारे में बताऊँ. मैं हैदराबाद से हूँ और एक मकान में पीजी रहता हूँ. मेरी हाईट 5 फिट 7 इंच हे और कलर में घेउआ हूँ. लेकिन मेरा बॉडी स्ट्रक्चर एकदम बढियां हे. मेरा लंड पूरा 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा हे. जो भी मेरे लंड को एक बार देख ले तो उस से चुदने को उसका मन हो जाए ऐसा हे मेरा पेनिस. ये बात जो आप को मैं आज बताने के लिए आया हूँ वो मेरी डिग्री की पढाई के समय मेरे दादा जी वाले घर में मेरे साथ हुई थी.

मेरे दादा जी की फेमली काफी बड़ी हे और वो लोग संयुक्त कुटुंब में रहते हे. तो जाहिर हे की उनका घर भी काफी बड़ा था और मैं अक्सर अपनी छुट्टियों में उस घर में रहने के लिए भी जाता था. घर काफी बड़ा हे जिसमे दो विभाग बने हे. एक साइड में घर के मेम्बर्स रहते हे. और दूसरी साइड में बोरवेल हे. उसी साइड में अनाज का छोटा गोदाम हे और एक बड़ा सा स्टोर रूम भी.

घर के दुसरे मजले के ऊपर दो बेडरूम बने हुए हे महमानों के लिए जो सिर्फ महमानों के लिए ही खोले जाते हे. घर बड़ा हे इसलिए नोकर चाकर भी काफी हे. वैसे भी दादा जी बड़े जमीनदार हे और काफी रुआब सा हे उनका. घर में नोकरों के बच्चे भी हे जो स्टोर रूम वाली साइड में घर के बच्चो के साथ ही खेलते हे. अक्सर दोपहर में जब घर के मेम्बेर्स सोये होते हे तब स्टोर रूम वाली साइड में बच्चो के खेलने का वक्त होता हे.

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कामवाली के बच्चो में एक लड़की भी थी जिसका नाम देवी था और वो उम्र में 18 साल की थी. वो घर के बच्चो का ध्यान रखती हे और कभी कभी उनको खेल भी लगाती हे.

एक दिन मैं जब वेकेशन के लिए दादा के घर आया था तो लांच के बाद बड़े लोग सब घर के मेन एरिया में बैठे हुए थे. फिर सब लोग सोने के लिए चले गए. दोपहर का वक्त था और गर्मी भी काफी थी. मुझे नींद नहीं आई तो मैं दुसरे एरिया में चला गया जहां पर बच्चे खेल रहे थे. वैसे भी मुझे दोपहर में कम ही सोने की आदत हे. मैंने उस वक्त लुंगी पहनी हुई थी. मैं गया तो मैंने देवी को बच्चो के साथ खेलते हुए देखा. उसने एक साडी पहनी थी जिसके अन्दर रेड ब्लाउज था. उसकी नाभि दिख रही थी. उसका फिगर भी काफी अच्छा लग रहा था. उसके बूब्स काफी बड़े हे जो ब्लाउज में से जैसे बहार आने को बेताब लग रहे थे. वो बच्चो के साथ खेलते हुए उछल कूद कर रही थी जिसकी वजह से उसके बूब्स भी ऊपर निचे हो रहे थे. मेरे लंड में तूफ़ान आ गया उसकी उभरती हुई जवानी को देख के. अभी कुछ समय पहले तक तो वो चड्डी में घुमती थी. और अब एकदम से ही बड़ी हो गई जैसे!

देवी के उछलते हुए बूब्स ने मेरे लंड को खड़ा कर दिया था. फिर धीरे धीरे कुछ बच्चे भी दोपहर की नींद लेने के लिए निकल पड़े. फिर एंड में देवी के साथ सिर्फ मेरे चाचा जी का 8-9 साल का बेटा ही रह गया. मेरा लंड ऐसे खड़ा हो चूका था की उसके अंदर से प्रीकम भी लुंगी के अन्दर निकल रहा था. मैंने धीरे से अपनी लुंगी को खोला और अपना मोटा लंड देवी को दिखा दिया.

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देवी ने मेरे बड़े लंड को देखा तो उसकी आंखे ही फट गई जैसे. फिर उसने मुझे देख के स्माइल दिया. और फिर मैं समझ गया की वो भी इस लोडे से अपनी हार्ड फकिंग करवाना चाहती हे. मैंने चाचा के बेटे को 10 का नोट दिया और उसको कहा की जाओ सो जाओ बेटा आज गर्मी ज्यादा हे. उसके जाने के बाद मैं देवी को कहा बाजू वाले कमरे में चलोगी मेरे साथ? वो निचे देख के हंस रही थी. शर्ट की जेब से मैंने 100 का नोट निकाल के उसके ब्लाउज में खोस दिया. वो हंस के ऊपर देखने लगी. मैंने उसके बूब्स को हलके से दबाये और फिर उसका हाथ पकड के बगल के कमरे में ले गया.

वो एकदम देसी देहाती लड़की थी, लेकिन दिखने में जैसे मैंने कहा वैसे काफी सेक्सी थी. मेरा लंड लुंगी को फाड़ के बहार आने को बेताब सा था. मैंने कमरे में घुसते ही दरवाजे को बंद कर दिया और लुंगी उठा दी. देवी के हाथ में मैंने अपना लंड पकड़ा दिया. फिर मैंने लुंगी को निकाल दिया. मैं लुंगी के अन्दर अंडरवेर नहीं पहनता हूँ. देवी को लंड की बड़ी नवाई सी लग रही थी. वो उसे पकड़ के जैसे दूध निकालना हो वैसे हिला रही थी.

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