चोरी करने की वजह से मा चुदी नौकर से

ही दोस्तों, मेरा नाम जे है. मैं कॉलेज में फाइनल एअर में पढ़ता हू. मेरी हाइट 5’10” है, और लंड 6.5 इंच का है. रंग मेरा सावला है, और मैं उप का रहने वाला हू. मेरे घर में मेरे अलावा सिर्फ़ मेरी मा है. मेरे पापा की डेत कुछ साल पहले हो चुकी है. तो मा ही मुझे पढ़ा-लिखा रही है. अब मैं बिना ज़्यादा टाइम वेस्ट किए अपनी कहानी पर आता हू.

मेरी मा की जो नौकरी है, उसमे उनको ज़्यादा पैसे नही मिलते. वो एक मॅन्यूफॅक्चरिंग यूनिट में काम करती है. मैने उनको कितनी बार बोला है, की मैं पढ़ाई छ्चोढ़ कर कोई नौकरी पर लग जाता हू. लेकिन वो मानती नही. वो चाहती है की मैं अपनी पढ़ाई पूरी करके एक अची नौकरी पर लागू. वो मुझे पार्ट टाइम जॉब भी नही करने देती.

क्यूंकी उनकी सॅलरी कम है, तो वो अक्सर अपनी फॅक्टरी से समान उठा कर ले आती है, और उसको बाहर बेच कर पैसे बना लेती है. ये चोरी करते-करते मेरी मा को चोरी की आदत लग गयी, और वो हर जगह पर हाथ सॉफ करने की कोशिश करने लगी. मैने उनको एक-दो बार सावधान करने की कोशिश भी की, लेकिन वो बाज़ नही आती. एक दिन उनकी यही आदत उनको भारी पद गयी.

तो हुआ कुछ ऐसा की हम एक जेवएलेरी शॉप पर गये. मा के कानो की बाली को टांका लगवाना था. वाहा जाके जितनी देर में बाली को टांका लगना था, मा दूसरे गहने ट्राइ करने लगी. पता नही औरतों को पैसे ना होते हुए भी चीज़े ट्राइ करने की हिम्मत कैसे आ जाती है.

फिर वो रिंग्स देखने लगी. तभी जैसे ही दुकानदार का ध्यान दूसरी तरफ हुआ, मा ने एक रिंग नीचे गिरा दी. मुझे सब सॉफ नज़र आ रहा था. पहले तो मुझे भी लगा की वो रिंग ग़लती से गिर गयी थी. लेकिन ऐसा नही था. रिंग नीचे गिरने के बाद मा ने अपनी चप्पल में से पैर निकाला, और पैर से रिंग को पकड़ कर चप्पल वापस पहन ली.

ये देख कर मेरी गांद फटत गयी. मुझे लगा की कही कोई पंगा ना पड़ड़ जाए. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नही. थोड़ी देर में बालियां टांका लग कर आ गयी, और हम पैसे देके वाहा से निकल गये. बाहर आके मैने मा से कहा-

मैं: मा, आप ये सब ना किया करो. अगर कही हम पकड़े जाते तो?

मा: पकड़े जाते तो मैं बोल देती ग़लती से गिरी है.

मैं: आपको समझने का कोई फ़ायदा नही है.

फिर हम घर आ गये. घर आके मा ने मुझे मार्केट से कुछ समान लाने भेजा. थोड़ी देर बाद जब मैं घर आ रहा था, तो मुझे एक बंदा दिखा. उस बंदे को मैने ज्यूयेल्री शॉप पर पोछा लगते देखा था. वो शायद उनका नौकर था. वो हमारे ही घर की तरफ जेया रहा था.

मैं उसके पीछे-पीछे आया. फिर घर के बाहर आके उसने बेल बजाई. मम्मी ने दरवाज़ा खोला. मैं साइड पर ही खड़ा था, लेकिन उनकी बातें मुझे सुन रही थी. वो मम्मी से बोला-

वो आदमी: मेडम मेरा नाम रमेश है, मैं वो ज्यूयेल्री शॉप पर सफाई करता हू, जहा आप अभी आई थी.

मम्मी: हंजी बोलिए.

रमेश: मुझे आप से कुछ बात करनी थी. क्या मैं अंदर आ सकता हू?

मम्मी: हा आइए.

फिर वो अंदर चला गया, और मैं विंडो से अंदर देखने लगा. अंदर जाके वो बोला-

रमेश: जब आप वाहा आई थी, तो मैं पोछा लगा रहा था. मैने देखा आपने वो रिंग नीचे गिरा दी, और फिर वापस नही लौटाई.

ये सुन कर मा का रंग उडद गया. तभी वो बोली-

मम्मी: कों सी रिंग?

रमेश: मुझे बेवकूफ़ मत समझिए. वही रिंग जिसको आपने अपने पैर से पकड़ा था, और उसको अपने बाप का माल समझ कर घर ले आई.

मम्मी: आप बात कैसे कर रहे हो? निकल जाओ मेरे घर से नौकर कही के.

रमेश: ठीक है, फिर मैं मलिक को जाके बता देता हू जो आपने किया. वो कॅमरा चेक करेंगे और फिर आपकी पॉल खुल जाएगी.

जब वो ऐसा बोल कर जाने लगा, तो मा उनको रोकते हुए बोली-

मम्मी: सुनिए, रुकिये. देखिए मैं बहुत ग़रीब हू. पैसे नही थे, तो मैने ये किया. प्लीज़ आप किसी को मत बताना. मेरी ज़िंदगी खराब हो जाएगी.

रमेश कुछ सोचते हुए बोला: देखिए मेडम, मैं ये किसी को नही बतौँगा. लेकिन इतनी महँगी रिंग मैं आपको ऐसे ही नही लेके जाने दे सकता. कम से कम 50000 की होगी.

मम्मी: आपको हिस्सा चाहिए?

रमेश: मुझे हिस्सा नही चाहिए. मुझे तो बस तुझे एक बार छोड़ना है.

मम्मी: ये क्या बकवास कर रहे हो.

रमेश: बकवास नही कर रहा हू. जो चाहिए वो बता रहा हू. अब या तो तुम मुझे वो डेडॉ, जो मुझे चाहिए. नही तो जो वो तुम्हारे साथ करेंगे, बाद में उस चीज़ का अफ़सोस मानना.

मम्मी: आप ऐसा कैसे बोल सकते है. मैं एक विधवा हू.

रमेश: अर्रे फिर तो और मज़ा आएगा. इतनी देर से तू चूड़ी नही है, तो तेरी छूट पूरी टाइट होगी. रंडी की तरह छोड़ूँगा तुझे.

चलिए अब मैं आपको अपनी मा के बारे में बताता हू. मेरी मा 45 साल की एक गड्राए शरीर वाली औरत है. उनका रंग गोरा है, और फिगर 36-30-38 है. वो अक्सर सारी पहनती है, जिसमे वो काफ़ी सेक्सी लगती है. उनके बूब्स ब्लाउस से बाहर आने की कोशिश करते रहते है, और सारी में लिपटी गांद भी कमाल की है. उनको देख कर किसी भी मर्द का मॅन दोल सकता है.

जब कभी मेरी मा लेगैंग्स-सूट पहनती है, तब तो तबाही लगती है. उनके चूतड़ और जांघें बवाल मचा रहे होते है. अब इतनी सेक्सी औरत को कों मर्द नही छोड़ना चाहेगा. मैने भी बहुत बार मा के बारे में सोच कर मूठ मारी है, लेकिन बेटा होने के नाते मैने कभी उन पर हाथ डालने की हिम्मत नही की.

अब मा के पास कोई रास्ता नही था. अगर वो ना करती, तो रमेश अपने मलिक को सब बता देता. इससे रिंग तो जाती ही, इज़्ज़त भी चली जाती. तो हार कर मा ने कहा-

मम्मी: ठीक है, लेकिन सिर्फ़ एक बार. और फिर तुम्हे इसमे से कोई हिस्सा नही मिलेगा.

रमेश: जिसको तू छोड़ने के लिए मिल जाए, वो हिस्से का करेगा.

ये बोल कर रमेश ने मा को अपनी बाहों में भर लिया. इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. अगर आपको कहानी पढ़ कर मज़ा आया हो, तो इसको अपने फ्रेंड्स के साथ भी शेर करे.

यह कहानी भी पड़े  लखनऊ की कामवाली को गर्लफ्रेंड बना कर चूसने की


error: Content is protected !!