राजू की मजेदार ज़िंदगी

मेरा नाम है राजू और मेरी उमर है 22 साल और मई चीरनावा नाम के गाओ मे रहता हू. मेरी पढ़ाई ख़तम होने के बाद मई अपनी दुकान खोली और मई उसी मे काम करता हू.

मेरे पिताजी की डेत के बढ़ घर का सारा भर मैने अपने उपर ले लिया है. मेरे घर मे मेरी मा जो 44 साल की है, मेरी विद्वा दीदी जो 26 साल की है, मेरी छोटी बहें जो 19 साल की है और मेरा 1 साल का भांजा रहता है. हुमारी आर्थिक स्थिति डुकर के कारण अची है और हुमारा परिवार बहुत खुशल है.

मेरा लाइफ बहुत सही चल रही है. और हन मैने अपने बारे मे तो बताया ही नही. मई दिखने मई अछा हू और मई अप्नी बॉडी का भी ख़याल रखता हू. मेरा लंड 7 इंच का है और मेरी सेक्स ड्राइव बोहुत ज़्यादा है.

मेरे स्कूल के टाइम मैने बोहुत लरकीओ के साथ सेक्स किया है और मेरे सारे दोस्त मुझे प्लेबाय भी कहते थे. पर कॉलेज के बाद मैने यह सब कम कर दिया था. और दुकान पे ज़्यादा फोकस करने लगा था.

हुमारा गाओ ज़्यादा बरा नही है पर सारी बेसिक फेसिलिटीस है. और हुमारे दुकान का नाम सभी को पता था और दिन भर की ज़रूरी सामग्री लोग हुमारे दुकान से ही लेते. और हुमारे गाओ मे सिनिमा हॉल एक छोटा माल और बहुत कुछ है. पर सबसे पॉपुलर जगह पर कोई इसके बारे मे बात नही करता
विजय का अड्डा. विजय का अड्डा मर्दो के लिए जन्नत समान है. रात के वक़्त दारू से लेकर रंडी साब मौजूद है. लोग बाहर से भी आते है इसका मज़ा लेने. विजय का अड्डा एक क्लब है जहा मई अक्सर ही जाता हू मेरी प्यास मिटाने. इस टॉपिक मे कभी और बात करेंगे.

बहुत इंट्रोडक्षन हो गया मेरे और मेरे गाओ के बारे मे. अब मेरे किसे की शुरुवत करते है.

राधा हुमारे यहा काम करती है. 32 साल की है और उसका फिगर मॉडेल जैसा है. वो हुमारे घर मैने बहुत सालो से काम करती है और उसको छोड़े की इचा मुझे बोहुत पहले से है पर कभी हिम्मत नही की.

पर जब उसका बाकचा हुआ उसके बूब्स पहले से बोहुत ज़्यादा बारे हो गये. जब भी वो मेरे कमरे मे कोई काम करने आती मा चुप चुप के बस उसकी क्लीवेज देखता रहता.

मुझे उसे छोड़ना था तो मैने डिसाइड किया कुछ तो करना ही पड़ेगा. तो मई एक दिन उससे अपने कमरे मई बुलाया.

राधा: क्या हुआ छोटे साहब कोई काम है?

मई: नही कुछ बात थी.

राधा: क्या बात है बोलिए

मई: मई सोच रहा था छोटू अभ बरा हनी लगा है. घर मे खर्चा बोहुत बढ़ गया होगा नही?

राधा: बात तो सही है. मेरे पति सारा पैसा दारू मई उधा देते है और घर चलाने के लिए कुछ नही बचता. और चोटो को स्कूल मे भी देना होगा.

यह बात कहकर राधा थोरी सहें गई.

मई: अरे तुम चिंता क्यू करती हो. रेहान(मेरा भांजा) और छोटू को एकसाथ भेज देंगे और खर्चे की चिंता तुम मत करो. और ये लो 3000 रुपी.

राधा: सच मह! आप इंता सब करेंगे मेरे लिए.

मई: हन पर तुमे भी कुछ करना होगा मेरे लिए.

राधा: कुछ भी! आप बस बोलिए छोटे साहब.

राधा के आखों में एक अलग सी खुशी आ गयी थी.

तो मैने धीरे से उसके कंधो पे हाथ रखा और वो समाज गयी.

राधा: पर छोटे साहब मई शादीशुदा हू. यह सब ग़लत होगा.

मई: अरे इसमे कोई ग़लत नही. हम बस एक दूसरे की मदात कर रहे है.

राधा ने जब कुछ नही कहा मई समाज गया यही मौका है सालो की इचा को पूरा करने का.

मैने धीरे से उसका ब्लाउस और ब्रा निकल दिया. उसके बारे बारे बूब्स और कली निपल देख मेरा लंड सख़्त हो गया. वो घुटनो पे थी तो मैने अपना पंत खोल के उसके मूह के सामने खरा हो गया. और मेरा लंड देख ही उसका चेहरा शरम से विस्मय मे बदल गया.

राधा: इतना बरा!!

मई: क्यू टुमरे पति का इतना बरा नही है?

राधा: नही मेरे पति का तो इसका आधा भी नही नई

मई(हस्ते हस्ते): जो भी हो. अभी अपना मूह लगाके चूस

राधा मेरे कहने के बाद ही हाथ और होत लगाके चूसने लगी. उसके बारे बूब्स झूल रहे थे.

वो देख मेरा लंड और साख हो गया और मैने उसके सर पाकर लिया.

ज़ोर से उसके मूह मह ढाका लगाने लगा. वो पूरी तरह अपने मूह मे नही ले पा रही थी और उसके गले मे लग रहा था मेरा लंड. उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे पर उसने मुझे नही रोका.

जब मेरा निकालने वाला था मैने उसके मूह से अपना लंड निकाला और उसके बूब्स पे झरदिया. जब मई तोरा पीछे गया. मैने देखा उसका गोरा मूह लाल हो चुका था और उसकी आँखों से गाल तक उसका काजल बहचुका था और उसके बारे बूब्स मेरे रस से ढके हुए थे.
यह चित्रा देख मेरा लॅंड फिर से खरा होगआया. मैने उसे बिस्तर पे लेट जेनी बोला और वो चुप छाप मेरी बात सुनकर लेट गयी.

मैने उसका पेटीकोआट उपर किया और उसकी लाल पनटी उतार दी. उसकी छूट जंगल से ढाकी थी और उसमे से एक महेक आ रही थी. वो सुंगते ही मेरा लंड टन गया और बिना कुछ सोचे मैने अपना लंड जंगल के अंदर धकेल दिया. और वो सीधा राधा की छूट के अंदर चला गया और वो कराह उठी.

उसकी छूट ढीली थी पर फिर भी मई उसके अंदर तक डालते ही महसूस हुआ की मई उसकी कोक को छू रहा हू. यह महसूस होते ही मई ज़ूर ज़ूर से धक्के लगाने लगा और राधा कराहने लगी. उसकी छूट ढीली थी पर मज़ेदार थी. उसे छोड़ते छोड़ते उसके बूब्स बाउन्स कर रहे थे. यह देख मेरा लंड और तेज़ होगआया. और मैने उसके बूब्स को पाकर कर दबाया और दूध के फुआरा निकल आया.

मई उसे छोड़ते छोड़ते उसके बूब्स से दूध निकल ता रहा. थोरी देर बाद मैने अपना सारा रास उसकी कोक मे ही भर दिया. वो कुछ नही बोली. उसके छूट के झट्तो के बीच से मेरा रास तपाक रहा था. और मेरा पूरा बेड पसीने और दूध से जेला हो चुका था.

मेरा लंड नरम होने के बाद मैने उसे कहा सब साफ करलेणा और मेरे बातरूम मे नहा लेना.

राधा: ठीक है छोटे साहब.

फिर अगले कुछ दीनो तक हुंने कुछ नही किया. पर एक दिन राधा खुद मेरे रूम मे आके बोली उसे फिर से सेक्स करना है.

तो फिर क्या मई उसे जब भी मेरा मान करता है छोड़ता हू.

इससे तरह मैने राधा को अपनी पर्सनल रंडी बनाया.

मिलते है फिर अगले चॅप्टर पे.

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