नौकर के मा को पाटने और चोदने की कहानी

ये कहानी मेरे नौकर राजू की है, और कैसे वो अपनी किस्मत पलट देता है. आइए कहानी शुरू करते है.

हमारे घर में मैं, मेरी मा जिसका नाम सुषमा है, और मेरी बेहन रहते थे. पिता जी का 3 साल पहले स्वरगवस हो गया था, पर हमे पैसे की कोई दिक्कत नही हुई. क्यूंकी हमारे पास गाओं में सबसे ज़्यादा ज़मीन थी.

हमारी हवेली में नौकर थे जो सब काम घर का देखते थे. हमारे सबसे ख़ास नौकर रामू काका की तबीयत थोड़ी खराब रहने लगी थी, तो उनका बेटा राजू जो की ब्स्क. कर चुका था, और पढ़ा-लिखा भी था, हमने उसे काम पे रख लिया.

वो अब हमारी हवेली के सारे काम देखता, और व्यापार का भी काम संभालने में मदद करता था. राजू बहुत ही स्मार्ट लड़का था. उसकी हाइट कम से कम 6 फुट 4 इंच के आस-पास थी. घर के सारे नौकर उसकी बात मानने लगे, और वो सारा काम बढ़िया संभालने लगा. हमारे घर से कोई भी काम होता, तो राजू साथ में जाता था. एक बार मा सीडीयों से गिर पड़ी, तो राजू तुरंत उनके पास गया, और उनको पकड़ लिया.

मा बोली: कुछ नही हुआ राजू, बस हल्का पीठ में दर्द हो रहा है.

तो राजू बोला: अगर ज़्यादा हो रहा है तो हॉस्पिटल ले चलता हू आपको.

पर वो बोली: नही, इतना भी नही हो रहा.

राजू बोला: कोई बात नही. अगर तोड़ा बहुत हो तो बताना, मैं मसाज कर दूँगा. मैने शहर में स्पा में भी कुछ महीने काम किया है.

तो मा बोली: नही, उसकी क्या ज़रूरत है.

और वो अपने कमरे में आराम करने चली गयी. फिर रात को जब मैं घर वापस आया तो मैने सोचा की क्यूँ ना मा से हाल-चाल लेले. तो मैं उनसे मिलने गया. पर उनके कमरे का दरवाज़ा बंद था. फिर जब मैने खटखटाया, तो राजू ने दरवाज़ा खोला.

मा बिस्तर पे लेती हुई थी और बोली: बेटा मेरी कमर में बहुत दर्द हो रहा था, तो मैं राजू से थोड़ी मसाज करवा रही हू.

मैं देखता हू की राजू की पंत में उसका लंड टेंट की तरह खड़ा हुआ था, और उसके हाथो में तेल लगा हुआ था.

राजू मा से कहता है: मालकिन आपको अपना ब्लाउस खोलना होगा, तभी ढंग से मसाज होगी.

तो मा कहती है: अर्रे तुम ही खोल दो. मैं तो लेती हू.

इतने में वो उनके ब्लाउस के हुक खोल के उनकी ब्रा भी खोल देता है, और तेल कस्स के मा के गोरे बदन पे लगाने लगता है. मा आँखें बंद कर लेती है. राजू उनके जिस्म को आराम से मसल रहा था, और धीरे-धीरे करके उसके हाथ पुर बदन पे चलने लगे.

फिर मा बोली: वाह राजू, तेरे हाथो में तो जैसे जादू है.

इतने में राजू बोला: मालकिन मैं तो आपके तलवे भी मालिश कर दूँगा.

और वो अब उनके पैर के पास आके उनकी सारी उपर करके पैरों पे भी तेल लगाने लगा. वो सारी उनके घुटनो के उपर करके तेल लगाने लगा.

फिर मा बोली: वाह राजू, सच में तुम तो बहुत आचे से मसाज करते हो. अब तुम ही किया करोगे मेरी मालिश.

उसके बाद मैं अपने कमरे में सोने चला गया. अगले दिन मा का कमर दर्द एक-दूं सही हो गया था, और वो और राजू अब साथ में बैठ के खाना खा रहे थे. ऐसे ही एक दिन रात को जब घर पे कोई नही था, तो मैं आया और देखा की राजू के कमरे में लाइट जल रही थी.

फिर मैने दरवाज़े के च्छेद से देखा, की राजू बिस्तर पे लेटके अपना लंड एक हाथ से सहला रहा था, और दूसरे हाथ में एक चड्डी सूंघ रहा था. मैं ये देख के चौंक गया, और इतने में वो अपना 8 इंच का लंड और तेज़ हिलने लगता है, और चिल्लाने लगा-

राजू: सुषमा, एक बार अपनी छूट डेडॉ मेरी जान.

और वो अपना सारा पानी उस अंडरवेर में छ्चोढ़ देता है. मैं उसकी ये हरकत देख लेता हू, पर कुछ बोलता नही हू. क्यूंकी राजू हमारा ख़ास नौकर था, और सारा काम देखता था. अब मैं समझ गया था, की राजू के क्या इरादे थे.

फिर मैं मा से बोला: मा आप राजू से मसाज मत करवाया करो.

तो वो बोली: बेटा अब नही कार्ओौनगी. वो तो एमर्जेन्सी थी.

पर राजू अभी भी उनके आस-पास आता रहता. कभी गार्डेन में वो दोनो बातें करते, और कभी किचन में दोनो मज़ाक मस्ती करते. एक दिन मैं उनकी बातें सुन रहा था चुपके से. राजू अपना काम कर रहा था, और मा उसके पास जाके बोलती है-

मा: और राजू, तुम शादी कब कर रहे हो? तुम तो हटते-काटते जवान हो गये हो.

वो बोला: मालकिन मेरी उमर तो अभी बस 24 साल की ही है.

फिर मा बोली: कोई सहेली तो नही है तुम्हारी?

वो बोला: नही मालकिन, मैं तो अकेला ही हू. मुझे लड़कियों के नखरे नही पसंद. मुझे जो चाहिए होता है वो मैं ले लेता हू.

बस इतने में दोनो हासणे लगे और राजू बोला: मालकिन आप भी तो अकेली हो. पर आप भी तो खुश रहती हो.

मा बोली: हा रहती हू, पर कभी-कभी उनकी याद आती है.

राजू ने उनको गले लगा लिया, और बोला: मालकिन मैं आपको अब अकेला महसूस नही होने दूँगा. अगर आपको किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो आप मुझे बताना.

मा ने उसको और तेज़ बाहों में जाकड़ लिया और बोली: जब हम अकेले हो तो मुझे मालकिन मत कहा करो. मुझे सुषमा ही बोला करो.

राजू बोला: ठीक है.

मैं ये बातें सुन कर चौक गया, की ये कैसे हो सकता था. अब मा और राजू रोज़ बहुत ज़्यादा समय साथ में रहते और राजू उनके कानो में कुछ बोलता और कभी वो उसको मज़ाक में थप्पड़ मार्टी. एक बार तो राजू ने ही उनके छूतदो पे थप्पड़ मार दिया था. तो वो गुस्सा हो गयी. तब से उनमे ज़्यादा बातें नही हुई.

एक बार हमे शहर जाना था ज़रूरी काम से. तो हम अपने फ्लॅट में आ गये, और मेरे दोस्त की शादी थी, तो मैने मा से कहा था की मैं कल सुबा ही अवँगा. मैं फिर निकल गया. शादी का फंक्षन निपात गया और मैं 12 बजे तक फ्री हो गया. मैने सोचा की घर जाके आराम करता हू. तो मैं फ्लॅट में आया.

मैने देखा, की कोई गाते नही खोल रहा था. तो मैने एक्सट्रा के से गाते खोला, और अंदर आ गया. लिविंग रूम में राजू का बिस्तर लगा हुआ था. पर कोई था नही. फिर मैं मा के कमरे के पास गया तो देखा की दरवाज़ा बंद था. उसके बाद मैं अपने कमरे में गया, और वाहा से बाल्कनी से मा के कमरे में झाँकने लगा.

मैने देखा, की राजू पूरा नंगा बिस्तर पे लेता था. मा उसका लंड चूस रही थी. ये देखते ही मेरे पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी. राजू ने मुझे देख लिया, पर कुछ बोला नही, और मा का सिर पकड़ के अपने लंड में घुसने लगा. मा उसकी हर एक बात मान रही थी.

फिर राजू बोला: सुषमा मुझे अपनी छूट दिखाओ.

मा बोली: राजू मैं अभी शाम को ही अपना पूरा शरीर तुम्हारे लिए वॅक्स करके लाई हू.

तो राजू ने उनकी टांगे पकड़ के फैला दी, और कुत्ते की तरह उनकी छूट को चाटने लगा. 5-10 मिनिट तक चाटने के बाद अपना 8 इंच का लंड उसने उनकी छूट में एक बार में डाल दिया. मा बहुत ते, चीकने लगी और बोली-

मा: सेयेल राजू, तू सांड़ है क्या? इतना मोटा लंड है तेरा.

राजू बोला: कहा था तुमसे ना की ले नही पावगी तुम मेरा लंड.

इतने में वो जोश में आके अपनी गांद उसके लंड पे खुद उपर-नीचे करने लगी, और राजू बोला-

राजू: ये बात हुई ना मेरी जान. और तेज़.

फिर राजू उनके छूतदों को हाथो से झापड़ मार के लाल करने लगा, और मा सिर्फ़ उहह आ करती रही और बोली-

मा: राजू और तेज़, आज दिखाओ तुममे कितना दूं है. अपनी मालकिन की ये ज़रूरत पूरी कर. इफ़ फ्लॅट में मैं टुमरी रंडी हू, और तुम मेरे मालिक. और तेज़ मारो राजू मेरी छूट.

राजू जोश में आ गया और उसने अपनी तेज़ी बढ़ा दी, और अब और तेज़ आवाज़े आने लगी उनके सेक्स करने की. राजू थोड़ी देर बाद उनको गोदी में लेके छोड़ने लगा, और मा को किस करने लगा. किस करके उनको चुप करने की कोशिश कर रहा था. पर आवाज़ बंद नही हो रही थी.

15-20 मिनिट बाद वो उनको बिस्तर पे लिटा के छोड़ने लगा, और फिर 10 मिनिट बाद वो अंदर ही झाड़ गया. फिर वो उनकी चूचियों को चूसने लगा, और फिर वो एक-दूसरे को पकड़ के किस करने लगे.

मा बोली: राजू मज़ा आ गया. मैं ऐसे पहली बार चूड़ी हू. तुम्हारा लंड तो बहुत ही कमाल का है.

इतने में राजू फिर उनको चूमने लगा और बोला: चल सुषमा घोड़ी बन.

और फिर छोड़ने लगा. दोनो रात के 3 बजे डाक चुदाई कर रहे थे.

राजू बोला: मैं शादी नही करूँगा. ई लोवे योउ सुषमा.

तो मा बोली: ई लोवे योउ टू मेरी जान. मैं कुछ तो तरीका ढूंढूंगी की हम साथ में रहे अब से.

और मैं अब चुपके से कमरे से निकल गया और दूसरे होटेल में रूम लेके सो गया.

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