मा के लिए मेरा प्यार

कुटिया बन कर चूड़ते हुए मा मुस्कुराने लगी. बेल गाड़ी वाला उसमे झटके मारता जा रहा था और गत्री मुस्कुराते हुए चुड रही थी.

कुछ ही देर बाद बेल गाड़ी वाले का पानी मा की गांद पर निकल गया और वो बेत गया.

“हुहह….आहुह…आहह…हुहह..मा कसम क्या छूट है साली तेरी, किसकी औरत है तू साली!”

कुछ देर बाद मा त्यार होके सारी पहें ली. वो बेल गाड़ी वाला मा को रोड तक छ्चोड़ आया. तभी उसने बीच रोड पर मा का पल्लू खिच लिया और पेट नोचने लगा.

मा- आआअहहूूच…ये क्या कर रहे हो…अब रहने दो ना..

“तुझे कैसे जाने डू मेरी जान. देख तेरा जिस्म…साली तेरा पेट कक्चा खा जाो तेरी नाभि निकल कर…उउम्म्म्म. चलती है क्या मेरे साथ!”

मा- आहह….मई कल आ जौंगी फिर अभी जाने दो मुझे. कल पक्का तुम्हारे पास आ जौंगी वरना मेरा पति आ जाएगे मुझे ढूड़ते हुए.

कुछ देर तक उसने मा को देखा फिर जाने दिया. शाम होते होते मा वापस घर मे आ गयी. यूयेसेस वक़्त मई घर वापस आ चुका था और मा ने देख लिया की मई भी घर पर ही हू. असल मे यूयेसेस वक़्त पार्टी की मीटिंग कर रहा था की कल की रॅली कैसे करनी है.

मई- अरे चाची छाए लेके आओ जल्दी.

मा ने ये आवाज़ सुनी और कपड़े बदल कर लहनगा चोली पहन कर छाए चाची के हाथ से लेके आने लगी. उउम्म्म्म…मा को देख कर मेरा एकदम मूड बदल गया. चौधरी यूयेसेस वक़्त नही था पर बाकी पार्टी के मेंबर थे. छूट तक घग्रा खिसका हुआ और पूरा पेट एकदम चिकना और क्सि हुई टाइट चोली जिसमे उसके निपल की गोली की शेप कड़क चमक रही थी.

गत्री को देखते ही सबने लंड मसलना शुरू कर दिया

मा- जी छाए लीजिए.

और जैसे ही वो छाए रखनी के लिए झुकी उसकी नंगी चिकनी कमर देख कर मेरी आँखे लाल हो गयी. मैने सबके सामने मा की नंगी कमर पर एक झनाते दार थप्पड़ मारा.

कचााअटत्त्ताआआआआआअक्ककककककककक…

मा- आआआआअहहूूच…हुहह..हुहह…

मा मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी.

मई- देखिए हुमारी होने वाली प्रधान आ गयी.

सब मेंबर घूर घूर कर गत्री की कमर, पेट और उसकी दूध से भारी च्चती देख रहे थे. मा की कमर लाल पद गयी.

मई- चल हुमारी होने वाली प्रधान सबको अपने हाथ से छाए पीला दो.

मा ने शरमाते हुए मुझे फिर देखा और सबके लिए कप मे छाए डालने लगी. बेशक मा प्रधान बनने वाली थी पर इश्स गाओ मे तो औरत की औकात उसके मर्द के लंड के नीचे ही थी ना. पार्टी का हर मेंबर अब तो बस इश्स होने वाली प्रधान को अपने बिस्तर की रखेल बनाना चाहता था.

छाए देने के बाद मैने मा को खिच कर अपनी झांग पर बिता लिया और उसके पेट पर को नोच कर मसालने लगा. होने वाली प्रधान उन्न सब मर्दो के किसी तरह मूह बंद करके सिसकिया ले रही थी, और वो सब मजा ले रहे थे. तभी एक बोला-

“सुनील भाई आज रात को मेडम को आराम करने देना कल बहोट काम है इनको.”

“अरे ऐसी मेडम हो तो कोई आराम तो क्या सास भी ना लेने दे.”

सब हास पड़े.

मई- (हुस्ते हुए) सही बोला मनोज भाई.. (मा की नाभि नोचते हुए) इसको तो रात भर छोड़ छोड़ कर भी मॅन ना भरे.

मा ने मुस्कुराते हुए शर्मा कर मूह नीचे कर लिया और सब हासणे लगे.

“सुनील भाई मई तो अभी मेडम से 10-12 बचे पैदा कर देता तुम्हारी जगह होता तो..”

मई- पंकज भाई..अभी तो मई इसका दूध पीटा हू रोज. वरना बचे हो गये तो उनको पीलना पड़ेगा.

हाहहाा…अहाआहह.हहा.

और इतना बोलते हुए मैने मा की चोली मे हाथ घुसा कर उसका दूध से भरा मोटा कसा हुआ चुचा ड्बे दिया. सबकी अपना लंड मसालने लगे और आँखे लाल हो गयी.

मई- बोल ना मेरी जान..ये दूध किसके लिए है..बोल बता इनको..

मा- आहह…हुहह…हुहह..जी….हह…हुहह…आहहुह…जी आपके लिए है बस..मेरा दूध..आहह…हह..बस आपके लिए.

“सुनील भाई हुमको भी पीला तो प्रधान जी का दूध.”

मई- ऐसे नही पंकज भाई…पहले इसको प्रधान बनाओ..फिर ये प्रधान तुम सबकी सेवा करेगी..

मई- (मा का निपल नोचते हुए) बोल करेगी ना मेरी जान..?

मा- आहह…आआआआआहह..हन करूँगी…करूँगी..सबकी करूँगी.

सब खुश हो गये और मॅन ही मॅन तान लिया की गत्री को गाओ का प्रधान बनाना है किसी भी कीमत पर.

मई- चल अब मेरे पेर दबा बड़ा दर्द हो रहा है.

मा नीचे परो मे बेत गयी और अपनी गरम च्चती पर मेरा पेर र्ख कर दबाने लगी और हम सब बात करने लगे. मई बात करने लगा और साथ मे अपने पेर से मा के चुचे भी ड्बे रहा. कुछ देर बाद मीटिंग ख्तं हो गयी और सब चले गये और गत्री को उठा कर मई बिस्तर पर ले गया.

बिस्तर पर जाते ही गत्री ने खुद ही अपनी चोली खोल दी उसके चुचो से दूध की बूँद तपाक रही थी.

मा- हुहह..हुहह…हहुऊंम..देख मेरी जान मेरा दूध बाहर निकल रहा है..निचोड़ दे इसको…हुहह..हुहह.

मेरी पंत भी खुल गयी थी मेरा लंड पकड़ कर मा ने मुझे और गरम कर दिया. मैने कक्चह..से मा का निपल दांतो मे च्बाया और रब्बर की तरह खिच कर चूसने लगा..

मा- आआआआआआआआआआआआआआआआआहह..मेरी जानं…उउम्म्म्ममम…छहुउस ले….चूस ले…पी ले मेरा दूध..उम्म्म्मम

स्सपप्रर कककच…कककच..कक्च…कककच…..उम्म्म्म..कक्चह

स्पपररर..ससपरर..कककच..कक्च्छ..कककच..उउम्म्म्मममममममममममम…पपकचह..प्पउक्च..उम्म्म्म..ससपरर.कक्च…कककचूंम्म्मममममम

मा- आआआआआहह…उउफफफ्फ़…..आहह.आहह..पी ले मेरी जान….निचोड़ दे मुझे आआआआआाआउऊचह.

स्सपप्रर कककच…कककच..कक्च…उउम्म्म्म..उउंम्म…उम्म्म..ससपरर..

स्पपररर..ससपरर..कककच..कक्च्छ..कककच..उउम्म्म्मममममममममममम…

पपकचह..प्पउक्च..उम्म्म्म..ससपरर.कक्च…कककचूंम्म्मममममम

15 मिनिट तक कुत्ते की चबा कर मैने गत्री का दूध निचोड़ कर उसके चुचे खाली कर दिए. उसके निपल बुरी तरह सूउज गये थे और चुचा पूरा लाल पद गया निशान से. मा ने अपना निपल देखा.

मा- आहह..हह….आहह…आहह.. आज मेरा निपल नही उखदेगा तू.. क्या हुआ मेरी जान नाराज़ है क्या मेरे से…क्या ग़लती हो गयी मेरे से..?

मा का ऐसा प्यार देख कर मई भी मूड मे आ गया.

मई- आज तू पूरा दिन मेरे पास नही थी, मुझे आछा नही लगा. इसीलिए बस तेरा दूध पीक ही मेरा मॅन भर गया.

हालाँकि मुझे मा के बाहर रहने से कोई दिक्कत नही थी पर मई मज़े ले रहा था. और मा सीरीयस हो गयी और पूरी नंगी हो गयी.

मा- ग़लती हो गयी मेरी जान… अब तुझे छ्चोड़ कर कही नही जौंगी 1 सेकेंड के लिए. तू जो सज़ा देगा मुझे मंजूर है. बस तू मुझे अपना पुराना प्यार कर जैसे तू मुझे नोच कर ख़ाता था.

और मा अपना निपल मेरे मूह मे डालने लगी.

मा- हह…इसको चबा कर उखाड़ दे मेरी जान… मुझे और मत तडपा, मई बस तेरी हू.

मा की गीली छूट मेरे लंड पर टच हो गयी तो मई और भड़क गया और सिद्धा मा के निपल पर चबा कर पूरा खिच कर काट डाला.

मा- आआआआआआआआआआआआआआआआआवउम्म्म्मममममममममममममम…एम्म्म…उफ़फ्फ़…

कककच…कककच..कक्च…..उम्म्म..ससपरर..

.कककच..कक्च्छ..कककच..म्‍म्म्ममम…

पपकचह..प्पउक्च..उम्म्म्म..ससपरर.कक्च…कककचूंम्म्मममममम..

10 मिनिट और बुरी तरह चबा कर मैने मा के दोनो निपल चबा कर उखाड़ कर खा लिए और सिसकिया भरती हुई गत्री ने सुकून भारी हवस की मुस्कान से मेरी तरफ देख कर मुस्कुरन लगी. अपने चुचो से कतते हुए निपल की जघ खून टपकता हुआ देख मा मुस्कुरा कर उल्टा लेट गयी.

मई साँझ गया आज इसका गांद ंृवाने का मॅन है. उम्म्म्मम..नंगी गत्री की मोटी गोल सफेद गांद मेरे सामने थी आज तो बस चियर दूँगा इसकी.

मई- हुहह…हुहह..गत्री…आज तुझे चियर दूँगा..साली..

मा- चियर दे मेरी जानं….आअहह…हुहह..आहह..मई तो तेरी रंडी हू…मार दे मुझे..हुहह..

मैने पास मे पड़ी हुई अपनी लेदर की बेल्टी उठाई और दे मारी इसकी गांद पर!

मा- आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआअहह……उम्म्म्मममममममम…और मार..

कचहाआत्त्ताआआआआआआआअक्कक…कचहाआत्त्ताआआआआआआआअक्कक…कचहाआत्त्ताआआआआआआआअक्कक…

5-6 बार मैने मा की सफेद गोल गांद पर बेल्ट ब्रसा दी. और उसकी लाल सूजी हुई गांद देख कर मैने एक ही झटके मे लंड अंदर गांद मे घुसेड डाला. मा काप गयी और उसकी सास बंद हो गयी.

उम्म्म्ममममम क्या मजा आया टाइट गांद मे लंड घुसेड कर. कपटी हुई गत्री की छूट से भी पानी निकल गया और तब उसकी सास वापस आई.

मा- आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआहह..माद्रचोड़….छोड़ मुझे….आआआआआआआआआआआआआआआआआआआहह..चियर दे मेरी गांद!

मई- साली हरामी की चूड़ी कुटिया आज तू गयी!

और मैने लंड बाहर निकले और फफकककककककककककचह से दुबारा अंदर तक घुसेड मारा. मा की आँख लाल हो गयी आयेज होने लगी. उसके दोनो हाथ पकड़ कर मैने मरोड़ दिए और-

मई- खा भाग रही है कुटिया..!

फचह…फचह…फच…फच..फचह..घप्प्प्प..घप्प्प्प..घपाआ ….मरड़चोड़…..आओउम्म्म्ममममममम.. ग्घहप्पा….घपाआ..घप्प्प्प..घप्पाा..ग्घहप्प्प्प…घपाा…घप्प्प्प्प…ग्घहपाआ

फफच..फच..फच..फच्छ….धप्पाआ..द्धप्प्प….धप्प्पाा…द्धप्प्प्प… फचह…फचह…फच…फच..फचह..घप्प्प्प..घप्प्प्प..घपाआ..आआआआआआआआआआआआआहह….मारडचोड़…!

मा- आआआआआआआआआआआआहमरर गयी…!

ग्घहप्पा….घपाआ..घप्प्प्प..घप्पाा..ग्घहप्प्प्प…घपाा…घप्प्प्प्प…ग्घहपाआ

फफच..फच..फच..फच्छ….धप्पाआ..द्धप्प्प….धप्प्पाा…द्धप्प्प्प…

आधी रात मा को नीचे लिटा कर उसकी टाइट गांद को छोड़ छोड़ कर मैने चियर डाला. कुटिया की तरह हाफ्ते हुए गत्री रग़ाद कर चुड्ती रही और अपनी गांद मे मेरा वीरये भर के सो गयी और मई भी उसके उपर चड़ड कर सो गया.

दिन भर की हवस और थकान मेरी शांत हो गयी थी. अब बस सुबह की रॅली का इंतज़ार था. सुबह हम लोग लाते ही उठे आख़िर रात मे इतना चुदाई जो करी थी.

अगले दिन हम उठे तो मुझे एलेक्षन के पेपर वर्क के लिए सहेर मे सरकारी ऑफीस जाना था. तो मैने मा को बोला आज उसको बाकी लोगो के साथ रॅली कारनेई पड़ेगी. ये सुन्न कर मा नाराज़ हो गयी.

मा- क्या ग़लती हो गयी मेरे स, तू कल रात मेरे से खुश नही हुआ क्या?

मई- अरे नही मेरी जान, बस तोड़ा सरकारी ऑफीस जाना है सहेर की तरफ, तू वॉया क्या करेगी टुआ आराम से रॅली कर.

मा- नही मुझे अकेले कुछ नही करना तू नही चलेगा साथ मे तो मई भी नही च्लॉगी.

मई- अरे मेरी जान नाराज़ मत हो, बस कुछ दीनो की बात है. वैसे भी वो सब तेरे इश्स चिकने मादक जिस्म के भूके है, तुझे बहोट प्यार देंगे.

मा- मुझे नही करना मुझे डरर लगता है तेरे बिना. ठीक है पर तुझे मेरा साथ पसंद नही तो. मई अकेले ही कर लूँगी रॅली. वैसे भी मई तेरी औरत हू तेरा ऑर्डर तो मानना पेड़ेगा, तू खा मेरी सुनेगा अब.

मा को एमोशनल देख कर मई ज़्यादा शॉक नही था. वो कभी कभी बहोट एमोशनल हो जाती थी. कहने को तो वो बहोट हरामी थी पर जब मई साथ होता हू बस तभी. मई जानता था मेरे बिना अकेले वो एक मासूम मादक अप्सरा थी बस. उसका एमोशनल एंजिन मई ही था और कल रात सच मे उसने मुझे बहोट प्यार दिया था.

अब मुझे दर्र था की कही अकेले मा रॅली करके मा गुस्से मे दूसरे रूप मे ना आ जाए. अगर मई आस पास नही हू और उसका मूड कराब तो कसम से उसको कोई टच भी कर्दे ना उसका हाथ तोड़ देती है वो इतनी ख्टरनाक है. यही सोच कर मुझे लगा की कही कुछ बात ना बिगड़ जाए इसको साथ लेना ही पड़ेगा.

मई बाहर गया तो मा कपड़े सूखा रही थी. दूध जैसे गोरे मादक जिस्म वाली मेरी गत्री तोड़ा गुस्से मे थी. मई गया और उसकी कमर प्यार से मसालने लगा.

मा- अब क्यू आए हो, कर लूँगी मई सब अकेले.

मई- आछा मेरी जान अब गुस्सा मत हो.

मा- मई कों होती गुस्से वाली. अब मेरा जिस्म बस बाहर वालो के लिए है लगता है, मेरे पति को अब मई पसंद नही हू.

मई- ऐसा नही है मेरी जान, तू जानती है तू किसी मादक अप्सरा से कम्म नही है. दूध से भी गोरा और रेशम से भी मुलयूं है तू. तभी तो तुझे प्यार से मनाने आया हू.

मा- हन पता है, तभी तो इतनी दूर खड़े होके माना रहे हो.

और इतना बोल कर गत्री ने अपने बॉल अपनी कमर से हटा कर आयेज कर लिए और उसकी मादक चिकनी नंगी कमर एकदम सॉफ दिखने लगी. मई उसका इशारा साँझ गया था की मुझसे क्यू खफा है.

मई रोज गत्री का जिस्म पकड़ कर उसको बहोट चूस्ता था ये मेरा रोज का था. पर आज सब वो नाराज़ थी मई बस दूर से उसकी कमर को सहला रहा था और ये उसको आछा नही लगा. उसने मुझे याद दिलाया की वो बस उसके उसके प्यार की भूकि है.

अब वैसे भी उसकी नंगी चिकनी कमर देख मेरा लंड खड़ा होने लगा. मई तोड़ा आयेज गया और उसकी कमर मे हाथ डाल कर खिच कर अपनी च्चती से लगा लिया. उसके मोटे दूध से भरे मेरी च्चती मे दब्ब कर आधे बाहर आ गये और आधा निपल भी बाहर आ गया, मेरा लंड एकदम तंन होने लगा.

मा की गहरी सास और गोरे गोरे जिस्म की गर्मी…उउम्म्म्मम… मई भेकने लगा पर अभी बात भी करनी थी.

मई- अब ठीक है ना मेरी जाअँ, अब मान गयी ना..

मा शर्मा कर तोड़ा मुस्कुराने लगी…उम्म्म्मम.. ऐसी मादक अप्सरा को देख कर मेरा दिल और मस्त हो गया.

मई- मेरी जान तू इतनी मादक है…नाराज़ मत हुआ कर. (मा की कमर और कासके नोचते हुए) देख तेरा ये अभी कितना जवान और वासना से भरा हुआ है, तू बस मेरी है.

ऐसा मोमेंट काफ़ी दीनो बाद आया था. मा के साथ ऐसा डीप वाला एमोशनल प्यार दिखाने का मौका, लाइफ की भाग दौड़ मे कम ही मिलता था. पर जब गत्री नाराज़ हुई तो दोनो की भावनाए जाग गयी और भी गहरी.

गत्री जिस्म से तो काफ़ी जवान और मादक थी पर आज वो किसी न्यी लड़की की तरह ई एमोशनल हो गयी. मई मेरे और करीब खुद ही मेरे जिस्म से चिपक गयी अपने मादक जिस्म को मेरे अंदर और कासके चिपका दिया. उसका मुलयूं पेट मेरे पथेर जैसे जिस्म मे ड्ब गया और दूध से भरे उसके गोरे चुचे मेरे च्चती मे और दब्ब गये और उसका एक निपल चोली मे से बाहर आ गया.

अपनी चिकनी कमर मे मेरी उंगलिया उसने और अंदर दबा दी और मेरे होंठ के करीब आके एमोशनल होके मेरी आँखो मे देख कर बोली-

मा- तो तू मुझे क्यू छ्चोड़ता है, तू जानता है ना तेरे बिना म्ृर जवँगी, मुझे अलग मत किया कर अपने से.

मई – नही करूँगा मेरी जान बिल्कुल भी अब कभी तुझे इतना अकेला नही छ्चोड़ूँगा. चल अब तुझे भी अपने साथ सहेर ले जौंगा.

दोनो की सास आपस मे मिलने लगी. गत्री और मई कितने भी बड़े मदारचोड़ हो पर मा के अंदर अभी भी 18 साल वाली लड़की का दिल था जो बस मेरे लिए धड़कता था.

हवस और भागडोड़ड से भारी इश्स ज़िंदगी मे मा कभी कभी बहोट एमोशनल हो जाती थी और इश्स दरूआं मई भी एकदम से पहले वाला सुनील बॅन जाता था. जब मैने मा को चूमना शुरू करा था. जब पहली बार उसको प्यार से चुऊमा था. मेरा हरामी पन्न भी कही गायब हो जाता था.

तभी मा ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी कमर पर मसालते हुए अपने मुलयूं पेट पर दबा कर मसालने लगी.

आयेज की कहानी अगले पार्ट मे जल्दी ही आएगी.

यह कहानी भी पड़े  मा और अंकल के चुदाई संबंध-2

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