मा और बेटे की बढ़ती नज़दीकियों की स्टोरी

ये कहानी मुख्या रूप से मेरी और मेरी मा की है. मेरे घर में 4 लोग थे, जून 2008 में. मेरी अब शादी हो चुकी है. मैं ये कहानी शुरू कर रहा हू.

मेरा नाम रवि है. मेरे घर में मेरी मा- सुषमा, मेरा भाई, मेरे पापा है. उनका नाम इन कहानी में ज़रूरी नही है. मैं ज़्यादा आइडेंटिटी नही बता सकता, ना ही सिटी का नाम बतौँगा.

मैं जून 2008 में अपने दूसरे सेमेस्टर के एग्ज़ॅम के बाद घर आया था. मेरी उमर उस वक़्त 19 साल थी. मेरा भाई मंक में जॉब करता था गुरगाओं में. मेरे पापा दुकान चलते थे. मेरी मा सुषमा हाउस वाइफ थी. उस वक़्त उनकी उमर 46 तो 47 के आस-पास होगी. क्यूंकी हमे उनके जनमदिन का नही पता था.

मैं घर आया हुआ था, और बोर हो रहा था. मेरे दोस्तों के अभी भी एग्ज़ॅम चल रहे थे. उनके एग्ज़ॅम जुलाइ फर्स्ट वीक में ख़तम होने थे, तो हम ज़्यादा मिल नही पाते थे. चुट्टिया बितानी मुस्किल हो रही थी. उस साल नया मल्टिपलेक्स खुला था हमारी सिटी में.

मम्मी शायद शादी के बाद कभी मोविए देखने भी नही गयी थी. मैने उनसे मोविए चलने के लिए बोला, क्यूंकी अकेला क्या ही जाता मोविए देखने. मैने पापा से पूछा, और हम दोपहर की मोविए देखने गये. मम्मी को अछा लगा. 2 दिन तक हम मोविए की बातें करते रहे. मैं फिरसे बोर होने लगा.

मेरी सिटी से सबसे पास हिल स्टेशन शिमला पड़ता था. मैने सोचा वाहा घूम आता हू. अकेला क्या ही जाता. मैने पापा से पूछा मम्मी को भी साथ ले जौ. उन्होने हा कर दी. मम्मी ने भी माना नही किया.

मैने मम्मी के बारे में नही बताया की वो कैसे दिखती है. मम्मी स्लिम सी है. हमेशा सारी पहनती है. कोई पहली बार देखे तो 30 तो 35 से ज़्यादा की ना बोले. मेरी फ्ज़िक थोड़ी बड़ी सी है. कोई बॉडीबिल्डर तो नही, कोई देखे तो उस वक़्त 24 से 25 का ही बोले.

हम बस से कालका गये, और वाहा से टॉय ट्रेन लेके शिमला पहुँचे. हम वाहा 4 नाइट रुके. एक ही रूम लिया. कुफरी गये, माल रोड, जाखू मंदिर गये. फिर तोड़ा रेस्ट किया, और काफ़ी मज़े किए. मम्मी ने सारी ही पहनी थी. मगर बहुत सुंदर लग रही थी. तब नीयत कोई खराब नही थी. आज सोचता हू उस दिन बहुत माल लग रही थी.

हम सुबा घूमते और ईव्निंग में वापस आ जाते रूम पर. मम्मी को भी अछा लगा घूमना. हम फिर वापस घर आ जाते है.

हम बाकी चुट्टिया ट्रिप की बातें करते रहे. मम्मी बहुत खुश थी, और हम दोनो और आचे फ्रेंड्स बन गये थे. सारा दिन अब बातें करते रहते थे हम दोनो.

ये कहानी थोड़ी स्लो रहेगी. लोवे एक दिन में डेवेलप नही होता. कॉलेज में भी 1 से 2 साल लग जाते है. ये तो मा और बेटे की कहानी है. मैं फिर वापस कॉलेज आ जाता हू. अब हम डेली बात करते थे. पहले इतने क्लोज़ कभी नही थे. मेरा कॉलेज काफ़ी डोर था, मैं नित में पड़ता था. तो सेमेस्टर ख़तम होने के बाद ही घर आता था.

मैं 3र्ड सेमेस्टर के बाद फिरसे घर आया. तब हम फिरसे मोविए देखने गये. तब रब ने बना दी जोड़ी मोविए आई हुई थी. वो देख के आए. अब मैं काफ़ी ओपन हो गया था. उनको फ्रेंड ही समझने लगा था. हम मोविए की मिमिक्री करते थे. वो अनुष्का मैं शाहरुख. उसमे अलग ही मज़ा आता था.

4त सेमेस्टर के बाद घर आया. हमने पापा से पूछा क्या इस बार भी हम घूमने जेया सकते है. उन्होने हा कर दी. हम इस बार मनाली गये. डोर था, और नाइट जर्नी में हम वाहा पहुँच गये. हमने होटेल लिया, रेस्ट किया, ईव्निंग में मार्केट में गये. एक शोरुम में गये.

मैने एक जीन्स देखी मम्मी के लिए. उन्होने माना किया, लेकिन मेरे ज़्यादा ज़िद करने पे उन्होने हा की. जीन्स का साइज़ 30 था. फिर एक टॉप लिया उनके लिए. उसके बाद रूम पर वापस आ गये.

अगले दिन हुमको रोहटंग जाना था. हमने कॅब बुक करवाई. मम्मी ने जीन्स टॉप डाला था. हम रोहटंग के लिए गये. मम्मी सच में बहुत ग़ज़ब लग रही थी. पहली बार मेरी नज़र उनकी गांद पर गयी थी. फिर मैने नज़र हटा ली. हम कॅब में बैठे. उस वक़्त तोड़ा सा गिल्ट हुआ, की मैं कैसे उनकी गांद को देख सकता था.

बीच में कार वाले ने हुंसे बातें की. उसने हुंसे पूछा भाग के शादी की थी क्या हमने. मम्मी से सिंदूर लगाया हुआ था. जीन्स टॉप में मम्मी मेरी ही आगे की लग रही थी शायद उसको. एक अनएक्सपेक्टेड सवाल आने पर हम घबरा से गये.

मैने संभाला, मैं ये कहता मा-बेटा है तो शायद ग़लत समझ लेता. मैने बोला की हम फ्रेंड्स है और इनके पति की तबीयत ठंड से खराब हो गयी तो हम आ गये. इनका पति और मैं आचे फ्रेंड है. मैने बात को संभाला.

मगर उन दीनो की सोचु तो वो ड्राइवर ग़लत नही था. हम बिहेव ऐसे ही कर रहे थे, जैसे हज़्बेंड और वाइफ हो. इतना ओपन में फ्रेंड की तरह घूमना, हर कोई यही समझेगा. मम्मी भी एक-दूं माल लग रही थी. उस वक़्त नीयत अची थी, नही तो उस दिन ही सुहग्रात माना लेता उनके साथ. मम्मी उस दिन ईव्निंग में फुल हस्सी उस ड्राइवर की बात पर. मैं भी बोला-

मैं: देख लो आप लगती ही नही हो 48 एअर की.

मम्मी बोली: देख लिया वो तो मैने. कही ये होटेल वाले भी तो यही नही सोच रहे मैं तेरी बीवी हू. ले भी रखा हमने एक ही रूम है.

मैं बोला: दो रूम्स ले लेते है.

वो बोली: उनके सोचने से क्या है? उनको सोचते रहने दे. हमने कुछ थोड़े ही करना है.

तोड़ा सा मैं खुश भी था गिल्टी भी. चलो 4 दिन घूमे फिरे हम. फिर हम वापस घर आ गये. उनकी जीन्स टॉप मैने अपने कपड़ो में ही रखी, ताकि पापा को पता ना चले. वैसे कुछ ना कहते वो, फिर भी हमने नही बताया. हमारे सच च्छुपाने की कहानी स्टार्ट हो चुकी थी.

मैं वापस कॉलेज आ गया. अब हम और आचे दोस्त बन चुके थे. कभी-कभी उस ड्राइवर की बात पर हेस्ट. आइसे ही चलता रहा. कभी ऐसा नही लगा हम कुछ ग़लत कर रहे है, बातें करते हुए. 5त सें में घर आया.

उनके साथ ही टाइम बिताया. फिर 6त सें में वापस घर आया. इस बार उन्होने पहले से ही डिसाइड किया हुआ था कहा जाना था. पापा से पहले ही पूच लिया था. इस बार हम डॅल्लूसियी गये. मैं उनकी जीन्स और टॉप साथ में ले गया था. उन्होने पहले दिन ही पहन ली. हम मार्केट घूमे.

फिर हम एक शॉप में गये, वाहा 1 पीस सूट था ब्लॅक कलर का. वो नी से तोड़ा नीचे तक था उनके. उन्होने वो लेने की ज़िद की. शायद वो अपनी पिछली सारी तमन्ना पूरी करना चाहती थी. हम फिर घूमे. बीच-बीच में हम हाथ पकड़ कर घूम रहे थे. फिर हम होटेल वापस आ गये.

नेक्स्ट दे हमे खज्जियार निकलना था. वो पहले तैयार होके रिसेप्षन पर जेया चुकी थी. मैं बस कपड़े ही पहन रहा था.

रिसेप्षनिस्ट उनको बोली: कार आ चुकी है. आपके हज़्बेंड कहा है?

मैं बस आ ही रहा था, और मैने सुन ली थी रिसेप्षनिस्ट की बात.

मा बोली: मेरे हज़्बेंड तोड़ा ज़्यादा टाइम लगते है तैयार होने में.

मैं आया, और कुछ नही बोला. हम खज्जियार और ब्लॅक टॉप घूम के वापस आ गये. मैं रूम में गया, और मम्मी रिसेप्षनिस्ट के पास गयी. मैं नहा के वापस आया. वो बातें कर रही थी, जैसे अब वो फ्रेंड्स बन गयी हो. मम्मी ने 30 मिनिट में ही उनको फ्रेंड बना लिया था.

नेक्स्ट दे मम्मी पहले से ही तैयार हो गयी थी. उन्होने ब्लॅक ड्रेस पहनी थी, जो खरीदी थी अभी. मैं जब रिसेप्षन पर आया.

रिसेप्षनिस्ट बोली: कोई बात नही, आज रात तुम दोनो फुल मज़े करना.

मैं कुछ नही बोला. मम्मी खुश थी. वो ब्लॅक ड्रेस में थी. आज सोचता हू उस दिन फुल छोड़ ही देता उनको. मेरा उस दिन मॅन तोड़ा सा दोल सा रहा था. बुत गिल्ट की वजह से मैं रुक जाता. हम घूम फिर के वापस ईव्निंग में आए.

रिसेप्षनिस्ट बोली: माँ आपका रूम फुल तैयार है.

जैसे ही मैं रूम में गया. देखा रूम फुल्ली डेकरेटेड था.

मैने मम्मी से बोला: ये क्या है?

वो बोली: रिसेप्षनिस्ट सोच रही है हम हज़्बेंड वाइफ है. वो पूच रही थी रूम को सज़ा डू. क्यूंकी खुसबु से रात में करने में और मज़ा आता है.

मैं बोला: मम्मी आप पागल हो क्या?

मम्मी: मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रही थी. उसको सोचने दे. इस खुसबु में सोने में मज़ा तो आएगा ही ना.

मैं: कोई बात नही. अब उनको लगने दो हज़्बेंड वाइफ, हम सो जाते है.

मम्मी: च्लो मोविए देखते है.

मैं: ठीक है.

साची बहुत कंट्रोल कर रहा था मैं. मम्मी ब्लॅक ड्रेस उतार ही नही थी थी. मैं दर्र रहा था ये मज़ाक भारी ना पद जाए. मेरे से कंट्रोल नही हुआ तो मैं क्या करूँगा. फिर जैसे-तैसे हम सो गये. नेक्स्ट दे हम साथ में ही रिसेप्षन पर गये.

वो मम्मी से बोली: कैसी रही रात?

मम्मी: अची रही.

रिसेप्षनिस्ट: सिर ने सोने दिया की नही?

मम्मी: ऐसी कोई बात नही है.

मुझे वो रिसेप्षनिस्ट की बातें अची नही लग रही थी. क्या रिसेप्षनिस्ट इतने फ्रॅंक हो जाते है 2 दिन में. मम्मी भी मज़े ले रही थी बातों के.

5 दिन डॅल्लूसियी फुल घूमे. हम वापस घर आ गये. मैं अब सोचने लग गया था क्या मैं सही कर रहा था. किसी को पता लग गया तो. मैं दर्र सा गया था. मैं वापस कॉलेज चला गया.

ये थी कहानी जून 2008 से जून 2010 तक की. नेक्स्ट पार्ट में मैं कहाँ आयेज से स्टार्ट करूँगा. ये कहानी मैं जून 2023 तक सुनौँगा. ये 100 पर्सेंट रियल स्टोरी है.

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