लड़की को उसके देवर ने पूरी रात पति के सामने चोदा

नेक्स्ट रात के डिन्नर के बाद मैं अपने पति कुमार के साथ बेडरूम में चली गयी. फिर बेडरूम में जाते ही कुमार तो बेड पर जेया कर लेट गया. शायद उसको बहुत नींद आ रही थी.

फिर मैने भी अपनी सारी उतार कर निघट्य पहन ली, और सोने के लिए जेया ही रही थी, की तभी फिर से मेरे बेडरूम पर नॉक-नॉक हुआ, और मैने जेया कर दरवाज़ा खोला, तो सामने राकेश था.

राकेश: कैसी हो मेरी जान?

अंजलि: मैं तो एक-दूं ठीक-ताक हू. तुम बताओ तुम कैसे आए?

राकेश: अंजलि मैं तुमसे प्यार करता हू, और यहा मैं तुमसे प्यार करने आया हू.

अंजलि: अछा ये बात है? लेकिन अभी तो नही हो सकता. फिर कभी कर लेना प्यार. अभी तुम जाओ यहा से.

पर वो नही गया, और मेरे करीब आ कर मुझे अपनी बाहों में भर लिया. मैं उसको रोकना चाहती थी, पर वो नही रुक रहा था. फिर वो बोला-

राकेश: चलो डार्लिंग, हम तुम्हारे बेडरूम में चलते है.

अंजलि: नही राकेश, बेडरूम में कुमार सोया हुआ है. और हम आज नही कर सकते. फिर कभी कर लेंगे, प्लीज़ अभी तुम जाओ.

राकेश: अंजलि टेन्षन मत लो. कुमार अब नही जागेगा. मैने उसके पानी के ग्लास में नींद की गोली मिला दी थी. अब वो सुबा ही उठेगा. तो चलो हम तुम्हारे बेडरूम में चलते है.

अंजलि: अछा.

और फिर राकेश मुझे अपनी बाहों में उठा कर मेरे बेडरूम में ले आया, और मुझे बेड पर लिटा दिया. उसके बाद उसने मेरे बेडरूम का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया, और मेरे पास मेरे बेड पर आया, और मुझे फिर से किस्सिंग करने लगा.

और आज मैं राकेश के साथ पुर मज़े लेने वाली थी, क्यूंकी मेरा पति कुमार तो गहरी नींद सोया हुआ था. फिर राकेश ने मेरी निघट्य उतार दी, और मैने अंदर कुछ नही पहना था. राकेश भी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया.

फिर वो सीधा बेड पर लेता, और मैने उसके उपर आके उसका लंड अपनी छूट में लिया, और उपर-नीचे की तरफ चलने लगी. उसका लंड सीधा मेरी छूट की गहराई तक जेया रहा था, और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

आहह आह ऑश उफफफ्फ़ की सिसकियाँ मेरे मूह से निकल रही थी. मुझे राकेश के साथ बहुत मज़ा आता है. उसका लंड मुझे बहुत पसंद है, इसलिए मैं बड़े मज़े से उसके लंड से अपनी छूट की चुदाई करवा रही थी.

और वैसे भी आज सुबा ही राकेश से मुझे चूड़ना था. पर सुमन आ गयी थी, इसलिए चुदाई बीच में छ्चोढ़ कर जाना पड़ा. लेकिन आज रात तो पुर मज़े लूँगी राकेश के लंड के साथ.

राकेश: अंजलि तुम बहुत हॉट लग रही हो मेरे लंड पर चढ़े हुए. जी तो कर रहा है, की आज मैं रात भर तुम्हारी छूट की चुदाई करू. वैसे मुझे भी तुम्हारी छूट छोड़ने में बहुत बहुत बहुत मज़ा आता है.

अंजलि: काश दादी मा मेरी शादी तुमसे करवाती. लेकिन तुम्हारी शादी हो चुकी थी. राकेश काश तुम कुमार की जगह होते.

राकेश: तो क्या हुआ तुम्हारी शादी हो गयी कुमार के साथ? तुम मेरे साथ चुदाई के मज़े तो ले सकती हो ना.

अंजलि: हा, तभी तो तुम्हारे लंड के उपर चढ़ि हुई हू ना राकेश. ह उफफफ्फ़ ऑश आह बहुत मज़ा आ रहा है राकेश. अब तुम भी उपर की तरफ धक्के दो मेरी छूट में, जिससे और ज़्यादा मज़ा आएगा तुमको, और मुझे दोनो को.

करीब 10 से 12 मिनिट के बाद राकेश ने मेरी छूट के अंदर अपने लंड के माल की पिचकारी छ्चोढ़ दी. मेरी छूट पूरी भर गयी थी उसके माल से, और फिर हम दोनो एक-दूसरे को कस्स के पकड़ कर लिपट गये. हम बेड पर सीधा लेट गये कुछ देर के लिए (ब्रेक).

कुछ देर ब्रेक के बाद मैं बोली: राकेश अब तुम अपने कपड़े पहनो, और जाओ अपने बेडरूम में जेया कर सो जाओ सुमन के साथ.

और मैं भी अपने कपड़े पहन कर सो जाती हू.

राकेश: ऐसे-कैसे मैं चला जौ. अंजलि मैने तो तुमसे कहा था नही की पूरी रात तुमको छोड़ूँगा. अभी तो मैने सिर्फ़ 15 मिनिट का ब्रेक दिया था, चलो अब आओ मेरे पास.

अंजलि: हा राकेश, मैं भी तो यही कह रही हू, की 15 मिनिट तो कब के हो गये. अब नेक्स्ट मेरी चुदाई शुरू करो. मैं तड़प रही हू तुम्हारे लंड को लेने के लिए. अब जल्दी करो.

मेरे इतने बोलने के बाद राकेश सीधा मेरी छूट के करीब आ गया, और मेरी छूट को अपनी जीभ से चाटने लगा.

मैं: आहह आह ऑश उफ़फ्फ़ राकेश अगर हमे चुदाई करते हुए सुमन भाभी ने देख लिया तो क्या होगा?

राकेश: अभी तुम सिर्फ़ चुदाई के बारे में सोचो, सुमन के बारे में नही. और तुमने मुझसे तो कहा है, लेकिन कभी भूल से भी सुमन को मत बताना की हम चुदाई करते है.

अंजलि: अगर तुम्हारी इतनी सुमन भाभी से फट-ती है, तो तुम मुझे छोड़ते क्यूँ हो?

राकेश: अंजलि में क्या करू, तुम्हारी छूट ही ऐसी है की ना चाहते हुए भी मेरा लंड खड़ा हो जाता है, और तुम्हे छोड़ने पर मजबूर हो जाता हू.

अंजलि: हा मुझे भी अछा लगता है तुम्हारा लंड. और वैसे भी लंड तगड़ा हो तो चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है.

फिर राकेश उठा, और मेरी टांगे अपने कंधे पर रख दी, और खुद घुटनो के बाल आ गया. फिर उसने अपना लंड सीधा मेरी छूट के अंदर घुसा दिया, और वैसे ही घपा-घाप मेरी चुदाई चालू कर दी.

उसने एक झटके में लंड घुसा दिया था, और फिर निकालता. फिर दोबारा ज़ोर से अंदर डालता, और फिर निकालता. ऐसे ही अंदर-बाहर करता जेया रहा था.

और फिर करीब 10 मिनिट बाद वो मेरी छूट के अंदर झाड़ गया. फिर हम ऐसे ही एक-दूसरे को लिपट कर सो गये, और सुबा सवेरे 5 बजे राकेश अपने कपड़े पहन कर मेरे बेडरूम से निकल गया.

नेक्स्ट सुबा के समय जब मैं किचन में थी, तो मैने देखा की सुमन बहुत उदास थी. उसकी आँखें नाम थी. फिर मैने उससे पूछा-

मैं: क्या हुआ सुमन भाभी?

सुमन: मेरी ज़िंदगी तो खराब हो गयी है राकेश के साथ शादी करके.

अंजलि: भाभी आप ऐसे क्यूँ बोल रही हो? क्या हुआ है आप दोनो के बीच में?

सुमन: अंजलि आज सुबा की बात है 5:30 बजे की. जब मेरी आँख खुली तो मैने देखा राकेश का लंड खड़ा था. खड़ा लंड देख कर मुझसे रहा नही गया. आयेज तुम समझदार हो.

अंजलि: हा, वो तो मैं सब समझ गयी. लेकिन बात क्या हुई है, जो तुम उदास हो गयी? आयेज क्या हुआ पूरा बताओ मुझे?

सुमन: सुबा उठ कर जब मैने कंबल हटा कर देखा, तो राकेश का लंड खड़ा हुआ था उसकी अंडरवेर में. मैने अंडरवेर नीचे कर दिया, और उसका लंड अपने हाथ में लेकर हिलने लगी. फिर थोड़ी देर में उसका लंड और टाइट हो गया. तो फिर मैं अपने मूह में लेकर उसको कुलफी की तरह चूसने लगी.

सुमन: उसका लंड काफ़ी गरम था. मुझे ये मेरे होंठो पर महसूस हो रहा था. अब मैं अपनी जीभ से उसके लंड के टोपे को चाट रही थी. उसका लंड बहुत टेस्टी था, और मुझे मज़ा आ रहा था लंड चूसने में. नीचे मेरी गीली हो गयी थी अपना पानी छ्चोढ़ कर, क्यूंकी अब मुझे मेरी छूट में ये लंड चाहिए था. फिर जैसे मैने पीछे मूड के देखा, तो राकेश उठ गया था, और वो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगा.

राकेश: सुमन तुम ये क्या कर रही हो?

सुमन: तुम देख नही रहे हो, तुम्हारे इस लंबे मोटे लंड को अपने मूह में लेकर चूस रही हू, और तुम्हे मज़ा दे रही हू. मेरे इतना बोलने के बाद राकेश अपने मूह से आहह ह ह ह करने लगा था.

सुमन: शायद उसको अब मज़ा आने लगा था मेरे लंड चूसने से, और मुझे अब ऐसा लग रहा था, की वो मुझे अब छोड़ेगा. इस आस में मैं और आचे से उसके लंड को चूसने लगी. फिर राकेश के लंड ने मेरे मूह में उल्टी कर दी, मतलब वो मेरे मूह में झाड़ गया.

सुमन: फिर राकेश उठ कर खड़ा हुआ, और अपना अंडरवेर पहन कर जाने लगा. मैं बेड पर बैठी थी अपनी कपड़े उतार कर. मैने उनसे पूछा, की कहा जेया रहे थे वो, और मुझे मेरी छूट में उनका लंड चाहिए. मैने उनको रुकने के लिए कहा, तो वो बोले-

राकेश: नही सुमन, मैं जेया रहा हू. मुझे काम है.

सुमन: तो इसका मतलब तुम मेरे साथ चुदाई नही करोगे?

राकेश: नही, मेरा मूड नही है तुम्हारी चुदाई करने का.

सुमन: तुम हमेशा की तरह ऐसे ही करते हो. मैं गरम हो जाती हू, और तुम मुझे छोड़ते नही, और ऐसे ही चले जाते हो.

राकेश: तुम अपनी बकवास बंद करो. सच काहु, तो मुझे तुम्हारे साथ अछा नही लगता है चुदाई करना ओके. अब मैं जेया रहा हू.

सुमन: इसका मतलब मैं तुमको पसंद नही हू. तो फिर मुझसे शादी क्यूँ की तुमने?

राकेश: पागल औरत, बात पसंद की नही है.

सुमन: तो फिर क्या बात है? तुम हमेशा की तरह ऐसे ही करते हो.

राकेश: बात ये है की तुम मुझे सेक्स में मज़ा नही देती हो. मैं जिस तरह से सेक्स चाहता हू, उस तरह तुम नही करती. इसलिए मुझे मज़ा नही आता तुम्हारी छूट छोड़ने में ओके.

सुमन: ऐसे बोल कर वो बाहर चला गया, और मैं बेड पर बैठी ही रही, और फिर किचन में आ गयी थी.

अंजलि: इसका मतलब तुम उसको संतुष्ट नही कर पाती हो? चलो कोई बात नही, तुझे सीखा दूँगी.

सुमन: फिर ठीक है अंजलि.

और फिर किचन का सारा काम करने के बाद मैं सुमन को अपने बेडरूम में लेकर चली गयी, क्यूंकी मुझे सुमन को चुदाई करना सीखना था, और मेरे पास स्ट्रॅप ओं डिल्डो था.

मैं: चलो सुमन अब तुम अपनी सारी उतरो, और मैं भी अपनी सारी उतारती हू. और फिर हम दोनो नंगी हो गयी, और एक-दूसरे को देखने लगी. वैसे सुमन का भी फिगर अछा था, मेरे जितना ही था. उसके भी बड़े बिग बूब्स थे, और छूट एक-दूं चिकनी मस्त छूट थी.

सुमन: मैने सुना था अंजलि के हर लड़की की छूट एक जैसी होती है. लेकिन तेरी और मेरी छूट में काफ़ी फराक है. तेरी छूट कितनी मोटी है, और मेरी छूट कितनी पतली है, और तेरी छूट देख एक-दूं गोरी है, और मेरी छूट देख कितनी ब्लॅक है.

अंजलि: ऐसा कुछ नही होता सुमन. बस जो औरत सेक्स में मर्द को अछा मज़ा देती है, उसको वही औरत पसंद आती है. फिर चाहे काली हो या गोरी, कुछ नही होता, बस उसको मज़ा बहुत दे. और आज मैं तुझे सिखाती हू कैसे एक मर्द को मज़ा देते है.

सुमन: ये क्या है, प्लास्टिक का लंड, वो भी पत्ते में अटका हुआ.

अंजलि: स्ट्रॅप ओं डिल्डो है. इसको मैं अपनी कमर में बाँध कर तुझे छोड़ूँगी, मतलब इसकी तेरी छूट में डालूंगी. चल अब पहले इसको अपने मूह में लेकर चूस.

सुमन: ह ह ऑश आह अंजलि ये तो बहुत अछा है. मुझे ऐसे लग रहा है, की मैं किसी मर्द का लंड अपने मूह में लेकर चूस रही हू. बहुत मज़ा आ रहा है ये लंड चूसने में रब्बर वाला.

और फिर मैने सुमन को डॉगी बना दिया और पीछे से उसकी छूट में रब्बर वाला लंड डाल दिया. फिर घपा-घाप मैं उसको छोड़ने लगी. उसको बहुत मज़ा आने लगा. वो अपने मूह से ह ऑश उफफफ्फ़ ऑश उफफफ्फ़ ऑश आह की सिसकियाँ निकालने लगी काफ़ी देर तक.

और फिर हमने पोज़िशन चेंज कर दी. अब मैं बेड पर सीधी लेती, और सुमन मेरे उपर अपनी छूट में मेरा ये रब्बर वाला लंड लेकर उपर-नीचे ज़ोर-ज़ोर से उछालने लगी.

उसके मूह से ह ह ह ह की आवाज़ निकालने लगी, और मैं भी उसकी छूट में लंड को उपर की तरफ घुसने लगी. इससे उसको और मज़ा आने लगा. उसने मेरे बूब्स पकड़े हुए थे, और मैने भी उसकी दोनो बूब्स पकड़े हुए थे, और उनको दबा रही थी हाथो से. उधर लंड छूट में घुस रहा था.

फिर उसने रब्बर वाला लंड अपनी कमर में बाँधा, और मुझे ऐसे ही छोड़ा. हमने एक-दूसरे को संतुष्ट कर दिया था. और फिर हम अपने-अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गयी, और अपने काम में लग गयी.

अब मेरी ज़िंदगी में टीन मर्द थे, प्रीतम जी, राकेश, और मेरे पति कुमार. और मैं अपनी ज़िंदगी बहुत एंजाय कर रही थी,

कभी प्रीतम जी के साथ, कभी राकेश के साथ, तो कभी अपने पति कुमार के साथ. मैं बहुत खुश थी.

और फिर अचानक से मेरी ज़िंदगी में एक मोड़ आया. मतलब मेरी ज़िंदगी में एक और मर्द की एंट्री हुई. वो और कोई नही राजू था, जो मुझसे 17 साल छ्होटा था, जिससे आयेज चल कर मेरी शादी हुई.

वो हुआ यू था, की मेरे पति कुमार कुछ दिन आउटडोर गये हुए थे, और वो एक वीक के बाद घर आए तो उनके साथ एक 15 साल का लड़का था.

दादी: कुमार तुम्हारे साथ में ये लड़का कौन है?

कुमार: दादी ये लड़का हमारे ही घर का है.

दादी: कुमार मैं तुम्हारा मतलब समझी नही. तुम क्या कहना चाहते हो?

कुमार: दादी इस लड़के का नाम राजू है, और ये राकेश भैया का लड़का है, जो उन्होने बुआ जी के घर छ्चोढ़ रखा था.

दादी: ये तुम क्या बोल रहे हो?

कुमार: जो सही है दादी, मैं वही बोल रहा हू.

राकेश: हा दादी, ये सही है. मेरा और मेरी दोस्त विद्या का लड़का है ये.

दादी: राकेश ये तुम्हारा लड़का है उससे हमे कोई ऐतराज़ नही. लेकिन हमे तो बताना था ना. चलो ठीक है, जो हुआ सो हुआ. आख़िर ये हमारे घर का वेराइस है.

अब हम वापस आते है जहा अंजलि और राजू बैठे है.

अंजलि: इससे आयेज तो तुम्हे सब कुछ पता है राजू, की हमारा ये रिश्ता कैसे हुआ था.

राजू: हा चाची, मुझे सब कुछ पता है.

लेकिन फ्रेंड्स मैं बताती हू की आयेज क्या हुआ, और कैसे इन दोनो के बीच रिश्ता कायम हुआ.

तो फ्रेंड्स राजू राकेश के साथ खड़ा था और अंजलि की सीधी नज़र राजू पर थी. वो उसको सर से पावं तक देख रही थी. एक 15 साल का लड़का गोरा चितता. अंजलि को अंदर कुछ हो रहा था राजू को देख कर, क्यूंकी राजू को देख कर अंजलि के अंदर कुछ अलग ही एहसास महसूस हो रहा था. अंजलि खुद नही जानती थी, की उसको ऐसा क्यूँ हो रहा था.

इससे आयेज नेक्स्ट पार्ट में बतौँगी.

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