Meri Kunvari Gaand Ki Shaamat Aa Gai- Part 1

यह कहानी पढ़ने के बाद एक महिला मित्र ने मुझे उनकी कहानी भेजी और उसे प्रकाशित करने के लिए बोला।
कहानी मुझे भी अच्छी लगी तो मैंने हाँ कह दिया लेकिन उनके कहने पर मैंने इसके पात्रों के नाम बदले हुए हैं।
इसमें आपको क्या सबसे अच्छा लगा, यह जरूर बताइये।

सुनिए उन्ही के मुख से-

परिचय
मेरा नाम दीपिका है, उम्र 34 साल है हाइट 5.5 फीट, मेरे पति की उम्र 36 साल हाइट 5.8 फीट है।
हमारी शादी को 16 साल हो गए हैं, यानि कि 18 वर्ष की उम्र होते ही मेरे घरवालों ने मेरी शादी कर दी थी, तब मैं सेक्स के बारे में थोड़ा ही जानती थी।

मैंने सिर्फ मेरे पति के साथ ही सम्भोग किया है और उनके साथ ही करुँगी, वे मुझे हर तरह से खुश रखते हैं, मैं भी उनसे बहुत खुश हूँ।
मैं अभी भी दुबली हूँ किसी एक्ट्रेस की तरह, मम्मे जरूर बहुत बड़े और तने हुए हैं इतने कि पतिदेव दोनों हाथों में भरकर चूसते हैं, निप्पल भूरे हैं, चूत हमेशा साफ रखती हूँ।

घर में हम पति पत्नी अकेले थे
बात इसी वर्ष गर्मी है जब उज्जैन में कुम्भ का आयोजन हो रहा था और गर्मी भी कहर ढा रही थी।
हम दोनों वहाँ से स्नान करके आ गए, इसके बाद मेरे परिवार के बाकी सदस्य भी चले गए, मेरे 2 बेटे हैं, उनको भी उनके साथ भेज दिया था, उनका पूरे सप्ताह का प्रोग्राम था।

अब घर पर हम दोनों पति पत्नी ही रह गए थे।
पहला दिन तो निकल गया था और घर के काम करके मैं बहुत थक गई थी।

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रात को पतिदेव ने मुझे बहुत देर तक चूमा, प्यार किया और मैं उनसे चिपक कर सो गई।

अगली सुबह मैंने पति को ऑफिस के लिए तैयार होने के लिए बोला तो उन्होंने कहा कि उन्होंने छुट्टी ले ली है, पूरे हफ्ते तक ऑफिस नहीं जायेंगे, मेरे साथ ही रहेंगे।
यह सुनकर मेरे मन में ख़ुशी की लहर दौड़ गई और ख़ुशी से पूरी ताकत के साथ उनके गले लग गई।

पति के अनजाने मनसूबे
फिर मैं खाना बनाने किचन में गई जैसे ही मैंने फ्रिज खोला तो उसमें 8-9 दूध के पैकेट रखे हुए थे, मैंने पतिदेव से पूछा कि इतने सारे पैकेट क्यों लाये हैं, उन्होंने सिर्फ यही कहा- इन्हें गर्म करके रख देना!
मैंने वैसा ही किया।

घर के सब काम से फुर्सत पाकर मैं बेडरूम की सफाई करने लग गई।
तभी पतिदेव ने पीछे से मेरी कूल्हे पर चपत लगाई और मेरी साड़ी भी निकाल दी और हल्का पसीना भी पौंछ दिया और ए. सी. ओन कर दिया।

उनकी ऐसी हरकतें आम बात है, अब मैं ब्लाउज और पेटीकोट में रह गई थी।
उन्होंने एक दुपट्टा ( क्योंकि मैं सलवार कुर्ती भी पहनती हूँ, जब पतिदेव बोलते हैं सिर्फ तभी) एक तरफ रखकर उसे उठाने के लिए मना कर दिया।

थोड़ी देर बाद वो 2 ग्लास में दूध लाये और बेड पर बैठ कर पीने लगे मैं भी उनकी गोदी में बैठ गई।
आधा ग्लास पीने के बाद उन्होंने मेरी तरफ बढ़ाया, तो मैंने कहा- आप ही पिलाइये।

उन्होंने खुद अपने हाथ से आधा ग्लास दूध मुझे पिलाया इसी तरह दूसरा ग्लास भी पिलाया।

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