हवस भरे पति ने की दर्द भारी चुदाई

ये कहानी कल रात की है. दो महीनो बाद मैं माइके से अपने घर आई थी. मेरा नाम सुनीता है, और मैं 24 साल की हू. मेरा फिगर 36-24-36 का है, और रंग गोरा है. मेरे पति मेरे दीवाने है. शादी के दिन उन्होने मुझे जब पूरा नंगा किया, तो वो मुझे देखते ही दीवाने हो गे थे.

आज तक उन्होने मुझे काई बार छोड़ा है. उनका नाम हिमांशु है, पर मैं उन्हे प्यार से हिं कहती हू. उनकी उमर 25 साल है. और हमारी शादी को सिर्फ़ 6 महीने ही हुए है. 4 महीने साथ रहने के बाद ही मेरे पिता की तबीयत खराब हो गयी. इसलिए मैं माइके चली गयी.

मैं 2 महीनो तक वही थी. तो मेरे पति मेरे लिए बहुत तरसते थे, और रोज़ फोन करके कहते थे की वो मुझे किस तरह मिलने के बाद छोड़ेंगे. और परसो मैं वापस आ गयी. मेरे पति और मैं कल पूरी रात सेक्स करते रहे.

मेरे पति वैसे तो मुझसे बड़े रोमॅन्स और प्यार से चुदाई करते है. पर इन दो महीनो में मुझसे डोर रह कर वो अपनी हवस को रोक नही पाए. और पहली बार उन्होने मुझे बहुत रफ तरीके से छोड़ा.

सुबा तो मैं ठीक से चल भी नही पा रही थी. पर मुझे बड़ा मज़ा आया. कल सुबा से मेरे पति मेरे करीब आने की कोशिश कर रहे थे. मैं जहा जौ मेरे पीछे आने लगते, और कही भी मुझे पकड़ लेते, और बाहों में भर लेते. मैने किसी तरह उन्हे रात तक इंतेज़ार करने के लिए मनाया.

शाम को हम बाहर खाना खा कर वापस आए. वापस आ कर मेरे पति नहाने चले गये. उनके बाद मैं चली गयी. मैं जैसे ही बाहर आई, क्या देखती हू, वो बेड पर बैठे मेरा ही इंतेज़ार कर रहे थे. मैने येल्लो कलर की सारी पहनी थी.

उन्होने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया, और मुझे उसी दरवाज़े से चिपका कर खड़ा कर दिया. मेरे कंधो को पकड़ कर उन्होने मेरे लिप्स पर किस करना चाहा. मैने उन्हे रोका, तो वो बोले-

हिमांशु: अभी मत रोक मेरी रानी. सुबा से इंतेज़ार कर रहा हू इस वक़्त का. इतने दीनो बाद तो मिली हो. मैं तड़प उठा हू तुम्हारे लिए.

मैं: थोड़ी देर रुक जाओ ना. फिर तुम जो कहोगे मैं करूँगी.

हिमांशु: आज तो मैं तुम्हे खा जौंगा. तुम्हारी छूट फाड़ दूँगा और गांद मारूँगा. सुबा तक मेरी जान की चुदाई करूँगा.

ये ऐसी बातें सुन के मैं शॉक हो गयी. क्यूंकी ऐसी बातें उन्होने मेरे सामने कभी नही कही थी. पर फोन की छत पर कहते थे. मैं समझ गयी थी, की आज हिमांशु मेरी चुदाई करके ही मानेंगे. बिल्कुल वक़्त ज़ाया ना करते हुए उन्होने मेरे होंठ पर अपने होंठ रखे, और बड़ी ही बेरेहमी से चूमने लगे.

वो मेरे होंठो का तो रस्स पी चुके थे, और अंदर मेरी जीभ के साथ खेलने लगे. चूमने के बाद उन्होने मेरी गर्दन पर चूमना शुरू किया, और और एक हाथ से बड़ी ज़ोर-ज़ोर से मेरे बूब्स दबाने लगे. मेरे मूह से आवाज़े निकालने लगी.

मैं: आह आहह हिं, धीरे करो ना. दर्द हो रहा है. आह आह.

हिमांशु: अभी तो शुरुवत है जानेमन. आज तो तुझे खा जौंगा. सुनो ना जानू. मैं तुम्हे नंगा देखना चाहता हू.

उनकी डिमॅंड को मैं माना नही कर पाई. उन्होने मुझे बेडरूम के बीच में खड़ा किया, और मेरे कंधे से सारी का पल्लू उतार दिया. फिर उन्होने मेरे पीछे से ब्लाउस का हुक खोला, और खींच के उसे उतार फेंका. फिर मेरी ब्रा को खीच के फाड़ ही दिया.

मेरे दोनो गोरे-गोरे और सॉफ्ट बूब्स उनके सामने नंगे झूलने लगे. वो मेरे सामने आए, और उन्हे ताड़ने लगे. पहली बार उनकी आँखों में मैने हवस देखी थी. वो मेरे पास आए, और अपने दोनो हाथो से मेरे बूब्स ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे.

इतने ज़ोर से दबाए की मैं चिल्ला उठी. पर उन्होने मेरी एक ना सुनी. वो अपने मूह में मेरे बूब्स को चूसने और मेरे निपल्स को काटने लगे.

मैं: धीरे करो ना जान. आ ह, मैं कहा भागी जेया रही हू.

हिमांशु: आज तो मैं दूध पी कर ही मानूँगा मेरी रानी.

कुछ देर यू ही मेरे बूब्स का मज़ा लेने के बाद वो पीछे हुए, और मेरी सारी खींच कर निकालने लगे. उन्होने मेरे आयेज-पीछे घूमकर मेरी सारी निकाल दी, और फिर मेरे सामने बेड पर बैठ गये. मैं उनके पास खड़ी हो गयी. उन्होने मेरे पेटिकोट का नाडा निकाला, तो एक ही झटके में वो नीचे गिर गया.

अब मैं उनके सामने सिर्फ़ पनटी में थी. उन्होने झट से मुझे अपनी और खींचा, और मेरे पेट पे और छूट के उपर चाटने लगे. वो बैठे-बैठे ही चाटने लगे, और मैं खड़ी उनका सिर सहलाने, और अपनी और दबाने लगी.

उनका हाथ कभी मेरी नंगी थाइस के बीच चला जाता, तो कभी पनटी के उपर से मेरी गांद पर. फिर जोश-जोश में वो मुझे मेरी गांद पर स्पॅंक यानी थप्पड़ मार देते.

उन्होने एक ही झटके में मेरी पनटी को मेरी कमर से नीचे खींचा, और मुझे पूरा नंगा कर दिया. फिर उन्होने अपनी जीभ सीधा मेरी छूट पर लगा दी और चाटने लगे. मैं भी अपनी टांगे डोर करके उनको अपनी छूट में दबाने लगी.

उनका एक हाथ मेरे बूब्स दबा रहा था, तो दूसरा हाथ मेरी गांद को दबा रहा था. उन्होने फिर मुझे पकड़ कर बेड पर ज़ोर से पटका, और मेरे सामने खड़े हो गये.

उन्होने पहले अपनी पंत उतरी, और अपनी अंडरवेर उतार कर फेंक दी. अब उन्होने अपने 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड मेरे सामने हिलना शुरू किया. फिर मेरा सिर पकड़ा, और अपना लंड मेरे मूह में डालने लगे. मैने माना किया तो कहने लगे

हिमांशु: आज तो मैं तेरी कुछ नही सुनने वाला. मेरी रंडी है तू जान. चल चूस दे इसे.

हिमांशु की हवस मैं समझ सकती थी. इसलिए मैने पहले धीरे से उनका लंड पकड़ा, और मूह से किस करने लगी. फिर उपर से मूह में लिया, और आधा लंड मूह में लेके चूसने लगी. उनका लंड इतना बड़ा था, की मैं एक बार में पूरा लंड नही ले पा रही थी. कुछ देर बाद उन्होने मेरे सिर को पकड़ा, और खुद ही अपना लंड अंदर-बाहर करने लगे.

उनके शॉट्स के कारण वो पूरा लंड अंदर मूह में तूसने लगे. और उसके कारण लंड मेरे गले को चू रहा था. कुछ देर बाद उन्होने अपनी स्पीड बधाई, और मैने उनके गांद पर हाथ रख दिया. कुछ ही देर में मेरी आँखों से पानी आने लगा, और मेरे मूह से थूक निकालने लगा. उन्होने मेरा मूह छोड़ना जारी रखा, और अपना वीर्या मेरे मूह में निकाल दिया.

निकालने के बाद भी उन्होने अपना लंड मेरे मूह से नही निकाला, बल्कि मेरा सिर कस्स कर पकड़ कर पूरा लंड गले तक अंदर डाल दिया. मजबूरन मुझे उनका सारा पानी पीना पड़ा. कुछ ही देर में उन्होने अपना लंड मेरे मूह से निकाला, और कुछ वक़्त मेरे बाजू में लेट गये. मैं संभालने की कोशिश कर रही थी, और वो मुझे देख मुस्कुरा रहे थे.

मैं अपने मूह में उनका लंड महसूस कर पा रही थी. कुछ देर बाद उनका लंड वापस खड़ा हो गया. उन्होने मुझे बेड पर लिटाया, और अपने दोनो कंधो पर मेरे पैर रख दिए. फिर अपना लंड मेरी छूट में डाल कर मुझे छोड़ने लगे. मैं भी उनका साथ देनी लगी थी.

फिर उन्होने मुझे खड़ा किया, और दीवार से लगा दिया. वो मेरे सामने आए, और अपना लंड मेरी छूट पर सेट करने लगे. फिर धीरे से उन्होने अपना लंड मेरी छूट में डाल दिया, और चुदाई करने लगे. मेरी गांद दीवार पर चिपक कर डब रही थी, और बूब्स उनकी चेस्ट के बीच सॅंडविच बन चुके थे.

साथ ही यहा नीचे मेरी चुदाई ज़ोरो पर थी. इसी कारण छाप-छाप की आवाज़ और मेरे चिल्लाने की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी. फिर उन्होने मुझे 15-20 मिनिट छोड़ा. कुछ देर रेस्ट करके उन्होने मुझे स्टडी टेबल पर बिताया, और मेरी छूट पर अपना लंड सताया.

फिर एक झटके में उन्होने मुझे छोड़ना शुरू किया. इस बार वो मेरे दोनो पैर पकड़ कर मेरी छूट में अपना लंड ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करने लगे.

हिमांशु: आ मेरी जानेमन, क्या माल है तू. तेरा दीवाना हो गया हू मैं तो. आज तेरी छूट फाड़ डालूँगा.

मैं उनकी बातें सुन कर गरम हो रही थी, और चिल्ला रही थी.

मे: आ आह आह मेरे राजा. ये छूट तुम्हारी है. मारो इसे आ. धीरे-धीरे करो ना. जान निकाल दोगे क्या?

पर हिमांशु कहा सुनने वाले थे. उन्होने मुझे बाहों में भरा और चुदाई जारी रखी. कुछ देर बाद हम दोनो नंगे चिपक कर सो गये. आधी रात को मुझे मेरी छूट पर उनका हाथ सहलाता हुआ महसूस हुआ. मेरी नींद खुली तो वो मुझे देख मुस्कुराए और मुझे फ्रेंच किस करने लगे.

उन्होने मुझे अपनी बाहों में खींचा, और मेरी छूट में उंगली डाल के फिंगरिंग करने लगे. फिर मैने अपनी दोनो टांगे फैला दी. कुछ देर मेरी छूट को फिंगरिंग करने के बाद उन्होने मुझे डॉगी बनाया, और मेरी गांद पर लंड रख दिया. मैं दर्र गयी, और अपने हाथ से अपनी गांद च्छुपाने लगी. पर आज हिमांशु कुछ सुनने के मूड में नही थे.

उन्होने मेरे हाथ को पकड़ा, और अपना लंड मेरी गांद में घुसने लगे. कुछ देर . हुई पर बाद में उनका . मेरी गांद में चला गया था. मैं . और . लगी.

मैं: उईईइ मा, आहह, दर्द हो रहा है. निकालो इसे.

हिमांशु: मेरी कुटिया. तेरी गांद को आज मैं मारूँगा. बड़े दीनो बाद मिली है तू.

फिर उन्होने धीरे-धीरे करके पूरा लंड मेरी गांद में डाल दिया, और फिर चुदाई शुरू कर दी. मुझे पहले दर्द हुआ, पर थोड़ी देर बाद मज़ा आया. उन्हे मेरी गांद मारने में बड़ी खुशी मिल रही थी, और साथ में मेरी गांद पर थप्पड़ मार रहे थे.

फिर 15-20 मिनिट की गांद चुदाई के बाद उन्होने अपना माल मेरी गांद पर ही निकाल दिया. उसके बाद हम दोनो साथ में नहाने गये, और सो गये. उसके बाद हर दिन वो मुझे छोड़ते है. आपको ये कहानी कैसे लगी ये जवानिकजोश@आउटलुक.कॉम पर बताइए. और ऐसे ही एक्सपीरियेन्स के लिए कॉमेंट करे ताकि मैं और अची स्टोरीस . ..

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