Gulabo Aur Kamli Ki Chut Gaand Chudai- Part 1

रसोई में खाना बनाते हुए आज उसका चुदने का मन कर रहा था। कमली ने साड़ी जांघों पर ऊँची कर ली और अपनी कोमल जांघें मुझे दिखाने लगी।
मैं उत्तेजित हो रहा था।
थोड़े देर में मैंने अपना पायजामा उतारकर मेरी निक्कर उतार दी। फिर पायजामा पहन कर मैं देखने के लिए गया कि ये दोनों रसोई में क्या कर रही हैं।

मैंने देखा गुलाबो कुकर लगा रही थी और कमली रोटियाँ बेल रही थी।
कमली के दोनों मम्मे इस तरह से हिल रहे थे कि मेरे लण्ड में हलचल होने लगी थी।

धीरे-धीरे मैं कमली के पास पहुँचा.. मैंने कमली की कमर पर हाथ रखा.. धीरे-धीरे उसकी कमर को सहलाते हुए मैंने हाथ कमली के मम्मों पर रख दिया।

इधर गुलाबो मेरी इस हरकत को गौर से देख रही थी.. वो कनखियों से ताड़ रही थी।
मैंने अपने हाथों से कमली के दूध दबाते हुए उसे गालियाँ देना शुरू किया- साली.. चुदक्कड़.. रोज मेरे सामने सोकर चुदती है.. आज तो तेरी चूत में मेरा लण्ड फिर से खलबली मचा देगा..

अब मैंने उसकी साड़ी को कमर तक उठा कर उसके चूतड़ों को फैला दिया। फिर अपने पायजामे को खोलकर.. उसकी दरार में अपना हथियार डाल दिया।
अब मैं लौड़े को ऊपर से ही आगे-पीछे करते-करते गुलाबो के होंठों को चूमने लगा।
गुलाबो के नरम होंठों को चूमते-चूमते मैंने उसके ब्लाउज में हाथ डालकर उसके मम्मों के आकार का अंदाज लिया, उसके दोनों मम्मे बड़े ही गुंदाज थे। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और उसके मम्मों को चूमने लगा।

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अय हाय.. क्या मस्त मम्मे थे.. एकदम मस्त और चुस्त..

मैंने जैसे ही उसके मम्मों को चूसना शुरू किया.. उसने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया।
क्या बात है.. यह तो कमली से ज्यादा गरम माल थी। मेरे जेहन में एक ख़याल आया.. साला इसका आदमी इसे गरम तो करता होगा.. पर ठंडा करने की बात आती होगी.. तो टाएँ-टाएँ फिस्स.. हो जाता होगा।

बड़े दिनों के बाद एक अरमानों की डोली उठने वाली थी.. मैं बड़ा खुश था, मुझे उसकी चूत देखने की तमन्ना हुई।
मैंने कमली को छोड़ा और गुलाबो की गाण्ड के पास अपना लण्ड अड़ा दिया।

साली एकदम से अपनी गाण्ड को आगे-पीछे करने लगी। उसके बड़े-बड़े चूतड़ों में मेरा लण्ड मस्त घिसता जा रहा था। उधर कमली रोटियाँ बनाने में लगी रही। इधर गुलाबो अपने मस्त चूतड़ों से मेरे लण्ड की मालिश कर रही थी।

मैंने उसका ब्लाउज ऊपर किया.. छोटे-छोटे गुन्दाज़ मम्मों पर गुलाबो के दोनों अंगूरी निप्पल.. इतने मस्त दिख रहे थे.. कि मेरे लण्ड की गोटियों में खून जोर से बहने लगा।

मैं भी अपना मूसल लण्ड गुलाबो के चूतड़ों के बीच में जोर-जोर से घिसने लगा।
साली थी तो बड़ी मस्त माल.. साली के चूतड़.. मेरे लण्ड को अन्दर तक ले रहे थे। ऊपर कमली मेरे होंठों को चूस रही थी। दो फूल मेरे पास थे और उनका एक माली उन दोनों पौधों को सींच रहा था।

आज तो मेरा दिन मस्त बीतने वाला था.. पर पता नहीं क्यों मुझे कोई खटका सा लग रहा था..
दोस्तो.. मेरे साथ लौड़ा हिलाते रहिए.. जल्द ही अगले भाग में आपको कमली और गुलाबो की चुदाई की कथा लिखता हूँ।
कहानी जारी है।

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