Gulabo Aur Kamli Ki Chut Gaand Chudai- Part 1

फिर उसकी चूत में लण्ड डाल कर उसको पीछे से.. आगे से.. नीचे से.. ऊपर से.. खूब मस्त कर कर के चोदता।
कभी-कभी जब मुझे उसकी गाण्ड मारने की इच्छा होती.. तो मैं उसे पलटा देता और फिर मलाई लगा कर लण्ड को उसको पहले चुसाता.. फिर उसकी गाण्ड में मलाई लगाकर अपना लण्ड उसकी रसीली गाण्ड में घुसा देता।

हाय कितना मस्त लगता था.. उसकी गाण्ड मारना।
चुस्त दुरुस्त गाण्ड की चुदाई का मजा ही कुछ और होता है। चुदने वाली अगर गरम हो.. तो चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है।
उसकी चूत में उसकी गाण्ड में.. उसके मुँह में लण्ड देते हुए जन्नत के सुख का अनुभव होता है।

कई बार मैंने देखा है कि खुद की औरत जितना मजा नहीं दे पाती.. उतना मजा ये बाहर वाली औरत देती है।
एक दिन उसने बड़ी शिद्दत से मुझसे चुदवाया। फिर मुझसे आराम से पूछा- साहब क्या एक और चलेगी?
मैं हल्का सा चौंका।

‘क्या कह रही हो.. क्या मरवाना है.. अगर तुम्हारी मालकिन आ गई तो तूफान खड़ा हो जाएगा?’

उसने कहा- नहीं होगा.. क्योंकि मैं जिसको लेकर आ रही हूँ. वो मेरी देवरानी है.. उसके पति का लण्ड छोटा सा है.. सो उसको भी लण्ड चाहिए।
मैं सोच में पड़ गया। कमली तो ठीक थी अगर घर में किसी और को बुलाता और घर वाली आ जाती.. तो लेने के देने पड़ जाते.. क्या करें?
मैंने कमली से पूछा- क्या तेरे घर में जम सकता है? फिर मैं तुम दोनों को भी चोदूँगा।

‘साहब आप कहाँ आएंगे.. हमारी उन झुग्गी झोपड़ी में.. दो कमरे हैं.. एक मेरी देवरानी का और दूसरा मेरा.. घर में भी बच्चे आते-जाते रहते हैं। फिर कोई भी आता है।’

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‘अच्छा.. यानि तुझे उसे यहीं लेकर आना है चुदने के लिए..’
‘साहब जी.. आपके लण्ड के लिए तो मैं कुछ भी करूँगी।’

उसने इस तरह की बात की.. तो मैं थोड़ा तैयार हो गया.. लेकिन चोदने के मामले में मैं कोई रिस्क में लेना नहीं चाहता था। उधर मन कहता था कि ये मस्त चुदक्कड़ कमली और साथ में उसकी देवरानी भी अगर मिल जाए.. तो क्या बात थी..
उसकी देवरानी इस खेल में नई थी.. ऐसा कमली ने कहा था।

दूसरे दिन कमली के साथ एक बाइस-तेईस साल की लड़की.. थोड़ी शरमाते हुए दरवाजे पर खड़ी थी। मैं समझ गया यही कमली की देवरानी हैि जो आज अपना भोसड़ा खुलवाने आई है।
मुझे मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ.. क्या बात है मेरे ठरकी लौड़े आज तो तेरी किस्मत में दो-दो चूतें हैं।

‘क्या नाम है तेरा? मैंने कमली की देवरानी से पूछा.. तो उसने धीरे से कहा- गुलाब..
हाय.. एक कमल का फूल.. तो दूसरी गुलाब की कली.. क्या बात है.. मेरे विचार अब बहकने लगे थे.. अरमानों में दोनों चूतें आँखों के सामने नंगी नाचने लगी थीं।

कमली की देवरानी थी तो जरा सांवली.. पर उसके भरे हुए दूध और मचलती जवानी देख कर मेरे लौड़े में नीचे एक खलबली सी मच रही थी।
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हें कमली ने बताया है कि तुम किस लिए आई हो?
गुलाब ने शरमा कर आँखें नीची करते हुए मुझसे ‘हाँ’ कहा।

कमली बोली- अरे गुलाबो.. अब शर्माती क्यों हो? सारा ही दिखाना है.. तो शर्माना क्यों..? चल पहले खाना बना ले.. फिर दोनों मिल कर साहब की खिदमत करेंगे।
यह कहकर कमली मेरी तरफ कनखियों से देखते हुए कंटीली मुस्कराहट के साथ रसोई में जाने लगी।
उसने गुलाबो के दोनों पुठ्ठों पर हाथ फिराया.. मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है।

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