गन्दू से रंडी बीवी बनने की सेक्सी स्टोरी

अगली सुबा निशा ने दरवाज़ा खटखटाया तो मेरी नींद टूटी. मैं उठी तो देखा की यादव जी वॉशरूम में थे. मैने उठने की कोशिश की तो मुझसे उठा नही जेया रहा था. कल रात की चुदाई से मेरी बॉडी अभी भी रिकवर नही हो पाई थी. मैने बेड से ही निशा को आवाज़ दी, और पूछा की क्या बात है. उसने बाहर से ही बोला-

निशा: मा जी, ब्रेकफास्ट नही करेंगे क्या? नीचे आइए सब आपका इंतेज़ार कर रहे है. जल्दी कीजिए.

मैं बोली: तुम लोग ब्रेकफास्ट कर लो प्लीज़. मेरी तबीयत खराब है. मैं आ नही सकती. तुम्हारे ससुर जी आ जाएँगे नीचे. तुम जाओ अभी.

फिर वो चली गयी. यादव जी भी वॉशरूम से नहा के बाहर आए, और आते ही उन्होने मेरे माथे पे किस किया और पूछा-

यादव जी: अब तबीयत कैसी है तेरी? अभी भी दर्द है?

मैने हा में सर हिलाया. फिर उन्होने मुझे रात वाली दवाई दी और साथ में एक पाईं किल्लर भी. मैने दवाई ले ली. फिर वो नीचे ब्रेकफास्ट करने चले गये, और उसके कुछ देर बाद निशा मेरे लिए ब्रेकफास्ट लेके आई. उसके साथ नेहा और रिया भी थी.

उन्होने मेरा हाल-चाल पूछा, और मुझे एक प्रेसेटमल भी दी. क्यूंकी मुझे बुखार चढ़ चुका था.

मैं सारा दिन बेड से उठ नही पाई. शाम को यादव जी काम से लौट आए. आते ही उन्होने मेरे बारे में पूछा. मेरा बुखार तभी भी बहुत था, तो उन्होने मेरे सर पे गीली पट्टी भी लगाई, ताकि बुखार कम हो जाए.

सारी रात वो मेरी सेवा करते रहे. सर पे पानी भी डाला उन्होने काई बार. डिन्नर के बाद उन्होने फिरसे मुझे वही दवाई दी. आधी रात को मेरा बुखार तोड़ा कम हुआ. मुझमे थोड़ी सी ताक़त भी आई तो मैने उठने की कोशिश करी. यादव जी अपनी रॉकिंग चेर पे बैठे थे. मुझे देख कर वो मेरे पास आए, और मुझे उठने में हेल्प करी और पूछा-

यादव जी: अब कैसा लग रहा है?

मैने कहा: अब तोड़ा अछा लग रहा है. थॅंक योउ.

वो चौक गये और बोले: थॅंक योउ किस लिए?

मैं: आपने मेरी इतनी सेवा करी इसलिए.

वो मुस्कुराए और बोले: अपनी बीवी को उसके बुखार में हेल्प नही करूँगा तो कब करूँगा?

अगली सुबा मैं उठी तो मुझे अब अछा लग रहा था. तबीयत भी अब बेटर लग रही थी. तो मैने नाहया और नयी सारी पहन ली. मैं तैयार हो रही थी, और तभी निशा ने बाहर से आवाज़ दी.

मैने कहा: हम नीचे आ रहे है.

फिर मैने यादव जी को उठाया. उन्होने उठते ही पहले मेरे माथे पे एक किस किया, और मुझे गले लगा लिया, और कहने लगे-

यादव जी: बहुत सुंदर लग रही है तू.

मैने कहा: अब उठिए और नहा के नीचे आइए ब्रेकफास्ट के लिए. मैं जेया रही हू.

फिर मैने सब के लिए खीर बनाई. सब ने मेरी तारीफ भी करी. इसके बाद घर के सारे मर्द अपने काम पे चले गये और हम औरते घर के काम में बिज़ी हो गयी. यादव जी ने मुझे कह दिया था मैं वो दवाई दिन में 2 बार याद करके ले लू. मैने वही किया.

जब सब काम ख़तम हो गया तो मैं निशा, नेहा और रिया के साथ बैठ के बातें करने लगी. ऐसे करके ही हम में बहुत अची दोस्ती हो गयी. हम सास बहू कम और सहेली ज़्यादा बन चुके थे.

ऐसे ही एक महीना बीट चुका था. यादव जी मुझे हर रात छोड़ते थे. कभी बेड पे, कभी टेबल पे, कभी चेर पे, कभी मुझे घोड़ी बना के, कभी मुझे गोद में बिता के हर तरह से उन्होने मुझे छोड़ा. कभी-कभी तो बिना किसी लूब्रिकॅंट के ही छोड़ा उन्होने मुझे, जिससे मेरी गांद से काई बार खून निकला. लेकिन इस एक महीने की लगातार चुदाई से मेरी गांद खुल चुकी थी. अब मुझे उतनी तकलीफ़ नही होती.

इस एक महीने में कुछ अजीब भी हुआ. मेरी दाढ़ी नही आई, मेरी चेस्ट फूलने लगी, जैसे की कोई लड़की के बूब्स हो. मेरी गांद भी उभर आई थी. मेरे बाल भी तेज़ी से बढ़ रहे थे और मेरी आवाज़ भी अभी लड़कियों जैसी हो चुकी थी. सबसे बड़ी परेशानी की बात ये थी, की मेरा लंड दिन प्रतिदिन सिकुड रहा था. मैने काई बार मुस्तेरबाटे किया तो स्पर्म भी उतनी नही निकलती थी.

मैने काई बार यादव जी से कहा भी मेरी इस प्राब्लम के बारे में. तो उन्होने इसे दवाई के साइड एफेक्ट्स बोल के ताल दिया, और मुझे रेग्युलर दवाई लेने को बोला. मैं उनकी हर बात मानती गयी.

ऐसे ही 6 महीने बीट चुके थे. अब मैं पूरी तरह से एक औरत बन चुकी थी. तंन से भी, और मॅन से भी. इस दौरान यादव जी मुझे हर रात छोड़ते रहे. और उस दवाई से मेरी बॉडी भी बदल चुकी थी. अब मुझे पॅडेड ब्रास नही पहँनी पड़ती थी, क्यूंकी मेरे बूब्स बढ़ चुके थे, और मुझे नये साइज़ की ब्रास लेनी पड़ी. मेरे बाल अब कमर तक आ गये थे, और वो बहुत सुंदर भी थे.

निशा हर शाम मेरे बालों में तेल लगा देती थी. हम चारो में दोस्ती और गहरी हो गयी थी. इसी बीच छ्होटी बहू रिया प्रेग्नेंट हो गयी. बाकी दोनो के 2 बेटे थे जो की मुंबई एक हॉस्टिल में रह के स्टडी कर रहे थे.

एक दिन यादव जी ने पूछा: तुझे अपनी बीवी की याद नही आती?

मैं: हा आती है बहुत.

यादव जी: उससे मिलने का मॅन नही करता?

मैं: जी.

यादव जी: ठीक है तो फिर कल जाके उससे मिलके आ. रवि कल मुंबई जेया रहा है उसके साथ चली जाना.

मैं: जी ठीक है.

अगले दिन सुबा मैं रवि के साथ निकली. करीब 2 घंटे में हम मेरे घर तक पहुँच गये. मुझे उतार के रवि ने कहा-

रवि: मा, मेरा काम ख़तम होते-होते शाम हो जाएगी. उसके बाद मैं आपको यहा से पिक कर लूँगा. अगर कोई प्राब्लम हो तो मुझे एक कॉल कर देना.

ये कह के वो चला गया.

इसके बाद मैं बिल्डिंग के अंदर गयी, लिफ्ट में घुसी, और लिफ्ट उपर जाने लगी. मैं तो अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी, की कितने दीनो बाद मैं ऋतु से मिलने जेया रही थी. लिफ्ट से उतार के जब मैं अपने फ्लॅट के गाते पे गयी, तो एक पल के रुक गयी. मैं अब जिस हालत में थी, क्या ऋतु मुझे आक्सेप्ट करेगी?

यही सोच रही थी की देखा की फ्लॅट का मैं गाते खुला था. मैं अंदर गया, और देखा की घर में कोई नही था. मैने हमारे बेडरूम से कुछ आवाज़ सुनी तो वाहा गयी. बेडरूम का गाते हल्का सा बंद था. अंदर से कुछ आवाज़ आ रही थी, तो मैने झाँका. जो मैने देखा वो मैं कभी अपने सपने में भी नही सोच सकती थी.

ऋतु पूरी नंगी होके अपने दोस्त और बिज़्नेस पार्ट्नर मोहित के साथ लिपटी हुई थी. मोहित का लंड ऋतु की छूट के अंदर था. ऋतु अपने चरमसुख में थी. मैं ये नज़ारा बर्दाश्त नही कर पाई. मैं वाहा से जाने ही वाली थी की उनकी बातों की आवाज़ आई.

मोहित: अछा हुआ की तुम्हारे पति को यादव ले गया अपने साथ. अब हमे उससे च्छूप-च्छूप के होटेल में, ऑफीस में, मेरे घर में ये सब नही करना पड़ेगा.

ऋतु: और नही तो क्या. सत्तू एक नंबर का नामार्द था. उसकी 4 इंच लुल्ली तुम्हारे इस 8 इंच के लंड के सामने कुछ नही है. अछा ही हुआ के चला गया. उपर से हमारे सारे कर्ज़े माफ़ हो गये, और हर महीने 20 हज़ार रुपय भी मिलने लगे. कुछ तो अछा हुआ उस नामार्द की वजह से.

मोहित: 6 महीने तो हो चुके है. अब 6 महीने बाकी है. जब वो लौट आएगा तब क्या करोगी?

ऋतु: मैने इसका इंतेज़ां कर रखा है पहले से ही. वो जब लौट के आएगा तब मैं उससे डाइवोर्स ले लूँगी ये कहके के वो गे है. तब उसकी सारी प्रॉपर्टी मेरी हो जाएगी और वो कही का नही रहेगा. फिर मैं तुमसे शादी कर लूँगी.

मैं एक पल भी और नही रुकी वाहा. बिल्डिंग से बाहर आते ही मैने रवि को कॉल किया-

मैं: रवि, तुम किसी को गाड़ी लेके भेज सकते हो, जो मुझे घर ले जाए?

रवि बोला: मा आप रुकिये वाहा, मैं अभी किसी को भेजता हू. 10 मिनिट बाद एक गाड़ी आई, और मैं गाड़ी में बैठ गयी. मैं पुर रास्ते रोटी रही. जिसके लिए मैने ये सब किया, अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी, उसने ही मुझे धोखा दिया. मैने मॅन ही मॅन तान लिया, की मुझे अब क्या करना था. घर पहुँचने के बाद मैने नेहा को हॉल रूम में देखा और उससे पूछा-

मैं: नेहा, तुम्हारे ससुर जी कहा है?

नेहा बोली: पापा जी तो अपने रूम में ही है.

मैं उपर रूम में गयी तो देखा की वो अपनी रॉकिंग चेर पे बैठे हुए थे, और उनके करंचारी उनके सामने खड़े थे. बातों से पता चला की वो अपने बिज़्नेस को लेकर कुछ डिसकस कर रहे थे. मुझे देख कर वो बोले-

यादव जी: तू इतनी जल्दी वापस आ गयी? क्या हुआ?

मैने उन्हे कोई जवाब नही दिया. उनके कर्मचारियो को मैने बाहर जाने को बोला तो यादव जी बोले-

यादव जी: अर्रे इंपॉर्टेंट काम है. तुझसे मैं बाद में बात करूँगा.

मैने उनकी एक नही सुनी और सब को रूम से निकाल दिया और रूम का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया.

यादव जी हैरान रह गये.

वो बोले: क्या कर रही है तू? मैने उनका जवाब नही दिया, और अपने सर से पल्लू उतार दिया और अपने बाल खोल दिए.

मैने उनसे पूछा: मुझे अपने पास रोकना नही चाहेंगे आप?

यादव जी मेरे इस आटिट्यूड से शॉक्ड हो गये और बोले: ज़रूर रोकना चाहूँगा.

मैं अपनी सारी का पल्लू गिराते हुए बोली: क्या कर सकते है आप मुझे रोकने के लिए?

यादव जी बोले: सब कुछ.

इसके बाद मैं उनकी गोद में बैठ गयी. वो पूरी तरह से शॉक्ड हो गये. मैने उनके गालो पे हाथ रखा और उनके लिप्स को किस करने लगी. उनकी आँखें बड़ी-बड़ी हो गयी ये देख के, क्यूंकी इन 6 महीनो में उन्होने कभी भी मुझे लीप किस नही किया, और मैने भी कभी रोमॅन्स की पहल नही की.

मैं किस करते हुए उनकी जीभ को चाटने लगी. ऐसे ही मैं 5 मिनिट तक उन्हे किस करने लगी. उनसे अलग होके मैने कहा-

मैं: तो मुझे रोक लीजिए, और अपना बना लीजिए.

ये सुनते ही मानो उनके अंदर कोई जानवर आ गया हो. उन्होने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, और मुझे किस करने लगे. मैं अपना हाथ से उनके बालों को सहलाने लगी, और उनके प्यार में डूबने लगी. उन्होने मुझे फिर बेड पर पटक दिया, और हम दोनो के सारे कपड़े उतार दिए.

वो मेरे उपर आके चढ़ गये और मुझे पागलों की तरह चूमने लगे. कभी वो मेरे बूब्स चूस रहे थे, तो कभी गले में चूम रहे थे. फिर मैने उन्हे उल्टा लिटा दिया, और मैं उनके उपर चढ़ गयी.

फिर मैं उनके लंड को अपने हाथ में लेके सहलाने लगी. आज उनका लंड और भी बड़ा लग रहा था. मैने भूखी शेरनी की तरह उनके लंड को चूसने लगी. एक-दम गले तक उनका लंड मैने उतार दिया. लंड को चूस्टे हुए मैने उनको देखा तो वो चरमसुख में पहुँच गये थे. फिर मैने अपने मूह से उनका लंड निकाला तो वो मेरे सलाइवा से पूरा गीला हो चुका था.

इसके बाद मैं उनके उपर आके बैठ गयी. वो कुछ बोलना चाह रहे थे. लेकिन मैने अपनी उंगली उनके होतो पे रख के उन्हे चुप करा दिया.

मैं: श… आज आप सिर्फ़ मेरी मर्ज़ी की करेंगे.

ये कहते ही मैं उनके गीले लंड के उपर बैठ गयी. इतने दीनो की चुदाई से मेरी गांद खुल चुकी थी. इसलिए उनका लंड एक-दूं मेरे अंदर चला गया और मूह से आ की आवाज़ आई. फिर मैं उछालने लगी, और उनके लंड से चूड़ने लगी.

आज पहली बार मुझे इतना सुख मिला. मैं झुकी और उनको किस करने लगी. वो मेरी गांद पे थप्पड़ मारने लगे, और उसे दबाने लगे. कुछ देर ऐसे हम एक-दूसरे से लिपटे रहे.

फिर यादव जी ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, और मुझे गोद में लेके ही छोड़ने लगे.

मैने अपने पैरों से उनकी कमर को जाकड़ लिया और खुशी से उनका लंड रही थी. फिर मुझे उन्होने बेड पर पटक दिया, और मेरे पैर अपने कंधे पे उठा के फिरसे लंड मेरी गांद में पेल दिया और ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगे. मैं मानो सातवे आसमान में थी.

फिर मैं बोली: मुझे अपना बना लीजिए. मैं ज़िंदगी भर आपकी बीवी बनके आपकी सेवा करना चाहती हू.

वो बोले: तो फिर तेरी बीवी ऋतु का क्या?

मैं गुस्से बोली: भाड़ में जाए वो. मैं सिर्फ़ आपकी हू, आपकी सत्या. मुझे किसी और की ज़रूरत नही. ज़िंदगी भर आपकी बनके रहना है मुझे.

पहली बार चूड़ते हुए मैं झाड़ गयी. ऐसा सुख मुझे कभी नही मिला. जब मैं ऋतु के साथ थी तब भी नही. मुझे मेरा असली प्यार मिल चुका था. यादव जी, मेरे पति. उनके साइवा मुझे और कुछ नही चाहिए अभी. कुछ देर बाद यादव जी भी मेरे गांद में झाड़ गये, और मेरे उपर लेट गये. हम ऐसे ही बहुत देर तक लेते रहे और सो गये.

जब मेरी नींद टूटी तो मैने उनको जगाया. फिर हर बार की तरह उन्होने मेरे माथे को चूमा.

मैने उनसे कहा: मेरी एक रिक्वेस्ट रखेंगे आप?

वो बोले: तू बोले तो चाँद तारे मैं तेरे सामने लाके रख डू. बोल क्या चाहिए तुझे? मैं बोली: चाँद तारे लाने की ज़रूरत नही. मैं पूरी तरह से औरत बनना चाहती हू. क्या आप मेरी ये ख्वाइश पूरी करेंगे?

वो बोले: हा बिल्कुल. बस एक बार तेरा हॉर्मोन्स का कोर्स ख़तम हो जाए, फिर हम फॉरिन जाके तेरी सर्जरी करा देंगे. इसी बहाने हमारा हनिमून भी हो जाएगा.

मैं बोली: हॉर्मोन्स का कोर्स? वो बोले: जो दवाई तू हर रोज़ ले रही है, वो हॉर्मोन्स की ही दवाई है. इसी की वजह से तेरी बॉडी चेंज हो रही है.

मैं बोली: बहुत अछा किया आपने.

ये कह के मैं उनके लिप्स को किस करने लगी. हमे होश आया जब निशा ने बाहर गाते पे नॉक किया डिन्नर के लिए.

उस दिन के बाद मैने ऋतु से कोई कनेक्षन नही रखा. एक साल पुर होने के बाद मुझे लेकर यादव जी बॅंकाक गये जहा मेरी सर्जरी हुई और मैं पूरी तरह से औरत बन गयी. मैं अब पूरी तरह से सत्या बन चुकी थी, और अपनी पिछली ज़िंदगी को पीछे छ्चोढ़ आई. यादव जी ने भी मेरा साथ कभी नही छ्चोढा. मैं अब पहले से भी बहुत ज़्यादा खुश थी.

…..थे एंड…….

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