गांद मरवाने का चरम सुख

मेरा नाम कारण है. ये कहानी मेरी कुछ मंत्स पहले की है. मैं बिल्कुल सीधा-सादा लड़का हू. जब मैं कॉलेज हॉस्टिल में रहने लगा, वाहा मुझे एक सीनियर मिला जिसने मुझे पूरी तरह से गान्डू और उसकी रंडी बना दिया.

ये शुरुआती दीनो की बात है, जब हॉस्टिल में रात को सीनियर्स हमारी रॅगिंग लिया करते थे. मैने उसे वही पहली बार नॉर्मल रॅगिंग के दौरान देखा. हमारी बात-चीत हुई. कॉलेज लाइब्ररी में हम दोनो बैठ कर बातें करने लगे.

एक रोज़ सीनियर्स को ज़्यादा गुस्सा आया था. तो उन्होने हम जूनियर्स को टेरेस पर ले जेया कर एक लाइन में खड़ा किया, और सब के कपड़े उतरवा दिए. सब जूनियर्स चड्डी में खड़े थे और सब की रॅगिंग शुरू हुई. उनमे से एक सीनियर मेरे पास आया और मुझे कोने में ले जाके खड़ा कर दिया. यहा से हम दोनो किसी को नज़र नही आ रहे थे.

उसने मुझे मेरी चड्डी उतारने को कहा. मैं डांग रह गया. मैने माना किया तो उसने मुझे कहा-

वो: ये नॉर्मल रॅगिंग है. सब के साथ होता है.

मैने ओक बोला, और उसने मेरी चड्डी खींचनी शुरू कर दी, और और गांद पर से थोड़ी नीचे उतार दी. उतने में वाहा दूसरा सीनियर जिसकी बात मैने स्टार्टिंग में की वो आया. उसका नाम गिरीश था. वो हटता-कटता और हॉट था. उसने वाहा आके कहा-

गिरीश: इसे छ्चोढ़ दो. इसकी रॅगिंग मैं लूँगा.

उसने मुझे उस दिन नंगा होने से बचा लिया. मैने अपनी चड्डी उपर उठाई, और मुझे रोना आ रहा था. वो मुझे ऐसे ही चड्डी में अपने कमरे में ले आया.

वो बोला: रोता क्यूँ है? पहले कभी नंगा नही हुआ क्या?

मैं चुप था.

उसने कहा: देख तू मेरा फॅवुरेट जूनियर है.

ये सुन के पता नही क्यूँ पर मेरे मॅन में लड्डू फुट गये.

गिरीश: कल से तुझे मर्द बना दूँगा. मैं जैसा कहता हू वैसा करते जेया बस.

गिरीश: किसी के साथ सेक्स किया है?

मे: नही.

गिरीश: आज हिलाया?

मे: नही.

गिरीश: हफ्ते में कितनी बार हिलता है?

मे: एक-दो बार.

गिरीश: आबे मर्द है तू, रोज़ हिलाया कर.

मे: ह्म.

गिरीश: किसी के सामने नंगा हुआ कभी?

मे: नही.

गिरीश: आबे तू तो सेयेल पूरा ही लड़की है. तुझे मर्द बनाना पड़ेगा. कल सुबा 9:30 बजे आना, साथ में नंगे नहाएँगे.

मुझे समझ नही आया की मैं क्या बोलू. इसलिए हा कर बैठा. दूसरे दिन सुबा मैं अपना समान लेकर उसके कमरे में गया. बाकी सीनियर्स जो उसके रूमेट थे, वही थे. सब के सामने गिरीश ने अपने कपड़े उतारे, और चड्डी पर आ गया. और मुझसे कपड़े उतारने को कहा. सब ने पूछा क्या हो रहा था.

गिरीश ने कहा: आज इसके साथ नाहोँगा.

सब के लिए ये बड़ी नॉर्मल बात थी, पर मैं शर्मा रहा था. उसने मेरा हाथ पकड़ा, और बातरूम में ले गया, और शवर स्टार्ट कर दिया. हम दोनो भीग गये. उसने मोबाइल पर हल्का सॉंग चलाया, और डॅन्स करने लगा. उसने मुझे भी नचाया.

साबुन लेकर मेरे और अपने बदन पर लगाया. अब तक सब ठीक था. फिर मेरे पास आया, और बोला-

गिरीश: चल खोल दे अपनी चड्डी. उतार इसे.

मैं काँपने लगा. मुझे दर्रा हुआ देख कर गिरीश ने खुद अपनी चड्डी उतार दी, और मेरे सामने नंगा हो गया. उसे नंगा देख कर मेरी शरम चली गयी. पर उसका गोरा शरीर और लंबा लंड देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.

उसने कहा की मैं खुद अपनी चड्डी उतारू. तभी मुझमे कॉन्फिडेन्स आएगा. कुछ देर में मुझे ऑक्वर्ड फील हुआ क्यूंकी वो नंगा था. तो मैने भी अपनी चड्डी उतरी. हमने साथ में शवर लिया, और टवल लपेट कर बाहर आए. सब हमे देख रहे थे.

वाहा दो और सीनियर थे. उन्होने मस्ती में मेरा और गिरीश का टवल खींच कर हमे नंगा किया, और मैं पानी-पानी हो गया. पर उनको देख के ऐसा लगा की ये उनका रोज़ का काम था.

गिरीश नंगा हो कर भी मस्ती में था, मानो सब के सामने नंगा हो कर उसे और मज़ा आ रहा हो. जाते वक़्त गिरीश ने कहा-

गिरीश: रात को 11: 30 बजे आ जाना. हम साथ में पॉर्न देखते है.

उस रात हम दोनो अकेले ही थे. तो हम गिरीश के मोबाइल पर पॉर्न देखने लगे. कुछ वक़्त बाद हम दोनो गरम होने लगे. गिरीश तो काई बार अपने शॉर्ट्स में हाथ डाल कर हिलने लगा. पर मुझे शरम आ रही थी. उसने ये बात जान ली.

उसने कहा: चल साथ में मूठ मारते है, और एक साथ शॉट निकालेंगे.

मैं दर्र तो गया, पर अंदर से मज़ा भी आ रहा था. हम दोनो ने शर्ट पंत उतरी. हम अब सिर्फ़ चड्डी में थे. उसने अपनी चड्डी के अंदर हाथ डाल कर हिलना शुरू किया. मैने भी वैसे ही किया, पर मेरा ध्यान पॉर्न से ज़्यादा उसकी बॉडी और हाथो पर था.

उसकी चड्डी अब गीली होनी शुरू हो गयी थी. उसने एक झटके में अपनी चड्डी नीचे की, और पैर फैला के लंड को सहलाने लगा. उसने मुझे देखा और कहा-

गिरीश: बहनचोड़ खोल अपना, मुझे भी देखने दे खड़ा हुआ कैसे लगता है.

मैं भी नंगा हो गया. हम दोनो अपना लंड हिलने लगे. पर कुछ ही देर में उसने मेरा लंड पकड़ा, और हिलने लगा. उसके हाथ मेरे लंड को छूटे ही मुझे एक करेंट सा लगा, और मैं सातवे आसमान पर पहुँच गया. मैने भी उसके लंड को पकड़ा.

पहली बार किसी लड़के का लंड अपने हाथ में लिया था. उसके टाइट लंड को मसालने में मुझे मज़ा आ रहा था.

उसने कहा: भद्वे. दूं नही है क्या? ज़ोर-ज़ोर से हिला, और तब तक हिला जब तक निकल ना जाए.

ये सुनते ही मैने एक हाथ से उसका हिलना शुरू किया. उसने भी मेरा लंड हिलाया. कुछ वक़्त में ही मेरा पानी उसके पुर हाथो में निकल गया. पर उसका अब तक नही निकला था.

उसने कहा: टेस्ट करेगा, ट्राइ कर. लेले मूह में मदारचोड़.

वैसे मुझे गालियाँ पसंद नही. पर उसके मूह से मुझे गालियाँ अची लगने लगी. पहले माना किया, पर वो ज़बरदस्ती मेरा सिर पकड़ के अपने लंड के पास लाया, और अपना लंड मेरी नाक और होंठो पर रगड़ने लगा. पहले अजीब लगा, पर बाद में उसकी खुसबु मुझे पसंद आई.

धीरे से उसने टोपा मेरे मूह में डाला. मैने जीभ से छाता, तो उसने पूरा लंड एक झटके में मेरे मूह में डाल दिया. कुछ देर चूसने के बाद हम दोनो को काफ़ी मज़ा आने लगा.

अब तक मैं उसके लंड का दीवाना हो चुका था. इसलिए लंड मूह से बाहर निकालने के बाद भी मैने उसकी बॉल्स और गांद को चाटना शुरू किया. मुझे खुद से एंजाय करता देख उसे भी मज़ा आने लगा.

उसने फिर एक बार इशारा किया, और मैने डॉगी बन कर उसका लंड मूह में ले लिया. उसने मेरा सिर पकड़ कर मेरे मूह की जाम कर चुदाई शुरू कर दी. 4-5 मिनिट लगातार चुसाई के बाद वो मेरे मूह में झाड़ गया. पहली बार था इसलिए मैं पूरा कम पी नही पाया.

उस दिन से मैं उसके साथ कंफर्टबल हो गया, और हर रात को या सूभ को मैं अब उसका पर्सनल टॉय बन चुका था. उसका पानी अब मेरे मूह में या मेरी बॉडी पर ही निकलता था. और मैने भी मास्टरबेशन करना छ्चोढ़ दिया था. अब गिरीश ही मेरा पानी निकाल देता था. एक रात ऐसे ही हम गरम हो चुके थे. गिरीश ने मुझे बाहों में भर लिया, और कहा-

गिरीश: जानेमन, तेरी गांद मारने का बहुत मॅन कर रहा है. प्लीज़ मारने दे यार आज.

मैने बहुत माना किया, पर मैं अपने बाप को छोड़ना कैसे सीखा सकता था. और गिरीश ने मुझे चुदाई के लिए मनाया. उसने मुझे टेबल पर बिताया, और मुझे नंगा करके मेरे दोनो पैर अपने कंधे पर रख दिए.

उसने मुझे हवस भारी नज़र से देखा, और मुझे किस करने लगा गाल पर, नेक पर, चेस्ट पर. और यहा नीचे से उसने अपना लंड मेरी गांद के च्छेद पर सेट कर दिया. धीरे-धीरे उसने लंड को मेरी गांद के अंदर डालना शुरू किया. मैं दर्द में चिल्ला उठा, पर वो नही माना.

उसका आधा लंड मेरी गांद में था, और मैं रो रहा था. उसने ऐसे ही पूरा लंड मेरी गांद में डाल दिया और कुछ देर एक ही पोज़िशन में खड़ा रहा. थोड़ी देर बाद उसने लंड से चुदाई शुरू की.

पहले धीरे-धीरे अंदर-बाहर और बाद में स्पीड बधाई. मेरा पहली बार था. ऐसे लग रहा था की जैसे किसी ने गरम रोड मेरी गांद में डाल दी हो. पर मेरी चुदाई शुरू हो गयी थी. 15-20 मिनिट लगातार उसने मेरी गांद मारी. फिर वो मेरे अंदर ही झाड़ गया, और छ्होटे बच्चे की तरह मुझसे लिपट गया.

मैं उससे चुड के बहुत खुश हुआ. उस रात आधी रात को उसका लंड फिर खड़ा हुआ. मैं सो रहा था, पर उसने मेरे से मेरा पैर उठा कर छोड़ना चाहा. मेरी नींद खुल गयी. मैने उसे करने दिया. उसने पीछे से एक-दो झटको में लंड अंदर डाल दिया. लेकिन उसका एक बार निकल चुका था, इसलिए इस बार वो जल्दी नही झाड़ा.

उसने खूब जाम कर चुदाई की. मैं रोता रहा की धीरे करो, पर उसने मेरी गांद पकड़ी, और एक्सप्रेस ट्रेन की तरह मेरी गांद मारी. मेरी चुदाई की स्पीड बढ़ चुकी थी. मैं तक चुका था, इसलिए उसे रोक नही पाया. मेरी गांद चुदाई ज़ोरो पर थी. 20-25 मिनिट चुदाई के बाद वो मेरे लंड के उपर ही झाड़ गया, और हम दोनो ऐसे ही सो गये.

सुबा उसके कम ने मेरे शरीर को धक रखा था. मैं वो देख के बहुत खुश हुआ. पर सुबा-सुबा मेरी गांद जलने लगी और मैं सॉफ करने उठा तो मैं चल नही पा रहा था.

मैं नहा के नंगा ही बाहर आया. तब गिरीश जाग उठा था. वो मुझे वापस बातरूम में ले गया, और शवर के नीचे बैठ के अपना लंड चुस्वाया. और सुबा एक और रौंद के लिए वो तैयार था. मैं उसे अब कैसे माना कर सकता था. वही बातरूम में मैं नंगा डॉगी बन गया, और पीछे से सुबा-सुबा मॉर्निंग सेक्स के साथ मेरी चुदाई हुई.

उस रात के बाद हर दो दिन मेरी चुदाई होती है. हमने आउटडोर एक्सपीरियेन्स किया है. ग्रूप और गंगबांग भी किया है. अगर आपको और जानना है तो प्लीज़ बताए. मैं अपना एक्सपीरियेन्स बतौँगा.

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