डेरे वाले बाबा जी और सन्तान सुख की लालसा-1

यह कहानी एक बहुत ही सैक्सी औरत, “आरती” की है, जिसे मर्दों से चुदवाने का शौक था। फिर वो मर्द चाहे कोई भी हो… सिर्फ़ उसकी चूत की आग को शाँत करने लायक होना चाहिए।

आरती की उम्र ४५ वर्ष थी पर दिखने में वो ३४-३५ की ही लगती थी। उसने अच्छे खान-पान और कसरत के ज़रिए खुद को काफ़ी फिट और मेनटेन कर के रखा था। उसका ३६-२८-३६ का फ़िगर बहुत ही सैक्सी था। वो बहुत ही फैशनेबल थी और हमेशा शिफॉन या नेट की पारदर्शी साड़ियाँ और स्लीवलेस ब्लाउज़ पहनती थी। उसके नूडल स्ट्रैप ब्लाउज़ हमेशा इतने लो-कट और छोटे होते थे कि उसके सामने खड़ा कोई भी इंसान उसकी सैक्सी चूचियाँ साफ-साफ देख सकता था। आरती के तराशे हुए शरीर पे अगर कहीं माँस दिखता था तो वो था सिर्फ़ उसकी चूचियाँ और उसकी गाँड और वो इन दोनों का पूरा-पूरा फायदा उठाती थी। उसकी शादी से पहले और बाद में भी उसके अनेकों नाजायज़ सम्बंध रहे हैं। उसका पति मर्चेंट नेवी में था और साल मे एक-आधे महीने के लिए ही घर आ पाता था। इसलिए आरती के लिए किसी से भी अपनी चूत चुदवाने में कोई बाधा नहीं थी। आरती की एक २२ वर्ष की बेटी थी, पूजा। पूजा भी दिखने में बहुत ही खूबसूरत और सैक्सी थी। पूजा को देख कर कितने ही लड़के आहें भरते थी और उसके नाम की मुठ मारते थे। आरती को अपनी अय्याशियों के आगे उसकी बेटी की ज़िंदगी में कोई रुचि नहीं थी। पूजा क्या पहनती है, क्या करती है, कहाँ आती-जाती है, इस सबसे आरती कुछ सरोकार नहीं था। अपनी माँ के रोक-टोक के बगैर पूजा की भी सिर्फ़ फ़ैशन और लड़कों में ही रुचि थी। पूजा दो साल से बी.ए फ़ाईनल इयर में ही अटकी थी। दोनों माँ बेटी की स्वच्छँद ज़िंदगी थी। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

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एक दिन पूजा के कॉलेज से आरती के लिए प्रिंसिपल से मिलने के लिए फोन आया। आरती को वैसे तौ पूजा के कॉलेज और पढ़ाई-लिखाई से कोई सरोकार नहीं था पर फिर भी एक माँ होने के नाते उसने प्रिंसिपल से मिलने का फैसला किया। अगले ही दिन आरती पूजा के कॉलेज गयी। आरती ने जामुनी रंग की शिफॉन की साड़ी, नाभी से काफी नीचे बाँध कर पहनी हुई थी। उसके साथ ही उसने बहुत ही कसा हुआ लो-कट स्लीवलेस ब्लाउज़ और सफ़ेद रंग के बहुत ही ऊँची और पतली हील के सैंडल पहने थे। गले में मंगल-सुत्र था जो उसकी चूचियों की बीच की घाटी में टिका था। उसके लम्बे बाल उसके पीछे क्लिप में बँधे थे और उसके माथे पर मैचिंग बिंदी थी और माँग में हल्का सा सिंदूर भी था। ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी बेटी के कॉलेज के प्रिंसिपल मिलने नहीं बल्कि किसी की शादी की पार्टी में आयी हो।

जब आरती कॉलेज पहूँची तो शाम के चार बज रहे थे। जब उसने चपड़ासी से प्रिंसिपल के बारे मे पूछा तो चपड़ासी ने आरती को प्रिंसिपल के ऑफिस तक ले जाने के पहले उसे सर से पाँव तक कामुक नज़रों से निहारा। चपड़ासी अंदर जा कर प्रिंसिपल, जसवंत राठौड़, को आरती के आने की खबर दी। जसवंत एक बहुत ही होशियार, ४२ वर्षिय आदमी था। वो ६ फुट ऊँचा, चौड़ी छाती और अच्छे हट्टे-कट्टे शरीर का मालिक था। उसने अपने चपड़ासी, मंगल से आरती को अंदर भेजने को कहा और साथ ही आदेश दिया कि कोई भी डिस्टर्ब ना करे क्योंकि यह बहुत ही जरूरी मीटिंग थी। मंगल ने बाहर आकर एक बार फिर आरती को ऊपर-से नीचे तक निहारा और उसे अंदर जाने को कहा। वो सोच रहा था कि इस सैक्सी औरत को देख कर जसवंत की क्या प्रतिक्रिया होगी।

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आरती ने दरवाजे पे नॉक कर के थोड़ा सा खोल के पूछा, “क्या मैं अंदर आ सकती हूँ? मैं आरती, पूजा की मदर, आपने मुझे बुलाया था।”

जसवंत राठौड़ की तो इतनी सैक्सी औरत को दरवाजे पे खड़ी देख कर बोलती बँद हो गयी। जामुनी रंग की शिफॉन की साड़ी में खड़ी इतनी खूबसूरत और सैक्सी औरत की बड़ी-बड़ी कसी हुए चूचियाँ और मादक होंठ देख कर उसे विशवास ही नहीं हुआ कि वो पूजा की माँ हो सकती है। जसवंत की नज़रें आरती की चूचियों पे टिकी थी और वो आरती की सैक्सी प्रतिमा को अपनी आँखों में उतारने की कोशिश कर रहा था। जब आरती ने फिर से दरवाजे पे नॉक किया तो जसवंत असलियत में वापस होश में आया और बोला, “आइये आइये आरती जी, आप पूजा की मदर हैं? मुझे लगा आप उसकी बहन हो इसलिए ज़रा हैरान था। वैसे आरती जी, मैंने बुलाया था आपको पूजा के बारे में कुछ बात करने। आओ अंदर आओ और प्लीज़ बैठो।”

कसे हुए लो-कट ब्लाउज़ में कैद अपनी बड़ी-बड़ी गोरी चूचियाँ जसवंत को दिखाने के लिए आरती ने बैठते हुए अपना पल्लू थोड़ा सा गिरा दिया। जसवंत को अपनी चूचियों को घूरते हुए आरती ने देखा तो वो मन ही मन खुश हुई और फिर अपना पल्लू फिर से ठीक करते हुए बोली, “शुक्रिया, लेकिन हाँ मैं पूजा की मदर ही हूँ। बोलो क्या बात करनी थी आपको मेरी बेटी के बारे में सर?” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

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