दामाद का दिल आया सास पे

अपने पिछली मेरी स्टोरी में पढ़ा की मेरी भनजे से चुदाई के बाद मेरे पति से मुझे अछा सुख मिलने लगा. लेकिन मुझे अब गैर मर्द से चूड़ने के तलब बढ़ने लगी थी.

कुछ समय बाद मुझे पता चला की मेरी तीसरी बड़ी बेहन के छ्होटे बेटे ने भाग कर शादी कर ली. उसका नाम अरुण था. अरुण और कमाल की अची जमती थी. कमाल को कुछ भी काम होता था, तो वो अरुण को ही बताता था. वो एक-दूसरे से सब कुछ शेर करते थे. लेकिन कमाल ने उसको नही बताया था की मैं उसके साथ चुड़वति थी.

एक दिन अरुण ने भाग के शादी की थी, तो सब मेहमान को बुलाने के लिए घर पर पूजा रखी थी. हम भी वाहा गये. अरुण की बात करू तो वो बहुत ही हॅंडसम और स्मार्ट लड़का है. और उसने जिससे शादी की वो लड़की भी बहुत ही खूबसूरत है. मुझे अरुण को देख कर उसके साथ रोमॅन्स करने का मॅन करने लगा.

अब मैने एक भनजे का लंड चख लिया था, तो दूसरे के साथ ये सब करने में मुझे अब कोई दिक्कत नही थी. अब मैं मेरी लाइफ खुल कर जीना चाहती थी, और शायद अब मेरी नज़र और दूसरे गैर मर्दों पर भी जाने लगी थी. और किसी फंक्षन में मेरा सारी पहनने का तरीका भी कुछ बदल गया था.

उस दिन मैने रेड कलर की सारी पहनी थी. पूजा मेरे माइके साइड थी, तो मैने स्लीव्ले ब्लाउस पहना था. सारी नेवेल के नीचे से पहनी थी. तो सारी का पल्लू हटाने से मेरी चिकनी कमर के दर्शन हो जाते. मैने सारी कस्स कर पहनी थी, तो मेरे सेक्सी बूब्स और गांद दिखा कर सब को सिड्यूस करने लगी.

बहुत से मर्दों की नज़र उस दिन मेरे उपर टिकी हुई थी, और मुझे ये सब में अब मज़ा आने लगा था. उस दिन मेरे पति ने मुझे कहा-

पति: आज रात तुझे घोड़ी बना कर छोड़ूँगा. तुम्हे देख कर रहा नही जेया रहा.

और कमाल भी मुझे देख कर आहें भर रहा था. कमाल को अब उसके गाओं में एक औरत मिल गयी थी. उसके साथ उसकी चुदाई होती रहती थी. मैने उस दिन बहुत कोशिश की अरुण मुझे नोटीस करे. लेकिन मेरी किस्मत में अरुण से पहले किसी और से चूड़ना लिखा था.

मैं अरुण को इंप्रेस करने में लगी थी, और मैने नोटीस किया की अरुण बार-बार मेरी तरफ देख रहा था. अरुण को इंप्रेस करने के चक्कर में अरुण के जीजा जी परेश मुझ पर लट्तू हो गये थे. परेश जी की बात करू तो वो मेरी बड़ी बेहन की बेटी मीयर्रा के पति है. यानी की हमारे दामाद है.

परेश जी दिखने में गोरे है, और उनकी आँखें नीली है. हाइट, बॉडी, और पर्सनॅलिटी भी काफ़ी अची है. मीयर्रा भी दिखने में काफ़ी खूबसूरत है, लेकिन थोड़ी मोटी है. परेश जी की आगे 32 थी और मीयर्रा की 30 के करीब. उनको कोई बच्चा नही था. मेरी और मीयर्रा की काफ़ी जमती थी. अक्सर हम दोनो की फोन पर बातें होती रहती. उस दिन से पहले कभी मेरे और परेश जी के बीच ऐसा कुछ नही हुआ था. लेकिन उस दिन जो हुआ उसके बाद हमारा मौसी सास और दामाद वाला रिश्ता बदल गया.

परेश जी मेरे आयेज-पीछे मौसी-मौसी करते घूम रहे थे. मैने भी नोटीस किया की वो मेरे पर लट्तू हो गये थे. मुझे भी अंदर से फील हुआ की उनको मेरे जिस्म का दर्शन करवा कर पागल बना डू. तो हुआ ऐसा की पूजा ख़तम होने के बाद सारे रिश्तेदार अपने घर चले गये. कुछ हम लोग वाहा रुके थे जिसमे परेश जी, मीयर्रा और मैं ही थे दीदी की हेल्प करने के लिए.

मीयर्रा की तबीयत कुछ ठीक नही लग रही थी, तो उसको आराम करने भेज दिया. अब मैं और परेश जी ही बचे थे सब पूजा का समान सेट्ल करने में. मैं आज रेड सारी में हॉट मिर्ची लग रही थी, और परेश जी उसको टेस्ट करना चाह रहे थे. उनकी नज़र मेरे जिस्म पर घूम रही थी. मैने भी उनको मेरा हुस्न दिखाने को कोई कसर नही रखी.

वो मेरी और देखते तब मैं उनकी और देख कर मुस्कुरा देती और तोड़ा शर्मा जाती. मेरी ऐसी अदा पर वो फिदा होने लगे. शाम का टाइम हो गया तो मैने दीदी को बोला की मैं च्चत पर कपड़े लेने जेया रही थी (ये बोलते टाइम मैने परेश जी की और देखा और मुस्कुराइ). मैने दीदी को ये भी कहा की मुझे आने में थोड़ी देर हो जाएगी.

मैं जब च्चत पर गयी तो कपड़े मैं फोल्ड कर रही थी. मुझे पता था की परेश जी पक्का मेरे पीछे आएँगे. मैने जान-बूझ कर मेरी सारी को नाभि से नीचे कर दिया, और पल्लू एक साइड पर दबा दिया, जिससे उनको मेरी पतली कमर दिखे. मीयर्रा मोटी औरत है, तो वो पतली और फिट औरत देख कर उसके पीछे फिसल तो जाने वाले थे. थोड़ी देर बाद वो च्चत पर आए तो मैने उनको कहा-

संगीता: क्या बात है दामाद जी, आप यहा? सब लोग कहा है?

परेश जी: अर्रे मैं सोच रहा था की आप कब से काम कर रहे है. मैं थोड़ी आपकी हेल्प करने आ गया.

संगीता: आप कब से हमारे बारे में इतना सोचने लगे?

परेश जी: मौसी जी हम तो आपकी हर प्रकार की सेवा करना चाहते है. आप बस हमे मौका दो, हम आपको निराश नही करेंगे. आप बुरा ना माने तो एक बात कहे?

संगीता: हा बोलिए, अब इतना कुछ कह दिया है तो आयेज भी बता ही दीजिए (मैं अपनी सारी का पल्लू एक साइड करके उनको मेरी नाभि और कमर दिखाने लगी).

परेश जी: मौसी आप बहुत खूबसूरत है. और आज इस लाल सारी में आप बहुत मस्त दिख रही हो. क्या हम दोस्त बन सकते है?

संगीता: परेश जी मैं आपकी मौसी सास हू, और आप हमारे दामाद जी . दामाद और सास की दोस्ती नही हो सकती. और आप कों सी दोस्ती की बात कर रहे है, मैं सब समझ रही हू.

परेश जी: अर्रे ऐसा नही है मौसी जी. आप तो बुरा मान गये. मैं तो बस दोस्ती की बात कर रहा हू.

संगीता ( दामाद जी का गाल खींचते हुए): अर्रे सब समझ रही हू मेरे नटखट दामाद जी. 3 बच्चो की मा ऐसे ही नही बन गयी.

ऐसे ही मैं अपना हुस्न दिखाते और शरारत करते हुए च्चत से नीचे उतार गयी. फिर शाम को मैने अरुण की बहू से ढेर सारी बातें की, और उससे अची दोस्ती बनाई. मैने दोनो को शादी की बहुत सारी बधाइयाँ दी. दूसरे दिन मैं बस से अपने घर जाने वाली थी, तो मीयर्रा ने कहा-

मीयर्रा: मैं यहा थोड़े दिन भाभी के साथ रुक जाती हू. परेश आपको स्कूटर से घर छ्चोढ़ देंगे ( मीयर्रा के शहर का रास्ता मेरे गाओं से हो कर ही जाता था).

परेश जी को पता चला की मैं उसके साथ आने वाली थी, तो उनकी खुशी का ठिकाना नही रहा. हम दोनो दोपहर का खाना खा कर दीदी के घर से निकल गये. दीदी के गाओं से तोड़ा बाहर आए तो पुर रास्ते पर कोई दिखाई नही दे रहा था. रास्ता पूरा खाली पड़ा था. अब हमने बातें करना शुरू कर दिया.

परेश जी: आप तो कल से मेरे से नाराज़ हो गये हो. मेरे से बात ही नही कर रहे.

संगीता: अर्रे मैं कहा आप से नाराज़ हू. वो तो आप दोस्ती की बात कर रहे थे. मैं आपकी सास हू. सासू से दोस्ती कों से दामाद करते है? और वैसे भी हम दीदी के घर थे. कोई हमे ऐसे मज़ाक मस्ती करते, और बाते करते सुन लेता तो अछा लगता?

परेश जी: बात तो आपकी सही है, पर अभी तो हम अकेले है. अब तो मेरी दोस्त बन जाइए ना मौसी जी. देखो ना पूरा रास्ता खाली पड़ा है. कों है हमे देखने वाला?

संगीता: आप ना अब बड़े बदमाश हो गये हो. मीयर्रा खुश नही रखती है क्या जो मुझसे दोस्ती करनी है ( अब मैं उनको हिंट देने लगी की मुझे सब समझ आ रहा था)?

परेश जी: मीयर्रा आप जितनी खूबसूरत नही है ना. आप तो कल अप्सरा लग रही थी. आपसे दोस्ती करने का मॅन किया, और आपको पता है ना मैने आपसे कुछ च्छुपाया नही है. तो आपको दिल की बात बता दिया.

संगीता: पर ये ग़लत ह्म ना. हमारा रिश्ता कैसा है आपको पता तो है. किसी को पता चला तो क्या सोचेगा ( मैने अल्टिमेट बता दिया की मैं समाज के दर्र से ये रिश्ता नही रख सकती)?

परेश जी: आप बहुत ज़्यादा सोच रही हो? मैं कहा बोल रहा हू हम सब के सामने दोस्त बन कर रहे. अभी कोई नही है तो दोस्ती रखिए ना. आपके घर जाते ही मैं आपका दामाद और आप मेरी मौसी सासू ही तो है.

संगीता ( मैने उनके कंधे पर एक हाथ रखा और दूसरा आयेज पेट पर): ठीक है परेश जी, पुर रास्ते मैं आपकी दोस्त हू ( मैं उनके पीछे ऐसे बैठ गयी की जैसे उनकी पत्नी हू).

परेश जी: मौसी जी मैं आपको बहुत पसंद करता हू. आपको देखा तब से आपका दीवाना बन गया हू. आप सच में बहुत खूबसूरत हो.

संगीता: आप कैसी बातें कर रहे हो? मैं कहा इतनी खूबसूरत हू. और अब तो हम दोस्त है, तो मुझे अभी मौसी नही मेरे नाम से बुलाए (उनके मूह से मेरी तारीफ सुन कर मैं खुश हो रही थी)

परेश जी: संगीता जी मैं आपको बहुत याद करूँगा. आपके बिना अब कुछ अछा नही लगेगा.

संगीता: अर्रे अभी तो मैं आपके साथ हू ना, मेरा घर आने में अभी टाइम है. आप चाहो तो अभी रास्ता लंबा बना सकते हो. वैसे भी पूरा रास्ता खाली है ( मैने पीछे से उन्हे कस्स कर गले लगा दिया).

परेश जी स्कूटर जंगल के ककचे रास्ते पर ले गये. वाहा जेया कर क्या हुआ वो मैं आपको अगले पार्ट में बतौँगी. आपको भी किसी रिश्तेदार से चूड़ना हो तो मुझे मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.

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