डाल दो रस मेरी प्यासी चूत में – 2

पिच्छले भाग में आप ने पढ़ा कैसे नाज़ और नामिता की चुदाई के साथ मेरी चुदाई की शुरू आत हुई. उस दिन मैने सच में सेक्स का मज़ा लिया और जाना कि इस्को स्वर्ग का सुख किओं कहते हैं. मेरे सामने चुदाई का रास्ता खुल चुका था और एक नहीं दो दो लड़कियो से मैं चुदाई का खेल खेलने लगा.

अगले दिन से मुझे नाज़ और नामिता को दीदी पुकारने की आदत डालनी थी. वैसे भी प्रभा देवी मुझे बहुत प्यार करती थी. लेकिन मैं ये ज़ाहिर नहीं कर सकता था कि जिस घर ने मुझे रहने का असरा दिया है मैं उसी घर की बेटी से चुदाई का गंदा खेल खेल रहा हूँ. नामिता मेरी मुझ पर जान च्चिडकती थी और नाज़ मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी. रोज़ मैं नाज़ और नामिता की चुदाई करता और क़िस्सी को पता ना चलता. मेरी तो बस चाँदी ही थी.

फिर एक दिन मेरा और नाज़ के कमरे वाला हिस्सा प्रभा देवी की पार्टी के वर्कर्स के लिए खाली करवा लिया. पार्टी को एलेक्षन की तैयारी के लिए कुच्छ दिन वहीं रहना था. प्रभा देवी को भी पार्टी के सीनियर लीडर्स से मीटिंग्स करनी होती थी और वो अब सारा दिन सारी रात लीडर्स के साथ ही रहती. पार्टी के नेता मोहन लाल भी वहीं थे जिनको प्रभा देवी इज़्ज़त से पिता जी कहती थी. मुझे अब सुनील के कमरे में शिफ्ट कर दिया गया और नाज़ अब नामिता के कमरे में रहने लगी. चुदाई में रुकावट होने के चान्स थे. खैर रात को मैं अपनी किताब पढ़ कर बाहर सैर करने को निकला तो एक कमरे की बत्ती जल रही थी. रात के 2 बजे थे. मैं घूमता हुआ उधर ही निकला गया और उत्सुकतावश मैं कमरे के पास चला गया. मुझे कुच्छ आवाज़ें सुनाई पड़ी तो मैने खिड़की से झाँक लिया. अंदर का नज़ारा चौंका देने वाला था. मेरे पैरों से ज़मीन खिसक गयी.

मेरी मा समान औरत प्रभा देवी मदरजात नंगी थी. प्रभा देवी का रूप देवी का नहीं बल्कि रंडी का दिखाई दे रहा था. प्रभा देवी, पलंग के सामने झुकी हुई थी और मोहल लाल नंगा हो कर टाँगों को पसार कर लेटा हुआ था. चाहे मोहल लाल की उमर 60 साल से कम ना होगी, लेकिन उसस्का लंड सखत हो कर तना हुआ था और प्रभा उसस्के लंड को चूस रही थी. मेरी मूहबोली मा की गांद मेरी तरफ उठी हुई थी जिससे मुझे उसस्की गांद का छेद कभी खुलता और कभी बंद होता दिखाई देता. प्रभा की चुचि नीचे झूल रही थी.

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मोहन लाल कभी प्रभा की चुचि को दबा देता और कभी उसस्के चूतड़ को स्पर्श कर लेता,” प्रभा बेटी, तुम बहुत कामुक औरत हो. मेरी पत्नी ने कभी मेरा लंड नहीं चूसा. साली बोलती है की लंड गंदी चीज़ है. बहनचोड़ अगर गंदी है तो चूत में किओं लेती है साली. प्रभा धीरे धीरे चूस वरना मैं चोदने से पहले ही झाड़ जायूंगा, मेरी रानी बेटी, और मैं अपनी प्यारी बेटी को चोदे बिना नहीं सो सकता. कितने दीनो के बाद ये मौका मिला है. साले अख़बार वाले हम नेता लोगों को अकेले कहाँ छ्चोड़ते हैं. कई बार सोचा है कि अपनी बीवी को तलाक़ दे कर तुझ से शादी कर लूँ, पर नेता लोगों की इज़्ज़त भी तो बहुत नाज़ुक होती है. एलेक्षन भी सिर पर हैं. पार्टी वाले तो पहले ही अफवाहें फैला रहे है कि मैं तुझे एमएलए का टिकेट इस लिए देता हूँ किओं के तुम मेरी रखैल हो. किस किस बेह्न्चोद का मूह बंद करूँ मैं? कोई सेफ रास्ता नही है हम दोनो के लिए?”

प्रभा देवी सीधी खड़ी हो गयी और अपनी चुचि को मोहन लाल के मूह में डालते हुए बोली,” पिताजी, सब के सामने आपको पिता कहती हूँ फिर भी लोग साले हमारी असलियत पहचान लेते हैं. जब से मेरे पति की मौत हुई है आप के लंड का ही तो असरा है मुझे. आपकी पत्नी भी मुझे सौतेन समझती है. वो भी अपनी जगह ठीक है किओं के मैने क़ब्ज़ा तो उसस्के अधिकार वाले लंड पर ही किया हुआ है. लेकिन, पिताजी, मैं आपके बिना नहीं रह सकती. आप ने जो मुझे एमएलए का टिकेट दिया है उस एहसान का बदला भी तो चुकाना है मुझे. आप मुझ से जो चाहें कर लो लेकिन मुझे अपने आप से अलग कभी मत करें. एक ख़याल आया है मेरे मन में. किओं ना नामिता की शादी आपके बेटे रमेश से कर दी जाए. हमारी राजनीतिक ताक़त भी बढ़ जाए गी और समाज में एक रिश्ता भी बन जाए गा. कल हमारे बच्चे ही तो नेता बनेंगे. मा के लिए समधी और बेटी के लिए पति उपलब्ध हो जाएगा और कोई कुच्छ बोलेगा भी नहीं.”

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मोहन लाल प्रभा की चुचि को चूमते रहे जैसे बच्चा दूध पी रहा हो. प्रभा की चुचि उनके थूक से गीली हो कर चमक उठी. प्रभा प्यार से उनके बालों में उंगलियाँ चलती रही.’हां बेटी, रमेश की शादी तेरी बेटी से करना एक मास्टर स्ट्रोक होगा. इस से हमारी ताक़त भी बढ़ेगी और हमारा प्यार भी च्छूपा रहे गा. मैं अपनी पत्नी से बात करता हूँ. लेकिन अब जल्दी से पलंग के उप्पेर चढ़ जयो. आज मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे लंड की सवारी करो और मैं तेरा दूध पीता रहूं और चोद्ता रहूं. मैं तेरे चूतादो को थाम कर नीचे से चोदना चाहता हूँ.चल प्रभा रानी जल्दी कर, मेरा लंड बेताब हो रहा है.” प्रभा गांद मटकाती हुई मोहल लाल के उप्पेर चढ़ गयी. इस उमर में भी प्रभा के जिस्म में क्या बात थी. उससने अपनी जांघों को फैला लिया और मोहल लाल की कमर के दोनो तरह अपनी टाँगों को फैलाते हुए अपनी चूत को उसस्के लंड पर गिराना शुरू कर दिया. मोहल लाल के हाथों ने मेरी मूहबोली मा की गांद को जाकड़ कर अपने लंड पर गिरा लिया.

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