मेरे भाई ने मेरी गर्लफ्रेंड की चूत

bhai ne gf ki choot chudaiहेलो दोस्तों, मैं समर प्रताप Kamukta सिंह आपको अपनी सेक्सी स्टोरी इंडिया की नं १ हिंदी सेक्स स्टोरी साईट नॉन वेज स्टोरी  पर सुनाने जा रहा हूँ। ३ साल से पंखुड़ी मेरी गर्लफ्रेंड है। मेरे पड़ोस में रहती है। उसको मैं कई बार चोद चूका हूँ। मेरा सगा भाई अविनाश मुझसे बहुत जलता था जब मैं पंखुड़ी को घर लाकर चोदता था। अविनाश काला कलूटा था, जादा हैंडसम नही थी इसलिए उससे कोई लड़की जल्दी नही पटती थी। इसलिए जब भी पंखुड़ी मुझसे मिलने आती थी, अविनाश मुझसे बहुत जलता था।

एक बार मुझे एक कॉम्पटीशन का एक्जाम देने देहरादून १० दिनों के लिए जाना पड़ा। मेरी गैर मौजूदगी में मेरी माल पंखुड़ी मेरे घर आई और मेरे बारे में अविनाश से पूछने लगी।

“समर घर पर है क्या???” पंखुड़ी ने पूछा

“भाई !!..यही सड़क तक गये है, आओ वेट कर लो!!” अनिवाश मेरी माल पंखुड़ी से बोला

अविनाश बार बार तिरझी निगाहों से मेरी माल को ताड़ रहा था। पंखुड़ी ने एक नीली रंग की कॉटन शोर्ट स्कर्ट पहन रखी थी। उसकी मस्त मस्त सुडौल जांघे अविनाश को दिख रही थी। उपर पंखुड़ी ने एक लो कट स्लीवलेस हल्के हरे रंग का टॉप पहन रखा था। जिसमे उसकी दुधिया बाहें दिख रही थी साफ साफ़। पंखुड़ी के ३४” के मम्मे काफी आकर्षक थे और किसी भी जावन लड़के का ध्यान आकर्षित कर सकते थे। प्यारी सी परी जैसी मेरी सामान पंखुड़ी को देखकर ना जाने क्यों मेरे सगे भाई के दिल में उसे चोदने की बड़ी ज्वलंत इक्षा पैदा हो गयी। अनिवाश ने मन ही मन सोच लिया की जब उसका भाई समर हजारों बार पंखुड़ी को पेल चूका है और उसके रूप के समुन्द्र से हजारों मोती चुरा चूका है तो क्यूँ ना आज अविनाश पंखुड़ी को चोद ले और उसके समुद्र से एक बाल्टी पानी निकाल ले। क्या फर्क पड़ता है। अविनाश ने सोचा। उसने लॉबी में बैठी पंखुड़ी को सुकून देने के लिए ac ओन कर दिया। फिर अंदर फ्रिज के पास गया। उसके २ ग्लास में कोको कोला निकाली और पंखुड़ी के ग्लास में कुछ नशीली गोलियां मिला दी और लाकर मेरी माल को दे दी।

यह कहानी भी पड़े  पायल की चुदाई

भीसड गर्मी के कारण पंखुड़ी २ मिनट में अपनी सारा कोल्ड्रिंक गटागट पी गयी। मिनट भी न हुए की पंखुड़ी को नींद आ गयी। मेरा चुदासा भाई अविनाश ये देखकर बहुत खुश हो गया। जब पंखुड़ी पूरी तरफ से बेहोश हो गयी तो अविनाश उसके पास सोफे पर बैठ गया। उसने उसका हाथ पकड़कर उठाया और देखा की कहीं ऐसा तो नही तो जग रही हो। पर मेरी सामान पंखुड़ी ने कोई प्रतिक्रिया नही दी और सोती रही। उसके बाद अविनाश फुल जैसी हसीन पंखुड़ी का हाथ चूमने लगा। फिर धीरे धीरे उसके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। अविनाश ने मेरी सामान पंखुड़ी को अपनी बाँहों में भर लिया और चूमने चाटने लगा। बहनचोद!!!.. भाई के नाम पर मेरा भाई कसाई निकला। क्या कोई भाई अपने भाई की माल को धोखे से ठोकता है क्या?? फिर अविनाश पंखुड़ी के रसीले लीची जैसे मीठे होठ की मिठास लेने लगा।

पंखुड़ी बेसुध थी। उसे कुछ पता नही था की उसके साथ क्या हो रहा है। अविनाश ने जी भरकर उसके रसीले होठ चूसें और मजा मारा। उसके बाद वो मेरी सामान के स्लीवलेस गोरे हाथों को शिद्दत से चूमने लगा।

“ओह्ह्ह…पंखुड़ी..तुम बहुत गजब का सामान हो?? तुम्हारी चूत लेने में मजा आएगा!!” अविनाश किसी दरिन्दे की तरह बोला

वो काफी देर तक पंखुड़ी के गोरे हाथ पंजे से कंधे तक चूमता रहा। क्यूंकि वो स्लीवलेस थी। उसके बाद उसने मेरी सामान को सोफे पर लिटा दिया और अपने सारे कपड़े निकाल दिए। फिर अविनाश ने अपना कच्छा भी निकाल दिया। उसने बेसुध पंखुड़ी के दोनों हाथ उपर कर दिए और उसका हरा टॉप निकाल दिया। फिर उसकी ब्रा भी निकाल दी। अब अविनाश के मुँह में वासना का पानी भर आया। वो मेरी फूल जैसी कच्ची कली पर किसी हब्सी की तरह टूट पड़ा। मेरा सगा भाई अविनाश ही मेरी माल की इज्जत लूट रहा था और उसकी रसीली बुर में लंड देने वाला था। उसने अपने राक्षस जैसे दोनों हाथ पंखुड़ी के ३४” के बूब्स पर रख दिए और कमीना बेदर्दी से उसे मीन्जने लगा।

यह कहानी भी पड़े  चाची ने अपने पति से मेरा कौमौर्य तुड़वाया

पंखुड़ी बिचारी कुछ नही समझ पा रही थी की उसके साथ क्या हो रहा है। वो तो गोली के नशे में थी। मेरा भाई उसके मस्त मस्त गुलाबी मम्मे पीने लगा। कुछ देर बाद उसने पंखुड़ी की शोर्ट स्कर्ट भी निकाल दी और उसकी गुलाबी पैंटी भी निकाल दी। अब मेरी जान पंखुड़ी मेरे दुष्ट भाई के शिकंजे में थी। अविनाश बड़ी देर तक उसके मस्त मस्त दूध का चूसन और पान करता रहा। फिर वो पखुडी जैसी फूल सी माल की चूत पीने लगा। कुछ देर बाद अविनाश ने अपने मोटे लंड में ढेर सारा तेल लगा लिया और अच्छी तरफ से लंड में मल लिया। फिर वो मेरी प्रेमिका को चोदने लगा। पंखुड़ी बेहोश थी। उसको होश नही था। पर उससे ये तो महसूस हो रहा था की कोई उसके साथ कुछ गंदा काम कर रहा था।

और मजेदार सेक्सी कहानियाँ:

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!