Bhabhi Sang Meri Antarvasna- Part 3

भाभी ने नींद में मुझे अपने ऊपर ले लिया था और इतने में ही अलार्म बज उठा था।
मैं जल्दी से भाभी के ऊपर से उतर गया और सोने का नाटक करने लगा।
भाभी अलार्म को बन्द करके जल्दी से उठ कर खड़ी हो गईं।

मैंने थोड़ी सी आँखें खोलकर देखा तो भाभी कपड़े बदल रही थीं।
कमरे की लाईट बन्द थी.. मगर कम पावर का बल्ब जल रहा था.. जिसकी रोशनी में मैं बिल्कुल साफ से तो नहीं.. मगर फिर भी भाभी को कपड़े बदलते देख सकता था।

भाभी कपड़े बदल कर कमरे से बाहर चली गईं.. और मैं ऐसे ही लेटा रहा। मुझे डर लग रहा था कि कहीं भाभी मेरी शिकायत मम्मी पापा से ना कर दें। यही सोचते-सोचते पता नहीं कब मुझे नींद आ गई।

भाभी की प्यार भरी डांट
दिन के करीब बारह बजे भाभी ने मुझे जगाया और कहा- अब क्या सारा दिन ही सोते रहोगे? रात को तो ना तुम खुद सोते हो और ना ही मुझे सोने देते हो।

तभी मुझे रात की घटना याद आने लगी.. मैंने भाभी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थीं।
मैंने डर और शर्म के कारण गर्दन झुका ली।

भाभी ने मुझे डांटते हुए कहा- रात को अपने कपड़ों के साथ-साथ मेरे कपड़े भी गन्दे कर दिए।
मैंने अपनी हाफ पैंट की तरफ देखा.. तो उस पर मेरे वीर्य का दाग लगा हुआ था.. जो कि सूख कर सख्त हो गया था।

भाभी ने फिर से हँसते हुए कहा- अभी देख क्या रहे हो.. चलो अभी नहा लो। मैं खाना बना देती हूँ।
मैं बुरी तरह से डर रहा था इसलिए बिना कुछ बोले चुपचाप नहाने चला गया।

यह कहानी भी पड़े  रूम पर लाकर क्लासमेट की चूत की फाड़ी

फिर खाना खाकर ड्राईंग रूम में जाकर लेट गया।
रात भर नहीं सोने के कारण मुझे फिर से नींद आ गई..

अधनंगी भाभी मेरे बगल में
मगर कुछ देर बाद ही मेरी नींद खुल गई और जब मैंने आँखें खोलीं तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं क्योंकि भाभी मात्र ब्लाउज और पेटीकोट में ही मेरे बगल में सो रही थीं। भाभी के ब्लाउज के भी बटन खुले हुए थे और नीचे उन्होंने ब्रा भी नहीं पहन रखी थी जिससे उनके आधे से भी ज्यादा दूधिया सफेद उरोज नजर आ रहे थे।
जिन्हें देखते ही मेरा लिंग उत्तेजित हो गया।

मैं समझ गया कि शायद भाभी भी मुझसे ये सब करना चाहती.. तभी तो वो मेरे पास इन कपड़ों में आकर सोई हैं।
यह बात मेरे दिमाग में आते ही मेरी ना जाने मुझमें कहाँ से इतनी हिम्मत आ गई कि मैंने भाभी के ब्लाउज के बचे हुए बटन भी खोल दिए और बटन के खुलते ही भाभी के उरोज स्वतः ही बाहर आ गए.. मानो दो सफेद कबूतर पिंजरे से आजाद हुए हों।

मैं पहली बार किसी के नग्न उरोज देख रहा था.. इसलिए मैं उन्हें बड़े ध्यान से देखने लगा।
भाभी के दूधिया उरोज और उन पर छोटे से गुलाबी निप्पल ऐसे लग रहे थे.. जैसे कि सफेद आईसक्रीम पर स्ट्राबेरी रखी हो।

आईसक्रीम को देखते ही जैसे किसी छोटे बच्चे के मुँह में पानी आ जाता है.. वैसे ही भाभी के आईसक्रीम रूपी उरोजों को देख कर मेरे मुँह में भी पानी भर आया।

मुझे सेक्स के बारे में इतना कुछ पता तो नहीं था.. मगर फिर भी भाभी के उरोज मुझे इतने अच्छे लगे कि मैं एक निप्पल को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और साथ ही दूसरे उरोज को एक हाथ से धीरे-धीरे सहलाने लगा।
उनके नग्न उरोज का स्पर्श रेशम की तरह मुलायम और आनन्द भरा था।

यह कहानी भी पड़े  छोटे भाई की बीवी यानि भाभी की चुदाई-1

Pages: 1 2 3 4

error: Content is protected !!