गर्लफ्रेंड की चूत को बरसात में चोदा

हैल्लो दोस्तों, में जो आज आप सभी के सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेने वालो के लिए यह कहानी लिख रहा हूँ। यह घटना आज से 18 साल पुरानी बात है। उस समय में एक प्राइवेट ट्रैनिंग करता था और हमारे उस स्कूल जिसमे में पढ़ता था उसमे हम सभी लड़के लड़कियाँ एक ही साथ वो ट्रैनिंग करते थे और लड़को के लिए वहीं पास में एक हॉस्टल था जिसमें वो लोग रहते थे, लेकिन में बाहर ही एक कमरा लेकर उसमे रहता और अपनी पढ़ाई किया करता था और मेरे वो दिन बहुत अच्छी तरह से निकल रहे थे और में बहुत खुश था। फिर उसी शाम को अचानक से बहुत तेज बारिश होने लगी थी, जिसकी वजह से मेरे पड़ोसी सभी आसपास के लोग अपने अपने घरों में बंद थे और मुझे बहुत देर पहले से पता था कि मेरी गर्लफ्रेंड जिसका नाम सुषमामा वो कहीं गई हुई है, क्योंकि वो मेरे ही सामने से निकली थी और उसको मैंने जाते हुए देखा भी था और मेरा वो कमरा उसके निकलने वाले रास्ते में ही पड़ता है, इसलिए में अपने कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला रखकर में बस उसी की राह देख रहा था। दोस्तों सुषमा मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त थी, वो दिखने में बहुत सुंदर, गोरी होने के साथ साथ उसका वो गरम जिस्म मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित किया करता था और हमारे बीच बहुत प्यार था, जिसकी वजह से हम बिल्कुल पागल हो चुके थे। हमें एक दूसरे से बिना मिले, देखे, बात किए बिल्कुल भी चेन नहीं मिलता और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत हंसी, मजाक किया करते थे जिसकी वजह से हमारे बीच की दूरियाँ एकदम खत्म हो चुकी थी।

दोस्तों हम दोनों ने सेक्स को छोड़कर बाकी बहुत सारे काम पहले से ही करके उनके मज़े ले लिए थे और अब हम दोनों बहुत समय से एक ऐसे ही किसी अच्छे मौके के इंतज़ार में थे, जिसका फायदा उठाकर हम दोनों अपने मन की इस इच्छा को भी एक बार पूरा कर ले। फिर आज मेरा उसकी चुदाई करने का पूरा पूरा विचार था। में इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था और फिर में बैठा उसका आने का इंतजार करते हुए उसकी चढ़ती हुई जवानी के बारे में सोच सोचकर पागल हुआ जा रहा था। मेरे बदन में अजीब सा कुछ होने लगा था और मेरा लंड भी अब तनकर खड़ा होने लगा था। में बस उसी के विचारों में बिल्कुल खोया हुआ था। तभी अचानक से वो मुझे मेरे सामने से आती हुई नजर आ गई, मैंने अपने दरवाजे को थोड़ा सा ज्यादा खोला दिया और जब वो मेरे एकदम पास आ गई। मैंने उससे कहा कि तुम अंदर ही आ जाओ, इस इतनी तेज बारिश में कहाँ जाओगी? जब पानी रुक जाए तब तुम वापस चली जाना, हम बैठकर कुछ देर बातें करते है, आओ ना अंदर तुम बाहर क्यों खड़ी हो? मैंने देखा कि अब तक वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसको भी मेरे साथ रहना बातें करना अच्छा लगता था, वो इसलिए तुरंत ही बिना कुछ कहे कमरे के अंदर आ गई।

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दोस्तों उसके अंदर आते ही में बहुत खुश हो चुका था, क्योंकि आज मेरे मन की मुराद पूरी होने वाली थी और अब में उसका वो काम भी पूरा करने की बात अपने मन में ठान चुका था, इसलिए मुझे आज उसकी चुदाई का काम खत्म करके अपने मन की इस बहुत पुरानी इच्छा को पूरा करना चाहता था। फिर सुषमा अंदर आकर अपने बदन से पानी को साफ करने लगी, उफ्फफफ्फ़ पानी से उसका वो पूरा गीला बदन जिसके ऊपर उसके कपड़े एकदम चिपके हुए थे, जिसकी वजह से मेरे सामने उसका एक-एक अंग साफ साफ झलक रहा था उसको इस हालत में देखकर मुझे ऐसा लगने लगा था जैसे वो मेरे सामने नंगी खड़ी हो क्योंकि गीले कपड़ो से मुझे उसका गोरा पेट, दोनों गोलमटोल बूब्स के ऊपर बंधी ब्रा, बड़े आकार के गले वाले सूट से उसके वो गोरे गोरे बूब्स उभरे हुए मुझे बहुत ही ललचा रहे थे और उसकी वो सलवार भी जांघो के अंदर तक जकड़ फंसी हुई थी। दोस्तों वाह उसने क्या कयामत की जवानी पाई थी उसके वो बड़े आकार के एकदम टाइट बूब्स, पतली कमर और वाह उसकी वो बड़ी गोल गांड हाए जिसको देखकर ही मुझे मज़ा आ गया और में बिल्कुल चकित होकर उसको घूर घूरकर देखने लगा। दोस्तों वैसे में तो पहले से ही उसके आने के इंतजार में तैयार बैठा था और उसकी सुंदरता, उस गीले, गोरे बदन को देखकर तो मेरे सब्र का बाँध टूट सा गया। अब मैंने हिम्मत करके बिना देर किए उसको पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपने खड़े लंड से में उसकी गांड पर ज़ोर लगाने लगा, पहले में उसकी कमर और अब उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने सहलाने लगा था और मेरा वो लंड एकदम तनकर उसके दोनों कूल्हों के बीच में सेट होकर ठीक जगह पर अंदर घुस गया और वो जोश में फनफनाने लगा।

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