औरत ने वर्जिन गांद की सील तुडवाई

ही मेरा नाम पूजा है. मेरी आगे 28 एअर है. मेरी शादी को 7 साल हो गये. मेरा एक 4 साल का बेटा है. अभी मेरा फिगर 36-30-36 है. मेरा स्किन टोने फेर है. बाल लंबे और काले है. आपको मैं बता डू की ये मेरी रियल स्टोरी है. मैने पिछले पार्ट में मेरी चुदाई डीटेल में नही बताई थी, इसके लिए मुझे माफ़ करना.

मैं इस पार्ट में मेरी चुदाई मेरी ननद के पति यानी के मेरे नंदोई से कैसे हुई, वो आपको आचे से बतौँगी. आपको पढ़ कर बहुत मज़ा आएगा. जहा से मैने स्टोरी ख़तम की थी, वाहा से मैं कंटिन्यू करूँगी.

कुमार: आपकी छूट भी बहुत मस्त है. आप की चुदाई करने में बहुत मज़ा आ रहा है.

अब कुमार ने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे दोनो हाथ स्लॅब पर टीका दिए, और पीछे से छूट में लंड डाल दिया. मेरी तो जान निकल गयी थी. कुमार की चुदाई से मैं आसमान में उडद रही थी. मैं सोच रही थी, की ये लंड हमेशा मेरी चुदाई करता रहे.

कुमार का हर एक धक्का मेरी मायूस ज़िंदगी में खुशिया भर रहा था. उसके झटके अब स्लो हो रहे थे.

कुमार: भाभी मैं झड़ने वाला हू.

मे: कुमार आप मेरी छूट में झाड़ जाओ. मैं आपका प्यार महसूस करना चाहती हू.

अब कुमार ने छोड़ने की स्पीड बढ़ा दी, और 5 मिनिट लगातार रेल चलने के बाद उनका प्यार मेरी छूट में बहने लगा. कुमार मेरे उपर गिर गये, और मुझे पीछे से हग कर लिया. हम दोनो ऐसे ही 2 मिनिट निढाल हो कर पड़े रहे. कुमार का प्यार मेरी छूट से बह कर मेरे पैरों पर उतार गया.

हम दोनो पसीने से भीग गये थे. मेरे चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे. और कुमार भी मेरी चुदाई से बहुत खुश थे. अब मैं अपनी सारी ठीक कर लेती हू, और पनटी पहन लेती हू. कुमार भी अपने कपड़े पहन लेते है.

मे: दीदी बहुत लकी है, जो आप उनकी ऐसी चुदाई करते हो. आपका प्यार पा कर दीदी का चेहरा खिल गया है. कुमार आप बहुत पक्के खिलाड़ी हो. आपने तो मेरी जान ही निकाल दी.

कुमार: मुझे तो अब भी यकीन नही हो रहा की हमारे बीच ये हो गया. मैने कभी सोचा नही था, की हमारे बीच ऐसा कुछ होगा.

मे: कुमार मैं ऐसी नही हू. आप प्लीज़ मुझे ग़लत मत समझना. विकास मेरा ख़याल नही करते और मैं आपको ( मैं चुप हो गयी).

कुमार: भाभी मैं आपको ग़लत नही समझ रहा. आपके लिए मुझे बहुत रेस्पेक्ट है. मैं समझ सकता हू की आप जैसी खूबसूरत लड़की को विकाश जैसे लड़के के साथ शादी करनी पड़ी है, तो आप खुश नही रह सकते.

अब कुमार ने मुझे हग कर लिया, और मेरे माथे पर किस किया.

मे: कुमार आप ही हो, जो मुझे आज समझ सके हो. मैने तो आपको पहली बार देखा तब से आपको लीके कर रही हू. मुझे पता है ये ग़लत है, पर मैने जैसा सोचा था वैसे हो आप. मुझे आपके साथ बहुत अछा लगता है ( मेरी आँखों में आँसू आ गये). आप चले जाते हो तो मुझे कितने दीनो तक कुछ अछा नही लगता.

कुमार मेरे आँसू पोंछते है, और मेरे सर को अपने दोनो हाथो से पकड़ कर मुझे किस करना स्टार्ट कर देते है. मैं लगातार उनके लिप्स को चूस रही थी. थोड़ी देर बाद मैं कुमार को अपने से अलग करती हू, और छाई बनाने लगती हू.

कुमार स्लॅब पर बैठ जाते है, और मैं उनको आयेज से चिपक कर खड़ी हो जाती हू. वो मुझे पीछे से हग कर देते है और हम दोनो साथ में छाई पीते है.

कुमार: मेरा मॅन नही भर रहा. मुझे आपको और प्यार करना है.

मे: अछा जी. ऐसा है तो चलो बेडरूम में.

मैं कुमार का हाथ पकड़ कर उनको बेडरूम में ले गयी, और हमने रूम लॉक कर दिया. जैसे ही मैने कुण्डी लगाई, कुमार ने मुझे पीछे से खीच लिया, और सारी के उपर से मेरे बूब्स पकड़ लिए.

मे: अर्रे आराम से. अभी भी 2-3 घंटे है हमारे पास. मैं आपके साथ हू, कही नही जाने वाली.

कुमार: भाभी किचन में तो दर्र के प्यार किया है. यहा तो खुल के आपको प्यार करूँगा.

अब कुमार ने मुझे सीधा कर दिया, और लीप किस करना स्टार्ट कर दिया. हम एक-दूसरे के लिप्स और लार छत रहे थे. बहुत वाइल्ड हो गये थे दोनो. कुमार के दोनो हाथ मेरी गांद को दबा रहे थे. जब हम अलग हुए तो कुमार ने मेरी सारी, ब्लाउस और पेटिकोट निकाल दिया.

मैं अब उनके सामने सिर्फ़ ब्रा और पनटी में खड़ी थी. मैने बहुत ही सेक्सी ब्रा पनटी का सेट पहना था. मेरा दूध जैसा गोरा बदन ब्लू कलर की ब्रा पनटी में चमक रहा था. कुमार थोड़ी देर मेरा दीदार करते रहे. मैं बहुत शर्मा रही थी.

कुमार: क्या बात है भाभी. मुझे तो पता ही नही था, की सारी के पीछे एक और रूप च्छूपा है. आपका फिगर अफ! मैं ये लुक कभी नही भूल पौँगा.

अब कुमार ने मुझे अपने पास खींच लिया. मैने तो मेरा बदन कुमार के हवाले कर दिया. मैं उनको आचे से साथ दे रही थी. कुमार ने मेरे हर एक हिस्से को चूमा. उन्होने मुझे अब पूरा नंगा कर दिया, और खुद भी पुर नंगे हो गये.

कुमार की बॉडी देख कर मेरी आ निकल गयी. उसने मेरे बूब्स हाथ में पकड़ लिए, और आम की तरह चूसने लगे. उनके हाथ बहुत स्ट्रॉंग थे. मुझे आज लगा की असली मर्द ऐसा होता है. मैं कुमार की चेस्ट पर हाथ घुमा रही थी, और उनकी चेस्ट को चूम रही थी.

मैने एक हाथ से उनका लंड पकड़ लिया. और फिर गुटनो पर बैठ गयी, और लंड मूह में लपक लिया. अब मुझे किसी भी बात का दर्र नही था. मैं एक प्यासी औरत थी, उर मेरी प्यास बुझाने वाला मुझे आज मिल गया था. कुमार का लंड मैं लॉलिपोप की तरह चूष रही थी. कुमार मेरा सर पकड़ कर मेरा मूह छोड़ रहे थे, और सिसकारियाँ ले रहे थे.

अब थोड़ी देर बाद मैने कुमार का लंड बाहर निकाला, जो मेरी लार से पूरा चमक रहा था. लंड की नास्से फूल गयी थी. लंड काहु या लोहे की रोड. अब मैं बेड पर लेट गयी, और मैने अपनी टांगे फैला दी. कुमार समझ गये और उन्होने मेरे पैर अपने कंधे पर लिए, और मेरी छूट पर लंड रख दिया.

फिर एक ज़ोर का धक्का मारा, और मेरी छूट में पूरा लंड उतार दिया. मेरी फिरसे चीख निकल गयी. मैने अपने होंठ दांतो से दबाए, और कुमार ने मेरी चुदाई स्टार्ट कर दी. वो रफ़्तार से मेरी चुदाई करते रहे. मैं तो आ आ उ ऐसे मोन करती रही. कुमार तोड़ा तक गये तो वो बेड पर लेट गये, और मुझे उनके उपर बैठने को बोला. मैं उनके लंड पर उछालने लगी.

मेरे बूब्स बहुत ही हिल रहे थे. कुमार ने मेरे बूब्स पकड़ लिए, और मुझे नीचे झुका कर निपल चूसने लगे. वो नीचे से गांद उठा कर मेरी चुदाई करते रहे. मेरी छूट में सूजन आ गयी तो मुझे दर्द होने लगा. ये बात मैने कुमार को बताई तो उन्होने मुझे सीधा लिटा दिया, और मेरी छूट पर जीभ रख कर छूट चाटने लगे.

उनकी इस हरकत से मैं और उत्तेजित हो गयी. मुझे कुमार पे प्यार आ रहा था. वो मेरी आचे से सेवा कर रहे थे. मैं उनके सर को अपनी छूट में दबाने लगी. मुझे जब दर्द कम हुआ, तो मैने कुमार से कहा मैं चुदाई के लिए रेडी हू. कुमार ने उनका लंड मेरे मूह में रख दिया. मैने फिरसे लंड चूसना स्टार्ट किया.

जब उनका लंड एक-दूं टाइट हो गया, तब उन्होने मुझे गोदी में उठा दिया. मेरे दोनो हाथ उनके गले में थे, और पैर उनकी कमर पर. अब उन्होने मेरी गांद उपर की, और छूट में लंड गुसा दिया. मैं चिल्लती रही, और वो खड़े-खड़े मेरी चुदाई करना स्टार्ट कर दिया. मैं तो उनका जोश देख कर पागल हो गयी.

मेरे जैसी भारी हुई औरत को वो एक गुड़िया की तरह उछाल-उछाल कर चुदाई कर रहे थे. उनका लंड मेरी छूट का भोंसड़ा बना दिया था. 5 मिनिट की ऐसी चुदाई के बाद वो मुझे नीचे उतार दिए, और फिरसे मेरे मूह में लंड डाल दिया. इस बार वो पूरा गले तक लंड डाल दिया. मैं साँस नही ले पा रही थी.

वो लगातार मेरा मूह छोड़ते रहे, और सारा माल मेरे गले में उतार दिया. मैं पूरा माल गतक गयी, और दो-चार बूँद मेरे बूब्स पर गिरी, वो मैं उंगली से उठा कर चाट गयी. आज पहली बार मैने माल छाता था. वो भी एक असली मर्द का. कुमार मेरे से बहुत खुश थे, और मैं भी उनका प्यार पा कर खुश थी.

कुमार अब मेरे से चिपक कर लेट गये. मैं बहुत तक गयी थी, और कुमार की बाहों में मुझे सुकून मिल रहा था. मुझे हर रात इन्ही बाहों में गुज़ारनी थी. हम दोनो की कब आँख लग गयी पता नही चला. थोड़ी देर बाद मेरी आँख खुली तो मुझे कुमार ने पीछे से पकड़ रखा था. वो मेरी गांद पे वो हाथ घुमा रहे थे, और मेरी गांद के च्छेद में एक उंगली डाल रहे थे. जैसे उंगली अंदर गयी मुझे दर्द हुआ.

मे: कुमार प्लीज़ धीरे से, मेरी गांद वर्जिन है.

कुमार: क्या बात है भाभी. मैं आपकी गांद की ओपनिंग करूँगा. पर आपको आज बहुत दर्द मिलने वाला है.

मे: कोई बात नही कुमार. आपके लिए मैं हर दर्द से लूँगी. पर प्लीज़ तोड़ा आराम से.

अब कुमार ने छूट में उंगली अंदर-बाहर करना स्टार्ट किया. मुझे अछा फील हो रहा था. फिर उन्होने माय्स्टयरिसर क्रीम ली, और मेरी गांद में लगा दी. फिर एक और उंगली डाली. मुझे तोड़ा दर्द हुआ, पर अछा लगा.

5 मिनिट ऐसा किया तो गांद थोड़ी ढीली हो गयी. फिर उन्होने मुझे आचे से लंड चुस्वाया और लोहे जैसा कर दिया. मैं जानती थी की गांद में जाने वाला था, तो मैने अपने थूक से लंड पूरा चिकना कर दिया. कुमार ने पीछे से मेरी गांद उपर की, और ज़ोर का धक्का मारा. लेकिन लंड नही गया.

5-6 ट्राइ के बाद लंड का टोपा अंदर घुस गया. मेरी आ निकल गयी. बहुत दर्द हो रहा था. फिर कुमार ने पुश किया, तो आधा लंड घुस गया. मेरी आँखों से आँसू निकल गये. मेरी गांद फटत गयी थी. गांद से खून निकल कर मेरे पैरों में आ गया. मुझे बहुत ही दर्द हो रहा था. मैं कुमार के आयेज गिड़गिदा रही थी, की प्लीज़ मुझे गांद नही मर्वानी.

कुमार का जोश बहुत ज़्यादा था, तो मैं कुछ नही कर पाई. बहुत अची पकड़ बना रखी थी उन्होने. 2-3 मिनिट बाद मैं जब रिलॅक्स हुई, तो मेरी गांद में लंड आगे-पीछे होने लगा. 5 मिनिट मेरी आधे लंड से चुदाई हुई, और फिर एक ऐसा झटका मारा, की पूरा लंड गांद में घुस गया. मेरी चीख निकल गयी. पर कुमार ने मेरी गांद मारना जारी रखा. मेरी गांद फटत कर चार हो गयी थी.

कुमार: कैसा लग रहा है भाभी?

मे: बहुत दर्द हो रहा है. प्लीज़ निकाल दीजिए लोड्‍ा.

कुमार ने मेरी एक ना सुनी, और मैं बेहोश होने लगी. फिर भी वो ज़ालिम की तरह मेरी गांद मारते रहे. मेरी आँखें बंद हो गयी थी. 10 मिनिट की चुदाई के बाद वो मेरी गांद में झाड़ गये, और मेरे उपर सो गये. एक घंटे बाद मेरी आँख खुली तो मैने देखा की चदडार खून से लाल हो गयी थी. मेरी गांद का दर्द मीठा हो गया था. मेरा जिस्म खुश था, पर मेरी आत्मा गिल्टी फील कर रही थी.

मैं सोच रही थी मैने ये क्या कर दिया. अपने नंदोई से छुड़वा लिया वो भी जिस्म के लिए. मुझे अपने आप पर घिन आ रही थी. मैं रोने लगी. मेरी रोने की आवाज़ सुन कर कुमार जाग गये.

कुमार: कुआ हुआ भाभी? आप रो क्यूँ रही हो? ( उन्होने खून देखा तो वो दर्र गये) सॉरी भाभी, मुझसे कंट्रोल नही हुआ. मुझे नही पता था आपको ये बहुत दर्द देगा.

मे: मैने बहुत ग़लत काम कर दिया. मैने आपके साथ संभोग कर लिया. मुझे ये नही करना चाहिए था. मैं अब किसी को क्या मूह दिखौगी ( मैं और रोने लगी)?

कुमार: भाभी आपकी कोई ग़लती नही है. मैं किसी को नही बतौँगा इस बारे में. आप प्लीज़ अपने आप को दोष मत दीजिए. ये ग़लत है तो मैं भी इतना ही ग़लत हू जितना आप हो. आप ने आपके दिल की बात सुनी है. आपको प्यार नही मिला, तो मेरे से लिया है. आप ने बाहर तो नही किया है ना. घर की बात घर में रहेगी. ना आप किसी को बताना, ना मैं किसी को बतौँगा.

अब कुमार खड़े हुए, और अपने कपड़े पहन लिए, और मेरी गांद पर क्रीम लगाई. फिर मुझे कपड़े पहनने को दिए. और मेरे पास आ कर बैठ गये. मैं उनसे नज़रे नही मिला पा रही थी.

कुमार: भाभी आपको ऐसा लगता है तो मैं कभी ये बात नही दोहरौगा. मैं भूल जौंगा की हमारे बीच कुछ हुआ है.

मुझे उस टाइम कुछ समझ नही आ रहा था, की मैं क्या करू. मैने कुछ नही बोला और अपने कपड़े पहन लिए. मेरी खामोशी देख कर कुमार को लगा की उनकी वजह से ये हुआ था. कुमार बेडरूम से बाहर निकल गये. शाम को दीदी आई, तो वो अर्जेंट काम आया है ये बोल कर रात को अपने घर चले गये. मैं पूरी रात सो नही पाई. उस दिन के बाद कभी कुमार ने मुझे इस बारे में अप्रोच नही किया.

सब नॉर्मल पहले जैसा हो गया. कुमार कभी भी मेरे से अकेले में बात नही करते. अब मुझे अपनी ग़लती का एहसास हो रहा है. मैने अपने आप को सही रखने के लिए कुमार को उनकी नज़रो में ग़लत कर दिया. मैने कितनी बार सोचा कुमार से माफी मांगू, पर हिम्मत नही हो रही.

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