आंटी की धक्का-पेल चुदाई की मस्त सेक्सी कहानी

अब मैंने आंटी को भी वापस बेड पर ले लिया। अब मैंने आंटी के भोसड़े के खांचे में फिर से लंड लगाया और अब मैं आंटी को मुझसे चिपका कर बजाने लगा। आंटी टांगे हवा में लहरा कर चुद रही थी।

“आईईईई आईईईई आह्ह आह्ह आह्ह आईएईई आईईईई आह्ह आह्ह आह्ह ओह सिसस्ससस्स आह्ह।”

“ओह आंटी, उन्ह आह्ह।”

“आह आईईईई ऊंह उह्ह्ह्ह मोहित बहुत मजा आ रहा है, आहा। बहुत ही मस्त लंड है तेरा।”

“हां मेरी रानी, आहा। आज तो तेरे भोसड़े को खूब बजाऊंगा।”

“आईईईई आईईईई उन्ह्ह्ह बजा ले मेरे सैंया।”

मैं गांड हिला-हिला कर आंटी की चूत में लंड पेल रहा था। अब आंटी को चिपका कर चोदने में मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। तभी आंटी ने टांगो से मेरी गांड को फंसा लिया। अब उन्हें चुदने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

“आईईईई उन्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह मेरे सैया।”

फिर मैंने आंटी को बहुत देर तक ऐसे ही ठोका। आंटी बहुत ज्यादा थक चुकी थी। पसीने से उनका बलाऊज भीग चूका था।अब मैंने आंटी के भोसड़े में से लंड बाहर निकाल लिया और आंटी के बलाऊज के हुक खोलने लगा। आंटी फिर से मुझे रोकने लगी।

“आंटी, जब चूत ही आपने दे दी है तो फिर बोबों में क्या दिक्कत है?”

“तुझे तो कोई शर्म नहीं आ रही है लेकिन मुझे तो आ रही है। क्या दिन आया है जिसे मैंने छोटा सा देखा था, आज वो ही मुझे चोद रहा है।”

“आंटी टाइम टाइम की बात है। अब हाथ तो हटाइए।”

तभी आंटी ने बलाऊज को ढीला छोड़ दिया। अब मैंने तुरंत आंटी के बलाऊज के हुक खोल दिए। फिर आंटी की ब्रा को ऊपर कर उनके बड़े-बड़े बोबों को नंगा ही कर डाला। अब मैंने के बलाऊज और ब्रा को भी खोल फेंका। अब आंटी पूरी नंगी होते ही बहुत ज्यादा शरमाने लगी। आंटी के नंगे बोबों को देखते ही मेरे लंड की बांछे खिल उठी।

“ओह आंटी, बहुत ही शानदार माल है।”

तभी मैंने आंटी के बोबों को मुट्ठियों में भरा और ज़ोर-ज़ोर से आंटी के बोबों को मसलने लगा। आहा! क्या बताऊं यारो, आंटी के बोबे मसलने में मुझे बहुत ही ज्यादा मज़ा आ रहा था। अब आंटी दर्द से कराह रही थी।

“उन्ह आह सिसस्ससस्स ओह आह्ह ओह आह्ह आह्ह धीरे-धीरे दबा मोहित।”

“दबाने दो आंटी, आह्ह बहुत मज़ा आ रहा है, आह्ह।”

आंटी की दर्द के मारे गांड फट रही थी। मैं आंटी के बोबों को ताबड़-तोड़ मसल रहा था। आंटी के शानदार बोबों की मैं ऐसी-तैसी कर रहा था। आंटी तो बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी।

“आईईईई उन्ह्ह्ह सिस्सस्स आईईईई।”

फिर मैंने आंटी के बोबों को मसल मसल कर लाल कर डाला। अब मैंने आंटी के बोबों को मुंह में भर लिया और फिर आंटी के बोबों को मस्ती से चूसने लगा‌ आहा! आंटी के बोबों को चूसने में अलग ही टेस्ट आ रहा था।

मैं झटके दे-दे कर आंटी के बोबे चूस रहा था। मुझे तो आंटी के बोबे चूसने में जन्नत का सुख मिल रहा था।

“ओह आंटी उन्ह्ह्ह बहुत टेस्टी है, आह्ह।”

“चूस ले मोहित, ओह्ह्ह्ह सिस्सस्स।”

आंटी चुप-चाप मुझे बोबे चुसवा रही थी। मैं भी आंटी के बोबों को खूब निचोड़-निचोड़ कर चूस रहा था। कुछ देर में मैंने आंटी के बोबों को चूस-चूस कर लाल कर दिया था। मैं आंटी के बोबों को बस चूसे जा रहा था। फिर मैंने आंटी के बोबों का खूब मज़ा लिया।

अब मैंने फिर से आंटी की टांगे खोल दी और फिर से आंटी की चूत में लंड डाल दिया। अब मैं आंटी की टांगे पकड़ कर आंटी को फिर से झमाझम चोदने लगा। मेरा लंड फिर से आंटी की चीखे निकलवाने लगा।

“ओह आहा सिसस्ससस्स आह्ह आह्ह आह्ह उन्ह ओह सिससस्स आहा आहाहा।”

“उह्ह्ह्ह मेरी रानी। आहा।”

अब मेरे लंड के झटकों से आंटी के बोबे बुरी तरह से हिल रहे थे। मैं आंटी को जम कर चोद रहा था। शायद आंटी ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि मैं कभी उनकी चुदाई भी करूंगा लेकिन मौका और कंडीशन कुछ भी करा देती है।

“आह्ह आईईईई आह्ह ओह मोहित, आह्ह आह्ह आह्ह।”

आंटी जैसी मदमस्त माल को चोदना मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात थी। आंटी को चोदना मेरे किस्मत में था ही। मैं लपक कर आंटी की चूत में झन्नाटेदार शॉट लगा रहा था। तभी आंटी एक बार फिर से झड़ गई।

“ओह्ह्ह्ह मम्मी, आहा सिस्सस्स।”

अब मेरे लंड का भी उतार आ चुका था। तभी मैंने आंटी की चूत में लंड रोक दिया और फिर कुछ ही पलों में आंटी की चूत को लंड के पानी से भर दिया। अब मैं आंटी के जिस्म से लिपट गया। आंटी अब क्या करती, उन्होंने मुझे सीने से चिपका लिया। फिर हम दोनों बहुत देर तक ऐसे ही पड़े रहे।

“मजा आ गया आंटी, आहा। बहुत ही मस्त माल हो आप।”

“तुने इस माल को बजा ही लिया मोहित।”

“इस माल पर मेरी बहुत दिनों से नजर थी आंटी।”

“हां मोहित, मैं सब जानती थी।”

फिर कुछ देर बाद आंटी उठने लगी तभी मैंने आंटी को फिर से बेड पर पटक दिया।

“रोहित यार अब जाने दे मुझे,‌ नहीं तो मैं प्रोग्राम में लेट हो जाऊंगी।”

“आंटी रूको अभी तो। मेरे लंड की प्यास नहीं बुझी है।”

“बस यार अब नहीं।”

“आंटी अभी तो आपको और चोदना है।फिर रोज-रोज मुझे ऐसे मौका थोड़े ही मिलेगा।”

तभी मैं फिर से आंटी के रसीले होंठो को चूसने लगा। आंटी बिल्कुल चुप थी। मैं आंटी के होंठो को जम कर चूस रहा था। फिर मैंने फटाफट से आंटी के बोबों को मुंह में भर लिया, और उनके बोबों को लबालब चूसने लगा।

मैं आंटी के बोबों को फिर से निचोड़-निचोड़ कर चूस रहा था। आंटी मुझे उनके बोबों को चूसने का पूरा मौका दे रही थी। मैं भूखे शेर की तरह आंटी के बोबों को निचोड़ रहा था। फिर मैंने आंटी के बोबों को बुरी तरह से चूस डाला। अब मैं आंटी के भोसड़े तक आ पहुंचा, और आंटी के भोसड़े में ताबड़-तोड़ उंगलिया पेलने लगा। अब आंटी कसमसाने लगी।

“ओह आह्ह सिससस्स आह्ह आह्ह आह्ह सिससस्स उन्ह ओह आह्ह।”

“ओह आंटी बहुत आग लगी हुई आपकी चूत में तो और आप प्रोग्राम में जा रही हो।पहले चूत की आग को तो बुझा लो।”

“उन्ह ओह सिसस्ससस्स आहहह ये आग भी तो तूने ही लगाई है। मैं तो जा रही थी।”

“तो फिर आप बेफिक्र हो जाओ। अब इस आग को भी मैं ही बुझाऊंगा।”

मैं ज़ोर-ज़ोर से आंटी की चूत में उंगलिया घुसा रहा था। आंटी अब बुरी तरह से दर्द से कराहने लगी थी। अब वो दर्द से झटपटा रही थी। मुझे तो आंटी की चूत में उंगली करने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

“ओह आईईईई आह्ह आह्ह धीरे-धीरे कर मोहित, आईईईई आह्ह।”

अब यहां कौन धीरे-धीरे करे यार। मैं तो ज़ोर-ज़ोर से आंटी की चूत की बखिया उधेड़ रहा था। तभी आंटी मेरे प्रहार को झेल नहीं पाई और उनकी चूत मे से फंवारा फूट पड़ा। तभी मैंने आंटी की चूत पर मुंह लगा दिया, और फिर मैं आंटी के नमकीन पानी को पीने लगा।

“उन्ह्ह्ह सिस्सस्स उन्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह।”

पानी निकलने से आंटी बहुत बुरी तरह से पसीने में भीग चुकी थी। मैं सबड़-सबड़ कर आंटी की चूत को चाट रहा था। आंटी मेरे बालो में हाथ डाल रही थी। फिर मैंने आंटी की चूत को बुरी तरह से चाट डाला। अब मेरा लंड फिर से आंटी की चीखे निकालने के लिए तैयार हो चूका था।

अब मैं आंटी को बेड से उतार कर नीचे ले आया, और फिर आंटी को घोड़ी बनने के लिए कहा।

अब आंटी घोड़ी बनने के लिए मना करने लगी। लेकिन फिर मैंने आंटी को अच्छी तरह से समझाया और फिर आंटी घोड़ी बन गई। अब मैंने आंटी के भोसड़े में लंड रखा और फिर आंटी की कमर पकड़ कर आंटी को झमाझम चोदने लगा।

“आईईईईई आह्ह आह्ह ओह आह्ह सिसस्ससस्स उन्ह आईईईई आईईईई।”

“ओह्ह्ह मेरी रानी। आहा बहुत मजा आ रहा है, आहा।”

“आहा आईईईई उन्ह्ह्ह बजा ले तेरी घोड़ी को, आहा आईईईई।”

“हां मेरी घोड़ी, खूब बजाऊंगा तूझे तो।”

“आईईईई मम्मी उन्ह्ह्ह सिस्सस्स।”

मैं झमाझम आंटी की चूत में लंड ठोक रहा था। अब आंटी घोड़ी बन कर बुरी तरह से चुद रही थी। मुझे आंटी को घोड़ी बना कर चोदने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। तभी आंटी कांप उठी और उनकी चूत से रस नीचे बहने लगा। मैं ज़ोर-ज़ोर से आंटी की चूत में लंड ठोक रहा था।

“आह्ह आह्ह उन्ह आह्ह आह्ह सिसस्ससस्स अहाह आह्ह आह्ह।”

“ओह्ह्ह्ह्ह मेरी रानी उन्ह्ह्ह।”

अब आंटी को प्रोग्राम में जाने से ज्यादा मज़ा चुदाने में आ रहा था। वो लंबी-लंबी सिस्कारियां लेकर चूत में लंड ले रही थी। मैं झमाझम आंटी को चोद रहा था। फिर मैंने आंटी को बहुत देर तक घोड़ी बना कर बजाया।

अब मैं आंटी को दीवार के पास ले गया और उन्हें दीवार से सटा दिया। अब मैं आंटी के बोबों को मसलते हुए उनके होंठो को चूसने लगा। मैं ज़ोर-ज़ोर से आंटी के बोबों को मुट्ठियों में कस रहा था। आंटी बुरी तरह से कसमसा रही थी। मुझे आंटी के बोबों को कसने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

फिर मैं आंटी के बोबों को चूसने लग गया। अब आंटी मेरे बालों में हाथ डाल कर उन्हें सहला रही थी। मैं रगड़-रगड़ कर आंटी के बोबे चूस रहा था। मुझे आंटी के रसदार बोबे चूसने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। तभी मैंने एक हाथ आंटी की चूत में घुसा दिया। अब मैं आंटी की चूत को सहलाते हुए आंटी के बोबे चूसने लगा।

अब आंटी दर्द से कसमसाने लगी।

“अहा आह्ह आह्ह उंह ओह आहाहाह सिसस्ससस्स ओह मोहित।”

मैं दबा कर आंटी के बोबे चूस रहा था। नीचे से मैं आंटी की चूत में खलबली मचा रहा था। आंटी अब तो बिन पानी की मछली की तरह झटपटा रही थी।

“आईईईई सिस्सस्स उन्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह।”

फिर मैंने आंटी के बोबों को चूस कर आंटी को पलट दिया। अब मैं आंटी से बुरी तरह से चिपक गया, और उनके कंधो पर किस करने लगा। अब आंटी उनके जिस्म को समेटने लगी।

मैं जम कर आंटी की नंगी पीठ पर किस कर रहा था। इधर मेरा लंड आंटी की गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था। मैं आंटी के जिस्म पर ताबड़-तोड़ किस कर रहा था। तभी मैंने फिर से आंटी की चूत में उंगलिया घुसा दी। अब मैं आंटी की पीठ पर किस करता हुआ आंटी की चूत को कुरेद रहा था। मुझे तो बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। आंटी बुरी तरह से कसमसा रही थी। फिर मैंने आंटी का बहुत देर तक ऐसे ही मज़ा लिया।

अब मैं आंटी को वापस बेड की तरफ ले आया। अब मैं बेड पर बैठ गया, और आंटी से मेरा लंड चूसने के लिए कहा। तभी आंटी लंड चूसने के लिए मना करने लगी।

“मोहित यार मैं नही चुसूंगी।”

“अरे आंटी चूसो ना। क्यों इतना शरमा रही हो?”

तभी मैंने आंटी को नीचे बिठा दिया और उनके मुंह में लंड डालने लगा। लेकिन आंटी मुंह नहीं खोल रही थी। मैं बार-बार आंटी से मुंह खोलने के लिए कह रहा था। फिर बड़ी मुश्किल से आंटी ने मुंह खोला। तभी मैंने फटाक से आंटी के मुंह में लंड डाल दिया।

अब आंटी क्या करती. वो धीरे-धीरे मेरा लंड चूसने लगी। अब मैं आंटी के बालों को संवार रहा था। आंटी आराम से मेरा लंड चूस रही थी। मुझे आंटी को लंड चुसवाने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

“ओह आंटी आह्ह बहुत मज़ा आ रहा है। आह्ह।”

फिर मैंने आंटी से थोड़ा जल्दी-जल्दी लंड चूसने के लिए कहा। अब आंटी में स्पीड बढ़ा दी और वो झमाझम मेरा लंड चूसने लगी। अब मुझे और ज्यादा मज़ा आ रहा था। अब तो आंटी मेरे लंड पर टूट पड़ी थी। वो दबा कर मेरा लंड चूस रही थी।

“ओह्ह्ह्ह मेरी रानी, आहा ऐसे ही चूस।अब आया ना मजा। आहा।”

“हां मेरे सैया।”

फिर आंटी ने बहुत देर तक मेरा लंड चूसा।

अब मैं खड़ा हो गया और आंटी के मुंह को पकड़ कर आंटी के मुंह को चोदने लगा। अब मेरा लंड घपाघप आंटी के मुंह में घुस रहा था। अब आंटी के मुंह को चोदने में मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।

“ओह आंटी आह्ह। बहुत मजा आ रहा है। आहा उन्ह्ह्ह।”

आंटी के मुंह में लंड पेलने में मुझे बहुत मजा आ रहा था। आंटी आराम से उनके मुंह में लंड ले रही थी। फिर मैंने बहुत देर तक आंटी के मुंह को चोदा। अब मैंने आंटी से घोड़ी बनने के लिए कहा।

“रोहित यार अब रहने दे। मत कर, वर्ना मैं लेट हो जाऊंगी।”

“आप जाने की चिंता मत करो। मैं आपको छोड़ आऊंगा।”

तभी आंटी घोड़ी बन गई। अब मैं आंटी की गांड में लंड सेट करने लगा।

“तू तो मेरी जान निकाल कर मानेगा आज।”

“तभी तो मज़ा आता है आंटी।”

“लेकिन दर्द भी तो बहुत होता है यार।”

“आपको कौन सा दर्द होगा आप तो वैसे भी अनुभवी हो।”

तभी मैंने आंटी की गांड में ज़ोर से लंड ठोक दिया। मेरा लंड एक ही झटके में आंटी की गांड को फाड़ता हुआ पूरा अंदर घुस गया। लंड गांड में घुसते ही आंटी का सारा अनुभव फेल हो गया और आंटी ज़ोर से चीख पड़ी।

“आईईईईई मर्रर्रर्र गईईईईई आईईईई आईईईईई मम्मी। आईईईई आईईईई। ओह रोहित बहुत दर्द हो रहा है। आईईईई मर्रर्रर्र गईईईई मैं तो। आहाहाह।”

अब मैं आंटी की ताबड़-तोड गांड मारने लगा। अब आंटी मेरे लंड के तूफान में उड़ने लगी।

“ओह मम्मी। आईईईईई आईईईई आईईईईई बहुत दर्द हो रहा है। आईईईईई।”

“ओह्ह्ह मेरी रानी। आहा बहुत ही सेक्सी गांड है तेरी।”

“आहा आईईईई उन्ह्ह्ह तेरा लंड मेरी जान निकाल रहा है मोहित। आईईईई सिस्सस्स।”

“मजा भी तो बहुत आ रहा है मेरी जान।”

“आईईईई आईईईई उन्ह्ह्ह सिस्सस्स।”

आंटी दर्द से बुरी तरह से झल्ला रही थी। अब मैं आंटी की गांड में लंड ठोक-ठोक कर उन्हें बुरी तरह से बजा रहा था।

“आह्ह आह्ह आह आहाहाह आईएईई आईईईई आह्ह आह्ह, मर्रर्रर्र गईईई मैं तो। ओह मम्मी।”

मैं ज़ोर-ज़ोर से आंटी की गांड में लंड पेल रहा था। मुझे आंटी की गांड मारने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। आंटी बुरी तरह से गांड मरवा रही थी। तभी आंटी ने कहा–

“यार बहुत दर्द हो रहा है सच में। थोड़ा तेल लगा कर मार।”

तभी मैं किचन में जाकर फटा-फट से तेल ले आया। अब आंटी फिर से घोड़ी बन गई। अब मैंने आंटी की गांड में बहुत सारा तेल लगा दिया और फिर मेरे लंड को भी तेल लगा कर मसल लिया। अब मैंने आंटी की गांड में फिर से लंड ठोक दिया। आंटी फिर से झल्ला उठी।

“आईईईईई आहहह फिर से बहुत दर्द हो रहा है यार।”

“अब इतना दर्द तो होगा ही आंटी।”

तभी मैं आंटी की गांड की फिर से ज़ोरदार ठुकाई करने लगा। तभी आंटी का पानी निकल गया। वो पसीने पसीने हो चुकी थी। मैं ताबड़-तोड़ आंटी की गांड मार रहा था। आंटी कराहती हुई गांड मरवा रही थी।

“आईईईईई आईईईई आह्ह आह्ह आह्ह आईईईई आह्ह आह्ह आहाहाह आहाहा।”

“ओह्ह्ह मेरी जान।”

आंटी की मस्त सेक्सी गांड की आज मेरा लंड बखिया उधेड चुका था। फिर मैंने बहुत देर तक आंटी की गांड मारी। आंटी गांड मरवाने के बाद बहुत ज्यादा थक चुकी थी।

अब मैंने जैसे ही आंटी की गांड में से लंड बाहर निकाला तो आंटी झट से बेड पर पड़ गई।

अब मैं भी बेड पर चढ़ गया और आंटी की टांगे खोलने लगा। लेकिन आंटी टांगे खोलने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। फिर बड़ी मुश्किल से आंटी ने टांगे खोली। अब मैंने फिर से आंटी की चूत में लंड ठोक दिया और आंटी को झमाझम चोदने लगा।

“ओह आह्ह सिससस्स आहा आह्ह आह्ह आहा सिससस्स आह्ह।”

मैं आंटी की फिर से खतरनाक ठुकाई कर रहा था। मेरे लंड के झटकों से आंटी के बोबे बहुत बुरी तरह से उछल रहे थे। मैं आंटी को बुरी तरह से बजा रहा था। तभी मेरे लंड के ज़ोरदार धक्कों से आंटी का पानी निकल गया। आंटी फिर से पानी पानी हो गई थी।

“आह्ह आहा सिससस्स आह्ह आह्ह उन्ह ओह बससस्स मोहित।”

“बस थोड़ी देर और आंटी।”

आंटी मुझे रुकने के लिए बोल रही थी लेकिन आज मैं रुकने वाला नहीं था। मैं तो बस आंटी को बजाये जा रहा था। आंटी को दोपहर से बजाते हुए बहुत टाईम हो चुका था लेकिन मेरा लंड रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

“आह्ह आह्ह आह्ह सिससस्स आह्ह आह्हओह मर्रर्रर्र गईईईई आहहह आह्ह। बसस्ससस्स बससस्स।”

आंटी की आज तो हालात खराब हो चुकी थी। मैं उनको पटक-पटक कर चोद रहा था। आंटी बस चुद रही थी। फिर बहुत देर के घमासान के बाद मेरा लंड झड़ने की कगार पर पहुंच चुका था। अब मैंने आंटी की चूत में लंड रोक दिया और फिर मेरे लंड के पानी से आंटी की चूत भर गई।अब मैं आंटी से लिपट गया।

“ओह्ह्ह मोहित तुने तो मेरी हालत ही खराब कर दी।”

“अब ये तो होना ही आंटी। आप ही ऐसी कमाल की माल।”

“हां मजा लूट लिया तूने तो पूरा।”

“हां आंटी।”

आंटी ने अब जाकर राहत की सांस ली थी। आंटी आज इतनी सज-धज कर आई थी लेकिन मेरे लंड ने उनके सारे मेकअप को बिगाड़ दिया था। जिन होंठो पर लिपस्टिक लगी हुई थी अब वो सारी लिपस्टिक फ़ैल चुकी थी।

आंटी की नई फ्रेश साड़ी की दशा बदल चुकी थी। उनके सेट किये हुए बाल बुरी तरह से उलझ चुके थे। अब आंटी के जिस्म से परफ्यूम की खुशबु की जगह चूत और लंड के रस की महक आ रही थी।

अब आंटी उठी और एक-एक करके कपड़े पहनने लगी।

“मेरी पूरी दशा बिगाड़ दी तूने। अब कैसे तैयार होउंगी?”

“सारा मेकअप रखा हुआ है आंटी।”

“तुझे आज ही सूझी थी ये सब करने की। पहले कभी ही कर लेता।”

“आंटी आपने मौका ही अब दिया है। मैं क्या करूं?”

फिर आंटी ने पेंटी ब्रा पहन ली। फिर आंटी ने ब्लाउज़ और पेटीकोट पहन लिया।अब आंटी साड़ी पहन कर तैयार हुई। अब आंटी ने मेकअप किया लेकिन वो अब उतनी फ्रेश नहीं लग रही थी जितनी पहले लग रही थी। फिर मैं कपड़े पहन कर तैयार हो गया और आंटी को प्रोग्राम में छोड़ने गया।

जब मैं आंटी को लेकर प्रोग्राम में पहुंचा।सभी मेहमान अभी आने ही शुरू हुए थे।

“सही टाईम पर ला दिया आंटी मैंने आपकों।”

“हां मोहित।”

अब आंटी मेरी तरफ मुस्कुरा रही थी। फिर मैं आंटी को छोड़ कर वापस आ गया।

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