विदेश गये स्टूडेंट्स के बीच में सेक्स की कहानी

मेरे प्रिय पाठकों, मेरा नाम वर्तिका है. दोस्त मुझे विन्नी कह कर बुलाते है. मैं सुंदरनगर हिमाचल की रहने वाली हू. इसीलिए मेरा रंग गोरा और बदन चुस्त है. मुझे जिम और अड्वेंचर स्पोर्ट्स करने का भी शौंक है.

मेरी हाइट 5’7” है. मेरे 34 इंच के खूबसूरत गोलाकार संतरे, मेरी 28″ की कमर, और मेरे प्यारे से चूचक 36 इंच के तरबूज़ को मिला कर मेरा फिगर एक फेमिना इंडिया लेवेल मॉडेल का है.

मैं जहा-जहा रही हू, वाहा-वाहा मेरी इस कातिल फिगर और मेरी अड़ाओ से काफ़ी लड़कों को दीवाना बना चुकी हू. शॉर्ट में काहु तो मेरी फन फॉलोयिंग और आशिक़ो की लिस्ट काफ़ी लंबी है. मेरी उमर 30 साल है, और मैं गुरगाओं में जॉब करती हू. (इस विवरण का किसी और से मेल खाना, महेज़ इत्तेफ़ाक़ होगा)

ये मेरी इस देसीकाहानी2.नेट की वेबसाइट पर पहली कहानी है. मेरा जीवन काफ़ी अनुभव भरा रहा है. मैं काई देशो के काई शहरों में घूमी हू. इसलिए किससे मेरी ज़िंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे है.

वासना और अपनी उत्तेजना को सही मध्यम देने के लिए और अपने क़िस्सो के ज़रिए आप सब के जीवन में रस्स भरने के लिए पेश-ए-खिदमत है ख़ास आपके लिए ‘स्विट्ज़र्लॅंड के खुले आसमान में एक पुराने आशिक़ के जिस्म की आगोश.’

दोस्तों ये कहानी ज़रूर बाहर देश के प्रसंग में है. पर मैं जानती हू की चुड़क्कद्पने का असली मज़ा देसी तरीके से ही लिया जेया सकता है. जिस्मों में चिपकान और रग़ाद. कुछ अलग ही बात है.

दोस्तों ये बात करीब 8 साल पहले की है, जब मैं 22 बरस की थी, और अपने कॉलेज के स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम से स्विट्ज़र्लॅंड गयी हुई थी. वाहा मेरे कॉलेज के काई लड़के लड़कियाँ भी साथ आए थे.

क्यूंकी हम सब विदेश पहली बार आए थे, और युरोप जैसी खूबसूरत जगह, तो हम लोग हर वीकेंड कही ना कही घूमने का प्रोग्राम बना लिया करते थे. उन्ही दीनो हम लोगों ने एक वीकेंड पर 5 लेक्स हिके पर जाने का प्रोग्राम बनाया.

हमारे ग्रूप के लड़कों में अक्षय नाम का एक लड़का था, जो की काफ़ी गातीला नौजवान था और कॉलेज की काफ़ी लड़कियों को पसंद था. गेहुआ रंग और देसी. लेकिन उसका दिल इस नाचीज़ पर कही अटका था. और मेरे यार दोस्त किसी तरह से उसको मुझसे मिलाने में लगे रहते थे.

ट्रेक सुबा-सुबा स्टार्ट हुआ, तो मुझे अंजलि ने कहा “अक्षय और विन्नी हमारे ग्रूप के सबसे फिटेस्ट लोग है, तो आज का ट्रेक तुम लोग ही लेड करो”. मैं समझ गयी थी की सेट्टिंग करवाने को ये एक नयी योजना थी. पर वो लड़का मुझे भी अछा लगता था. बस भाव देने में टाइम लगा रही थी. क्यूँ ना लगौ, आख़िर मेरी फन फॉलोयिंग उससे ज़्यादा जो थी. पर ये मौका कुछ और ही था.

फिर ट्रेक स्टार्ट हुआ. हम लोग स्विट्ज़र्लॅंड की हसीन बर्फ़ीली हरी भारी, वादियाँ, नदियाँ, पहाड़ देख-देख कर सम्मोहित हो रहे थे.

अक्षय: विन्नी, तुम्हारी फिटनेस का राज़ क्या है? कॉलेज में तुमसे फिट लड़की नही देखी. कमाल का फिगर है तुम्हारा

मैं: मुझे अड्वेंचर स्पोर्ट्स का शौंक है, तो अपने आप को सब के लिए फिट रखती हू. तुमने भी काफ़ी अची बॉडी बनाई हुई है.

अक्षय (शरमाते हुए): हा, तोड़ा बहुत जिम का शौंक है. वैसे एक बात बताओ. तुम्हारा बाय्फ्रेंड तो काफ़ी हॅंडसम होगा?

मैं: बाय्फ्रेंड? मेरा तो कोई नही है.

अक्षय: मतलब तुमने कभी सेक्स नही किया?

मैं (यही बात पूछने के लिए इतनी देर से इधर-उधर की बातें कर रहा है? ): मैने ऐसा तो नही कहा.

अक्षय: मैं तो समझा था की (हासणे लगा). वैसे तुम मुझे बहुत हॉट लगती हो.

मैं (मैने अपने होंठो में अपनी हस्सी च्छुपाई): ज़्यादा नॉटी मत बनो.

बातें करते-करते हम आयेज बढ़ते रहे, और अक्षय की बातों में खुलापन और शरारत बढ़ने लगी.

अभी हम लोग आधे ही पहुँचे थे की ज़ोरदार झामा-झाम बारिश गिरने लगी. मैं और अक्षय बचते-बचाते एक तालाब के पास बनी एक पुरानी कॉटेज में जा पहुँचे. पीछे पलट कर देखा तो हम गुम हो गये थे.

ट्रेक के बाकी सभी लोग कही नज़र नही आ रहे थे. और पहाड़ी पे होने के कारण मोबाइल नेटवर्क्स भी कुछ साथ नही दे रहे थे. आख़िरकार हम दोनो तक कर एक बड़े से पेड़ के नीचे जेया कर बैठ गये.

मैने सफेद त-शर्ट और गुलाबी लोवर पहना हुआ था. क्यूंकी मैं पूरी भीग गयी थी, मेरी त-शर्ट में से मेरी गुलाबी ब्रा भी नज़र आने लगी थी. और मेरी टाइट लेगैंग्स भी मेरी छूतदों को और ज़ोर से दबोच कर उनके आकार को विस्तारित कर रही थी.

अक्षय नज़र चुरा-चुरा कर मेरे मुममे में से निकली सुरंग को ताड़ रहा था. मेरी भी मॅन ही मॅन जीभ ललचा रही थी की आख़िरकार एक ऐसा मौका मिल ही गया, जिसमे मैं उसके मोटे लंड से अपनी रसीली छूट को रगडवा साकु. और उसके भारी-भारी मोटी उंगलियों वाले हाथो से अपने मुममे मसलवा साकु. दोस्तों सही काहु तो यही हाल उस तरफ भी था.

अक्षय: क्या तुमने कभी खुले आसमान के नीचे सेक्स किया है?

ये कहते-कहते अक्षय मेरे पास आने लगा और अपने होंठ मेरे होंठो के करीब ले आया. अक्षय अब पूरी तरह से लाल हो चुका था. उसकी हवस उसकी शरम पर हावी हो रही थी. पर मैं भी इतनी आसानी से हाथ आने वाली नही थी.

मैने उसके होंठो पर उंगली रखी और पीछे उठ कर जाने लगी. ये कहते ही उसने अपनी सारी शरम खो दी, और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी टाँगो के बीच बिता लिया.

समय रुक गया. सुनसान जंगल, विशाल-के पेड़, हसीन हरी-भारी वादियाँ, दो गीले दहाकते हुए बदनो की आग. अक्षय पेड़ की टेक लगा कर बैठा हुआ और उसकी ताकतवर बाहों में मेरी कमसिन जवानी.

मैं: ये क्या कर रहे हो अक्षय?

अक्षय: कह दो की तुम मुझे च्छूप-च्छूप कर टाडा नही करती.

मैं उसकी बाहों से निकालने की कोशिश करती रही. पर सच मानो तो चाहती थी की वो मुझे और ज़ोर से पकड़ ले. उसने मुझे पीछे से जाकड़ कर पकड़ लिया, और हम दोनो के गीले होंठ एक-दूसरे से जेया कर आ मिले.

मैं उसकी बाहों में चूर होने लगी. वो मेरे एक होंठ को मूह में लेता और उसको लितची की तरह चूस्टा. फिर मेरे नीचे वाले होंठ को लेकर रस्स-भारी बना देता. मेरे दोनो हाथो को अपने हाथो से बाँध कर, मुझे अपनी टाँगो के बीच में बिताए वो मेरे होंठो का रस्स लेने लगा.

मेरा सिर उसके बाए कंधे पे जेया कर टिक गया, और मेरा बदन उसकी पूरी आगोश में आ गया. अब मुझे भी मज़ा आने लगा था, और मैं भी उसके मोटे होंठो को चूस कर परमानंद में हिस्सा ले रही थी.

धीरे से उसने अपने गरम हाथ मेरी त-शर्ट के अंदर डाले, और मेरी कमर पे चिकोतियाँ काटने लगा. फिर धीरे से मेरी ब्रा के उपर से ही मेरे मम्मो को मसालने की कोशिश करने लगा.

ऐसा करने में मेरे हाथ उसको रोक रहे थे. ये चूसाम-चुसाई और मुममे को मसलने की कोशिश लगभग 15 मिनिट चलती रही.

फिर उसने मेरे दोनो हाथो को हटा कर मेरी त-शर्ट के अंदर हाथ फिरसे डाल दिए, और मेरे संतरो को मेरी ब्रा के उपर से निकाल दिया. मेरी त-शर्ट नेट वाली थी, और उसका जोश आसमानो पर.

उसने आव देखा ना ताव, और मेरी त-शर्ट बीच में से फाड़ कर अलग कर दी. मैं मचल उठी, और मेरी करकराहट की आवाज़ उहह सस्शह सस्स्स्स्सस्स उहह उस वादी में चहेकने लगी. उसने अपनी भी स्लीव्ले त-शर्ट झट से उतार फेंकी.

मेरे दोनो मुममे उसके हाथो में थे, और वो पीछे से मेरी नंगी गरम पीठ को अपने सीने से चिपका कर मेरे मुम्मो को स्पंज बॉल समझ कर निचोढ़ रहा था. मैं समझ गयी थी की मेरी ब्रा के होने ना होने से अब कोई फराक नही पड़ता. तो मैने खुद ही उसको बोल दिया “इसको भी निकाल दो.”

उसने धीरे से एक हाथ पीछे ले जेया कर मेरी चमचमाती हॉट पिंक ब्रा को एक ही हाथ से उतार फेंका. फिर मुझे जाकड़ कर फिरसे मेरे होंठो को पीछे से चूसने लगा. मौसम में यू तो काफ़ी ठंडक थी, पर दोनो के जलते हुए बदनो की गर्मी कुछ और ही कह रही थी.

उम्म्म ह्म उम्म छाप छाप की आवाज़े चलती रही. मेरे दोनो मुम्मो को वाइन ग्लास की तरह उसने अपने दोनो हाथो में भर लिया था. मेरी चूचियों को कभी मसलता तो कभी दोनो बूब्बों को निचोड़ लेता. मेरी मादक सिसकारियाँ उसको और उत्तेजित कर रही थी. और वो मेरे होंठो को काटने लगा.

मेरे नीचे वाले होंठ को काट-ते ही मैं मचल गयी. फिर हम दोनो की जीभ आपस में लड़ने लगी और एक-दूसरे को चाटने धकेलने लगी. कसम से लाइफ मैं ऐसी चुम्मि मेरी किसी ने नही ली थी. ऐसा लग रहा था जैसे काई महीनो की हवस उसने अपने अंदर दबा रखी थी, जो आज उछाल-उछाल के बाहर आ रही थी.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. कहानी कैसी लगी इसके बारे में विन्निसेन0@गमाल.कॉम पर मैल करके बताना मत भूलिएगा.

यह कहानी भी पड़े  बेटे ने बाप का माल निकलवाया


error: Content is protected !!