ट्रेन में मिली एक हसीना के साथ चोदन

हैल्लो दोस्तों मुझे बिलासपुर जाना था. तो में बस से सतना पहुंचा और रेलवे स्टेशन पर जाकर एक्सप्रेस ट्रेन का इंतजार करने लगा और उसमे मेरा एसी कोच में रिज़र्वेशन था. कुछ देर बाद ट्रेन आई और वो रात का वक़्त था.. तो ट्रेन आते ही में अपनी बोगी नंबर 13 में गया. वहां पर मेरे केबिन में पहले से एक कपल और एक मस्त सेक्सी औरत बैठी हुई थी. उनकी उम्र 35 साल की थी.. बेबी कट बाल और वो पीले कलर का सूट पहने हुई थी और वो कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी और वो दिखने में किसी अमीर खानदान की लग रही थी.. लेकिन उसको देखकर अजीब सा लग रहा था.. क्योंकि वो एकदम चुपचाप बैठी हुई कुछ सोच रही थी.

मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और में अपनी बर्थ पर आकर बेग रखकर लेट गया और ऊपर बर्थ से नीची की तरफ बैठी उस औरत को देखने लगा.. उसने दुपट्टा डाल रखा था.. तो मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. हाँ.. लेकिन इतना अनुमान ज़रूर लग रहा था कि उसके बूब्स बड़े बड़े है और फिर धीरे धीरे वक़्त गुजरा और दो घंटे के बाद जबलपुर आया. तो वो कपल वहां पर उतार गया और अब उस केबिन में और वो आंटी थी.. वो शायद सो गई थी.
फिर जब मैंने उसके सीने का गोरापन देखा तो लगा कि मेरा तो वीर्य निकल ही जाएगा. तो में कुछ देर देखकर नीचे उतरा और टॉयलेट में जाकर उसके बूब्स को सोचकर मुठ मारकर वापस आया और फिर बाहर उसके पास में जाकर उसका दुपट्टा उठाया और उसके हाथ को हल्के से पकड़कर हिलाकर उसे जगाया और उसका दुपट्टा दिया. तो वो मुझसे धन्यवाद बोली. तो में उसी के पास में बैठ गया.. लेकिन वो शायद वो बहुत गहरी नींद में थी इसलिए उसका हाथ सीने से गिरकर मेरी जाँघ पर आ गया.

मैंने थोड़ी देर बाद उसका हाथ पकड़ा और लंड के पास तक ले जाकर रख दिया उसके हाथों की नरमाई ही मेरे जोश को बड़ाने लगी थी और कुछ देर बाद वो जागी तो उसने झट से अपना हाथ खींच लिया.. लेकिन में उसके बहुत पास था. तभी उसने अपना मुहं खोलकर हवा को अंदर बाहर किया तो मुझे एकदम से शराब की बदबू आई और फिर में समझ गया कि यह नशे में है और इसको अपनी बातों में फंसाकर इसके साथ चुदाई करनी चाहिए.. में एकदम पास में बैठा उनसे बात करने लगा.. लेकिन वो मेरी हर हर बात का अधूरा सा जवाब दे रही थी.

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फिर मैंने उससे कहा कि आप बड़ी सुंदर हो.. तो वो हाँ बोली और फिर मैंने कहा कि मेरी शादी नहीं हुई. तो वो बोली कि मेरी तो हो गई है.. मैंने कहा कि बहुत अच्छा, आपके तो बहुत मज़े है यहाँ हमारा तो अपना हाथ जगन्नाथ है. यह बात मेरे मुहं से सुनते ही वो एकदम से मुझे देखने लगी. तो मैंने हल्के से उनका हाथ पकड़ा.. लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली तो मेरा साहस और बढ़ा. फिर मैंने उससे कहा कि आपके हाथ बहुत नरम है लगता है आप कोई भी काम नहीं करती. तो वो बोली कि काम तो रात में करते है और में झट से समझ गया कि यह ट्रेन मेरी लाईन पर आ रही है और मैंने उनका हाथ पकड़कर किस कर लिया..

वो आखे बंद किए हुई थी और में हाथ पर हाथ फेरने लगा.. थोड़ा ऊपर थोड़ा ऊपर और ऊपर और एक वक़्त आया कि जब में धीरे धीरे अपना हाथ कंधे तक हाथ ले जाने लगा तो में कंधो के पास तक जाकर उसके बूब्स को छू रहा था और अचानक से मैंने उसके एक बूब्स को पकड़ लिया. तो उसने मेरे हाथ को पकड़कर कहा कि नहीं ऐसा मत करो और जब मैंने अपनी पकड़ ढीली की तो उसने अपना सूट ठीक किया.. लेकिन मेरा हाथ अब भी वहीं पर था और उसने मेरा हाथ नहीं हटाया और में अपना हाथ उसके सूट में डालने लगा और उसके मस्त जिस्म की गरमाहट पाकर मेरा लंड गरम हो गया और मेरी हिम्मत बहुत बढ़ गई थी.

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मैंने अब बूब्स को दबाना, सहलाना शुरू कर दिया था. वो बड़ी गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. शायद उसको भी अब आनंद आ रहा था.. मेरे शरीर के अंदर एक अजीब सी खलबली मच गई और मैंने उनसे कह दिया कि क्यों आंटी आपको अच्छा लग रहा है? वो हाँ बोली और मैंने कहा कि क्या में दोनों दबाऊ? तो वो ना ना हाँ ना ना हाँ बोली और मैंने दोनों दूध पकड़ लिए धीरे धीरे सहलाने लगा. फिर मैंने हाथ हटाए और पेट के पास से सूट में अंदर हाथ डालकर ऊपर ले गया और ब्रा के ऊपर से दूध दबाने लगा और में इस कोशिश में ना जाने कब उसकी जाँघो पर बैठ गया, मुझे खुद को पता नहीं चला.

फिर मैंने थोड़ी देर तक बूब्स दबाए तो वो बोली कि ऊपर से तो उतरो मुझे वजन लग रहा और पास में बैठकर दबाओ. तो में उनके पास में आकर उनके बड़े ही मुलायम, गरम, जोश से भरे हुए बूब्स दबाने लगा. फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी क्या आपको दूध पिलाना अच्छा लगता है? वो बोली कि हाँ तो मैंने कहा कि मुझे पिलाओ ना. तो वो बोली कि तुम्हे जो करना हो कर लो.. लेकिन प्लीज मुझे तंग मत करो. फिर मैंने इसका पूरा फायदा उठाया और उनका सूट ऊपर करके ब्रा के ऊपर से ही दूध पीने लगा और थोड़ी देर बाद मैंने ऊपर की तरफ देखा तो पाया वो मुझे बड़े गौर से देख रही थी और में उनकी तरफ मुस्कुराया.

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