टीना की भाभी और सेठी साब

अंजू ने फ़ोन उठाते ही हँसी मजाक के लहजे में पूछा, “जीजू सा, प्रणाम! ननद सा से बात किये बगैर चैन नहीं पड़ता क्या आपको? ननदसा अभी बाथरूम में है। जीजू, एक बात तो माननी पड़ेगी। आपके और दीदी के बिच में जो अंडरस्टैंडिंग है उसका जवाब नहीं। आप यहां की बिलकुल फ़िक्र मत करना। मैं हूँ ना। सब सम्हाल लुंगी।

सुबह दीदी काफी देर से उठी है। लगता है दीदी की तबियत थोड़ी ठीक नहीं। चिंता की कोई बात नहीं। दीदी एक्चुअली तो बहुत ज्यादा थकी हुई हैं। पूरी रात बेचारी सो नहीं पायी। उनको पूरी रात मच्छरों ने या पता नहीं खटमलों ने काटा और परेशान किया।

वैसे हमारे यहां अभी एक भी मच्छर या खटमल नहीं है, पर पता नहीं शायद कहीं से कोई एक मच्छर या खटमल ने दीदी की नींद हराम कर दी है। दीदी का खून कुछ ज्यादा ही मीठा होगा। दीदी के बदन पर कई जगह लाल लाल निशान हैं। कुछ तो ऐसी जगह हैं की किसीको दिखा नहीं सकते। गरमी के कारण शायद रात में दीदी ने कपडे निकाल दिए होंगे। वैसे उनके और सेठी साहब के कमरे में तो ए.सी. लगा हुआ है और बढ़िया काम कर भी रहा है।

खैर, मैं अभी ननदसा को निचे नहीं जाने दूंगी। पापा या मम्मी ने ननदसा को अगर इस हाल में देख लिया और बदन के निशान देखे तो वह कुछ और सोचेंगे। मैं सब को कह दूंगी की ननदसा की तबियत थोड़ी ठीक नहीं है। मुन्ना सेठी साहब के साथ निचे खेलने गया है।

सेठी साहब नाश्ता करके अपने काम पर जयपुर के लिए निकल चुके हैं। वह भी थके हुए दिख रहे थे। शायद वह भी रात भर सो को नी पाए। उनको भी रात भर मच्छरों ने परेशान किया लगता है। रात को वापस आएंगे। दीदी के भाई आज दफ्तर के काम से तीन दिन के लिए बाहर गए हैं। जीजू, आप ननदसा की बिलकुल चिंता मत करना, मैं सब सम्हाल लुंगी। यहां सब कुछ ठीक है। दीदी बाथरूम से निकलेगी तो आपसे बात करेगी।”

यह सब कह कर अंजू ने फ़ोन रख दिया। अंजू की इतनी बात से मैं समझ गया की अंजू ने सब कुछ भाँप लिया था और फिर भी वह किसी को कुछ नहीं बताएगी। अंजू यह भी समझ गयी थी की इस सारे तामझाम में मैं और टीना मिल कर सब कुछ एक दूसरे की सहमति से कर रहे थे। क्यूंकि वरना अंजू मुझसे इतनी ऐसे बात नहीं करती। यह बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी। पर एक बात अच्छी थी की सिचुएशन नियंत्रण में थी।

कुछ ही देर में टीना का फ़ोन आया। टीना कुछ घबड़ायी हुई थी। टीना ने कहा, “अंजू भाभी बड़ी शरारती और शातिर है। वह सेठी साहब और मेरे बिच की बात भाँप गयी है। उसने मुझे निचे पापा और मम्मी के पास जाने से मना किया है। वैसे उसकी बात भी ठीक है।

मैं उस हालात में नहीं की मैं निचे जा सकूँ। अब मैं आपको क्या बताऊँ? आप तो आप के दोस्त सेठी साहब का नेचर जानते हो। भाभी ने आपको सब कुछ बता ही दिया है। पर वैसे चिंता की कोई बात नहीं। मुझे लगता है भाभी मजे ले रही है वह किसी से कुछ कहेगी नहीं। मैं भाभी को सम्हाल लुंगी। लगता है भाभी सेठी साहब से बड़ी इम्प्रेस हुई है। रात को मुझे धमकी दे रही थी की अगर मैं सेठी साहब के पास नहीं गयी तो खुद चली जायेगी। पता नहीं सेठी साहब के पास क्या जादू है की हर लड़की उनके पास जाना चाहती है।”

मैंने टीना से मजाक में कहा, “हाँ भाई, ऐसा क्यों नहीं कहती की सेठी साहब की पर्सनालिटी ही कुछ ऐसी है की लडकियां उनसे इतनी इम्प्रेस्सेड हो जाती हैं की जो लड़की सेठी साहब से मिलती है वह उनसे चुदवाना चाहती है?”

टीना ने कुछ रिलैक्स्ड होते हुए कहा, “लगता है तुम्हें सेठी साहब से जलन हो रही है।”

मैंने कहा, “वह तो होगी ही। अरे मेरी खूबसूरत कमसिन बीबी को ही जिन्होंने वश में कर लिया हो उनसे जलन नहीं होगी क्या?”

टीना ने कटाक्ष का जवाब कटाक्ष में देते हुए कहा, “अच्छा? बड़ी तत्वचिंतन की बात करने लगे हो! मेरा मुंह मत खुलवाओ। तुमने जो उनकी देवलोक की अप्सरा जैसी खूबसूरत बीबी को अपने निचे पूरी रात दबा के रखा उसका क्या?”

मैंने टीना की बात को काटते हुए कहा, “अरे हम कहाँ बेकार में झगड़ने लगे। यहां बात तो तुम्हारी अंजू भाभी को सेट करने की है, और हम आपस में ही लड़ने लग गए।”

अचानक मेरे दिमाग में बत्ती हुई। मैंने टीना को कहा, “अगर तुम्हारी भाभी सेठी साहब से बहुत इम्प्रेस हुई है और सेठी साहब से रातको मिलने के लिए भी तैयार हो गयी थी तो तुम क्यों ना उसे आधी रात को चुपचाप अकेले सेठी साहब के कमरे में ले जा कर उसे सेठी साहब से मिला दो और ऐसा कुछ जुगाड़ करो की सांप भी मरे और लाठी भी ना टूटे?” मैं जैसे तैसे अंजू को मामला शांत करना चाहता था।

मेरी बात सुनकर कुछ झुंझलाती हुई टीना बोली, “क्या बकते हो? मैं भाभी को सेठी साहब से रात को मिलाऊँ? भाभी तो वैसे ही उनसे मिलने के लिए बड़ी बेताब है। वह तो फ़ौरन तैयार हो जायेगी। भाभी बड़ी बेशरम, शरारती और शातिर है। अगर मैंने सेठी साहब से उसे रात को मिला दिया तो समझो हो गया काम तमाम। अगर मैंने ऐसा कुछ किया तो भाभी का कोई भरोसा नहीं। वह तो सारे कपडे निकाल कर सेठी साहब से लिपट ही जायेगी। इतना झंझट कम है की एक और झंझट पैदा करूँ? मतलब? तुम कहना क्या चाहते हो?”

मैंने बड़ी ही शांति से कहा, “थोड़ा ठंडे दिमाग से सोचो। अगर अंजू भाभी सेठी साहब से इतनी ज्यादा इम्प्रेस्सेड है और रात को वह उनके कमरे में जाने के लिए भी तैयार हो जाती है और जैसे तुम कह रही हो की वह तो अपने कपडे निकाल कर सेठी साहब से भी लिपट सकती है तो मतलब की तुम्हारी भाभी सब तरह से तैयार है। तुम समझ गयी ना मैं क्या कहना चाहता हूँ? तुम्हारे भाई कहीं टूर पर गए हैं।

वह है नहीं तो उन्हें कुछ भी पता चलेगा नहीं। तो तुम्हारी अंजू भाभी को अगर तुम सेठी साहब से रातमें मिला देती हो, तो जो होता है होने दो। भाभी भी खुश, सेठी साहब भी खुश, तुम्हारे भाई को भी पता नहीं चलेगा और उसमें हमारा क्या जाता है? अब हम तुम को ऐसी जलन से ऊपर उठ जाना चाहिए।

अंजू भाभी खुश होंगी और चुप रहेगी। वैसे भी अंजू भाभी तुम्हारे और सेठी साहब के बारे में जान ही गयी है। तो तुम भाभी को भी सेठी साहब से अच्छी तरह से मिला दो। तुम सोचो और जैसे ठीक लगे करना। यह तो मेरे दिमाग में एक बात आयी तो मैंने बतायी। बाकी आप भी सोचो की भाभी को कैसे शांत किया जाए।”

सामने से टीना का कोई जवाब नहीं आया। शायद वह मेरी बात को ध्यान से सुन कर उसके बारे में गंभीरता से सोच रही थी। कुछ देर बाद टीना ने अकुलाते हुए कहा, “पता नहीं यह भाभी बिच में कहाँ से आ टपकी? खैर, आपने कहा इसके बारे में मैं सोचती हूँ। अभी तो मेरा दिमाग बिलकुल काम नहीं कर रहा। मैं बाद में फ़ोन करती हूँ।” टीना ने यह कह कर फ़ोन काट दिया।

मैं टीना की उलझन समझ सकता था। एक तो जिंदगी में पहली बार मेरी बीबी किसी गैर मर्द से चुदवा रही थी ऊपर से कहते हैं ना की “प्रथम ग्राशे मक्षिका” (खाना खाने बैठे और पहले ही निवाले में मछली दिखी तो कैसा हाल होगा?) वैसे पहले ही अनुभव में टीना को भाभी की शरारत का सामना करना पड़ रहा था तो टीना का झल्लाना स्वाभाविक था। पर कहते हैं ना की फूलों के साथ साथ काँटों को भी स्वीकार करना पड़ता है। मैंने अपना काम कर दिया था। अब क्या मेरी बीबी मेरे आइडिया पर अमल करेगी? अगर करेगी तो देखना यह था की टीना मेरे आइडिया को अमली जामा कैसे पहनाती है।

अब मेरा ध्यान टीना इस नयी चुनौती का कैसे सामना करती है उस पर था।

प्यारे पाठकगण चलिए हम भी देखते हैं टीना कैसे इस चुनौती का सामना करती है उसे टीना से ही क्यों ना सुनें?

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