विधवा मां की उसके बॉस ने जब होली खेल कर ली

नमस्कार दोस्तों मैं दीप (बदला नाम) बिहार का रहने वाला हूं। मेरी उम्र अभी 33 वर्ष है लेकिन यह कहानी उस समय की है जब मेरी उम्र 14 वर्ष की थी।

मेरे परिवार में मैं तीन भाई हूं एक बहन (शादीशुदा) और विधवा मां है। मेरे पिता जी पुलिस में थे जिनकी हत्या गांव के ही कुछ अपराधियों ने कर दी थी उस वक्त मेरी उम्र महज 8 वर्ष की थी और मां उस वक्त 27 वर्ष की थी। भरी जवानी में विधवा हो गई थी मेरी मां।

वैसे मेरी मां बहुत ही संस्कारी थी और हाउसवाइफ थी। मेरे पिता की हत्या के लगभग 3 वर्ष बाद सरकारी प्रावधान के अनुसार अनुकंपा पर मेरी मां की नौकरी स्थानीय थाना में लग गई।

मेरी मां इन तीन वर्षो में किसी के साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाई थी और चूंकि उसके बदन की मालिश नहीं हो पा रही थी तो उसका बदन खास कर उसके चूची ढीले पड़ने लग गए थे।

जब वह नौकरी ज्वाइन की तो उसके थाने के कई स्टाफ्स उसके पीछे पड़े और लेनी चाही लेकिन मेरी मां किसी को कोई भाव नहीं दे रही थी। बात है होली आने वाली थी तो मैंने मेरी मां के स्वभाव में कुछ परिवर्तन देखा जैसे की वो थाने में मेरी मां के साथ काम करने वाली दो महिला के साथ ज्यादा दोस्ती और थानेदार की एक रखैल भी वहीं पास में रहती थी तो उसके घर भी आना जाना शुरू कर दी थी।

क्या खिचड़ी पक रहा था मुझे नहीं मालूम है। मैं अक्सर उस समय मां के साथ जाया करता था।

अब ज्यादा बोर नहीं करूंगा और आते हैं सीधे कहानी पर। बात होली के एक दिन पहले की है। इस दिन रविवार था। थाना पर सारे स्टाफ आए हुए थे चौकीदार और अन्य स्टाफ समेत करीब 50 से अधिक स्टाफ थे।

सबकी परेड हुई, हाजरी बनाई गई और उसी समय थानेदार ने मुंशी से कहा क्या कल होली है, कल तो सब आयेंगे नहीं आज ही होली खेलने का प्रबंध कर लो। उसके बाद थाना पर रंग गुलाल व्यवस्था की गई और सभी स्टाफ एक दूसरे के साथ होली खेलने लगे।

50 में से करीब 15 मर्द स्टाफ ने मेरी मां और अन्य दो महिला स्टाफ को भी गुलाल लगाया और उनके गाल को छुआ। फिर मेरी मां की सहकर्मी महिला जिसका नाम सुलेखा है ने थानेदार से पूछा कि सर आप केवल देख रहे हैं सबको होली खेलते आप नहीं खेलेंगे तो उसने कहा हां क्यों नहीं खेलेंगे चलो मेरे क्वार्टर में वहां खेलेंगे।

फिर क्या था वह खुश हो गई और मेरी मां के पेट में चुटकी काटते हुए बोली चलो सुनीता आज सर तैयार हैं खेलने के लिए।

फिर तीनों महिलाएं उनके क्वार्टर की तरफ जाने लगी तो मैं भी उनके साथ चला गया। वहां सब बाहर ही खड़े थे थानेदार अंदर जाकर ड्रेस चेंज कर गंजी और लुंगी में बाहर आ गया और बोला रंग घोल ली। पूरी एक बाल्टी रंग तैयार किया गया था।

अब थानेदार का शब्द बिलकुल ही बदला हुआ था बात बात पर गाली दे रहा था तीनों को। फिर। सुलेखा ने थानेदार को गुलाल लगाया तो उसने उसे तेरी बहन को चोदूं कहते हुए सुलेखा को पकड़ लिया और गाल को गुलाल लगाने के बहाने अच्छे से रगड़ा फिर ब्लाउज और पेट पर गुलाल लगाया।

उसके बाद तीसरी महिला को भी लगाया और अब बारी थी मेरी मां सुनीता की।

उसने सुलेखा को बोला इसे पकड़ो और बाल्टी उठा कर मेरी मां को अच्छे से रंग के पानी से नहला दिया। मेरी मां पूरी तरह से भींग गई। फिर उसने वहीं सबके सामने ही पकड़ कर अच्छे से ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर उसके चुचियों पर रंग लगाया और लगभग 5 मिनट तक मेरी मां को रगड़ा।

मेरी मां कसमसाती रही और बोलती रही कि बेटा देख रहा है तो सुलेखा बीच में आ गई और बोली ले अब नहीं देखेगा मैं बीच में खड़ी हो गई मजे ले।

लगभग 10 मिनट के रगड़ाई के बाद जब थानेदार ने मां को छोड़ा तो मेरी मां रंग में एक दम से भींगी हुई और हवस से भरी हुई थी। फिर थानेदार ने मां को बोला चल अंदर बाकी काम वहां।

इसी बीच सुलेखा ने कहा हां सुनीता इतनी भींग गई हो कैसे जाएगी जा अंदर कपड़े धो कर सूखने डाल दे एकाध घंटे में सुख जायेगा फिर घर चली जाना।

मां ने थानेदार से बोला कि कोई कपड़ा तबतक पहनने के लिए है तो थानेदार ने कहा तेरी बहन को चोदूं मैं आ रहा हूं जरूरत नहीं पड़ेगी।

मेरी मां अंदर चली गई और थानेदार मेरे साथ वहीं बाहर बैठ गया। करीब 10 मिनट बाद अंदर से कुछ आवाज आई तो थानेदार अंदर चला गया और करीब 5 मिनट बाद काफी फलों के साथ मेरे पास आया और मुझे देकर बोला ले बेटा यह खा तब तक मैं आता हूं और अंदर चला गया।

मैं किसी भी शक और किसी अन्य तरह की आशंकाओं से दूर बाहर बैठ कर फल खाने लगा। करीब 10 मिनट के बाद मुझे अंदर से मां की कराह की आवाज आई तो मैं अंदर गया तो देखा कि मेरी मां और थानेदार बिलकुल नंगे हैं और क्वार्टर के आंगन में ही पानी के हैंडपंप पकड़ कर मां झुकी हुई है और थानेदार पीछे से धक्के दे रहा है।

मैं वहीं खड़ा होकर देखने लगा। उस थानेदार ने उसी तरह से मेरी मां को पकड़ कर कभी चूचियां दबा रहा था तो कभी पेट रगड़ रहा था और जोर जोर से धक्के मार रहा था।

बीच बीच में मेरी मां मजे लेते हुए सिसकारियां मार रही थी और वह थानेदार एक से एक भद्दी भद्दी गालियां दे रहा था।

करीब 10 मिनट बाद वह थानेदार मेरी मां की कोरी चूत में झड़ गया। और मेरी मां वैसे ही चल कर बगल के बाथरूम में गई। जब वह बाथरूम जा रही थी तो मैंने देखा कि उसके दोनो टांगों के बीच पानी टपक रहा था।

फिर वह थानेदार वैसे नंगे ही अपना हाथ और लड धोया और हस कर मेरी मां को बोला कल भी आ जाना और भी मजे दूंगा फिर अपनी लुंगी उठाने लगा तो मैं बाहर आकर बैठ गया।

कुछ देर के बाद मेरी मां अपने कपड़े पहन कर उस थानेदार के साथ बाहर आई। दोनों हंस रहे थे और मेरी मां खुश भी दिखाई दे रही थी।

फिर वह थानेदार मेरे पास आया और मुझे 500 का नोट देते हुए कहा ले बेटा पिचकारी खरीद लेना।

अब अगली कहानी में बताऊंगा कि उसके बाद मेरी मां को चोदने के लिए जब वह थानेदार मेरे घर आ गया वो भी रात में तो क्या हुआ..

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