स्टूडेंट ने की टीचर की रंडी जैसी चुदाई

ही दोस्तों, मेरे लिए अपनी छूट और लंड को इंतेज़ार करवाने के लिए शुक्रिया. तो फाइनली मैं आ गया हू हॉट सेक्सी करिश्मा माँ और मेरी एक और चुदाई की कहानी लेके. इस कहानी को पढ़ने से पहले मैं चाहता हू, की लड़के अपना लंड हाथ में लेले, और लड़कियों की उंगली उनकी छूट में होनी चाहिए.

पिछली बार करिश्मा माँ के साथ अपने कॉलेज की क्लास में चुदाई करके अपने लंड का दीवाना बना दिया था. अब मेरे काफ़ी खर्चे मेरी रंडी मेरी करिश्मा माँ उठाने लगी. कॉलेज के बाद एक्सट्रा टुटीओन्स होती थी. और हम बिना कपड़ों के ही बैठे रहते थे.

मेरी रंडी इतनी बड़ी चुड़क्कड़ बन चुकी थी, की उसे मुझसे छुड़वाने का सिर्फ़ मौका चाहिए होता था. मैं जब भी होमवर्क नही करके आता था, तो मेरे हाथ बाँध के मेरे मूह पे बैठ जाती थी. जब तक मेरी साँसे ना फूले, वो रुकती नही थी, और मुझसे अपनी छूट चत्वती थी.

जिस दिन मैं होमवर्क करके आता था, या मेरे मार्क्स आचे आते थे, तो उस दिन तो मेरी मॅन पसंद पोज़िशन में हम चुदाई करते थे. कितनी बार ही हो गया था की मैं माँ के यहा ही रुक जया करता था. ठंडी का मौसम आ गया था, और फाइनल एग्ज़ॅम्स भी सर पे थे. लेकिन करिश्मा माँ को जमशेदपुर से कही बाहर जाना पद रहा था किसी मीटिंग के लिए.

मेरी रंडी ने मुझे साथ चलने को कहा. मैने माना नही किया क्यूंकी एग्ज़ॅम्स भी सर पे थे. माँ मुझे गाइड कर देती आचे से, और इतनी ठंडी में बिना कपड़ों के रहना का माँ जैसी माल के साथ मज़ा दुगना हो जाता है. मानो धरती पे जन्नत का एहसास हो. तो मैने दो टिकेट्स बुक की कोलकाता के लिए, और माँ को कन्फर्मेशन दे दिया.

अगले दिन सुबह की ट्रेन थी 10 बजे की, तो हम उस रात जल्दी सो गये. सुबह उठ कर हमने जल्दी से सब काम निपटाया, और 10 बजे की ट्रेन लेने के लिए रवाना हुए. ट्रेन में हमने उपर वाली सीट्स ली थी, ताकि ठंड में भी सेक्स का मज़ा ले सके, और जमशेदपुर से वैसे डोर नही था कोलकाता. कुछ घंटो में ही हम पहुचने वाले थे.

दोपहर के टाइम में हमे नींद आ रही थी, तो मैने करिश्मा माँ को उपर कुछ नही पहनने दिया. उनका टॉप मैने खोल दिया, और ब्रा भी हटा दी, और माँ की चूचियों को मसालते-मसालते चूस्टे-चूस्टे मुझे नींद आ गयी और जल्द ही माँ की भी आँख लग गयी थी.

अब जब हम उठे तो कोलकाता आने ही वाला था. तो माँ ने जल्दी से ब्रा और बाकी कपड़े पहने, और हम नीचे उतार गये. हमने अपना समान चेक किया और बैठ कर कोलकाता आने का इंतेज़ार कर रहे थे. तभी माँ ने मुझे इशारो में कहा वो वॉशरूम हो कर आ रही थी, और मैं समान का ध्यान रखू.

मेरे बाग में मेरी और करिश्मा माँ की एक न्यूड मॅगज़ीन मैने प्रिंट करवाई थी, वो थी, जो की मुझे पता चला किसी ने देखी थी. क्यूंकी मैने मॅगज़ीन को उल्टी रखी थी, और वो सीधी रखी हुई थी. तभी मेरी नज़र पास वाली एक लड़की पे पड़ी, जो की मुझे ही देख रही थी.

वो मुझे ऐसे देख रही थी मानो मुझसे कुछ चाहती हो. मैं उठ कर वॉशरूम की साइड जाने लगा, और वो मेरे पीछे-पीछे आने लगी. गाते के पास पहुच कर उसने धीरे से मेरे कानो में बोला-

लड़की: मैने तुम्हारी और तुम्हारी उस हॉट लड़की की न्यूड फोटोस देखी है. मैं भी तुम दोनो के साथ चुदाई में शामिल होना चाहती हू.

मैं: अछा, क्या तुम अकेली हो या कोई और है तुम्हारे साथ?

लड़की: नही मैं अकेली सफ़र कर रही हू, और तुम्हारी मॅगज़ीन देखने के बाद काफ़ी गरम हो गयी थी. इसलिए मैं भी तुम दोनो के साथ ये एक्सपीरियेन्स फील करना चाहती हू.

मैं: ठीक है, तुम अपना नंबर डेडॉ मुझे. मैं करिश्मा से बात करके तुम्हे अपने रूम में बुला लूँगा.

उसने बताया की वो कोलकाता में अलिपोरे के पास प्ग में रहती थी, और उसे कोई रिस्ट्रिक्षन्स नही थी. वो जब चाहे आ जेया सकती थी. हम बात कर रहे थे, और करिश्मा आ गयी.

करिश्मा: अर्रे सौरव, तुमने सारा समान चेक कर लिया ना, कुछ मिस्सिंग तो नही?

मैं: अर्रे नही करिश्मा, सब सही है. इनसे मिलो, ये भी हमारे साथ सेक्स करना चाहती है.

करिश्मा: वाह रे बहनचोड़ तेरी किस्मत. सेयेल सौरव कोलकाता में तू दो छूट मारेगा. हा अछा है तेरे इस लंड का मज़ा दूसरी लड़कियों को भी मिलना चाहिए.

लड़की: हा सौरव जी, आज मैं और करिश्मा आपके लंड से खेलेंगे.

बातें करते-करते स्टेशन आ गया, और हम उतार गये. उस लड़की ने मुझे गाल पे किस किया, और अपना लगेज लेके चल दी. उसने मुझे कहा की रात को 8 बजे के बाद मैं उसे कॉल करू, और वो हमारे साथ नाइट स्टे करेगी. मैं और करिश्मा भी वाहा से टॅक्सी पकड़ हॉवरह पहुँचे. वही पे हमने एक होटेल में रूम बुक कर रखा था. हमने चेक-इन किया, और अपने कमरे में आ कर रिलॅक्स करने लगे.

करिश्मा वॉशरूम में चली गयी शवर लेने के लिए, क्यूंकी सफ़र की थकान से उसे हेड पाईं कर रहा था. मैने भी अपनी शर्ट उतरी, और पीछे-पीछे चला गया. पता नही मुझे क्या हुआ करिश्मा के साथ नहाते-नहाते मेरा खड़ा हो गया. हलकी वो रेज़िस्ट कर रही थी, लेकिन मेरे लंड के आयेज उसकी नही चलती वो जानती थी.

मैने उसे गांद में थप्पड़ मारने शुरू किए. वो कुछ रिक्ट नही कर रही थी, बस माना किए जेया रही थी. मैने उसकी गांद पे और ज़ोर से थप्पड़ मारे जब तक गांद लाल नही हो गयी. अब मैने उसके बाल काससे, और उसे नीचे बिता दिया. फिर एक झटके में अपना लंड उसके मूह में डाल दिया. अब मेरा लंड पूरी तरह से सख़्त हो गया था, एक-दूं छोड़ने के लिए तैयार.

मैं जानता था जब तक मैं करिश्मा को छोड़ नही लेता, मेरा लंड शांत नही होगा. कुछ देर लंड चुसवाने के बाद मैने करिश्मा को गोद में उठा कर दीवार से लगा के ज़ोर-ज़ोर के धक्के मारने लगा. मैं आज एक-दूं रहम नही खाना चाहता था. मैने करिश्मा को आज रुलाने की तान ली थी.

फिर मैने कस्स-कस्स के थप्पड़ मारे करिश्मा को, और कस्स-कस्स के छोड़ने लगा. चूड़ते हुए अब करिश्मा भी मेरा साथ दे रही थी, और ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी-

करिश्मा: क्या हुआ सौरव, बेबी कोलकाता में आके इतना जोश आ गया तुममे. ऑश अया उम्म उम्म्म ओह एस मेरा प्यारा सौरव. आचे से छोड़ो अपनी करिश्मा माँ को. अपनी रंडी की छूट को प्यार करो. छोड़ो हा छोड़ो, श एस आ हा.

हमारी चुदाई की आवाज़ पुर बातरूम में गूँज रही थी. अब मैने पोज़िशन बदली, और डॉगी स्टाइल में घुटनो के बाल माँ को बिताया. मैने शवर चला दिया, और माँ की गांद और पीठ को तोड़ा गीला कर दिया. माँ के गीले बालों की खुश्बू मुझे मदहोश कर रही थी. मैने एक बार भी माँ की बालों को ढीला नही छ्चोढा.

बहुत ज़ोर से मैने माँ की बालों को कॅसा हुआ था. अब मैने अपना लंड फिरसे माँ की छूट में लगाया, और एक झटके में अंदर घुसा दिया. इस बार मैं माँ के बूब्स को बहुत ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था. माँ की चीख निकली-

करिश्मा: हाए सौरव, मेरे चूचे छ्चोढ़ दे राजा, दर्द हो रहा है.

मैने माँ को खींच के गांद के उपर मारा और माँ की आँखों से आँसू आने लगे थे. लेकिन मैं छोड़ने में मगन था.

मैं: रंडी साली, कोलकाता भी आई तो मुझे साथ लेके. इतना पसंद है ना मेरा लंड तुझे. तो अब चुप-छाप छुड़वा साली रंडी. एक दिन भी मेरे लंड के बिना तेरा गुज़ारा नही होता.

करिश्मा: हा राजा, तुझसे चूड़ने में जो मज़ा है, वो और कहा ह्म? ऊ आ उम्म एस छोड़ो मेरे राजा, तेरे लंड की रानी हू मैं.

कुछ देर और छोड़ने के बाद माँ ने पानी छोढ़ा. ये तीसरी बार था जब माँ को पाईं हो रहा था, और मैं भी अब झड़ने वाला था. मैने बोला-

मैं: मूह खोल साली, मेरा पानी पिएगी आज तू. नही तो रंडी बन के घूमना.

और ये बोल के मैने अपना सारा गरम स्पर्म माँ के मूह में डाल दिया. अब माँ कपड़े पहनने जेया रही थी. मैने माँ के कपड़े लिए, और शवर के नीचे पुर गीले कर दिए.

मैं: साली रंडी, बिना कपड़े के बाहर निकल. चल चुप-छाप बिस्तर पे ब्लंकेट के अंदर. कपड़े नही पहनने मिलेंगे तुझे आज साली रंडी. तेरे नखरे निकालने पड़ेंगे.

हम दोनो बाहर आए, और बिना कपड़ो के बिस्तर पर सो गये.

तो ये थी मेरी और करिश्मा माँ की एक और चुदाई की कहानी. अब अगले पार्ट में मैं बतौँगा कैसे उस लड़की को भी मैने बुलाया, जो ट्रेन में मिली थी, और हम तीनो ने कैसे रात साथ बिताई. ये स्टोरी कैसी लगी मुझे ज़रूर बताईएएगा, और एक बात की मैं कुछ महीनो के लिए कोलकाता में ही हू, तो कोई भी अनसॅटिस्फाइड लड़किया है तो मुझे मैल करे [email protected] पर. मैं उन्हे करिश्मा माँ से भी ज़्यादा प्यार करूँगा.

यह कहानी भी पड़े  भाभी की छोटी सी चूत मे सेठी साहब का बड़ा लंड


error: Content is protected !!