सोनिया की चुदाई की कहानी

मेरा नाम अनिल है और मैं पहली बार अपने ऐसे किस्से को लिख रहा हूं जो मैं कभी नहीं भुला सकता । मैं आशा करता हूं कि आप इनको समझेंगे और अपने जीवन की घटना के साथ इनकी तुलना कर पायेंगे।

मैं ऐसे ऑफिस में काम करता हू। जहां काम करने वालों में लड़कियों व लड़कों की संख्या बराबर है । अधिकतर लड़कियां मिडल क्लास खानदानों से हैं जिस के कारण “सदाचार” का बहुत असर है चाहे आजकल के मॉर्डन ज़माने में इनका कोई मुल्य नहीं है । परन्तु इन सब लड़कियों में सोनिया बिलकुल अलग है । वह काफी स्लिम है परन्तु उसके मम्मे और चूतड़ लाजवाब हैं । वह ५ फुट ३ इंच ऊंची है और उसकी छाती धरती की खींच को भी झुठला देती है। किस्सा तब शुरू हुआ जब हम दोंनों को किसी मीटिंग के लिये लन्च टाइम पर जाना पड़ा। जैसे आमतौर पर होता है मीटिंग कुछ घंटे चली और हम दोनों को बहुत भूख लग रही थी। कार की तरफ जाते हुये मैंने सोनिया को कहा कि विम्पी या मैकडौनल्ड या के०एफ०सी० जो पास में थे जा कर नाश्ता कर लेतें हैं। सोनिया बरगर नहीं खाना चाहती थी इस लिये हम के०एफ०सी० में घुस गये और क्रिस्पी चिकन ऑर्डर किया। कुछ देर बातें करते वार्तालाप कॉलेज ब्वायफ्रैन्डो इत्यादि की तरफ बढ़ा। सोनिया ने बताया कि उसके कई पुरूष दोस्त हैं पर कोई ऐसा नहीं जिसे ब्वायफ्रैन्ड कहा जा सके।

यह तो हर भारतीय लड़की से समाज की चाह है कि उसके मां बाप उसके लिये एक लड़का ढूंढे और शादी करवा के लड़की को ऐसी ज़िदगी में धकेल दें जिस में उसकी बिलकुल नहीं चलती। खुशी या निरार्शा पति व ससुराल के अत्याचार्र किसी पर उसकी सुनवाई नहीं होती। सोनिया ने मुझे बताया कि उसके पिताजी का देहांत तकरीबन दो वर्ष पहले हो गया था और घर पर सबसे बड़ी है। घरबार उसकी कमाई से ही चलता है। हालंकि अपनी ज़िन्दगी से उसे कोई शिकायत नहीं है पर उसके भाईयों का पढ़ाई छोड़ना और दोस्तों के साथ गुलछर्रे मनाना सबसे बड़ी समस्या है। इस कारण शादी की तरफ तो सोनिया का ध्यान ही नहीं गया। चाहे उसकी आजकल की ज़िन्दगी कोई खास अच्छी नहीं है पर वह शादी से बहुत डरती है क्योंकि क्या पता उसका शौहर उसे प्यार करेगा या उसे बस एक अपनी हवस उतारने का साधन या बच्चे पैदा करने वाली मशीन बना के रख देगा। मैंने सोनिया को २५ वर्ष की आयु में भी समझदार और दूरदर्शी पाया। जैसे जैसे बातें होती रहीं कुछ देर बाद र्वातालाप सेक्स के विषय के आस पास मंडराने लगा। जैसे कि सोनिया ने कहा कि वह ढीले ढाले कपड़े इस लिये पहनती है क्योंकि उसकी चूचियां बड़ी हैं और बसों में सफर करते हुये वह अपनी तरफ ध्यान आर्कशित नहीं करना चाहती।

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उसने यह भी कहा कि वह टाइट ब्रा पहनती है क्योंकि जब उसे भाग कर बस पकड़नी होती है तो उसकी चूचियां उछलती हैं। मैंने देखा खि जब सोनिया बातें कर रही थी तो उसने अपने कंधे पीछे कर दिये थे और उसके दुधिया रंग की चूचियां कपड़ों मैं से उभर कर दिख रही थी। उसके निप्पल उभरे हुये थे और जब वह चिकन अपने रसीले अधरों से चूस चूस कर खा रही थी तो मेरा लण्ड अपने आप खड़ा होना शुरू हो गया। मैंने जब उसे बताया तो उसने शरमा कर अपना सिर मेरी तरफ घुमाया। उसकी सुन्दर मुखड़े से साफ ज़ाहिर था कि वह खुश थी कि उसने एक मर्द को उतेजित किया। वह बोली “आप मुझे अच्छे लगते हो परन्तु आप तो शादी शुदा हो। आप अपने जैसा कोई लड़का मेरे लिये क्यों नहीं ढूंढ देते।” खैर बातें करते करते इतना समय बीत गया कि हमंे एहसास हुआ कि शाम हो चुकी है और सोनिया को घर पहुंचना है। चूंूकि हम दोनो का जल्दी अलग होने का मन बिलकुल नहीं था मैने उसे घर छोड़ने का प्रस्ताव दिया। वह कार में आगे की सीट पर बैठ गयी और मैंने गाड़ी चलायी। चलाते हुये मैंने देखा कि वह कनखियों से मेरी लातों के बीच बार बार नज़र मार रही थी और मैं भी उसकी प्यारी चूचियां जो इतनी उभर रहीं थी निहार रहा था। उसके निप्पल भी एैसे तने हुये थे जैसे कि ब्रा और कमीज़ में छेद कर देंगे। वह अपनी लम्बी व सुन्दर जांघों को कभी एक दूसरे के उपर रख रही थी और कभी उतार रही थी और ऐसे करते हुये बहुत सैक्सी लग रही थी। पर उस दिन और कुछ नहीं हुआ पर एक दूसरे का साथ हमें इतना अच्छा लगा कि हमने यह निश्चय किया कि हम ऑफिस के बाहर फिर मिलेंगे।

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स्वभाविक था कि सोनिया के इस बात का डर था कि कोई हमें देख न ले इस लिये यह भी तय हुआ कि जब भी हम बाहर निकलेंगे कार में लम्बी सैर के लिये चलेंगे। कुछ दिनों बाद हमने बाहर मिलना शुरू कर दिया। शहर के बाहरी तरफ जा कर हम खूब गप्पें मारते थे। हमारी बातें अपने परिवार अपनी समस्याआ। खास कर अपनी कामनाआ के बारे में थी। सोनिया अभी कुंवारी थी परन्तु उसे सैक्स का बहुत सीमित ज्ञान था। यह स्थिति हर मिडल क्लास घर में पायी जाती है। मैं तो उसके स्तनों के साथ खेलने उसके कोमल अधरों को चूमने नर्म जांघों को सहलाने। उसकी पैंटी में घुसने के लिये बहुत तत्पर था परन्तु सीधापन देख कर मैंने निश्चय किया कि हर काम आहिस्ता होना चाहिये। वैसे भी मैं इस बात में विश्वास रखता हूॅं कि सैक्स और इश्क की पूर्ती तभी होती है जब दोंनो भागीदार बराबरी से शरीक हों। मैं चाहता था कि सोनिया प्यार के बुखार में बहुत गर्म हो। जो न तो औफिस और न ही शहर में हो सकता था कियोंकि समाज की रोकें ऐसा होने नहीं देंगी। बातों के दौरान यह भी बिना बोले स्पष्ट था की जीवन की नइय्या पर इस नाते का कोई असर नहीं होना चाहिये। ना तो मेरी शादीशुदा ज़िदगी पर और ना सोनिया के लड़का ढूंढने के संयोगों पर। सोनिया अपने तरीकों से मेरी तरफ आकर्षण का इज़हार करती थी। जैसे कि मेरे कोट से धागे के कतरे हटाना या मेरी मूंछों से खाने का कतरा साफ करना इत्यादि और मैं भी उसकी पीठ पर हक से हाथ फेर कर या सड़क पार करते हुये उसके प्यारे नितंबों पर हाथ रख कर जैसे उसे पार करवा रहा हूं। जब भी उसके नितंबों को दबाता था तो ऐसा लगता था कि मैं सातवें आसमन में पहुंच गया हूं कसे और गोल और फिर भी इतनी नर्म और मखमली।

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