शाहिद को अम्मी ने खुश कर दिया

हाय रीडर्स. मेरा नाम शाहिद है। दोस्तों आप सच माने या झूठ. मैं आप को कभी ये नही कहना चाहता के आप भी ऐसा ही करना जेसा मैंने किया या ज़िंदगी ने मुझसे कराया लेकिन शायद आप को मैं ये समझा सकूँ और इसलिये ये आप को बता रहा हूँ ताकि शायद इस तरह मेरा गुनाह कुछ
कम हो जाये. यह जो कुछ भी हुआ यह कहानी नही बल्कि आपबीती है एक मजबुर इंसान की. उस वक़्त मैं 18 साल का था. और 12वी के पेपर दे चुका था.

मेरे अलावा मेरे घर मैं मेरी अम्मी जी और छोटी बहन रहते थे. मेरा एक बड़ा भाई भी है जो दुबई रहता है और मेरे अब्बू जी मर चुके हैं 5 साल पहले. मेरे बड़े भाई का नाम महमूद है,मेरी अम्मी जी का नाम सजदा है और मेरी छोटी बहन का नाम रेहाना है. रेहाना 9वी क्लास मैं पढ़ती है. और मेरे साथ बहुत शरारत करती है. और घर मैं सबकी लाड़ली है मैं अगर कभी गुस्से मैं उससे कुछ कह दूँ तो अम्मी जी से मुझे बहुत डाट पड़ती है। लेकिन वेसे देखा जाये तो अम्मी जी मुझ से कुछ ज्यादा प्यार करती थी. जेसा की अक्सर घरो मैं होता है. इन दिनो में किसी काम से बाहर था और मैंने नया नया काम शुरु किया था इसलिये मेरा दिल और क़िसी चीज़ की तरफ लगता ही नही था बस हर वक़्त दिमाग में बस यही चीज़ रहती थी की मेरे सभी दोस्तो के गर्ल फ्रेंड्स थी पर मैं इस मामले मैं भी काफ़ी बुज़दिल निकला था इसलिये बस सोचने से ही काम चलता था. और वेसे भी मैं घर से कम ही निकलता था. क्योकी मेरे कोई ज़्यादा दोस्त भी नही थे बस शाम को थोड़ी देर के लिये जाता.
मैं बहुत ज़्यादा अच्छा लड़का नही था और अम्मी जी की बात भी नही सुनता था. और इस बात पर वो अक्सर दुखी भी रहती और कहती तुम्हारे अब्बू जी भी नही हैं तुम तो मेरी बात सुना करो बस अगर मेरा मूड होता तो मानता वरना नही. एक दिन अम्मी जी ने मुझे किचन से आवाज़ दी बेटा एक बात सुनो ज़रा, मेरा लंड उस वक़्त खड़ा था मैं जाना नही चाहता था लेकिन अम्मी ने जब गुस्से से बुलाया तो मैं चला गया. मैंने अपने आगे अपने दोनो हाथ बाँध रखे थे ताकि पेन्ट मैं से मेरा खड़ा लंड नज़र ना आये.लेकिन जब मैं किचन में गया अम्मी ने नीचे देखा तो फिर बड़ी गौर से मेरी तरफ देखा मेरे ख्याल में उन्हे शक़ हो गया था आख़िर वो बच्ची नही थी. उन्होने कहा फ्रिज से पानी की बोतल निकाल दो मैंने जल्दी से बोतल निकाल कर दी और किचन से बाहर आ गया मैं बहुत शर्मिन्दगी महसूस कर रहा था.
फिर एक दिन टी.वी देखते हुये मेरा लंड खड़ा हो गया उस वक़्त अम्मी जी बिल्कुल मेरे साथ बेठी हुई थी और मैंने क्योकी ट्राउज़र पहना हुआ था और उस में से खड़ा लंड साफ नज़र आता है मैंने हाथ से छुपाने की बड़ी कोशिश की लेकिन अम्मी जी की नज़र पड़ गयी. और उन्होने मुझसे कोई बात किये बिना टी.वी बन्द किया और उठ कर चली गयी इससे मुझे अंदाज़ा हो गया की उन्होने कुछ देखा है. एक दिन रेहाना मुझसे शरारत कर रही थी की मेरा हाथ उसके पेट पर लगा तो पहली बार मैंने उसके लिये कुछ महसुस किया लेकिन मैंने इस ख्याल को ये सोच कर छोड़ दिया की वो मेरी बहन है. अब मैं भी नोट कर रहा था की अम्मी जी अब मुझ पर नज़र रखती थी और मेरी हरकत नोट कर रही थी. यह गर्मियो के दिन थे और सख़्त गर्मी पड़ रही थी. अम्मी जी किचन मैं दोपहर के लिये खाना बना रही थी की मैं किचन मैं गया लेकिन अम्मी जी की तरफ देख कर एक़दम मुझे झटका लगा वो पसीने मैं नहा रही थी और उनके पूरे कपड़े गीले हो कर जिस्म से चिपके हुये थे जिसकी वजह से उनके जिस्म का पूरा दीदार हो रहा था। मैं जल्दी से किचन से बाहर आ गया मैं अम्मी जी को ऐसे नही देखना चाहता था लेकिन मेरे दिमाग मैं कोई गलत ख्याल नही आया था क्योकी मैं ऐसा सोच भी नही सकता अपनी अम्मी जी के बारे मैं.
इसी तरह दिन गुज़रते रहे और कोई छोटी मोटी बात बीच मैं हो जाती. जेसे एक दिन दोपहर मैं बिजली चली गयी उस दिन बहुत तेज की गर्मी थी हर तरफ़ से पसीना बह रहा था. अम्मी जी बार बार कह रही थी उफ़ यह गर्मी तो आज जान ले लेगी. अरे शाहिद बेटा तुम तो शर्ट उतार दो. अच्छा अम्मी जी और मैंने अपनी शर्ट उतार दी खैर अम्मी जी नहाने चली गयी थोड़ी देर बाद उन्होने बाथरूम से आवाज़ दी शाहिद मुझे टावल तो देना मैं ले जाना भूल गयी हूँ. मैं उन्हे टावल देने गया तो उन्होने बाथरूम मैं से अपना हाथ बाहर निकाला जिस पर साबुन लगा हुआ था और मुझसे टावल ले लिया. उस दिन रात को अम्मी जी ने मुझे अपने कमरे मैं बुलाया और कहा बेटा ज़रा मेरी टाँगे और हाथ दबा दो आज मैं बहुत थक गयी हूँ. मुझसे नही होता अम्मी जी आप रेहाना को कहीये ना. नही बेटा वो सो गयी है उसे सुबह स्कूल जाना होता है, चलो यहाँ आओ काम चोरी ना किया करो.
अम्मी जी एक तो आप भी ना हर वक़्त तंग करती रहा करिये. और मैं बेड पर बेठ कर उनकी टाँगे और हाथ दबाने लगा. शाहिद थोड़ा ज़ोर से दबाओ. अम्मी जी मुझसे तो ऐसे ही दबता है नही दबवाना तो ठीक है. अच्छा तू ज्यादा बाते ना कर और दबा. यह मेरी सलवार को थोड़ा थोड़ा उपर कर ले और अम्मी जी ने अपनी कमीज के बाज़ू भी कोहनियो तक उपर कर लिये और मैंने उनकी शलवार को भी थोडे ऊपर कर दिया और उनके मोटे मोटे बाज़ू और टाँगे दबाने लगा. थोरी देर बाद अम्मी जी ने कहा अब बस करो और सो जाओ बहुत देर हो गयी है. मैं सोने जाने लगा तो वो बोली चलो आज यहीं सो जाओ. मैंने कहा जी लेकिन मुझको अपने कमरे मैं सोना है. शाहिद कभी बात मान भी लिया करो वेसे भी मुझे तुम से कुछ बात करनी है. मैंने थोड़े गुस्से और लापरवाही से कहा अच्छा इधर ही सो जाता हूँ. और मैं अम्मी जी के साथ उनके डबल बेड पर लेट गया.
अम्मी बोली : शाहिद तुम्हारी शादी कर दूं.
शाहिद : आज आप को मेरी शादी का ख्याल कहाँ से आ गया वो भी इस वक़्त.
अम्मी जी : बस आ गया क्यो तुम को शादी नही करनी
शाहिद : जी करनी तो है पर इतनी जल्दी नहीं.
अम्मी जी : अच्छा तो यह जल्दी है. तुम 18 साल के हो गये हो. और वेसे भी मैंने कुछ दिनो से महसुस किया है की अब तुम्हारी शादी कर देनी चाहिये.

शाहिद : मैं दिल मैं थोड़ा सा शर्मिन्दा भी हो गया लेकिन मैंने छुपाते हुये कहा जी वो बस अभी रहने दे इस बात को. वेसे भी शादी के बाद आदमी की आज़ादी और खुशियाँ सब ख़त्म हो जाती हैं.
अम्मी जी: ओये यह तुम से किसने कहा की मैं खुश नही हूँ.
शाहिद : जी वो तो हैं.
अम्मी जी: हाँ वेसे तुम कहते सही हो शादी के बाद इंसान की खुशीया ख़त्म हो जाती है अगर ओलाद तुम जेसी हो जो मेरी कोई बात नही सुनते.
शाहिद : अम्मी जी आप फिर शुरु हो गयी .
अम्मी जी : बेटा तुम से किसने कहा है मैं खुश हूँ हाँ यह सच है मैं खुश नहीं हूँ. और इसकी एक वजह तुम भी हो.
शाहिद : और दूसरी वजह अम्मी जी
अम्मी जी : वो भी कोई है तुम छोड़ो इस बात को बेटा थोड़ा सा माँ का ख्याल भी कर लिया करो.
अच्छा अच्छा अब लेक्चर देना बस भी करो मुझे नींद आ रही हैं. और मैं करवट बदल कर सो गया. अगले दिन रेहाना स्कूल से जल्दी घर आ गयी और उसने बताया की कल उनके स्कूल वाले उन सब को ट्रिप पर कही ले जा रहे हैं दो दिनो के लिये इसलिये आज जल्दी छुट्टी दे दी है. लेकिन अम्मी जी को मनाना मुश्किल था. रेहाना ने मुझे कहा भाई आप कुछ करिये. मैं अम्मी जी के पास गया और उनसे कहा अम्मी जी प्लीज रेहाना स्कूल ट्रिप के साथ जाना चाहती है उसे जाने दे. शाहिद मैं उसे इजाज़त नही दे सकती. अम्मी जी प्लीज. शाहिद तुमने कभी मेरी कोई बात मानी है जो मैं मानू. मैंने हसंते हुये कहा अच्छा आगे से मानूंगा. मैं जानती हूँ तुम झूठ बोल रहे हो लेकिन चलो तुम्हे अज़मा लेते है. ठीक है मेरी तरफ़ से रेहाना को इजाज़त है. मैं रेहाना के कमरे मैं गया और उसे यह खबर दी वो बहुत खुश हुई और बोली थैंक यू भाई. कोई बात नही और मैं नई शरारत से उसके मुँह पर हल्का सा थपड़ मारा. भाई मैं तुम्हे छोडूगी नही. मैं ज़ोर से हंसा. अगले दिन सुबह सुबह रेहाना चली गयी .
अब अम्मी जी ने मुझे कहा अब तुम बाहर ना जाना दो दिन मैं घर मैं अकेली हूँ. अच्छा तो अब मैं आप की चोकीदारी के लिये बेठा रहूं. शाहिद तुम हर बात का उलटा जवाब ना दिया करो मैं तुम्हारी माँ हूँ कभी सही तरह भी बात किया करो. अच्छा ठीक है ठीक है. उस दिन अम्मी जी ने मेरी पसन्द का खाना बनाया. और जब मैं खाना खा चुका था तो मेरी झूठी प्लेट मैं उन्होने खाना शुरु कर दिया. शाम को अम्मी जी जब चाय बना रही थी तो वो एक खाली कप ले कर बाथरूम मैं चली गयी और फिर जब वो थोड़ी देर बाद बाहर आईं तो मैं ये देखने के लिये उठा की कप मैं क्या है तो कप मैं दूध था. मैंने पूछा यह बाथरूम से दूध कहाँ से आया. क्यो तुम्हे क्या और फिर अम्मी जी ने वो दूध चाय मैं डाल दिया. जब मैं चाय पी रहा था तो अम्मी जी ने मुझसे पूछा आज चाय का स्वाद केसा है अच्छा है ना. हाँ लेकिन आज आपने इस मैं कुछ ख़ास डाला है क्या. हाँ यही समझ लो. और वो मेरी तरफ देख कर थोड़ा सो मुस्करा दी.
अम्मी जी : बेटा उस दिन मैंने तुम से तुम्हारी शादी की बात की थी याद है ना तुम्हे
शाहिद : जी हाँ याद है. तो फिर
अम्मी जी : तो फिर क्या तैयारी कर लो.
शाहिद : जी पर किससे और इतनी जल्दी अभी मेरी उम्र ही क्या है.
अम्मी जी : अच्छा जी चलो नही करती तुम्हारी शादी मगर?
शाहिद : मगर क्या. आप खामोश क्यो हो गयी हैं.
अम्मी जी : चलो छोड़ो बाद मैं बात करेगे.
शाहिद : अच्छा जेसी आप की मर्ज़ी.
तो दोस्तों अम्मी जी सुबह से काफ़ी परेशानी में इधर उधर फिर रही थी आख़िर मैंने पूछ ही लिया क्या बात है. वो बोली बेटा आज सुबह से ही मेरी कमर मैं दर्द है रेहाना भी नही है वरना वो थोड़ी
सी मालिश कर देती अगर तुम कर दो तो लेकिन मैं जानती हूँ तुम्हे माँ का ख्याल कहाँ है. अच्छा अच्छा हर वक़्त गुस्सा ना करती रहा करो चलो. अम्मी जी अपने बेड पर उल्टा लेट गयी मैंने उनकी कमीज़ थोड़ी सी उपर उठाई और आहिस्ता आहिस्ता मालिश करने लगा के मेरी नज़र अम्मी जी के कुल्हो की तरफ गयी जहाँ से सलवार थोड़ी सी नीचे गयी हुई थी पहली दफ़ा उस वक़्त मुझे दिल मैं कुछ महसुस हुआ और मेरा लंड खड़ा हो गया. अब अम्मी जी ने अपनी कमीज़ और उपर कर ली और उनका सफेद ब्रा नज़र आने लगा. मुझे पसीना आ गया और शायद अम्मी जी ने भी यह बात महसूस कर ली और मुझे कहा शाहिद क्या हुआ ए.सी चालू कर लो अगर गर्मी है तो और फिर वो मुस्कुरा दीं. और फिर अचानक वो उठ कर बेठ गयी और बोली शाहिद एक बात कहूँ अगर गुस्सा ना करो तो.

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मेरे उस वक़्त वेसे ही पसीने छूट रहे थे मैंने कहा बोलीये. तुम शादी कर ही लो. आप फिर. तुम फिर गुस्सा हो रहे हो. वेसे भी तुम्हारी यह हालत देख कर ही मैं तुम्हे सुझाव दे रही हूँ. कोन सी हालत मैंने अंजान बनते हुये कहा. उन्होने मेरे बाल ठीक करते हुये कहा बेटा मैं तुम्हारी माँ हूँ मैं सब जानती हूँ. आप पता नही क्या जानती हैं मुझे कुछ समझ नही आ रहा और मैं शर्मिन्दगी छुपाने के लिये कमरे से बाहर आ गया. और पूरा दिन अपने कमरे मैं बेठा रहा और सोचता रहा यह सब अम्मी जी क्यो कह रही हैं. शाम को अम्मी जी मेरे कमरे मैं आईं और बोली शाहिद क्या हुआ आज तुम ने खाना भी नही खाया. सुबह से कमरे मैं बेठे हो. कुछ नही शान्ति से कमरे मैं तो बेठने दो। अरे बेटा मैंने तो ऐसे ही पूछ लिया था. तुम तो हर वक़्त नाराज़ ही रहते हो. चलो आओ बाहर कुछ खा लो. अच्छा चलो. अम्मी जी ने मुझे कुछ खाने को दिया और खुद मेरे पास बेठ कर मुझे देखने लगी. मैं बोला अब आप मुझे क्यो घूर रही है. नही मैं तो सिर्फ़ कहना चाहती थी तुम्हे पेसे तो नही चाहिये. पेसे किस को नही चाहिये. अच्छा ठहरो और वो अंदर चली गयी और वापस आ कर मुझे 5 हज़ार रुपए दिये. मैं हेरान हो कर उन्हें देखने लगा. तो वो बोलीं मैंने सोचा तुम्हे ज़रूरत होगी. शुक्र है आप को भी यह एहसास हुआ.
बेटा मुझे तो शुरु से ही एहसास है बस तुम ही. अच्छा ठीक है सुन लिया और मैं पेसे ले कर बाहर निकल गया. पीछे से अम्मी जी की आवाज़ आई जल्दी वापस आ जाना मैं अकेली हूँ. मैं रात को देर से वापस आया. अम्मी जी मेरा इंतज़ार कर रही थी वो बोलीं तुम्हे समझ में नही आता मैंने कहा था जल्दी आना. और उन्होने मुझे थोड़ा सा डाट दिया. और मैं गुस्से मैं अपने कमरे मैं चला गया. वो थोड़ी देर बाद मेरे कमरे मैं आईं और कहा चलो खाना खा लो और आज मेरे कमरे मैं ही सो जाना. मैं गुस्से से बोला मुझे खाना नहीं खाना है और ना ही आप के कमरे मैं सोना है आप चली जाओ मेरे कमरे से मैंने यह सब काफ़ी ऊँची आवाज़ मैं कहा.
ऐसे वक़्त मैं रेहाना मुझे राज़ी कर लेती थी लेकिन आज वो भी नही थी. अगले दिन मैं सो कर उठा तो रेहाना वापस आ चुकी थी. उसने मुझे सलाम किया और मेरे सर पर थप्पड़ मार कर भाग गयी शरारत से. मैं भी उसके पीछे भागा. उसके बाद हम दोनो ने नाश्ता किया. उस दिन के बाद अम्मी जी बहुत कम बोलती और ज्यादा वक़्त खामोश ही रहती. बल्कि वो रेहाना से भी कम ही बात करती. मैं अपनी मन मर्ज़ी करता रहा और उन्होने अब मुझे क़िसी भी बात पर मना करना और समझाना भी छोड़ दिया. यानी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दिया लेकिन रेहाना मुझे बताती थी की अकेले मैं अम्मी जी रोती रहती हैं की मैं उनकी बात नही सुनता. खैर इसी तरह दिन गुज़रते रहे और मैं कॉलेज जाने लगा. रेहाना भी 12वी मैं चली गयी .

फिर एक दिन अम्मी जी और रेहाना दो दिन के लिये हमारे एक दूर के रिश्तेदार चकवाल में रहते हैं दो दिन के लिये उनके पास गये। उन के क़िसी बेटे की शादी थी. खैर दो दिन बाद अम्मी जी और रेहाना शाम के वक़्त वापस आ गये. उनकी वापसी के बाद कुछ दिन से मैं अम्मी जी मैं काफ़ी चेंजिंग देख रहा था. पहले वो बहुत चुप रहने लगी थी लेकिन अब अचानक वो फिर पहले की तरह बोलने लगी बल्कि पहले से भी ज़्यादा लेकिन अब वो मुझे क़िसी काम से भी रोकती नही थी मैं जो चाहता करता. मैं काफी हेरान था लेकिन जो था अच्छा ही था. फिर एक दिन जब रेहाना स्कूल गयी हुई थी अम्मी जी मेरे कमरे मैं आईं और मेरे पास बेठ गयी और बोलीं. शाहिद बेटा क्या कर रहे हो. कुछ नही मैंने कहा.
अम्मी जी : आज मुझे तुम से बहुत ज़रूरी बात करनी है.
शाहिद : जी बोलीये.
अम्मी जी : बात ये है बेटा नाराज़ ना होना. आज जो बात मेरे दिल मैं है मैं तुम्हे सच सच बताना चाहती हूँ आगे तुम्हारी मर्ज़ी तुम जो चाहे कहो.
शाहिद : आप बोलीये क्या बात है.
अम्मी जी : बेटा तुम्हारे बाप को मरे काफ़ी वक़्त गुज़र गया है और मैं अकेली हूँ हाँ ये सच है की मैं तुम्हारी माँ हूँ लेकिन यह भी सच है की मैं एक औरत हूँ और एक इंसान हूँ मेरी भी कोई खुशी है मेरे एक दिल भी है जो धड़कता भी है. मेरी भी पसंद और ना पसंद है.
शाहिद : हाँ जी वो तो ठीक है लेकिन आप ये सब मुझे क्यो बता रही हैं.
अम्मी जी : इसलिये बेटा की तुम्हे समझाने की मैंने बहुत कोशिश की लेकिन तुम समझे ही नही इसलिये अब मुझे सब कुछ तुम्हे खुद बोलना पड़ेगा.
शाहिद : अब बता भी दो.
अम्मी जी : अच्छा एक बात सच सच बताओ बिना क़िसी शर्म के. यह बताओ तुम जवान हो क्या कभी तुम ने क़िसी लड़की से कुछ किया है.
शाहिद : यह आप क्या कह रही हैं. मैंने हेरान होते हुए पूछा.
अम्मी जी : अच्छा छोड़ो क्या तुम क़िसी बड़ी उम्र की औरत से कुछ ऐसा करना पसंद करते हो.
शाहिद : जी क्या. यह आप क़ेसी बाते कर रहीं हैं. की अचानक अम्मी जी ने अपना हाथ मेरी पेन्ट पर मेरे लंड पर रख दिया. मुझे अचानक झटका लगा. मुझे कुछ समझ नही आ रही था की क्या करूँ मेरी आवाज़ ही नही निकल रही थी.
मैं इसी तरह खामोशी से बेठा रहा और अम्मी जी मेरे लंड को मसलती रही पेन्ट के उपर से ही. अब मेरे बर्दाश्त से बाहर होये जा रहा था में सब भूल जा रहा था की यह मेरी माँ है. मैं पागल होया जा रहा था. मैंने अम्मी जी के बोबो को चाटना शुरु कर दिया. मैं बेड पर लेट गया और अम्मी जी मेरे उपर लेट गयी और मेरे पूरे जिस्म को चाटना शुरु कर दिया उसके बाद उन्होने मेरी पेन्ट की चैन खोली और अपना हाथ अन्दर डाल दिया और मेरे लंड को मसलना शुरु कर दिया. अम्मी जी और मैं हम दोनों पागल हो रहे थे. फिर अम्मी जी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये और अपने भी। अब मैं बिल्कुल नंगा था अम्मी जी सिर्फ़ ब्रा और पेन्टी मैं थी.
मैंने उनकी पेन्टी और ब्रा उतार दिये अब उनके बड़े बड़े बूब्स लटकने लगे. और उनकी चूत पर थोड़े थोड़े बाल थे. उन्होंने मेरा मुँह अपने बूब्स के साथ लगा दिया मैं उनके बूब्स को चाटने लगा और मुँह मैं डालने लगा. फिर मैंने उनके पूरे जिस्म पर शहद डाला और उनका पूरा जिस्म चाटा फिर अम्मी जी ने भी ऐसा ही किया. मैंने उन्हें सीधा लेटा कर उन की चूत मैं अपना लंड डाला. और उनके मुँह मैं अपना मुँह डाल कर किस करने लगा और मेरा हाथ उनके बोबो पर था. हम 2 घंटे तक एक दूसरे के साथ खेलते रहे फिर रेहाना के स्कूल से वापस आने का वक़्त हो गया इसलिये अम्मी जी ने मुझे कहा अब बस करते हैं और वो कपड़े पहन कर बाहर चली गयी .
मैंने भी अपने कपड़े पहने. लेकिन मैं बाहर नहीं गया बल्कि अपने कमरे मैं ही बेठा रहा. थोड़ी देर बाद रेहाना भी आ गयी. मुझे अभी तक यक़ीन नही आ रहा था की मैने ये क्या किया है और वो भी अपनी माँ के साथ. मैं पूरा दिन कमरे मैं बेठा रहा कुछ शर्मिन्दगी भी थी. लेकिन मज़ा भी तो बहुत आया था. शाम को अम्मी जी मेरे कमरे मैं आईं और बोली क्या हुआ शाहिद बाहर क्यो नही आ रहे. उन्होंने मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा. क्या यह जो कुछ हुआ ये सच था मैंने पूछा. हाँ क्यो तुम्हे कोई शक है या तुम्हे मज़ा नही आया. नही तो ऐसी तो कोई बात नही. चलो फिर बाहर आओं अम्मी ने कहा.
शाहिद : मैं बोला अच्छा यह बताओं क्या हम दुबारा भी यह करेगे.
अम्मी जी : क्यो तुम नही चाहते ये सब करना
मैं तो चाहता हूँ तो फिर ज़रूर करेगे मुझे तुम्हारी खुशी पसन्द है. और मुझे आप की. मेरे बेटा और अम्मी जी ने मुझे चूम लिया. अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठा और किचन मैं जा कर देखा अम्मी जी नाश्ता बना रही थी मैंने पीछे से जा कर उन्हे कमर से पकड़ लिया और दबा लिया और उनके गाल पर प्यार करते हुये बोला क्या बना रहीं हैं. तुम्हारे लिये नाश्ता बना रही हूँ. लेकिन मैं नाश्ता सिर्फ़ एक शर्त पर करूँगा आप भी मेरे साथ खायेगी. अच्छा चलो फिर. फिर एक निवाला अम्मी जी खाती और एक मुझे खिलाती और चाय का एक घूँट वो लेती और उसी कप से एक घूँट मैं लेता. अब मैं बहुत बदल गया था अम्मी जी मुझे जो काम भी कहती मैं भाग कर करता और उनकी हर बात मानता. एक दिन अम्मी जी ने मुझे खुद बताया मैंने जब तुम्हे समझाने की बहुत कोशिश की और तुम्हे अपनी तरफ ध्यान देने की भी लेकिन तुमने ध्यान नही दिया. फिर जब मैं एक शादी में गयी वहाँ मुझे मेरी एक पुरानी सहेली मिली मैने सारी बात उसको बताई तो उसने मुझे कहा की खुल कर उससे बात करो और बिना डरे उसे अपना जिस्म दो फिर देखना वो तुम्हारा गुलाम बन जायेगा और जो तुम कहोगी वो मानेगा.
मैंने उसी दिन फेसला कर लिया जो होगा देखा जायेगा. वेसे भी रोज़ रोज़ मरने से बेहतर है एक बार ही कोशिश की जाये फिर आर या पार. और मुझे कामयाबी मिल गयी. मेरी समझ मैं अब सारी बात आ गयी थी की अम्मी जी शादी से वापस आ कर इतनी चेंज केसे हो गयी हैं. और यह सच है की अब मैं उन की क़िसी बात को नही टालता था. रेहाना ने भी इस बात को महसूसस किया और कई बार पूछा लेकिन मैं टाल देता. और इस सब के बाद यह भी बता दूँ कि इस सारी घटना के 2 साल बाद अम्मी जी का स्वर्गवास हो गया. और मुझे एहसास हुआ यह जो कुछ भी हुआ कितना गलत हुआ. अंत में मुझे यह ही कहना है की हाँ अगर मैं झूठ बोल रहा होता तो मुझे यह इतनी लम्बी बात नही कहनी पड़ती क्योकी झूठ मैं तो ये सब करना बहुत आसान होता है लेकिन हक़ीक़त मैं नहीं और ये सब आप भी जानते हैं. अभी भी मैंने काफ़ी शॉर्ट करके आप को सब कुछ बताया है. और ये सब आप को बताने का मक़सद सिर्फ़ ये है की यह सब बहुत गलत है. आप कभी ऐसा सोचना भी मत मुझसे बस एक भूल हो गयी. जिसकी सज़ा मैं आज भी पा रहा हूँ. तो दोस्तों आपको मेरी यह आपबीती केसी लगी.
धन्यवाद ..

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