मकानमालकिन आंटी के साथ मजेदार सेक्स

हेलो दोस्तों मेरा नाम राहुल हे और मैं गुजरात के अहमदाबाद का रहनेवाला हूँ. मैं साड़े पांच फिट इन्चा और एवरेज बॉडीवाला हूँ. मेरे लंड की लम्बाई 6 इंच हे. आज ये मेरी पहली सेक्स कहानी हे जिसे मैंने अपनी तरफ से अच्छी तरह से लिखने की पूरी कोशिश की हे.

मैं एक किराए के मकान में रहता हूँ. और इस मकान की ओनर एक औरत हे. उसके पति ने 8 10 पहले उसे छोड़ दिया था. उसका फिगर 30 28 32 हे और उम्र में करीब 44-45 की हे. उसकी बॉडी एकदम मस्त हे जिसे देख के कोई भी खुश हो जाए. उसकी एक बेटी हे जो हॉस्टल में रह के अपनी कोलेज की पढ़ाई करती हे.

वैसे पहले जब मैं यहाँ रहने के लिए आया तो मेरे दिमाग में आंटी को ले के कोई बुरे इरादे नहीं थे. मैं आंटी के मकान में निचे रहता हूँ और वो फर्स्ट फ्लोर पर रहती हे. मैं आंटी को घर के सामान वगेरह की खरीदी में काफी मदद करता था. एक दिन मैं अपने कमरे में बैठ के पोर्न क्लिप्स देख रहा था. और तभी आंटी ने मुझे आवाज दे दी. मैंने दरवाजा खोला तो वो सामने खड़ी हुई थी. मैंने उसे अन्दर बुलाया.

उसने मेरे रूम पार्टनर के बारे में पूछा जो की बहार गया हुआ था.

आंटी: विशाल कहा हे?

मैं: आंटी वो बहार गया हे कुछ काम से अब शाम को आएगा. आप को उसका कुछ काम था?

आंटी: नहीं राहुल मैं ऐसे ही पूछ रही थी बस.

फिर आंटी चली गई. और मैंने फिर से अपनी पोर्न क्लिप्स को चालु कर दिया और देखने लगा. विशाल ने शाम को मुझे कॉल किया की उसको कुछ काम पड़ गया इसलिए अब वो कल ही आएगा घर पर वापस. और उसने आंटी को भी कॉल किया की मेरा खाना मत बनाना आज आप.

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वैसे नॉर्मली आंटी हम दोनों का खाना दे के जाती थी. आज आंटी ने कहा वैसे भी विशाल नहीं हे तो तुम मेरे कमरे में ही आ के खाना खा लेना. तब मुझे पता नहीं था की काफी टाइम से आंटी को सेक्स नहीं मिला था और वो उसके लिए ही भूखी थी. वो सब बात मुझे बाद में पता चली.

आंटी के साथ खाने के बाद बातें होने लगी.

आंटी: राहुल मुझे कुछ रंगोली की डिजाइन चाहिए थे. हमारी पड़ोस की रेखा बता रही थी की इंटरनेट पर मिलती हे.

मैं: हाँ मिलती हे ना आंटी,. अभी आप के लिए डाउनलोड कर लेता हूँ.

और फिर मैंने अपना लेपटोप ला के आंटी के लिए कुछ नयी रंगोली की डिजाइन डाउनलोड कर ली. आंटी मेरे बगल में ही बैठ के मेरे लेपटोप के स्क्रीन पर डिजाइन देखने लगी. उसका क्लीवेज मेरे एकदम सामने था. ना चाहते हुए भी मेरा सब ध्यान वहां चला गया. आंटी ने भी मुझे उसका क्लीवेज देखते हुए पकड लिया. लेकिन उसने कुछ भी नहीं कहा और मैं अपना काम करता रहा. आंटी के बूब्स एकदम बड़े और सेक्सी थे.

और आंटी के बदन के ऐसे नज़ारे देख के मैं अपने लंड के ऊपर कंट्रोल नहीं कर सका. आंटी ने मेरे खड़े हुए लंड को भी देख लिया था. लेकिन उसने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी और मेनेज कर लिया. फिर मैं अपने कमरे में चला गया और आंटी के बूब्स और गांड को याद कर के लंड को हिलाने लगा.

दो बार लंड को हिलाने के बाद भी जैसे आग नहीं बुझ रही थी आज तो. और तभी मेरे कमरे के दरवाजे के ऊपर नोक हुई. मैंने उठ के दरवाजा खोला तो मकानमालकिन ही सामने खडी हुई थी. मैं उसे देख के एकदम शोक हो गया. आंटी ने मुझे ऊपर से निचे देखा. फिर वो बोली, विशाल नहीं हे तो नींद नहीं आ रही होगी हे ना?

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मैं: हां आंटी सोने की ट्राय कर रहा हूँ.

आंटी: चलो मेरे कमरे में सो जाना आज की रात.

और ये कहते हुए वो एकदम स्माइल दे रही थी मुझे.

मैं: आप को इस से प्रॉब्लम तो नहीं हे ना आंटी?

वो बोली, जरा भी नहीं मुझे तो ख़ुशी होगी ऊपर से.

और मैं समझ गया की आंटी भी मेरे लंड का गाजर अपनी मुनिया में लेना चाहती थी. आंटी के कमरे में गया. वो कपडे बदलने के लिए चली गई. कुछ ही देर में वो एकदम पतली नाइटी पहन के बहार आई. मैं उसके बोबे और गांड को देख के और भी उत्तेजित हो गया. सच में ऐसी लग रही थी की चुदाई कर के ही लंड को शान्ति मिले!

आंटी के कमरे में एक बड़ा किंग साइज़ बेड था और मैं उसके ऊपर लेटा हुआ था. आंटी भी मेरे पास आ के लेट गई. मेरा लंड ऐसा खड़ा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था. आधी रात तक ना मैं सो सका ना ही आंटी!

फिर आंटी एकदम से मेरे करीब आ गई और उसने मेरे लंड को टच कर लिया. मैंने उसको देखा और वो स्माइल कर रही थी. मैंने उसको आँख मारी. आंटी अपने हाथ से लंड को सहला रही थी. आंटी अब खड़ी हुई और अपनी नाइटी को उतार के मेरे पास में वापस लेट गई.

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