छ्म्मक छ्ल्लो आंटी की चुदाई

किसी मस्त आंटी को भयंकर तरीके से गिरा गिरा के चोदना मेरा सपना था, वैसे मेरा नाम सोनू है। जब मैं नए शहर में कमरा खोजने निकला था। काल बेल बजाई तो सामने एक अंकल और आंटी दिखाई दिए। अंकल ने मुझसे मेरे बारे में पूछा और फ़िर आंटी से बात की। अंत में उन्होने कहा कि आप आ सकते हैं क्योंकि आपकी आंटीने हां कह दी है वैसे हम किसी को रुम नही देते। मुझे आशियाना मिल गया मैं शाम को ही वहां शिफ़्ट कर गया।

मेरे वहां जाते ही आंटी के हावभाव स्टाइल सब बदल गये। लिपस्टिक लगा के टाईट चोली पहन के एक दम छ्म्मक छ्ल्लो बन के रहती थी। आंटीकी एक बेटी भी थी जिसका नाम पूनम था। लेकिन आंटीके आगे पूनम भी फ़ीकी लगती थी। आंटी मेरे आगे अक्सर अपने चूंचे और गांड की परेड करती रहती थी। आंटीको अपनी गांड और चूचे हिलाकर मेरे आगे चलने में बहुत मजा आता था और वो एक भी मौका चूकती नही थी। इस दौरान एक दिन अंकल कही बाहर चले गए । मेरी नजर आंटी और उसकी बेटी दोनों पर ही थी।

आंटी ने मुझे चाय पीने के लिए आवाज दी , तो मैं थोड़ा बाथरुम चला गया। वहां आंटीकी बेटी अपनी झांटे साफ़ कर रही थी मुझे देख के मुस्कराने लगी, मैं समझ गया कि साली एक दम रंडी है अपनी मां की तरह तो मैंने कहा ला बना दूं तेरी झांटें। वो बोली अभी तो मेरी मां की बना लो उसके चूंचे तेरा इंतजार कर रहे हैं। मैंने कहा तुझे भी चोदूंगा मेरी जान और तेरी आंटीकी भी चूत का हलवा बनाउंगा। पूरा रंडियों का खानदान था यह्।

जब मैं चाय पीने के लिए सोफ़े पर बैठा तो आंटी चाय ले आईं और मुझे थमाते समय मेरे पैंट पर गिरा दिया। गरमा गरम चाय से मेरा लौंडा सीधा भीग गया और लगा कि फ़फ़ोले पड़ जाएंगे। तुरत उसने कहा सोनू ये तौलिया पहन लो पैंट खोल दो। मैंने अपनी पैंट और चड्ढी दोनो निकाल दिए और आंटीकी दी हुई छोटी सी तौलिया पहन ली।उसे पहन के बैठने पर मेरा लंड और अंड कोश साफ़ दिख रहे थे। ये सब आंटी की साजिश थी। आंटी मेरे लिए इस बार चाय नही लाईं कमरे में गई और शहद की बोतल ले आईं। लाकर कहा बेटा जलन हो रही होगी ये शहद लगा लो, मैंने कहा अच्छा आंटी। फ़िर वो कमरे से बाहर चली गई। मैंने दरवाजा भेड़ दिया और शहद अपने लंड में लगाने लगा।मेरा लंड चुदाई की आशका से गरमा गरम था और लगभग 7 इन्च का हो चुका था।

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मैं अपने लंड में शहद लगाने लगा और मेरा लंड एकदम अकड़ कर 8 इन्च का लंड बन चुका था। मैं समझ चुका था कि यह आंटीकी कोई सोची समझी साजिश है और मन ही मन खुश हो रहा था कि अच्छा कमरा मिल गया है मुझे तो । मैं अपने लंड को और सहलाने लगा और आंटीकी पावरोटी जैसी बुर के बारे में सोचने लगा। तभी मैंने देखा कि पूनम तौलिया लपेटे अपनी छोटी सी गांड मटकाते हुए कमरे में धड़धड़ाती हुई घुसी जा रही है। यह देखकर मेरे लंड की मुराद पूरी हो गई।

अब मेरे सामने चुनौती थी दो रंडियों को एक साथ मैनेज कर के पेलने की।

पूनम अंदर आते ही मेरा लंड देख कर अवाक रह गई। हाय दैया!! इतना बड़ा लंड? मैंने तो कभी देखा ही नही था। जरा छू के देखूं क्या? मैंने कहा नही अभी अभी आंटी इसे गरमा गरम चाय से जला कर गईं हैं। वो बोली च च उसने जला दिया मेरे सपनों के लंड को ? लाओ मैं इसे चूस के ठंडा करती हूं और उसने मेरे आगे घुटनों पर बैठ कर मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया। मेरे लंड में शहद पहले से लगा हुआ था और मेरे लंड के सुपारे की खूश्बू से मिलकर शहद बिल्कुल एक अलग रस बन गया था। पूनम तो जैसे चाशनी पी रही थी। तभी मैंने अपना लंड उसके मुंह में पेल दिया और वो गों गों करने लगी और देखते ही देखते उसने फ़र्श पर उल्टी कर दी। मैं इसी तलाश में था कि जैसे ही वह उलटे उसकी तौलिया खींच कर बस सीधा उसकी क्वारी गांड में अपना लंड धंसा दूं। बस मैंने पीछे से उसके गांड में अपना लोहे जैसा लंड धंसा दिया और वह चिल्लाई मम्मी!!

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अपनी प्यारी बेटी की आवाज सुनकर आंटी सीधा बाथरुम से भागी चली आई और उसने पूरा कपड़ा भी नही पहना। गीली जवानी उसकी मस्त दिख रही थी। पूनम की गांड में मेरा लंड देखकर वो शायद जल भुन गई और पूनम को डांटने लगी पूनम को पहले से दर्द हो रहा था और उसकी मम्मी उसे डांटने लगी तो बेचारी की आंखों में आंसू भर आए। मुझसे पूनम की यह दशा देखी नही गई और मैंने आंटी से कहा जाने दीजिए ना आंटी प्लीज। आंटी की आंखे पहले से लाल हो रही थीं उसने कहा मुझे भी चोदो तभी तुम्हारी खैर है। मैंने कहा यही पूनम की बगल में आप भी बकरी बन जाईये। आंटी पूनम की बगल में बकरी बन गई।

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