सौतेली मा से नफ़रत से प्यार तक

ही दोस्तो, मेरा नाम रोहन है, ये घटना एक बहुत ही रोचक घटना है.

ये बात तब की है जब मेरी मा का देहांत हुए 3 साल हो रहे थे. सब कुछ तब बदला जब एक दिन पापा अपने काम से वापिस आए और किसी को साथ लाए.

मैने पूछा पापा ये कौन है? पापा बोले ये तुम्हारी मा है. पापा ने बताया उन्होने इंडोरे में दूसरी शादी कर ली पिछले महीने. मैं चौक गया, मुझे यकीन नही हो रहा था की पापा ऐसा कैसे कर सकते है.

हन पापा मम्मी इतने पास नही थे पर दूसरी शादी मेरे लिए तब भी एक शॉक से कम नही थी. उसी समय मेरी पापा से लड़ाई हो गयी. काई दीनो तक लड़ाई चली पर पापा का डिसिशन हो चुका था, मैं क्या ही कर सकता था.

उन्होने मुझे प्यार से भी समझीा और गुस्से से भी. की मैं क्या करू अकेला जियू जिंदगी भर? तब तो मेरी शादी मा भौजी की मर्ज़ी से हो गयी और मैने किसी से कुछ नही कहा. पर अब तो मैं शादी कर सकता हू. और तुम्हे दिक्कत ही क्या है?!

मैं कुछ दिन बहुत रोया पर समय बीतता गया और मेरा गुस्सा फ्रस्ट्रेशन बनता गया. बात एक और थी, वो एक औरत की तरह बिल्कुल नही थी. उसकी उमर 25 साल होगी मुझसे बस 3 साल बड़ी थी वो.

मैं उसको मा कैसे बुला सकता था, मेरे लिए सब बहुत अज़ीब था. शुरू के कुछ दिन तो सोनाली अची बन के रही जेसे उससे अछा कोई हो ही ना. पर उसका असली रंग मैं जानने लगा था.

कुछ महीनो बाद वो ऐसी हो गयी जेसे पापा के काम पर जाने के बाद वो बिल्कुल बदल जाती और मुझसे लड़ती रहती. मेरी भी लड़ाई होती रहती उससे.

मेरे पापा कन्स्ट्रक्षन में थे और उनका अधिकतर काम सहर में होता था. पर घर हुँने एक छोटे सहर में बना लिया था. अक्सर पापा भोपाल, इंडोरे जाके काम करते थे और हफ़्तो बाहर रहते. पर जब आते तो हफ़्तो घर पर रहते. आधे समय बाहर और आधे समय घर पर.

मैं भी कलाज में था पर मैं कभी कभी कलाज जाता था जो पास भोपाल में था. हम भोपाल से 80 केयेम दूर रहते थे. मैने काई महीनो उसे इग्नोर किया, लड़ाई की.

मेरे अंदर उसके लिए एक गुस्सा सा भर गया. मैने उसके बारे में पता किया, तो वो इंडोरे में किसी नमक के व्यापारी की लड़की थी.

पापा 48 के और वो 25 की. मुझे बहुत गंदा लगता था. दोस्त लोग कुछ बोलते नही थे पर मैं संजता था वो लोग मेरे बाप की नियत पर हेस्ट होंगे. तो मैं दोस्तो से कम ही मिलता था और कलाज भी कम ही जाता था. रूम पर डाला रहता था और अपना काम करता था फोटोग्रफी का.

आक्च्युयली मैं एक वीडियो आंड फोटो एडिटर हू, ऑनलाइन काम उठता हू या शादी की वीडियोस एडिट करता हू. ये सब तो हुआ नॉर्मल बाते.

बुत एक दिन सब बदला जब मैने उसको नहा के रूम में घुसते हुए देखा. वेसए तो वो चुपके से नहा के कपड़े पहन के ही निकलती रही हमेशा से.

पर उस दिन वो टवल बँधकर निकली, वाइट टवल उसकी मुम्मो के उपर से होते हुए उसकी छूट के ज़रा से नीचे तक पहुच रहा था. मैं देखता रह गया.

उसने मुझे नही देखा पर मैने उसको कुछ सेकेंड क्या देखा मेरे मॅन में अज़ीब सा ख़याल आया, एक हवस सी उठी. मैं तुरंत टाय्लेट में गया और वापिस से उन सेकेंड्स को याद करने लगा.

उसकी नज़र जेसे मैने अपने दिमाग़ में छाप ली हो.. और क्या था मेरा हाथ लंड पर गया और ब्स मूठ मार ली. मूठ मारने मे जो मैने आनंद महसूस किया वो कुछ अलग था कुछ ज़्यादा था.

मेरा मॅन करने लगा उसे फिर से वेसा देखने का. पर उस समय पापा घर पर थे तो मैने कोई हरकत करना सही नही समझा.

कुछ दीनो के बाद जब पापा इंडोरे चले गये. मैने सोचा क्यू ना सोनाली को तडपया जाए. मेरे अंदर इचा थी की कोई इसे तडपए, इसे छोड़े कोई और मैं देखु. फिर वीडियो बना के इसे ब्लॅकमेल करू और अपनी नौकरानी बना के रखू.

मैं बस उसको उसकी औकात दिखना चाहता था. पापा जब चले गये तो मैने अपनी चाल चली. मैं सोनाली के पास गया और अछा बनने की आक्टिंग करने लगा.

मैं – सुनो, मुझे कुछ बात करनी है.

सोनाली – क्या है! पहले तो कभी कोई बात नही करनी होती थी, आज क्या हुआ?!

मैं – मैं चाहता हू कब तक हम ऐसे लड़ते रहेंगे, पापा को भी अछा नही लगता और मैं भी तक गया हू. कुछ सल्यूशन निकलते है.

सोनाली – क्या हुआ आज सूरज पासचिं से कैसे निकला है?

मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर मैने कंट्रोल किया.

मैं – ज़रा सोचो ऐसा कब तक चलेगा, किसी दिन तो ख़तम करना पड़ेगा ना.

सोनाली – बोल तो तुम ठीक रहे हो पर मैं नही लड़ती तुमसे, तुमने ही मुझे कभी आक्सेप्ट नही किया.

मैं – देखो ये सच है पर ये भी सच है की तुम मेरी मा की जगह नही ले सकती. उपर से तुम्हारी आगे देखो, तुम तो एक लड़की हो. उमर ही नही है तुम्हारी मा लायक.

सोनाली – (खुश हुई तोड़ा) – हन वो तो है, तो बताओ तुम क्या करे?

मैं – देखो एक काम करते है, पापा के सामने मैं तुम्हे मा ही बोलूँगा. पर जब पापा नही रहेंगे तो सोनाली बोलूँगा.

उसना तोड़ा सोचा फिर हन भर दी.

उस दिन हुँने थोड़े और समझोते किए फिर अपने कमरे में चला गया मैं.

कुछ दिन बीट गये, मुझे आदत हो गयी उसे सोनाली बोलने की. वो मेरी चाल में फैस्टी जेया रही थी. अब वो मुझे अपने कमरे में भी घुसने देती. हम नॉर्मली बात करते थे.

एक दिन मैने सोचा है तो ये यंग, पापा ज़रूर छोड़ते होंगे इसे आते ही. क्यू ना अब इसके कमरे में वीडियो कॅमरा लगा डू.

अगले दिन पापा भी आने वेल थे. फिर मैने चुपके से उसके कमरे में कॅमरा लगा दिया जब वो च्चत पर गयी थी. और अगले दिन का इंतेज़ार करने लगा.

अगले दिन पापा आए और मैं रात होने का इंतेज़ार करने लगा. उस दिन मैने पापा से बोला मैं राहुल के घर जेया रहा हू और वही रुकुंगा आज. पापा ने हन कर दी. ये इसलिए क्यूकी मैं चाहता था पापा बिल्कुल शरम ना करे और ज़ोर ज़ोर से छोड़े उसे.

फिर अगले दिन मैं सुबा जल्दी आ गया और उसके रूम से जाने का इंतेज़ार करने लगा. जब वो नहाने गयी मैने जल्दी से कॅमरा निकाल के अपने कमरे में आ गया और रूम लॉक करके वीडियो चालू की.

कुछ देर कुछ नही हुआ फिर मैने देखा पापा सोनाली को बेड पर लिटा के किस कर रहे है और यूस्क कपड़े उतार रहे है. मेरा लंड खड़ा हुआ तो मैने पंत से लंड बाहर करके लंड हिलने लगा. पर अंधेरे के कारण कुछ सॉफ नही था पर हल्का हल्का दिख रहा था.

फिर पापा ने उसे नंगा कर दिया और उसके मुम्मो को दबाते हुए किसे कर रहे थे. उसके बाद पापा लंड निकल के बेत गये. और इतनी हवस से सॉवॅर हो गये उसके उपर जेसे बस छोड़ देना चाहते हो. लंड चूसने का तक नही सोचा और छोड़ने लगे.

मुझे आवाज़े सुन के रहा नही जेया रहा था. मेरी धड़कने तेज़ होती जेया रही थी. पापा ने बस 2 मिन्स ही छोड़ा होगा की उनका गिर गया और थोड़ी देर बाद वो सो गये.

सोनाली का चेहरा सॉफ नही दिख रहा था. पर उसके बड़े बड़े मम्मी जो अक्सर मैं देखा करता था, आज कुछ और बड़े थे. कुछ और ही नशीली गांद, कुछ और ही रंग, मेरा मूठ भी निकल गया उसको देखते देखते.

फिर मैने वीडियो सवे करली. पर मैने सोचा मैं इससे उसे ब्लॅकमेल नही कर सकता इसमे तो पापा भी है. ये वीडियो वाला प्लान काम नही कर सकता जब तक कोई और ना छोड़े.

उस दिन के बाद से एक हवस ऐसी जागी थी की वो सामने हो तो उसका चेहरा नही सिर्फ़ उसका बदन सारी के आरपार दिखता हो. हवस ऐसी की ना चाहते हुए आँखे उसे देखती हो, उसे टच करने का मॅन करता, उसकी खुसभि शरीर में समा गयी हो.

दिन बा दिन हवस बढ़ती गयी. लंड अब मूठ से नही मानता था, छोड़ लेना चाहता था उसे, पर कैसे?

अब आयेज क्या हुआ ये अगली कहानी में पढ़ाइए, आपका रोहन.

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