समधी जी से चुदवाया

मेरा नाम उर्मिला है , मैं कानपुर, उत्तर प्रदेश की हूँ। मेरी जिंदगी का एक ऐसा सच है जो समाज से मैंने आज तक छुपाये रक्खा है , उसी सच को आज मै लिख रही हूँ। आज से १५ वर्ष पहले मेरे पति का स्वर्गवास हो चूका है। ३५ वर्ष की आयु में ही मै विधवा होगयी थी।एक बार तो लगा मै ही आत्महत्या कर लूँ लेकिन अपने २ बच्चो के ख्याल ने मुझे फिर से जीवन में संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया और इस काम में मेरे परिवार वालो ने मेरी बड़ी मददे की। मेरा एक पुत्र प्रभात और एक पुत्री नीलम है । प्रभात तो इंजीरयिंग करके अमेरिका चला गया और अब सिर्फ मेरी बेटी ही मेरे साथ कानपूर में रह गयी थी. मेरी लड़की आईआईटी से एमटेक कर रही थी और उसी के साथ पढ़ने वाले एक लड़के मलय के साथ उसकी दोस्ती हो गयी थी। मलय इलाहबाद का था और हॉस्टल में रहता था।आईआईटी में वैसे भी मौहौल बड़ा खुला होता है इस लिए मलय का मेरे घर आना जाना भी था। दोनों ही साथ में पढ़ाई करते थे. लड़का अच्छा था, इसलिए मैंने इन दोनों की दोस्ती पर कोई आपत्ति नही जताई।

बच्चो के खुलेपन और अगल बगल के बदलते मौहौल ने मेरी १५ साल से सुप्त वासना को कही न कही छेड़ दिया था। बहुत समय से दिल में दबी हुई वासना को स्त्री सुलभ लज्जावश मैंने अपने वश में कर रक्खा था। मेरे दिल में भी चुदाई की एक कसक रह रह कर उठती थी। मेरी उम्र ५० वर्ष की हो चुकी थी, पर दिल अभी भी जवान था। मेरी दिल की वासनाएँ उबल उबल कर मेरे दिल पर प्रहार करती थी।एक बार मलय रात को मेरी बेटी नीलम के पास प्रोजेक्ट का कुछ काम करने आया। मैं उस समय सोने की तैयारी कर रही थी। मैंने नीलम से कहा,’ मै आराम करने जा रही हूँ, जब काम खतम हो जाये तो मुझे जगा देना।’ उसके बाद मै अपने कमरे चली गयी और लाईट बन्द करके सोने की कोशिश करने लगी, पर वासनायुक्त विचार मेरे मन में बार बार आ रहे थे। मैं बेचैनी से करवटे बदलती रही। फिर मैं उठ कर बैठ गई। पानी पीने मैं अपने कमरे से बाहर आ गई, तभी मुझे नीलम के कमरे में कुछ हलचल सी दिखाई दी। मैं उत्सुकतापूर्वक उसके कमरे की ओर बढ़ गई। तभी खिड़की से मुझे नीलम और मलय नजर आ गये। वो नीलम के ऊपर चढ़ा हुआ उसे चोद रहा था!

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मैं यह सब देख कर दंग रह गई! मुझे नीलम और मलय पर बेहद गुस्सा आया और गुस्से में तमतमाये हुए मैंने दरवाजा खुलवा कर दोनों को डाटने के सोची , लेकिन बरसो बाद एक लड़की और लड़के को काम क्रीड़ा करते देख मै ठिठक गयी.
मेरे दिल पर उनकी इस चुदाई ने आग में घी का काम किया। मेरे अंग फ़ड़कने लगे।मेरी सासे तेजी से चलनी लगी और मुझे यह जानकर धक्का लगा की मेरी बेटी मेरे सामने चुदवा रही है और मेरी चूत में बरसो पुरानी खो गयी तिलमिलाहट वापस आगयी थी। मैं आंखे फ़ाड़े उन्हें देखती रही। दोनों जवान थे और बड़ी तेजी से चुदाई कर रहे थे। ३/४ मिनट में दोनों घुट्टी घुट्टी आवाज करते हुआ झड़ गए और उनका चुदाई का कार्यक्रम समाप्त हो गया। मैं लड़खड़ाते हुए कदमों से चुप चाप अपने कमरे में लौट आई। मन में वासना की ज्वाला भड़क रही थी। उस रात को मैंने मोमबत्ती को अपनी चूत में डाल दिया और जैसे तैसे मैंने अपना रस निकाल लिया, पर दिल की आग अभी बुझी नहीं थी। मै इस से पहले कभी कभी उँगलियों से अपनी चूत मसल कर अपनी काम क्षुधा शांत कर लेती थी लेकिन उस रात मैंने मोमबत्ती डाल कर किया था शायद मुझे अपनी चूत के अंदर कड़ेपन के एहसास की जरुरत थी

जमाना कितना बदल गया था,, मेरे पति तो लाईट बन्द करके अंधेरे में मेरा पेटीकोट ऊपर उठा कर अपना लण्ड बाहर निकाल कर बस चोद दिया करते थे। मैंने तो अपने पति का लण्ड ज्यादातर अँधेरे में ही देखा था और उन्होंने ने भी मेरी चूत के दर्शन दिन के उजाले मै कभी कभी ही किया होगा। पर आज तो कमरे की लाईट जला कर, प्रेमी प्रेमिका एक दूसरे के कामुक अंगो को जी भर कर देखते हैं। लड़के का लण्ड लड़की हाथों में लेकर दबा लेती है और यही नहीं उसे मुँह में लेकर जोर जोर से चूसती भी है। ये सब यदि मेरे जमाने में होता भी होगा तो हम पति पत्नी को इसका कोई ज्ञान नही था।

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लड़के तो बिल्कुल बेशर्म हो कर लड़कियो की चूत में अपना मुख चिपका कर चूत को खूब स्वाद ले-ले कर चूसते हैं और प्यार करते हैं। यह सब देख कर, पढ़ कर मेरा दिल वासना के मारे मचल उठता था। यह सब मेरे नसीब में कभी नहीं था। मेरा दिल भी करता था कि मैं भी बेशर्मी से नंगी हो कर चुदवाऊँ, दोनों टांगें चीर कर, पूरी खोल कर उछल-उछल कर लण्ड चूत में घुसा लूँ। पर हाय! यह सब मेरे लिये बीती बात हो चुकी थी।

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