दो कामुक सहेलियाँ की चुदाई 2

porn kahani do kamuk saheliya दो कामुक सहेलियाँ विनोद औंधे मुँह नीता के नंगे जिस्म पर गिर पड़ा और नीता चुप चाप उसके नीचे पड़ी रही. शिल्पा ने अपनी सलवार का नाडा बाँधा और अपने आप को संभालते हुए चुप चाप घर से बाहर चली गयी. वो अब सीधा नीता के घर की तरफ गयी.

शिल्पा के कदम नीता के घर की तरफ बढ़ने लगे और उसके मन मे बस एक ही बात आ रही थी. “अगर नीता मेरे भाई के लंड से मज़े ले सकती है तो क्या मैं सुरेश से नहीं चुदवा सकती?” नीता का भाई सुरेश बेशक अभी 16 साल का था, लेकिन काफ़ी ताकतवर था. कभी कभी तो शिल्पा को शक होता था कि सुरेश शिल्पा और नीता की कंपनी मे रहने का बहाना ढूढ़ता रहता है लेकिन कभी उसने कोई ऐसी वैसी हरकत ना की थी. औरत अगर मर्द को पटाने की सोच ले तो मर्द की क्या हिम्मत है कि वो ना कर दे.

जब शिल्पा अपनी सहेली के घर के नज़दीक पहुचि तो एक बार फिर उसने अपने मन को मज़बूत किया कि आज जो भी हो जाए अगर सुरेश घर पर हुआ तो उसको अपनी चूत का स्वाद चखा कर ही जाएगी. चाहे कुच्छ भी हो जाए! शिल्पा की किस्मत अच्छी थी कि सुरेश घर पर ही था. घर दोपहर के वक्त खाली ही होता है. नीता की मम्मी स्कूल मे टीचर है और शाम को 6 बजे वापिस आती है और पापा तो हफ्ते मे दो दिन ही घर आते हैं. सुरेश का रूम बंद था लेकिन कुच्छ दबी दबी आवाज़ आ रही थी. अंदर से सेक्सी आवाज़ें आ रही थी. शिल्पा को पूरा यकीन था कि अंदर ब्लू फिल्म चल रही है. तो सुरेश अकेले मे ब्लू फिल्म देख रहा है?शिल्पा ने धीरे से डोर खोला. डोर कीतरफ पीठ कर के सुरेश खड़ा था, बिल्कुल नंगा. उसके गोरे चुतड आगे पीच्छे हो रहे थे. सामने ब्लू फिल्म चल रही थी. सुरेश साला बेह्न्चोद ब्लू फिल्म देखते हुए मूठ मार रहा था.

“ये क्या हो रहा है, सुरेश? टीवी पर क्या चल रहा है?” शिल्पा ने सख़्त आवाज़ मे कहा तो सुरेश बेचारा घबरा कर मुड़ा. उसके हाथ मे उसका 7 इंच का लंड एकदम टाइट हो कर पकड़ा हुआ था.” कुच्छ नहीं शिल्पा दीदी. नीता दीदी घर पर नहीं है….आप यहाँ? सॉरी दीदी…घर पर कोई नहीं था तो मैने सोचा कि……नीता दीदी को मत बताना…प्लीज़” सुरेश के मुँह पर पसीना आ चुका था. शिल्पा मुस्कुराइ और आगे बढ़ कर सुरेश के कंधे पर हाथ रख कर बोली,” बहनचोड़ मुझे दीदी कहता है और मेरे सामने लंड निकाल कर मूठ मारते हुए शरम नहीं आती? अब सच बता किस को याद कर के ये सब कर रहा था?” कहते हुए शिल्पा आगे की तरफ झुकी जिस कारण उसकी चुचि का काफ़ी बड़ा भाग नंगा हो गया. सुरेश की नज़र उसकी गोरी चुचि से हट नहीं रही थी.

” नहीं दीदी, ऐसी बात नहीं है….ये तो मैं पहले से ही कर रहा था…आप एक दम सामने आ गयी..मैं अभी कपड़े पहन लेता हूँ” वो हड़बड़ा कर बोल रहा था. शिल्पा ने उसकी नंगी छाती पर हाथ फेरते हुए उसके लंड पर हाथ रख दिया. लंड किसी व्याकुल जानवर की तरह फड़फड़ा उठा.” सुरेश मैं किसी को नहीं कहूँगी कि तुम यहाँ क्या कर रहे थे. तुम मुझे बताओ कि मूठ मारते हुए मुझे याद कर रहे थे या नहीं? तुमको मैं कैसी लगती हूँ. सपने मे मुझे कभी चोदा है या नहीं?” शिल्पा ने महसूस किया कि उसका लंड और भी टाइट हो गया है.

“नहीं दीदी….ऐसा तो नहीं है…..मैने कभी….” शिल्पा ने उसके लंड को मसल्ते हुए कहा” बहन्चोद तेरी ज़ुबान कुच्छ कह रही है और ये लंड कुच्छ और. तेरा लंड तो मेरे हाथ मे और भी कड़ा हो गया है, साले ये तो मुझे चोद्ने को तड़प रहा है और तू कहता है कि तुमने कभी अपनी शिल्पा दीदी को चोद्ने के बारे नहीं सोचा? सच बता, मैं तुझे कैसी लगती हूँ? अगर तेरा जवाब ठीक हुआ तो तुझे चूत मिल सकती है” सुरेश की समझ मे कुच्छ नहीं आ रहा था.” दीदी, आप तो बस पटाखा हो! आप बहुत सेक्सी हो…सच मे मैं आपको नंगा देखने के सपने देखता रहता हूँ…अभी भी मैं आपकी कल्पना मे मूठ मार रहा था. आप तो नीता दीदी से भी सेक्सी हो!” शिल्पा सारी बात समझ कर मुस्कुराइ,” तो साले नीता को भी कल्पना मे नंगा देखता है तू? उसको कभी नंगा देखा है क्या?” सुरेश ने गर्दन झुका कर कहा” हाँ दीदी. नीता दीदी को नहाते हुए देखा करता हूँ मैं बाथरूम मे. मैं क्या करूँ? औरत का जिस्म मुझे बेकाबू कर देता है वो चाहे मेरी दीदी का ही क्यो ना हो. मैं उसको चोद्ने के लिया पागल हो जाता हूँ”

“अच्छा बेटा, तो तू चोद्ने के लिए पागल हो जाता है? कितनी को चोद चुके हो, बेह्न्चोद?”शिल्पा को यकीन हो गया था कि आज सुरेश से चुदवा लेगी.”दीदी अभी तक किसी को असलियत मे नहीं चोदा. बस कल्पना मे ही.” सुरेश ने कहा. शिल्पा ने अपना हाथ उसके मस्त लंड के ऊपर नीचे करते हुए कहा” मुझे चोदोगे? अपनी शिल्पा दीदी की चूत चोदोगे? मुझे स्पर्श तो करो, मेरे भाई!” सुरेश का हाथ काँप रहा था जब उसने शिल्पा के सीने के उभार पर हाथ रखा. हाथ रखते ही उसकी चुचि मे आग लग गयी और उसने सुरेश के लंड को ज़ोर से थाम लिया और उसके निपल को चूसने लगी. सुरेश का तो सपना सच हो गया था.

सुरेश के हाथ शिल्पा की चुचि को मसल्ने लगे और दोनो वासना की दुनिया मे उतरते चले गये.”दीदी अपनी कमीज़ उतार दो और मुझे अपने उरोज़ देख लेने दो” वो बोल उठा तो शिल्पा ने उसको कहा”बहन्चोद, अपनी शिल्पा दीदी को चोद्ने वाले हो तो कमीज़ भी उतार लो ना, रोका किसने है?मुझे अपनी तरह नंगा कर दो सुरेश. अगर शिल्पा दीदी को खुश कर दिया तो नीता दीदी की चूत भी दिलवा दूँगी तुझे. मुझे नंगी कर दो भाई”

सुरेश ने आव देखा ना ताव और उसके कपड़े उतारने लगा. कमीज़ उतरते ही उसके सामने शिल्पा दीदी का तराशा हुआ जिस्म नंगा हो गया. उसके सीने का उठान ब्रा मे ग़ज़ब ढा रहा था, गोरी चुचि पर ब्राउन चुचक, सपाट पेट और पतली कमर देख कर उसका लंड उठक बैठक करने लगा. सुरेश ने पहले ब्रा के हुक खोले और फिर सलवार का नाडा खोला. वाह! पैंटी मे धकि हुई चूत किसी को पागल बना सकती थी. उसके चुतडो का उभार देखने लायक था. सुरेश ने उसके चुतडो पर हाथ फेरा और पैंटी को नीचे सरका दिया. शिल्पा ने मदहोशी मे सुरेश को गले लगा लिया और उसके होंठों पर अपने तपते हुए होंठ रख दिए. दोनो मादरजात नंगे हो कर एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे मे समा जाने की कोशिश करने लगे.

सुरेश का लंड अपनी शिल्पा दीदी की चूत के मुँह पर ठोकर मार रहा था और शिल्पा के निपल उसके सीने मे धँस रहे थे. वासना का तूफान उठ चुका था. सुरेश ने उसकी चुचि को दबा कर अपने होंठ चुचक पर रख दिए और चूमने लगा. सुरेश के होंठ और ज़ुबान को अपने निपल पर महसूस करते ही शिल्पा भड़क उठी और अपने हाथ को चूत पर ले जा कर मसल्ने लगी. चूत से रस की जो बरसात थोड़ी देर पहले बंद हुई थी, फिर से बरसने लगी.” सुरेश, जल्दी करो….मुझे बिस्तर पर ले चलो…मेरी प्यासी चूत को ठंडी कर दो…मैं जल रही हूँ..वासना मुझे जला रही है….अपना लंड मेरी प्यासी चूत मे डाल कर मुझे तृप्त कर दो मेरे भाई” सुरेश ने अपनी बालिश्ट बाज़ू मे अपनी प्यारी शिल्पा दीदी को उठाया और अपने मम्मी डॅडी के डबल बेड पर लिटा दिया.

दोनो गुथम गुत्था हो कर एक दूसरे के जिस्म को चूमने और चाटने लगे. साँसों का तूफान मचल रहा था और फिर अचानक शिल्पा के ऊपर चढ़ कर अपना लंड उसकी चूत पर रख कर सुरेश ने धक्का मार दिया, “उ…सुरेश, बेह्न्चोद बता तो देता कि पेलने लगे हो…मुझे बहुत दर्द हुआ है…आराम सेमेरे भाई..तेरी दीदी भी पहली बार चुद रही है…बेह्न्चोद कोई रंडी नहीं हूँ जो पेलते ही जा रहा है…कितना मोटा है तेरा…!” शिल्पा चीख ही पड़ी, लेकिन सुरेश रुका नहीं. सुरेश के कुंवारे लंड को शिल्पा दीदी की टाइट चूत नसीब हो गयी थी अब रुकने का काम ही क्या था. उसने शिल्पा दीदी के निपल को हाथों से मसलना शुरू कर दिया और उसकी गर्दन को चूमने शुरू कर दिया. चूत चाहे चिकनी थी फिर भी टाइट इतनी थी कि लंड का अंदर जाना मुश्किल हो रहा था.” चुप साली, चुप हो जा…चोद्ने दे मुहे अपनी प्यारी शिल्पा दीदी की चूत..कब से सपने मे चोद रहा हूँ…आज असल मे चोद लेने दो और अपने सुरेश भैया का लंड ले ले अपनी चूत मे” सुरेश फुन्कार उठा.

“बहन्चोद, अपनी दीदी का दूध पी ले….मेरी चुचि चूस मदेर्चोद…अपनी मम्मी के बेड पर अपनी बेहन को चोद रहे हो साले इसी बेड पर तेरे डॅडी तेरी मम्मी को चोद्ते हैं, साले चोद अपनी दीदी को!!” शिल्पा ने भी उसको उत्तेजित करने के लिए बोलना शुरू कर दिया. असल मे चूत रस के कारण अब लंड आसानी से चूत मे परविष्ट होने लगा था और दोनो को खूब मज़ा आ रहा था.” मम्मी को भी तो मज़ा आता ही होगा डॅडी के लंड से…तू भी ले ले मज़े मेरी प्यारी शिल्पा दीदी. ला मैं तेरा दूध पी लेता हूँ अगर मेरी दीदी को ये ही पसंद है…मम्मी का दूध तो पी चुका हूँ अब दीदी का भी पी लेता हूँ!!”

शिल्पा की नज़र के सामने अपने विनोद भाई का लंड घूम रहा था और अपनी सहेली की चुदाई का सीन एक बार फिर से उभर आया. उसने अपनी चुचि उठा कर सुरेश के मूह मे दे दी और वो प्यार से उसको चूसने लगा. शिल्पा मस्ती से भर गयी और चुतड उठा कर चुदने लगी.” वाह मेरे भाई..खूब चूस मेरी चुचि…चाट ले मेरी चुचि….चोद ले मेरी चूत..आआ…ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ…बहुत मस्त है तेरा लोड्‍ा…..अपनी नीता दीदी को भी चोदेगा क्या?” सुरेश मस्ती मे चुचि चूस्ता रहा और फिर चुदाई की स्पीड बढ़ाता हुआ बोला”हां दीदी…नीता को भी चोदुन्गा..अगर उसने चुदवाया तो….अपनी मम्मी को भी….चुदाई मे इतना मज़ा मिलता है…पता नही था”

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शिल्पा भी आनंद की चर्म सीमा पर थी. वो अपनी चूत सुरेश के लौडे पर ज़ोर ज़ोर से मार रही थी. फिर उसने एक हाथ नीचे ले जा कर उसके अंडकोष पकड़ लिया.” साले मम्मी को भी चोदेगा? पहले अपनी शिल्पा दीदी को तो चोद, मदेर्चोद! ज़ोर से चोद…..मिटा दे खुजली इस निगोडी चूत की…वाह मेरे भाई…हम तो घर मे लंड ना देख कर कितना तड़पे हैं….अब तो खुल चुके हैं…खूब पेलो मुझे…चोद लो अपनी बेहन को!” सुरेश तूफ्फानी स्पीड से चूत को चोद्ने लगा,” चोद तो रहा हूँ….और क्या मैं पूजा कर रहा हूँ..इस से पहले की मैं झाड़ जाऊ, दीदी तुम मेरे लंड पर चढ़ कर मुझे चोद लो….मेरे लंड की सवारी कर लो..मुझे नीचे लिटा कर चोदो मेरी प्यारी दीदी!”

शिल्पा की चूत से उसने लंड निकाल लिया और खुद बिस्तर पर लेट गया. शिल्पा दीदी का गदराया जिस्म देख कर उसकी वासना और भी बढ़ गयी. शिल्पा ने टाँगें चौड़ी कर के अपनी चूत को सुरेश के सुपाडे पर रख दिया और धीरे से दबाव डाला. इस बारी लंड आसानी से घुस गया. नाग देवता अपनी बिल का रास्ता पहचान चुके थे. शिल्पा ने अपना जिस्म लंड के ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया. उसकी भारी चुचि मस्ती मे नाचने लगी. सुरेश ने उसके चुतडो को थाम कर नीचे से चोद्ना शुरू कर दिया और सिर उठा कर चुचि को मूह मे ले लिया और चूसने लगा. चुदाई अपनी चर्म सीमा पर थी. शिल्पा एक कुतिया की तरह हाँफ रही थी. तभी सुरेश का लंड छूट पड़ा. अंडकोषों से रस लंड की तरफ उठने लगा. उसने धक्के नीचे से और भी तेज़ कर दिए,” उफफफ्फ़..दीदी मैं झाड़ रहा हूँ…मेरा लंड अपनी दीदी की चूत मे झाड़ रहा है…दीदी मुझे माफ़ कर दो मैं झाड़ा”

गरम लावे की धारा शिल्पा की चूत मे जा गिरी और वो और भी ज़ोर से उठक बैठक करने लगी. उसकी चूत से रस बहने लगा था लेकिन उसको कुच्छ और देर चाहिए थी झड़ने के लिए, कुच्छ और लंड की पिटाई होनी थी उसकी चूत की तब जा कर उसकी चूत की संतुष्टि होनी थी. लेकिन चर्म-सीमा से पहुँचने से पहले ही सुरेश का लंड ढीला पड़ गया. सुरेश का लंड अभी शिल्पा की चूत मे ही था और वो दोनो एक दूसरे से लिपटे हुए थे. सुरेश ने शिल्पा के नंगे जिस्म को चूमते हुए पूछा” दीदी, कैसा लगा, मेरा लंड? मुझे तो तेरी चूत बहुत पसंद आई” शिल्पा का मन हुआ कि कह दे कि तेरे लंड मे दम नहीं है, लेकिन फिर सोचा कि बेचारे का पहला टाइम है. कोई बात नहीं धीरे धीरे तज़ुर्बे से एक्सपर्ट बन जाएगा. शिल्पा ने उसके मुँह को चूमते हुए कहा,” अपनी दीदी की चूत की धज़ियाँ उड़ा कर पूछ रहे हो कि लंड कैसा था. बहुत दम है तेरे लंड मे, मेरे छ्होटे भाई. ऐसे ही चुदाई करेगा तो चॅंपियन बनेगा एक दिन. अब बस करो, नीता आती ही होगी और मुझे खिसक लेना चाहिए”

शिल्पा ने कपड़े पहने और जाने लगी,” शिल्पा दीदी अब कब?” शिल्पा हंस पड़ी,” जल्दी ही, सुरेश. अगर लंड को आराम ना मिले तो नीता पर हाथ साफ कर लेना”

क्रमशः……………………….
गतान्क से आगे………………

शिल्पा तेज़ी से घर की तरफ चल पड़ी. आसमान मे काले बदल आ चुके थे. किसी भी वक्त बारिश आ सकती थी. अभी वो घर से कुच्छ दूर थी कि बारिश ने आ घेरा और वो भीगने लगी, उसके कपड़े जिस्म से चिपक गये. वो तेज़ी से घर पहुँची. सोच रही थी कि नीता वहाँ होगी या नहीं. घर पर सिर्फ़ विनोद भैया थे. वो बाथरूम मे नहा रहे थे और बाथरूम मे पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. शिल्पा अपने रूम मे गयी और अपने गीले कपड़े उतारने लगी. उसने सलवार और फिर कमीज़ उतारी और टवल से अपने जिस्म को सुखाने लगी, उसके बालों से पानी टपक रहा था और वो उस वक्त ब्रा और पैंटी मे खड़ी थी जब बाथरूम का दरवाज़ा खुला और विनोद कमर पर टवल लपेटे बाहर निकला. शिल्पा की मांसल चुचि ब्रा ढकने मे कामयाब नहीं हो रही थी. उसकी टाइट पैंटी के बाहर शिल्पा के गोरे चुतड भीग कर चमक रहे थे.

भाई और बेहन की नज़रें मिली. नीता को चोद्ने के बाद विनोद का लंड शांत नहीं हुआ. उसके लंड की आग और भड़की हुई थी. अपनी सग़ी बेहन के लगभग नंगे जिस्म को देख कर विनोद के शरीर मे एक करेंट सा लगा. एक बार तो शिल्पा ने आँखें झुका ली. लेकिन उसको सॉफ दिखाई दिया कि विनोदा भैया के कमर पर लिपटे टवल मे कुच्छ हरकत हुई. जो नाग देवता दोपहर को नीता की बिल मे घुसे थे, फिर से सिर उठा रहे थे. झेम्प्ते हुए शिल्पा बोली,” भैया क्या देख रहे हो, मुझे शरम आ रही है. आप ने मुझे पहले कभी देखा नहीं है क्या?” विनोद भी झेंप गया और कमरे से बाहर चला गया.

अपने कमरे मे जा कर भी उसके मन से अपनी बेहन का भीगा बदन नहीं हट रहा था. शिल्पा का दूधिया बदन उसकी वासना को भड़का रहा था.विनोद की अंतरात्मा ने उसको कोसा,” साले विनोद, बेह्न्चोद, अपनी सग़ी बेहन की सहेली को चोद चुके हो और अब अपनी ही बेहन को वासना भरी नज़र से देख रहे हो! शरम आनी चाहिए तुझे! कई सोचती होगी शिल्पा?” विनोद ने लाख चाहा लेकिन शिल्पा के नंगे जिस्म की तस्वीर उसकी आँखों से नहीं हट रही थी. उसने रात के लिए निक्केर और टीशर्ट पहन ली और कमरे से बाहर निकला. तभी आकाश मे बिजली चमकी और बदल गरजे. उसी वक्त विनोद के मन मे शैतानी योजना ने जनम लिया.

शिल्पा का रूम बंद था. विनोद ने कीहोल से झाँका. शिल्पा कमरे के बीच बिल्कुल नंगी खड़ी हुई बिस्तर की तरफ झुकी हुई थी और उसकी मस्त गांद दरवाजे की तरफ थी. शिल्पा चादर पर हाथ फेर रही थी. उसके मस्त चुतडो के बीच उसकी गांद का छेद दिख रहा था. विनोद का लंड एक बार फिर मस्ती से खड़ा हो गया. तभी शिल्पा अलमारी की तरफ बढ़ी और एक पारदर्शी कुरती और ढीला सा पाजामा पहनने लगी. विनोद का दिल धक धक करने लगा जब उसने अपनी बेहन की फूली हुई चूत देखी. विनोद झट से दरवाज़े से हट गया और फ्रिड्ज से ठंडे कोक की बॉटल निकाल कर डाइनिंग रूम मे चला गया.

शैतानी प्लान जो उसके मन मे चल रहा था वो ये था कि कोक की बोत्तल मे उसने वोडका मिक्स कर डाली और दो ग्लास भर लिए. वो बिना अपनी बेहन को बताए वोड्का उसको पिला देगा. कोक की वजह से मीठा होने से शिल्पा को कुच्छ फरक नहीं पता चले गा और वोड्का के असर से शिल्पा पर मस्ती चढ़ जाएगी. इतनी सेक्सी बेहन को चोदे बिना आज की रात नहीं कटेगी. आज शैतानी भाई किसी भी कीमत पर अपनी बेहन को नहीं चोदेगा. आज की रात भाई बेहन के मिलन की रात होगी जिसको देख कर शैतान भी खुश हो जाएगा. बस अगर विनोद को नहीं पता था तो ये कि उसकी बेहन भी अपने भैया से चुदवाने की प्लान बना रही थी.

बारिश तेज़ हो चुकी थी. “भैया, देखो ना बारिश कितनी तेज़ है? मुझे तो डर लग रहा है. उफ्फ मुझे तो प्यास लगी हुई है” शिल्पा ने अंदर आते हुए कहा. “मैने तेरे लिए ये ड्रिंक बनाई है, शिल्पा” विनोद ने कहा और तभी उसकी नज़र अपनी बेहन के सीने पर चली गयी. शिल्पा के वक्ष-स्थल का उठान देख कर विनोद की साँस ऊपर की ऊपर रह गयी. शिल्पा की चुचि बहुत मस्त थी और चुचक बहुत नोकिले थे.” आओ बहना, मेरे पास बैठ जाओ” विनोद ने सोफे पर इशारा करते हुए कहा. शिल्पा चुतडो मटकती हुई भैया की बगल मे बैठ गयी.

“विनोद भैया, आज नीता आई थी क्या? उसकी मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है शायद” शिल्पा ने ग्लास से घूँट भर कर पूछा. कोक के स्वाद मे कुच्छ कड़वापन था. वो समझ गयी कि कुच्छ गड़बड़ है. कहीं ऐसा तो नहीं की भैया मुझे पटाने की कोशिश मे हैं? चलो देखते हैं.” नीता, नहीं तो. तुझे नहीं मिली?” शिल्पा अपने भाई के झूठ से खुश हुई. यही झूठ आज उसको अपने भाई के लंड से चुदवाने मे हेल्प करेगा. एक ही घूँट मे उसने ग्लास खाली कर दिया और तभी उसके सिर मे कुच्छ होने लगा.” भैया मुझ से झूठ क्यो बोल रहे हो? मेरे बिस्तर पर मेरी सहेली को हम बिस्तर बनाया है आपने, मुझे पता है, मैने आपको देखा है अपनी इन आँखों से. बोलो सच है या नहीं?” शिल्पा ने अपना हाथ अपने भाई की नंगी जांघों पर रख कर पुछा.

विनोद ने अपना हाथ अपनी बेहन की मस्त चुचि पर रखा और बोला” शिल्पा, अगर सब देख ही चुकी हो तो पूछ क्यो रही हो? नीता मुझ से चुदने को मचल रही थी और मैं भी तो जवान मर्द हूँ. जवानी मे मर्द का लंड कुच्छ नहीं देखता, शिल्पा” कहते ही उसने अपनी बेहन की भारी भारी चुचि को मसल दिया,” औरत बेशक मर्द की बेहन की सहेली हो या उसकी बेहन ही क्यो ना हो” शिल्पा के मुँह से एक कामुक सिसकारी निकल गयी और उसका हाथ भी अपने आप विनोद के उठाते हुए लंड पर चला गया.” तो फिर बेहन को इतनी देर से क्यो नहीं चोदा, भैया? आपको अपनी बेहन की जवानी पर तरस क्यो नहीं आया? उस छिनाल नीता को मेरे ही बिस्तर पर क्यो चोदा आपने? भैया बताओ ना? तुम जानते हो कि आपके लंड पर मेरा अधिकार है, फिर नीता को क्यो चोदा आपने?”

विनोद को ये उम्मीद ना थी कि उसकी बेहन खुद ही चुदवाने के लिए तैयार हो जाएगी. वो सम्भल कर बोला,” इसी लिए तो मैं उसे तेरे बिस्तर पर ले कर गया था क्यो कि मैं अपनी बेहन को चोद्ना चाहता था, शिल्पा, मुझे डर था कि तू नाराज़ ना हो जाए. खैर अब मुझे पता चल गया है कि मेरी बेहन भी मेरे लंड से प्यार करती है तो तुझे ही चोदुन्गा, और किसी को नहीं” विनोद अपनी बेहन को चूमने लगा, उसकी चुचि को मसल्ने लगा और वासना भरी हरकत करने लगा. शराब और वासना का संगम अब शिल्पा के बदन मे आग लगा रहा था. उसने अपने भैया की निक्केर की ज़िप खोल डाली और लंड बाहर निकाल लिया.

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“भैया, मुझे प्यार करते रहो….मेरी चूत को वैसे ही चोद्ना जैसे मेरी सहेली को चोदा था….इस बरसात की रात को कभी ना भुला देने वाली रात बना दो मेरे भाई…अपनी बेहन को चोद कर उसको अपना लो भैया!” शिल्पा बोल रही थी और विनोद अपनी किस्मत पर खुश हो रहा था. उसने एक ही झटके मे उसकी कुरती उतार डाली और शिल्पा की गोरी चुचि नंगी हो गयी. उसकी बेहन तो नीता से भी अधिक सेक्सी थी. आज तो उसकी लॉटरी निकल पड़ी थी, पहले नीता और अब उसकी सेक्सी बेहन शिल्पा चुदने के लिए मिन्नत कर रही थी. विनोद के हाथ अब शिल्पा का पाजामा खोलने लगे. वाह! शिल्पा ने नीचे पैंटी भी नहीं पहनी थी. शेव की हुई फूली हुई चूत देख कर विनोद मस्ती मे भर गया. उसका लंड निक्केर से बाहर आने के लिए तड़प रहा था.

“मेरी प्यारी बहना, अपने भाई का हथियार तो बाहर निकालो! मेरा लंड तेरे कोमल हाथों का स्पर्श महसूस करना चाहता है, मेरी निक्केर खोल कर मेरा लंड अपने हाथ मे ले लो मेरी बहना!” विनोद अब खुले शब्दों मे बोल रहा था और दोनो भाई बेहन लाज शरम छोड़ कर सेक्स की दुनिया मे उतर चुके थे. शिल्पा ने हाथ बढ़ा कर अपने भैया की निक्केर नीचे सरका डाली और भैया के काले लंड को हाथ मे ले कर उसको आगे पीच्छे करने लगी. उसके भैया का लंड सुरेश के लंड से काफ़ी मोटा और लंबा था. लंड एक गरम लोहे की रोड की तरह आकड़ा हुआ था और उसको स्पर्श करते ही शिल्पा उत्तेजना से काँप उठी.

शिल्पा की उंगलियाँ भैया के सुपाडे को स्पर्श करने लगी और उसने महसूस किया कि कुच्छ लंड रस का पानी उसके हाथ मे लग चुका था. एक हाथ से भैया के अंडकोष स्पर्श करते हुए शिल्पा ने अपने होंठ भैया के मस्त लंड पर रख दिए. विनोद ने अपने हाथ अपनी बहन के सिर के पीछे रखते हुए उसके बाल खोल दिए और अपनी कमर उचका कर मुँह चोदन करने लगा. शिल्पा की कोमल उंगलियाँ उसके अंडकोष से खेल रही थी और उसका रेशमी मुँह उसके लंड को चूसने लगा. शिल्पा ने ऐसा स्वाद कभी ना चखा था. वो उत्तेजित होती हुई अधिक से अधिक लंड को मूह मे लेने लगी और फिर सूपड़ा उसके कंठ से टकराने लगा. जब वो लंड को मुँह से बाहर निकलती तो “पच” की आवाज़ कमरे मे गूँज जाती.

विनोद का लंड अब मस्त से उच्छल रहा था लेकिन वो भी अपनी बेहन के ख़ज़ाने को स्पर्श करना चाहता था, चूमना चाहता था. विनोद ने शिल्पा की चुचि को मसल्ते हुए कहा” मेरी प्यारी बहना, अब मुझे भी अपनी चूत पर हाथ लगाने का मौका दो, इसका स्वाद चखने दो, चलो हम बिस्तर पर चलते हैं जहाँ हम जिस्मानी मिलन मे बँध जाएँ और हम भाई बेहन मे कोई फासला ना रहे” शिल्पा ने अपनी भैया का लंड चूसना बंद कर दिया और अपनी गुलाबी आँखों से अपने भैया को प्यार से निहारती हुई मुस्कुरा कर बोली,”भैया जब तुमको सब कुच्छ सौंपने का फ़ैसला कर लिया है तो मुझे जहाँ चाहो ले चलो. अब से तेरी बहना सिर्फ़ तेरी है. जो चाहो कर लो और जो चाहो करवा लो अपनी बेहन से”

नग्न अवस्था मे दोनो भाई और बेहन बिस्तर की तरफ बढ़ गये. विनोद पीछे था और अपनी बेहन की मस्त गांद को ठुमक ठुमक करते हुए देख कर मस्ती से भर गया.”एक दिन शिल्पा की गांद ज़रूर चोदुन्गा” उसने मन ही मन अपने आप से कहा. पलंग पर जा कर शिल्पा बैठ गयी और विनोद उसके साथ चिपक कर उसको चूमने लगा. विनोद को अपनी बेहन के होंठों से अपने लंड का स्वाद आ रहा था. भाई ने बहना को बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगों को फैलाते हुए अपनी सग़ी बेहन की चूत पर अपने होंठ जमा दिए.

शिल्पा की चूत मक्खन जैसी मुलायम थी लेकिन उसमे से एक आग की गरमी निकल रही थी. विनोद के तपते होंठ अपनी बेहन की की चूत के आस पास घूमने लगे और उसकी ज़ुबान चूत के होंठों को चूमने लगी. भाई की गरम साँसें बेहन की चूत को भड़का रही थी और प्यासी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया.” ओह..भैयाआ…तुम ने कैसी आग लगा दी है मेरे जिस्म मे…मेरी चूत फड़ फाडा रही है…ऊओह मेरे भाई…सम्भालो मुझे….मेरी आग शांत कर दो मेरे भैया…मैं मर जाऊगी मेरे भैया…आअहह….भगवाआअँ…मत तड्पाओ भैयाआआ!!!” विनोद अपनी ज़ुबान को शिल्पा की चूत मे घुस चुका था और शिल्पा अपने चुतडो ऊपर उठा रही थी ता कि अपने भाई की ज़ुबान को आसानी से अपनी चूत मे समा ले.

क्रमशः……………………….
गतान्क से आगे………………

शिल्पा के हाथ अब उसकी मस्ती से भरी चुचिओ को दबा रहे थे और उसने आँखें बंद कर रखी थी. कुच्छ देर चूत रस चाटने के बाद विनोद ने अपनी बेहन की जांघों को चूमा और फिर अपना मूह उसके चुचक पर ले गया. गदराई चुचि मूह मे भर के वो पागल सा हो गया और उसका लंड अब उसको बेह्न्चोद बनाने के लिए तड़पने लगा. “शिल्पा, मेरी बेहन, अब चुदाई शुरू करते हैं. तुम मेरे ऊपर चढ़ जाओ और मैं तेरे नीचे लेट जाता हूँ. मैं अपना लंड अपनी बेहन की चूत मे जाते हुए देखना चाहता हूँ. मुझे लगता है कि मेरी प्यारी बहना भी अब चुदाई के लिए तैयार हो चुकी है”

विनोद ने शिल्पा को बाहों मे उठाया और चूमते हुए लेट गया. शिल्पा अपने भाई के ऊपर चढ़ गयी और दोनो के नंगे जिस्म एक दूसरे से मिलने लगे. शिल्पा ने अपनी टाँगों को फैलाया और चूत को खड़े लंड पर रगड़ने लगी. विनोद से रुका नहीं गया तो उसने अपनी बेहन को कमर से पकड़ कर अपने लंड पर उतार दिया. “फूच” की आवाज़ से लंड उसकी बेहन की चूत को चीरता हुआ गरम गुफा मे परवेश कर गया. चूत की दीवारों से रस टपक रहा था और चिकनाई की वजह से लंड महाराज बेहन की चूत मे घुसते चले गये.

शिल्पा की चूत का रास्ता पहले ही सुरेश के लंड ने खोल दिया था. इसी लिए वो मस्ती से चुदने लगी. वो झुकती चली गयी और उसकी मस्त चुचि अपने भाई के सीने पर रगड़ खाने लगी,”ओह्ह्ह भैया आप का लंड जड़ तक घुस चुका है मेरी चूत मे….बहुत मस्त लोड्‍ा है आपका भैया…आपका तो सुरेश से भी मोटा है…अपनी बेहन की चूत को पूरा खोल रखा है आपके लंड ने भैया…चोदो मुझे मेरे भैया….वाह मेरे भैया…मैं आनंद से मरी जा रही हूँ..खूब चोद अपनी बहना को मेरे भाई!!”

विनोद को अपना लंड शिल्पा की चूत की गहराई मे घुसता हुआ महसूस हो रहा था. उसने शिल्पा के निपल को मूह मे ले लिया और नीचे से ज़ोर दार धक्के मारने लगा,” तो मेरी प्यारी बहना सुरेश से चुदवा चुकी है?” शिल्पा लंड के ऊपर नीचे होती हुई बोली” हां भैया जब मैने अपने भाई को नीता की चुदाई करते देखा तो रह ना सकी. अगर मेरा भाई मेरी सहेली को चोद सकता है तो सुरेश मुझे क्यो नहीं चोद सकता? मेरी चूत को भी लंड उसी तरह से चाहिए जिस तरह से मेरे भाई के लंड को चूत चाहिए. अब तो मेरे भाई का लंड ही मुझे चोद रहा है, अब और क्या चाहिए मुझे, भैया ज़ोर से चोदो मुझे, मेरी चूत का रस टपकने वाला है, आपके लंड मेरी चूत को तृप्त कर रहा है!!!” इस के साथ ही शिल्पा ने तेज़ी से विनोद के लंड की चुदाई शुरू कर दी.

विनोद उत्तेजना की सीमा पर कर चुका था. वो अब चुदाई का आसन बदलना चाहता था. वो बोला” शिल्पा, अब तुम बस करो और घोड़ी बन जाओ. मैं तुझे घोड़ी बना कर चोद्ना चाहता हूँ!” शिल्पा ना चाहते हुए भी लंड से उठी और हाथों और घुटनो के बल चौपाया हो गयी और उसने अपने चुतडो ऊपर उठा लिए. विनोद ने उसकी गांद पर हाथ फिराया और अपना भीगा हुआ लंड एक बार उसकी गांद पर रगड़ना शुरू कर दिया. शिल्पा को लगा कि शायद विनोद उसकी गांद पेलने लगा हो. लेकिन तभी विनोद ने लंड चूत मे पेल दिया. चूत ने भैया के लंड को एक दम से निगल लिया.

विनोद का लंड बुरी तरह से फूला हुआ था और वो अपनी बेहन की कमर पकड़ कर धक्के मारने लगा. कुतिया की तरह झुकी हुई उसकी चुदासी बहना उसको अपनी शक्ति का एहसास दिला रही थी. “अब मैं जो कहूँगा, शिल्पा वो ही करेगी, मेरी बहन अब मेरी गुलाम बन के रहे गी और मैं शिल्पा और नीता दोनो को चोदुन्गा!!” विनोद ने अपने आप से कहा और मस्ती मे उसने शिल्पा को बालों से पकड़ कर चोद्ना शुरू कर दिया जैसे वो घोड़ी हांक रहा हो. “भैया मेरी चुचि दबाओ, प्लीज़…मैं झरने वाली हूँ…मेरे निपल दबाओ, मुझे ज़ोर से पेलो, मेरे भाई..आआहह…ज़ोर से भैयाआ..ऊऊहह चोद लो अपनी बहना को!!!” शिल्पा चिल्ला रही थी और अपनी गांद को अपने भाई के लंड पर धकेल रही थी.

विनोद ने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी और मस्ती से चोद्ने लगा. उसके अंडकोष उसकी बेहन के नंगे चुतडो से टकरा रहे थे और कमरे मे पच पुच की आवाज़ें गूँज रही थी. विनोद का लंड भी झरने को थी. बगल से हाथ डाल कर उसने शिल्पा की चुचि मसल डाली और लंड की चोट और तेज़ कर दी. शिल्पा ने एक हाथ से अपने क्लिट को स्पर्श किया और वो झरने लगी,” ओह्ह्ह भयियैययाया..मैं गाईए…मेरी चूत…आपका लंड..मैं मरी…भैयाअ मैं बस….ओह्ह्ह्ह भगवाां…आअहह!!”

इसी के साथ विनोद का लंड अपना रस एक फव्वारे की तरह छोड़ने लगा. बेहन की चूत मे भाई का लंड पिचकारी छोड़ रहा था और दोनो आँखें बंद कर के चुदाई के आनंद मे डूब चुके थे.

समाप्त


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