परिवार में थरक भारी बातों की सेक्सी कहानी

हेलो दोस्तो, कैसे हो आप सब? उमीद करता हू हॉर्नी ही होंगे सारे. तभी तो यहा आए हो. चलिए इस कहानी को शुरू करते है. तो दोस्तों कहानी मेरे परिवार की है, जहाँ हम जॉइंट फॅमिली में रहते है. पहले आपको सभी के बारे में जानकारी दे डू.

बेसिकली मैं राहुल, मुंबई में कॉलेज में हू. मेरी बॉडी टाइप तो अब क्या बतौ? किसी नॉर्मल लड़के को आप इमॅजिन कर लो, बस वैसा ही तोड़ा पतला टाइप. मेरे दाद विकास, 40 यियर्ज़ के, एक-दूं हासमुख किसाम के इंसान है. मेरी मों निराल, 38 यियर्ज़ की, बिल्कुल सुंदर थोड़ी चब्बी और अक्सर स्लीव्ले टाइप कपड़े पहनने वाली लेडी है.

वो काफ़ी सुंदर है. अगर आपको काहु तो आप मेरी मों को आक्ट्रेस “रश्मि देसाई” से कंपेर कर सकते हो. काफ़ी मिलती जुलती फिगर और सूरत है. फिर आते है मेरे चाचू विवेक, 39 यियर्ज़ के, और बिल्कुल पापा की नेचर के जैसे. मेरी चाची मोना, 38 यियर्ज़ की, जो फिगर में तो मेरी मों के मुताबिक थोड़ी कम चब्बी है. पर्फेक्ट साइज़ जिसे कहते है वैसा समझ सकते हो आप.

यहा मैं अगर काहु तो आप मेरी चाची को आक्ट्रेस “नुश्रत भरूचा” से कंपेर कर सकते हो, तो आपको एक आइडिया आ जाएगा. उनकी एक बेटी सोनू, जो मुझसे 2 साल बड़ी है, और फाइनल एअर में है. वो भी काफ़ी गोरी है, और अपनी मम्मी के उपर ही गयी है. सुंदर और पटाखा है.

हम सब के बीच आपस में काफ़ी प्यार है, और सभी आपस में मिल कर हस्सी-खुशी रहते है. इसी तरह हमने वाकेशन में कही बाहर जाने का प्लान बनाया, और प्लान के हिसाब से हम मनाली चले गये. वाहा हमने एक 4 स्तर होटेल में 2 रूम्स लिए. एक हमारे लिए और एक चाचा-चाची और सोनू के लिए.

हम पहुँचे, अपने-अपने रूम में रेस्ट किया, और फिर डिन्नर के लिए हम नीचे गये. वाहा ज़्यादा लोग नही थे, क्यूंकी हम वीकडेस पर गये थे. एक टेबल पे सभी लोग बैठ कर खाना खा रहे थे. मैं और सोनू यहा-वाहा घूम रहे थे, और पेस्ट्रीस और डिज़र्ट्स खा रहे थे. टेबल पर सभी खुश थे, और काफ़ी डिस्कशन चल रही थी.

मोना: यार कितना अछा लग रहा है ना.

निराल: हा इतने सालों बाद हम सब कही साथ निकले है.

विकास: एस डार्लिंग. ये सब हम दोनो भाइयों ने तुम दोनो के लिए प्लान किया है.

विवेक: एस. तुम दोनो घर का इतना ख़याल रखते हो. बच्चो का ख़याल रखते हो, और पता नई कितने काम करते हो.

मोना: सिर्फ़ 1 बच्चे का ख़याल थोड़ी रखते है हम. 3 बच्चो का ख़याल रखना बहुत मुश्किल काम है.

निराल: 3 बच्चे?

मोना: हा 3 ना. मेरी सोनू, फिर मेरे पति, जिनके नखरे बच्चो से कम नही है, और इनका वो जो कभी भी मूड में आ जाता है. हहे.

निराल: इस्श मोना. तू भी ना!

विवेक: क्या मोना? ये बातें सब के सामने?

मोना: हा तो निराल तू भी तो तीनो का ख़याल रखती ही होगी ना? आफ्टर ऑल हम सब अडल्ट्स ही है. इसमे शरमाने वाली क्या बात?

विकास: बात तो सही है भाभी आपकी. निराल नही कह रही, लेकिन मैं आपको बताता हू की निराल भी आपकी तरह तीनो बच्चो का ख़याल रखती है (सब हासणे लगे)

विवेक: बहुत अची बात है.

मोना: वैसे मनाली का प्लान आप दोनो भाइयों में किसका था?

विवेक: क्यूँ पसंद नही आया?

निराल: नही तो. किसने कहा? मुझे तो बहुत अछा लगा.

मोना: अर्रे किसका भी हो, आइडिया जमाल का है. और ऐसे ठंडे-ठंडे मौसम में तो सेक्स करने का मज़ा ही आ काए. क्यू जी? (चाचू को पूछते हुए)

विवेक: हा मज़ा क्यूँ ना आए. लेकिन बच्चे भी है ना. बस सोनू को तुम सुला दो, फिर तो हमारे मज़े ही मज़े जान.

मोना: ऐसे नही यार. इतना डोर आए है. इतने पैसे खर्च किए है, और बस ऐसे बच्चो की वजह से च्छूप-च्छूप के करके मूड खराब कर दे?

निराल: वैसे आइडिया बुरा नही है. ऐसे ठंडे मौसम में तो सारी रात करने का मज़ा ही अलग होता.

विकास: बच्चे बड़े हो रहे है. लेकिन आप दोनो की तारक है की ख़तम ही नही होती?

मोना: क्यूँ देवर जी? आप दोनो को करने की इक्चा ना हो तो बता दो. हम दोनो अपना इंतेज़ाम खुद ही कर लेंगे. क्यूँ निराल?

निराल: हा बिल्कुल. और आप शायद जानते नही हो. लेकिन फीमेल्स की नीड्स 30 यियर्ज़ के बाद बढ़ जाती है. और वैसे भी सेक्स तो हर कोई करता है. उसमे क्या है? बस डालो निकालो और हो गया. अर्रे इसे तो एक्सप्लोर करना चाहिए. अलग-अलग जगहो पे.

मोना: अलग-अलग पोज़िशन में नये-नये तरीके. छ्चोढ़ निराल. इनको ये सब नही समझेगा. आप तो जैसे भी खुश करते हो मुझे, मैं उसी में खुश हू (चाचू को हग करते हुए)

निराल: हा, मैं भी हमेशा खुश होती हू आप से. हम तो बस अपनी-अपनी इकचायें बता रहे थे.

विवेक: हम क्यूँ नही करना चाहेंगे भला? वैसे आप दोनो ये सोचो की राहुल और सोनू भी है हमारे साथ. अब उनके लिए अलग रूम तो नही ले सकते ना.

मोना: हा बात तो सही है. बच्चे ज़रूर है, लेकिन बच्चे इसी उमर में आधी-आधी चीज़े सीखते है, और फिर अंजाने में ग़लती कर देते है.

निराल: कॉलेज में तो कुछ सीखते है. यहा-वाहा दोस्तों से अधूरी चीज़े सीखते है. बात तो सही है. और इस उमर में उन्हे नही समझाएँगे तो आयेज जेया कर बड़ी मुसीबत से बच सकते है.

विकास: हा आप दोनो के पास इसका कोई प्रॅक्टिकल सल्यूशन है तो बताओ. वरना हमारा प्लान बनाओ की बच्चो के रहते हुए हम सब कैसे सेक्स कर सकते है?

मोना: हम सब? (आक्टिंग में शॉक रिक्षन देते हुए) देवर जी आपको साथ में सेक्स करना है? ची-ची!

विकास: अर्रे मेरा मतलब था की आप दोनो भी कर सको और हम दोनो भी. अपने-अपने कमरे में.

मोना: श, तो ठीक है. वरना मैं तो इस नये आइडिया को मान ही लेती (हेस्ट हुए).

निराल: इस्श मोना. तुझे हर टाइम मस्ती ही सूझती है?

विवेक: अर्रे भाभी, इसकी तो आदत है. आधा टाइम मस्ती करेगी, उससे भी ज़्यादा वक़्त सेक्स की बातें.

मोना: हा तो मुझे मज़ा आता है.

निराल (चाची का साथ देते हुए): वैसे आइडिया बुरा तो नही था सेक्स साथ करने का.

मोना: हैईना? आफ्टर ऑल कोई तो साथ देने वाला मिला.

विकास: तुम दोनो पागल हो गये हो?

यहा एक तो आपस में करने का ही प्लान नही बन पा रहा है, और तुम लोग चारो साथ करने का प्लान बनाने लगे.

निराल: मतलब आपको इस बात पे कोई ऐतराज़ तो नही है? यही समझे हम?

विवेक: आप दोनो का समाज नही आता कब सीरीयस बातें करते हो कब मज़ाक.

मोना: अर्रे बाबा मज़ाक ही है. चिल करो. ये डिसाइड करो की ह्यूम क्या करना है?

निराल: एक आइडिया है. देख ऐसा करते है. पहले मैं राहुल को तुम्हारे कमरे में भेज दूँगी. वाहा सोनू और राहुल मस्ती करते-करते सो जाएँगे. तब मैं और विकास कर लेंगे. फिर 3-4 घंटे बाद, तुम लोग बच्चो को हमारे कमरे में भेज देना. तब तुम लोग कर लेना सेक्स.

मोना: 3-4 घंटे? जीजू कों सा शावॅन-प्रश खा के चढ़ते हो?

विकास: ऐसी कोई बात नही है. कोई शावॅन-प्रश वग़ैरा की ज़रूरत नही पड़ती.

निराल: मेरे कहने का मतलब. उसी में जितनी बार चाहे इतनी बार कर सकते है ना. मल्टिपल टाइम्स योउ नो.

मोना: श ऐसे. मैने सोचा की 3-4 घंटे मतलब दोनो भाइयों की पवर एक जैसी है क्या?

निराल: मतलब? इनका 3-4 घंटे कंटिन्यू चल जाता है काम? फ्युयेल टांक ख़तम नही होता?

मोना: अर्रे मतलब तुम्हारी तरह ही. ब्रेक लेकर थोड़ी-थोड़ी देर में.

विकास: हा तुम लोग आपस में कैसे करते है, वो भी डिसकस कर लो ना.

विवेक: हा और किसका कितना बड़ा है, कितना मोटा है, वो भी कर लो बात. तुम लोग भी ना सॅकी. सेक्स पे बात आई तो शुरू ही हो जाते हो.

मोना: हहे, हम तो बस भावनाओ में बह जाते है.

निराल: भावनाओ में नही. तारक की प्यास में. हहा.

(सभी हासणे लगे)

मोना: चलो फिर तय ताहा. निराल तुम लोग राहुल को भेज देना. फिर तुम्हारा हो जाए तो कॉल कर देना. हम दोनो बच्चो को तुम्हारे रूम में भेज देंगे. लेकिन हा, उससे पहले कपड़े पहनना मत भूलना, हहे.

निराल: ना हम तो बिना कपड़ो के ही बैठेंगे बच्चो के सामने. (सार्कॅज़म में बोलते हुए)

मोना: हा फिर तुम ही बच्चो को जवाब देते बैठना पूरी रात. ये लुल्ली बड़ी क्यूँ है, क्या है ना वो क्यूँ नही है.

विकास: यार भाभी आपकी इमॅजिनेशन को मानना पड़ेगा. आप कों सी बात से कहा पहुँच जाती है ना?

मोना: हहे, कभी साथ बैठ कर देखो हमारी इमॅजिनेशन कहाँ-कहा जाती है.

विवेक: चलो-चलो अब चलते है अपने-अपने कमरे में.

(सभी हम बच्चो को आवाज़ लगते हुए)

निराल: राहुल बेटा चलो रूम में.

मोना: सोनू बेटा, खा लिया तो चलो अब सोने.

और इसी तरह हम सब अपने अपने कमरे में चले गये.

तो दोस्तों आपको यहा तक की कहानी कैसी लगी, कॉमेंट्स करके और मेरी एमाइल ईद पे मैल करके ज़रूर बताना.

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