परिवार में चुदाई और ग्रूप सेक्स की प्लॅनिंग

तो दोस्तों, ये इस कहानी का 3र्ड पार्ट है और उमीद करता हू की ये सीरीस आपको अची लग रही होगी. तो जैसा की आपने पढ़ा होगा की कैसे चाचू और चाची के बीच सेक्स की गर्माहट बढ़ने लगी थी, और हमने पहली बार चाची की ब्लॅक नेटेड पनटी देखी. अब आयेज-

तो करीब सुबह के 4 बजे रहे होंगे, और चाची हमे उठाने लगी.

मोना: सोनू बेटा, राहुल, चलो उठो.

सोनू (आधी नींद में): मम्मी क्या हुआ?

मोना: अर्रे बच्चो योउ नीड तो गो तो राहुल’स रूम. यहा अभी थोड़ी देर में मेंटेनेन्स के लिए कोई आने वाले है, सो हमे बाहर जाना पड़ेगा.

राहुल: तो चाचा-चाची आप भी चलोगे ना?

विवेक: नही बेटा, तुम लोग वाहा सो जाओ. और जैसे ही यहा का काम ख़तम होगा, हम सुबह मिल लेंगे ब्रेकफास्ट पे. लेकिन तुम्हारी नींद बिगड़नी नही चाहिए ना इसलिए.

मोना: कम ओं गाइस, गेट उप.

सोनू: मम्मी नींद आ रही है.

मोना: हा, इसलिए तो वाहा रूम में जेया कर सो जाना.

तो उनके कहने के हिसाब से मैं इस वक़्त अपने कमरे में आ चुका था, और मेरे पीछे सोनू भी. चाची भी अंदर आई, और 2 मिनिट मम्मी से बात करने लगी.

मोना: यार निराल, कितने घंटे? हम लोग कब से वेट कर रहे थे.

निराल: अर्रे हम लोग आज एक एक्सपेरिमेंट कर रहे थे. आंड हम लोग ये 4-5 घंटे लगातार लगे रहे. हमने कुछ वाइल्ड वाले सेक्स वीडियोस देखे, आंड वो करने का ट्राइ किया. विकास की तो आज सच में गांद फटत गयी. हे लिटरली कुंमेड मोरे देन 10 टाइम्स

मोना: फक, इस हे ओके? इतना पानी निकला देवर जी का?

निराल: हा तो, ये हर रौंद के बाद मेरा दूध पीते, और फिर शुरू हो जाते. आज तो मज़ा ही आ गया. चल अब तेरी बारी, आंड ऑल थे बेस्ट.

मोना: थॅंक योउ सो मच. अब बच्चो का ध्यान रखना.

निराल: एस, डॉन’त वरी. बाइ. हॅव आ ग्रेट फक.

मोना: थॅंक्स.

फिर चाची अपने कमरे में चली गयी, और हम अपनी-अपनी जगह पे सोने चले गये. तो यहा भी कुछ पहले के जैसा ही था. बस सोनू और मेरी पोज़िशन इंटर-चेंज हो चुकी थी. मैं मम्मी के साइड वाली जगह पे सोया था, और बाकी दोनो कॉर्नर्स पे पापा और सोनू.

फिर अब नींद तो उडद ही चुकी थी. मैं बस यहा-वाहा पलट रहा था, और सोने की कोशिश कर रहा था. सोनू भी सो चुकी थी. फिर थोड़ी देर में मैने नोटीस किया की मम्मी पापा भी अभी सोए नही थे. क्यूंकी हर थोड़ी-थोड़ी देर में बेड पे थोड़ी हुलचूल होती, और मुझे पहले लगा की ये करवट ले रहे थे.

लेकिन उपर मम्मी की निघट्य का जो शोल्डर के पास वाला स्ट्रॅप होता है, वो उतरा हुआ था. क्यूंकी थोड़ी-थोड़ी देर में मम्मी हमारी तरफ घूमती और नीचे देखती की हम सो रहे थे ना. उस वक़्त मैं आँखें बंद करता, और फिर दोबारा नज़र मम्मी पापा की तरफ चली जाती. मैने नोटीस किया की ब्लंकेट के अंदर मम्मी पापा के उपर सोई हुई थी. खैर उससे ज़्यादा तो क्या ही नज़र आ सकता था.

अंदर तो पापा के शॉर्ट्स उतार चुके थे, जो उन्होने साइड में रख दिए थे. मम्मी ने तो वन पीस टाइप निघट्य पहनी हुई थी, जो कमर तक उपर थी, और पापा की लुल्ली मम्मी की छूट में अंदर बाहर हो रही थी. मम्मी बीच-बीच में अपने बालों को पीछे करती, और फिर दोनो हाथ पिल्लो के सपोर्ट से चुदाई करती. जैसे ही पापा का पानी निकल जाता, मम्मी अपनी जगह पर लेट जाती, और दोनो एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराते.

फिर मम्मी एक बार हमे देखती की हम जाग तो नही रहे थे. उसके बाद जैसे ही मम्मी दूसरी तरफ घूमी, तो ब्लंकेट थोड़ी साइड हो गयी. तब मैने पहले बार मम्मी की आस देखी.

मैने सोचा मम्मी ने भी मोना आंटी की तरह पनटी उतार दी होगी रात में सोते वक़्त. लेकिन नाइट लॅंप में इतना क्लियर तो कुछ भी नज़र नही आता. बस हल्का-हल्का सा दिखा जिसे देख कर मैं काफ़ी हैरान था. खैर उसके बाद मुझे तो याद नही की मैं कब सो गया.

अगले दिन हम सब उठे, और फ्रेश हो कर तैयार होने लगे. फिर नीचे ब्रेकफास्ट रूम में मिले. मैं और सोनू तो बाहर थे. अंदर बाकी सब बड़े लोग बात कर रहे थे.

निराल: तो मोना भाभी? कैसी रही रात? कितनी बार और कैसे मज़े किए?

मोना: अर्रे आराम से निराल. सब जानना है? वैसे मज़ा तो काफ़ी आया. हमने तो रूम की हर जगह सेक्स किया. पहली बार इतने सालों में मुझे बहुत मज़ा आया. जैसे ही मैने इन्हे बताया की विकास भाई ने 10 बार पानी निकाला, तो आपको कम से कम 15 बार निकालना पड़ेगा.

निराल: फिर? जीजू आपका क्या हाल है? लग तो रहा है की आप लोग सोए ही नही होंगे 1 मिनिट के लिए भी.

विवेक: नही निराल, इतने सालों बाद ऐसा मौका मिला था. वरना बच्चो और काम से तो फ़ुर्सत ही कहा मिलती है. सोए तो नही लेकिन मज़ा काफ़ी किया.

मोना: हा लेकिन 15 बार तो नही. मैने 12 बार पानी निकाला इनका. लेकिन पहले 4 बार में फुल फव्वारा निकला. उसके बाद तो बस बूँद-बूँद ही निकला.

विवेक: हा तो भाभी गन्ने का जूस थोड़ी है, की हर बार पानी निकलता ही जाएगा.

विकास: वही तो, 3-4 बार में जितना निकलना हो पानी निकल जाता है.

मोना: वैसे पता है. कल जब बच्चे सोए हुए थे, तो मेरी पनटी नीचे गिर गयी थी. और सोनू पूछने लगी क्या हुआ और सब. लेकिन मैने बात की घुमा दिया. तुम्हे नही लगता बच्चो के मॅन में काफ़ी डाउट्स होंगे.

निराल: हा मुझे भी ऐसा लगा की शायद बच्चे सोए नही है, और बस नाटक कर रहे थे. लेकिन हम तो सेक्स की भूख में इतने मगन थे की फराक ही नही पड़ता.

मोना: तो फिर आज का क्या प्लान है?

निराल: हा आज तो आखरी नाइट है हमारी यहा.

मोना (विवेक चाचू को): सुनिए ना, क्या हम हर बार की तरह यहा भी?

विवेक ( शॉक होते हुए की विकास और निराल के सामने): पागल हो गयी हो क्या? ये बात यहा करने की क्या ज़रूरत है?

निराल: क्या मतलब? कैसी बात?

मोना: अर्रे बताते है ना. क्या पता इन्हे भी इंटेरेस्ट हो, तो ये भी मज़े कर सकते है ना.

विकास: भाभी अगर सेक्स में और मज़ा आने वाली बात है तो ज़रूर बताए. भैया इसमे क्या?

मोना: वो दरअसल हम लोग कुछ साल पहले जब घूमने जाते थे ना, तो हम वाहा एक होटेल में रुकते थे. हहा यूष्यूयली कपल्स पार्ट्नर्स स्वाप करते थे. तो हम दोनो दूसरे कपल्स के साथ मिल के सेक्स करते थे. जस्ट तो एक्सपीरियेन्स चेंज.

निराल: फक, क्या बात कर रही हो भाभी. आंड आप दोनो एक-दूसरे की बीवी पति के साथ सेक्स?

मोना: एस. आंड योउ नो जब एक साथ तुम्हे दो अलग-अलग लंड मिले ना, तो मज़ा भी दुगना हो जाता है.

निराल: हमने तो कभी ऐसा सोचा ही नही. क्यूँ विकास? आइडिया तो बुरा नही लगा मुझे. लेकिन मैं जानती हू की आप अगर राज़ी ना हो तो कोई बात नही. मैं समझ सकती हू.

विकास: वैसे अगर तुम्हे ट्राइ करना है तो हम कर सकते है. लेकिन पूरी प्रोटेक्षन के साथ हा.

निराल: लेकिन मोना, यहा हम दूसरे कपल्स कैसे ढूँढे?

मोना: हा, ये बात तो है.

विवेक: हम तो ऐसी जगह आए है जहा कोई क्लब्स वग़ैरा भी नही आस-पास जहा हम जेया कर ट्राइ कर सके.

मोना: आइडिया. देखो आप दोनो को भी स्वापिंग करना है, और हमे भी. क्यूँ ना हम आपस में ही करे?

निराल: मोना, मैं जीजू के साथ? कैसा लगेगा? और परिवार में चुदाई. मुझे सही नही लग रहा.

मोना: यार ये भी तो नया एक्सपीरियेन्स होगा. हमे एक्सप्लोर करने मिलेगा. और ये सोचो हम तो सब एक-दूसरे को जानते है. इतनी ही बातें होंगी, उतना ही मज़ा भी .

विकास: वैसे भैया आपका क्या ख़याल है? मुझे समझ नही आ रहा. मोना का आइडिया है तो वो तो राज़ी है. बाकी निराल तुम बताओ. करना है?

निराल: कोशिश कर सकते है जीजू.

मोना (एग्ज़ाइट्मेंट में): फक एस. सो आज रात होगी हमारी सबसे लंबी और मज़ेदार रात.

निराल: और बच्चे?

मोना: मैं तो सोच रही हू बच्चो को भी साथ रखते है. आफ्टर ऑल हम बात कर रहे थे ना सेक्स एजुकेशन की. मुझे लगता है उन्हे वो ज़रूरी है. और इस उमर में मिलनी चाहिए उन्हे.

निराल: वरना आयेज जेया कर अंजाने में कोई ग़लती ना कर बैठे. यही तो उमर है बनने की या बिगड़ने की.

विवेक: योउ मीन तो से हम स्वापिंग भी करेंगे, और वो भी बच्चो के सामने?

निराल: एस जीजू.

विकास: चलो अब बच्चो की मा को लगता है तो यही सही. लेकिन आज दिन में फिर आराम कर लेते है. पूरी रात तो सोए नही.

निराल: एस आक्च्युयली. पूरी रात इनका लंड खड़ा रखना है, तो अभी रेस्ट देना पड़ेगा ना.

मोना: एस एस विकास भाई, रेस्ट कर लीजिए. क्यूंकी रात को मैं थकने वाली हू आपको. हहे

विवेक: अर्रे तुम क्या तकावगी. हम दोनो मिल कर तुम दोनो की लेंगे फिर तो बारी-बारी.

विकास: एस अब आएगा ना मज़ा. चले अब?

फिर हम सब रेस्ट करने चले गये अपने-अपने कमरे में.

तो दोस्तों आपको यहा तक की कहानी कैसी लगी, मुझे कॉमेंट्स करके और नीचे दी गयी मैल ई’द पे मैल करके ज़रूर बताए.
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