हेलो दोस्तों, कैसे हो? मैं फिर से आपके बीच एक और इंट्रेस्टिंग कहानी लेकर आ गया हू. ये कहानी मेरे एक दोस्त की रियल कहानी है. बाकी की कहानी उसकी ही ज़ुबानी स्टार्ट करते है.
मेरा नाम मोहित है, आगे 19 यियर्ज़, 5.7 फीट हाइट, गोरा रंग, फिट स्मूद हेरलेस बॉडी, पिंक लिप्स और पिंक निपल्स, 2न्ड एअर ब.आ का स्टूडेंट हू. हमारी फॅमिली में पापा मम्मी, एक बड़ा भाई और मैं हू. हम लुक्कणोव में रहते है.
मुझे बचपन से ही लड़कियों के साथ खेलना, उनके साथ रहना बहुत अछा लगता था. काई बार तो बचपन में लड़कियों के कपड़े पहन कर भी खेल लिया करते थे. लेकिन मेरे पापा जब भी मुझे ऐसे देखते वो मुझे मारने लगते और बहुत गुस्सा करते थे. मम्मी मुझे हमेशा चुप करती, लेकिन वो भी बहुत गुस्सा करती थी ये सब करने से.
ऐसे ही बहुत साल बीट गये. पापा और मेरे बीच रिलेशन्स कुछ ज़्यादा आचे नही थे. वो हमेशा बड़े भाई को ही अछा समझते और मुझे बार-बार बोलते, “सुधार जेया और लड़कों के जैसी हरकतें कर लिया कर.”
मैं बहुत टेन्षन में रहने लगा था. मेरे कोई ख़ास दोस्त भी नही थे. एक दो थे, वो भी बार-बार मज़े लेते रहते थे. इसलिए मैं किसी से भी बात नही करता था.
धीरे-धीरे मेरा घर से बाहर जाना बंद सा होने लगा. शिरफ़ स्कूल, फिर कॉलेज और टुटीओन, बस और कही नही. मम्मी हमेशा पापा को समझती थी की आप हमेशा मोहित से गुस्से में क्यूँ रहते हो? उससे बात करने की कोशिश तो करा करो. लेकिन पापा नॉर्मल ही बात करते थे. कभी मेरी फीलिंग को जानने की कोशिश नही करते थे.
मैं लड़कों और मर्दों को देख कर पता नही कहा खो जाता था. लेकिन मुझे सेक्स के बारे में कुछ पता नही था. पापा मुझे काई बार ये सब करते हुए नोटीस करते थे, और गुस्से में सुधार जाने के लिए बोल देते बस.
लेकिन उनने कों बताए ये तो नॅचुरल है मेरे साथ. मैं कुछ भी कर लू, लेकिन फीलिंग कैसे चेंज कर सकता था.
एक दिन हमारे घर पर मेरे बड़े वाले मौसा जी आए थे किसी काम से. मेरे मौसा जी रेलवे में है. इसलिए वो ट्रॅवेल करते रहते है, और बहुत ओपन माइंड के है.
मेरे पापा मेरे बड़े मौसा जी की बहुत रेस्पेक्ट करते है. मेरे मौसा जी का नाम जगदीश है, आगे 55, 5.9 फीट हाइट. उनका घर मीरूत में है. हमेशा खुश रहते और मेरे साथ तो बहुत आचे से बात करते. हमेशा मेरे और भाई के लिए कुछ ना कुछ ज़रूर लाते थे.
मौसा जी को आए हुए 2 दिन हो गये थे. सब बढ़िया चल रहा था. पापा मॉर्निंग में छाई पी रहे थे. मैं उनके लिए नाश्ता लेकर आया. तब मौसा जी नहा कर ओन्ली टवल में आए. मेरे मौसा जी थोड़े मोटे है और उनकी हेरी चेस्ट है.
मैं उनकी चेस्ट के काले बालों को देख कर सोच रहा था की इस आगे में भी मौसा जी के बाल कितने काले थे. और नास्टा लेकर मैं बस खड़ा रहा और मौसा जी को देखते ही रहा.
तभी पापा ने नास्टा मेरे हाथ से लिया और एक थप्पड़ मेरे कान पर लगा दिया. “मोहित तुझे कितनी बार बोल दिया सुधार जेया. तेरे मौसा है वो, कुछ तो शरम कर.”
मौसा जी: बच्चा है वो. ये क्या हरकत है आपकी? बच्चे से कोई ऐसे बात करता है.
मैं बहुत तेज़ रोते-रोते अपने रूम में आ गया और रूम बंद कर लिया. एक गे चाहे मर्दों को कितना भी पसंद क्यूँ ना करता हो, लेकिन वो सभी मर्दों को ग़लत नज़र से नही देखता. जैसे एक आदमी हर लड़की को एक ही नज़र से नही देखता. पता नही लोगों को इतनी सी बात क्यूँ समझ नही आती?
मेरे रूम में नीचे हॉल की सारी आवाज़ आती है. पापा और मौसा जी बोल रहे थे-
पापा: भाई साब, आपको पता है ये बचपन से कैसा है. अब तो हड्द हो गयी, आपको देख कर भी!
मौसा जी: तुम्हे कैसे पता की वो मुझे देख कर कुछ ग़लत ही सोच रहा है? अभी वो बच्चा है, टाइम के साथ-साथ सब समझ जाएगा.
पापा: कब समझेगा? जब सब मज़ाक बनाएँगे तब?
मौसा जी: कुछ लड़कों में ऐसी फीलिंग होती है, ये नॉर्मल है.
पापा को मौसा जी ने बहुत समझाया, लेकिन वो किसी की नही सुन रहे थे. आख़िर मौसा जी को पापा ने बोला-
पापा: आप ऐसा करो, कुछ दिन इसको अपने पास ले जाओ. शायद यहाँ से डोर जाएगा तो ठीक हो जाए.
शाम को खाना खाने के बाद मम्मी ने मुझे बताया की कल मुझे मौसी के घर जाना था, मौसा जी के साथ. नेक्स्ट दे हम हरिद्वार के लिए निकल गये. मौसा जी मुझे ट्रेन में समझा रहे थे.
मौसा जी: मोहित, पापा की बात का बुरा मत माना करो. वो गुस्सा करते है, लेकिन तुम्हारे बारे में बहुत सोचते है.
ऐसे ही बात करते-करते हम उनके घर आ गये. मौसी की फॅमिली में मौसी जी, उदित भैया, उदित भैया की वाइफ, भैया की 3 साल की लड़की और मौसा जी रहते है. गाते पर उदित भैया और मौसी जी हमारा वेलकम करने आए थे. दोनो ने मुझे गले से लगा लिया. हम अंदर गये.
मैं: भैया, भाभी और गुड़िया कहाँ है?
उदित: हमारे तो हाल-चाल पूच ले देवर साहब.
उदित भैया बॅंक में मॅनेजर है, आगे 31 यियर्ज़, 5.8 फीट हाइट, फिट आवरेज बॉडी, गोरा रंग और फेस पर हल्की-हल्की दाढ़ी. भैया बचपन से ही बहुत इंटेलिजेंट और हासमुख रहे है. इसलिए वो सबसे बहुत प्यार से बात करते है.
भाभी और मौसी ने मेरी पसंद का ही खाना बनाया था. उस दिन हम सब ने बहुत आचे से टाइम स्पेंड किया. फिर शाम को पापा का मौसी के लिए कॉल आया और उसके बाद मौसी पता नही क्यूँ तोड़ा अलग ही बर्ताव करने लगी, जैसे वो कुछ पूछना चाह रही हो.
रात को हम सब च्चत पर ही सो गये. नेक्स्ट मॉर्निंग मेरी आँखें खुली तो देखा मौसी और मौसा किसी बात पर गुस्सा कर रहे है.
मौसा जी: तुम भी टुमरी बेहन और जीजा की बातों में आ रही हो. बच्चा है वो. ये अंध-विश्वास है. मेरे होते हुए ये नही होने दूँगा.
मौसी जी गुस्से में अंदर रसोई में चली गयी. पता नही क्या बात हो रही थी, लेकिन इतना तो समझ गया था की वो शायद मेरे लिए ही बोल रहे थे. मौसा जी के ऑफीस जाने के बाद मौसी मेरे पास रूम में आई.
मौसी: मोहित बेटा, आज किसी से मिलने जाना है. मेरे साथ चलना और मौसा को कुछ नही बोलना. तुम जल्दी ही ठीक हो जाओगे.
उदित (रूम में आते हुए): इसको क्या हुआ है मा? कहाँ जाने की बात हो रही है?
मौसी (घबराते हुए): तुम यहाँ, ऑफीस नही गये क्या?
उदित: नही बस जेया रहा हू. क्या हुआ बोलो इसको?
मौसी: कुछ नही बस माल्वी जी से कुछ पूछने जाना है और कुछ नही.
उदित: ओक, फिर ठीक है.
11 बजे थे. मौसी मुझे रिक्कशे में बिता कर पता नही कहा जेया रही थी. फाइनली 12 बजे हम एक घर के पास पहुँच गये. उसके अंदर जेया कर हम एक सोफे पर बैठ गये, तभी कोई मौलाना जैसा कोई आया.