गे सेक्स स्टोरी अब आयेज-
सिर: मूह से करो ना, फिर तुम्हारी गोरी गुब्बारे जैसी गांद को भी तो मौका देना है.
मैने पूरा लोड्ा एक साथ मूह में उतार लिया, और पूरी मस्ती में खांस-खांस कर चूसने लगा. जैसे कोई सालों से भूखी रांड़ लोड्ा चूस रही हो. मामू से चुदाई के बाद आज ये मौका मिला था, जो मैं पुर मज़े के साथ एंजाय करने के मूड में था.
सिर ने मुझे बेड की साइड में ज़मीन पर बिता दिया, और खुद मेरे सामने एक लेग बेड पर रख कर मेरे मूह की चुदाई करना शुरू कर दिए. सिर इतनी तेज़ झटके दे रहे थे, जैसे पूरा माल मेरे मूह में ही निकाल देंगे.
2-3 मिनिट की मूह चुदाई के बाद सिर का लोड्ा पूरा गीला और मेरा मूह उनके प्रेकुं से भर गया था. मैं खुद खड़ा हुआ और बेड पर गांद और पैर फैला कर बोला-
मैं: लगता है पोते की गांद को तो भूल ही गये. इसको भी मौका दो सेवा का दादू.
सिर ड्रॉयर में से आयिल लेते हुए बोले-
सिर: सोच लो, पूरा लेना होगा फिर.
मैं: सोच लिया दादा जी.
सिर मेरी गांद में आयिल लगा कर, आयिल अंदर तक उंगली डाल कर भरने लगे. फिर अपने लोड पर बहुत सारा आयिल लगा कर दोबारा मेरी गांद में 2 उंगलियों के साथ चुदाई करते हुए मुझे किस करने लगे.
मुझे दर्द हो रहा था. दादा जी की तो उंगलियाँ भी इतनी मोटी थी. पता नही लोड्ा क्या हाल करता. तभी सिर ने 3 उंगलियाँ एक साथ अंदर डाल दी. मेरी तो जान ही निकल गयी. लेकिन सिर ने अपने लिप्स मेरे लिप्स से डोर ही नही करे. मैं दर्द से पागल हो रहा था.
फिर सिर ने हाथ निकाला. मैने गांद के च्छेद पर हाथ लगाया, तो देखा गांद का च्छेद अब फैल गया था.
तभी सिर ने और आयिल मेरी गांद के फैले हुए च्छेद में डाला. उसके बाद लोड पर आयिल लगा कर मेरी गांद में अपना सूपड़ा रखा. उन्होने मुझे चुप रहने का इशारा करते हुए धीरे-धीरे मेरी गांद में सूपड़ा डाल दिया.
आयिल से सूपड़ा तो आराम से चला गया. लेकिन जैसे-जैसे पूरा लोड्ा अंदर गया, मेरी गांद फटने को हो रही थी. 3 मिनिट तक सिर धीरे-धीरे उसी पोज़िशन में मुझे छोड़ रहे थे. फिर सिर बेड पर जेया कर लेट गये, और मैं उनके लोड को गांद में लेते हुए सिर पर बैठ कर हॉर्स राइड करने लगा.
इसी पोज़िशन में सिर ने मुझे झुका कर किस करते हुए मेरी कमर को कस्स कर पकड़ लिया. फिर अपनी जाँघ उँची करके ज़ोर-ज़ोर के झटके देने लगे.
मैं: ह्म्म्म्ममम आआआ ओह. आराम से करो…
इस उमर में भी दादा जी की जवानी बनी हुई थी. लगते ही नही थे की मेरे पापा से भी बड़े थे. 5 मिनिट छोड़ने के बाद सिर ने मुझे मिरर के सामने खड़ा कर दिया. फिर झुका कर दोबारा से तेज़ झटको के साथ छोड़ने लगे.
मिरर के सामने खुद को चूड़ते हुए देखना एक अलग ही हवस जगा देता है. मैने सिर का एक हाथ मेरे लोड पर रखा, और सिर तेज़-तेज़ झटके देते हुए मेरे लोड को हिलने लगे.
मैं: और तेज़ करो, बहुत मज़ा आ रहा है.
सिर: हैईना दादा जी का लोड्ा जानदार?
मैं: जानदार ही क्या, ये तो शानदार भी है. आआ ह्म्म्म्म और करो.
5 मिनिट तक तेज़-तेज़ झटके के साथ छोड़ने के बाद सिर ने मेरी गांद अपने माल से भर दी, और हम दोनो बिस्तर पर नंगे ही गिर गये. फिर एक-दूसरे को किस किया.
सिर: तुम्हारा बदन तो किसी को भी पागल कर सकता है. फिर मैं क्या चीज़ हू, और हा बेटा, किसी को बोलना मत ये.
मैं: डॉन’त वरी दादू.
फिर हम दोनो चेंज करके सो गये. नेक्स्ट मॉर्निंग:-
हम सब रेडी हो कर गार्डेन एरिया में ब्रेक फास्ट कर रहे थे. सिर आज अपने गाओं जेया रहे थे. मेरा मॅन बहुत उदास हो रहा था. कितने दिन बाद अब तो मज़े आने लगे थे.
पापा: सिर आप 3 दिन और रुक जाते, तो मैं आपको कार में ले जाता. क्यूंकी मैं भी कुछ दिन बाद किसी काम से गाओं ही अवँगा, और आपके पास बॅग्स भी बहुत हो गये है. कैसे लेकर जाओगे?
मैं एक-दूं से खुश हो गया. मैने भी सिर को रुकने का फोर्स किया, लेकिन वो बार-बार बोल रहे थे-
सिर: मैं नही रुक सकता, मुझे गाओं के स्कूल में बहुत से काम करवाने है.
टाई जी (पापा से): आप किसी को कार लेकर साथ भेज दो. और फिर 2-3 दिन बाद जब आप जाओगे, तब उसे ले आना.
पापा: ये तो मैने भी सोचा था. लेकिन 3 दिन वहाँ रुकने वाला कोई होना भी तो चाहिए.
पापा की ये बात सुन कर मैने तुरंत बोला: पापा, सिर दादा जी जैसे है. उनके लिए इतना काम तो मैं भी कर सकता हू, और मुझे कार भी अची चलानी आती है.
इस बात पर मैने सिर को धीरे से आँख मारी और बाग रेडी करके हम दोनो 12 बजे तक घर से निकल गये. रास्ते में हम बहुत सी मस्ती, मज़ाक और बातें करते हुए चलते जेया रहे थे.
सिर का गाओं घंडीढ़ाम के पास था. रास्ता लंबा था, इसलिए मैने एक कुछ फन करने के लिए कार को एक सुनसान रास्ते पर रोका.
सिर: क्या हुआ?
मैं: आप तो कुछ करने का सोचोगे नही. इसलिए मैं ही कुछ कर लू?
सिर: बेटा कोई देख लेगा, और वो रात में तो बस जोश-जोश में हो गया. लेकिन ये सही नही है बेटा.
मैं: दादू अब तो सब हो गया. अब सोचने से क्या होगा? और वैसे भी यहाँ डोर-डोर तक कोई नही है.
मैने कार मैं रोड से डोर एक खेत के बीच लगा रखी थी. मैने उनको पीछे वाली सीट पर बुलाया, और एक प्यार बड़ा लिप्स पर किस करते-करते उनके गर्दन से होते हुए उनके लोड के पास आ गया.
पंत के अंदर ही लोड्ा पूरा खड़ा हो चुका था, टाइम ज़्यादा ना वेस्ट करते हुए मैने जल्दी से लोड्ा बाहर निकाला और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा. सिर धीरे-धीरे मेरी पंत खोल कर मेरी अंडरवेर निकालने लगे.
मैं: क्यूँ अब क्या हुआ?
सिर ने एक प्यारी सी स्माइल दी, और मेरी गांद पर हाथ फेरने लगे. मैं ज़ोर-ज़ोर से लोड्ा चूज़ ही जेया रहा था.
सिर: अब गांद में ले लो बेटा. वरना कोई आ जाएगा.
मैने अपने बाग से क्रीम और कॉंडम निकाला, और सिर को पहना कर लोड पर बैठने लगा. लेकिन कार में सही से बैठा नही जेया रहा था. तभी सिर ने साइड गाते खोला और खुद बाहर निकल गये, और मुझे कार की सीट पर डॉगी बना कर लोड्ा मेरी गांद में डालने लगे.
पहले तोड़ा दर्द हुआ. फिर बाद में आराम से पूरा अंदर चला गया. सिर पहले धीरे फिर तेज़ झटको के साथ गांद फाड़ चुदाई कर रहे थे. हमारी पूरी कार बहुत तेज़-तेज़ हिल रही थी.
मैं: एयाया… ओह… ह्म्म्म्मम, धीरे करो, बहुत दर्द कर रहे हो.
सिर कसम से हालत ही बुरी कर देते है गांद की. 10 मिनिट बाद-
सिर: हितें, माल मूह में लेगा क्या?
मैं तुरंत घुटनो के बाल बैठ कर, कॉंडम निकल कर, लोड्ा पूरी स्पीड में चूसने लगा. थोड़ी देर बाद सिर ने मेरा सर बहुत ज़ोर से पकड़ कर आयेज-पीछे किया, और सारा माल मेरे मूह में ही निकाल दिया. मैं भी सिर के अमृत की एक-एक बूँद निगल गया, और लोड को जीभ से सॉफ करता रहा.
तोड़ा नमकीन था, लेकिन बहुत सारा और टेस्टी था. जिगर के बाद ये दूसरी बार था जब मैने किसी का माल पिया था.
चुदाई के इस सफ़र में अगले पार्ट में पढ़ना कैसे और क्या-क्या हुआ.