पापा और चाचा से चूड़ने की सेक्सी कहानी

ही दोस्तों, तो काफ़ी दीनो बाद मैं इस सीरीस का न्यू पार्ट आपको बताने जेया रही हू. देरी के लिए माफी तलब है, और उमीद करती हू की ये पार्ट भी आपको बाकी पार्ट्स की तरह पसंद आएगा.

तो न्यू रीडर्स के लिए तोड़ा रीकॅप दे देती हू. मेरे पापा ने ही मेरी वर्जिनिटी तोड़ी, और तब से मुझे वो खुद छोड़ते है, और दूसरे लोगों से भी चुड़वते है. कभी खुद के कुछ काम निकालने के लिए, तो कभी सिर्फ़ मज़े के लिए.

फिर भी मुझे पापा के लिए फीलिंग्स आ गयी. एक दिन अंजाने मैं शर्मा अंकल ने मुझे मम्मी समझ के छोड़ दिया, और मैं इतनी तक गयी थी, की वैसे ही बेड पे मेरी आँख लग गयी. पापा ने मुझे वैसे ही चूड़ी हालत में देख लिया. फुल स्टोरी जानने के लिए पहले के पार्ट्स पढ़े.

पापा ने उसके बाद मुझे कुछ नही बोला. वो ना मुझे छोड़ते थे, और ना मुझसे बात करते थे. मैं अंदर ही अंदर पापा के लंड के लिए तड़प रही थी. मैने पापा को लुभाने के काई तरीके अपनाए, मगर कुछ काम नही आया.

फिर हमे मेरे चाचा के बेटे की शादी में दोबारा गाओं जाना था. पिछली बार का गाओं का सफ़र काफ़ी रोमांचक था. काई नये, जवान, बुड्ढे लंड से चूड़ी थी. ख़ास करके मैं रीमा से मिलने के लिए एग्ज़ाइटेड थी. जिसके साथ मैने लेज़्बीयन सेक्स किया था. पूरी कहानी जानने के लिए पिछले पार्ट्स पढ़े.

हम दिन भर का सफ़र करके गाओं पहुँचे. रीमा वाहा पहले से आ चुकी थी. उसकी गोद मैं 2 मंत्स का बेबी भी था. मैने सब के पावं छुए, और गले मिलने लगी. मेरे बड़े चाचा से मिलते वक़्त उन्होने मेरी गांद को दोनो हाथो से दबा दी.

मैं शॉक में पद गयी. तब मुझे याद आया की पिछली बार जो मेरे साथ गंगबांग हुआ था, उसमे मुझे छोड़ने वाले ये चाचा भी थे. मैं बाकियों से मिलने लगी. चाचा की नज़र मुझ पर ही थी.

मैने रीमा की बेबी को भी गोद में लेकर खिलाया. शादी चाचा के बेटे सन्नी की ही थी. सबसे मिलने के बाद हम शादी के कामो में लग गये. चाचा ने मेरे पापा को मुझे रात में कोठी पे भेजने को कहा.

कोठी हमारे गाओं में उस जगह को कहते है, जो घर से थोड़ी हॅट के या घर के बाहर हो. वाहा घर के मर्द बैठते है, और घर की औरतें वाहा कम ही जाती है. पापा ने तब हफ़्तो बाद मुझसे बात की, और मुझे चुप-छाप 12 बजे कोठी पे चले जाने को कहा. उनके लिए मैं सिर्फ़ एक रखैल थी.

पापा की बात काटना कभी मेरे लिए ऑप्षन ही नही था. घर के सब लोग 8-9 बजे तक सो गये थे. मैं रीमा के साथ सोई थी. बीच में उसका बच्चा सोया था, जो की हर थोड़ी देर में उठता और रीमा उसे दूध पिलाती. उसके दूध से भरे बूब्स देख कर मैं हॉर्नी होती जेया रही थी. बुत क्यूंकी मुझे कोठी पर भी जाना था, तो मैने कुछ नही किया.

रात के 12 बजे मैं कोठी की तरफ पहुचि. कोठी पर पापा और चाचा ही थे. दोनो बैठ कर शराब पी रहे थे, और पुराने दीनो को याद कर रहे थे. मैने दरवाज़े पे नॉक किया, तो चाचा ने अंदर आ जाने को कहा. अब मैं सूट सलवार में दोनो के आयेज खड़ी थी.

चाचा: पिछली बार से काफ़ी बड़े हो गये है तेरे चूचे. लगता है छ्होटे ने जाम के चुदाई की है.

चाचा मेरे पापा को प्यार से छ्होटे ही बोलते थे.

पापा: अर्रे भैया, अब बड़ी रंडी हो गयी है ये. बाहर के लोगों को घर बुलवा कर चुड्ती है.

मे: पापा ऐसे मत बोलिए. वो सिर्फ़ एक ही बार हुआ था, वो भी ग़लती से.

चाचा: चुप साली रॅंड, ज़ुबान चलती है.

पापा: चल पेग बना चाचा के लिए.

मैं पेग बनाने के लिए झुकी, तो चाचा ने मेरा हाथ पकड़ा, और सीधा अपनी जांघों पर लिटा लिया. फिर उन्होने मेरी पाजामी उतरी, और मेरी पनटी को खींच कर फाड़ दिया. मेरी चीख निकल आई.

पापा: चुप साली रॅंड चिल्ला-चिल्ला कर सब को उठना चाहती है.

चाचा ने वही पनटी मेरे मूह में तूस दी, और मेरी गांद पर थप्पड़ मारने लगे.

चाचा (स्पॅंक करते हुए): जब बड़े कुछ बोले तो बीच में नही बोलना चाहिए. समझी?

मैने सिर हिला कर हामी भारी.

चाचा फिर भी थप्पड़ मारते गये. थप्पड़ मारते-मारते उन्होने मेरी गांद लाल कर दी. फिर उन्होने मेरी कमीज़ भी उतारने को कहा. मैने जल्दी से उतार दी. नही तो क्या पता इसको भी फाड़ देते.

फिर उन्होने अपने दांतो से मेरी ब्रा भी उतार दी. अब मैं अपने पापा और चाचा के सामने नंगी मूह में पनटी तूसे पड़ी थी. फिर चाचा ने मेरे गाल पकड़े, और मेरी लिप्स पे किस करने लगे, और आस-पास चाटने लगे. मेरी मूह में पनटी तूसे रहने के कारण मैं ठीक से किस नही कर पा रही थी.

चाचा: बड़े चिकने गाल है तेरे.

ऐसा बोल कर चाचा मेरे गालो पर थप्पड़ मारने लगे. चाचा का हाथ काफ़ी भारी था. उनका एक-एक थप्पड़ बड़ी ज़ोर से लग रहा था. मेरी आँखों में आँसू आ गये. मेरे दोनो गाल भी लाल हो चुके थे. फिर चाचा ने मुझे पलताया. इन सब से मेरी छूट काफ़ी गीली हो गयी थी.

चाचा (हेस्ट हुए): छ्होटे तेरी बेटी तो गीली हो गयी.

पापा: हा भैया, है ही साली रॅंड.

चाचा: कोई ना, आज इसकी सारी गर्मी उतार देंगे.

चाचा ने एक बार में मूह मेरी छूट में मारा, जैसे घुसा ही देंगे, और मेरी छूट चाटने लगे. उनकी मूचे मेरी छूट पर चुभ रही थी.

चाचा: छ्होटे तू किसका इंतेज़ार कर रहा है. ये पहली लड़की थोड़ी है, जिसकी हम दोनो मिल कर ले रहे है. शुरू होज़ा. याद है रीमा की हमने कैसी चुदाई की थी, उसकी शादी के वक़्त? हाहहाहा.

पापा: हा भैया, मुझे तो लगता है वो बच्चा भी आपका है. वरना शादी के 9 महीने बाद ही बच्चा हो गया उसका.

मेरे तो होश ही उडद गये ये सुन कर, की रीमा भी उनसे चुड चुकी थी. फिर पापा ने मेरे मूह से पनटी निकली, और अपना लंड मेरे आयेज कर दिया. पापा के लंड के लिए मैं काई दीनो से तरस रही थी. मैं आयेज बैठ कर पापा का लंड अपने मूह में लेकर चूसने लगी.

चाचा ने फिर मुझे पीछे खींच लिया. पीछे से मेरी छूट चाट रहे थे, और आयेज से पापा मेरे मूह को छोड़ रहे थे. कुछ देर ऐसे ही चलने के बाद मुझे मेरी छूट के पास कुछ महसूस हुआ. वो चाचा का 9 इंच का लंड था. हमारे खानदान में ये खूबी तो है की सब के लंड 8-9 इंच के है.

चाचा ने एक बार में पूरा लंड मेरी छूट में डाल दिया, और आयेज से पापा ने ज़ोर लगा कर लंड मेरे गले तक डाल दिया. मेरी तो दर्द से चीख भी नही निकल पाई. दोनो ने हेस्ट हुए ही-फाइव किया.

चाचा ज़ोर-ज़ोर से शॉट लगते गये, और पापा भी हर शॉट मेरे गले तक ले जेया रहे थे. मुझे रहम माँगने तक का मौका नही मिल रहा था.

चाचा: पर छ्होटे, शहर की लड़कियों की छूट में कुछ बात तो है. इतनी चुदाई के बाद भी टाइट है.

फिर चाचा और पापा दोनो ने मुझमे से लंड निकाला. मैं बिल्कुल तक चुकी थी.

चाचा: छ्होटे, सोचता हू आज गांद भी मार लू तेरी बेटी की. काफ़ी दिन हुए किसी की गांद मारे.

पापा: हा-हा बिल्कुल. बहुत बड़ी रंडी है, मज़े ही आएँगे इसे तो.

मेरे पास माना करने का ऑप्षन ही नही था. चुदाई से ज़्यादा दर्द मुझे पापा की बातों का हो रहा था. मुझे कैसे भी उनका विश्वास दोबारा जीतना था. मैने अपने दोनो हाथो से अपनो गांद को फैलाया. फिर चाचा ने अपना लंड सेट किया.

मेरी गांद का च्छेद इतना टाइट था, की चाचा का लंड जेया ही नही रहा था. फिर चाचा के लंड पे मैने तोड़ा थूक लगाया, और इस बार दूं लगाने पे उनका लंड एक बार में पूरा अंदर चला गया. मुझे इतना बड़ा लंड एक बार में लेने की आदत नही थी.

मेरी ना चाहते हुए भी चीख निकल आई, और पूरा चेहरा लाल हो गया. मैने खुद ही अपनी पनटी उठा कर मूह में डाल ली. मेरी ये हरकत देख कर दोनो हस्स पड़े. चाचा का मोटा लंड मुश्किल से ही मेरी गांद में फिट हुआ था, और चाचा झटके भी ज़ोर के मार रहे थे. काफ़ी दीनो बाद मेरी ऐसे चुदाई हुई थी.

चाचा: अर्रे छ्होटे, इसकी चुत्मट तो अभी भी खाली है. आजा तू मार ले.

मैने पापा के तरफ दर्द भारी आँखों से देखा. पापा का मुझपे इतना गुस्सा था, की वो भी मान गयी. फिर नीचे चाचा मेरी गांद मार रहे थे, और बीच में मैं थी, और उपर पापा मेरी दोनो टांगे फैलाए मेरी छूट मार रहे थे. दर्द तो इतना हो रहा था, की मुझे लगा मैं बेहोश हो जौंगी. बुत मैं जैसे-तैसे सहती गयी.

थोड़ी देर बाद चाचा मेरी गांद के अंदर ही झाड़ गये, और साथ ही साथ पापा मेरी छूट के अंदर झाड़ गये. मैने चैन की साँस ली. मुझे लगा की आज के लिए तो ये सब ख़तम. मेरी छूट और गांद दोनो से माल तपाक रहा था. मैं हिम्मत जुटा कर उठी, और कपड़े पहन ही रही थी की चाचा बोले.

चाचा: कहा चली? अभी तो पूरी रात पड़ी है. फिर खड़ा होगा, तो उसे शांत कों करेगा?

वही बगल में बिस्तर था. मैं उसपे जेया कर लेट गयी. मैं साँझ गयी थी, की आज रात भर मेरी चुदाई होने वाली थी, और वैसा ही हुआ. मगर इन सब से पापा मुझसे दोबारा बात करने लगे, और मुझे इस बात की . थी.

उस रात चाचा ने 5 बार और पापा ने 4 बार मेरी चुदाई की. इसके अग्गे की कहानी अगले पार्ट में. जो की जल्द ही आएगा. अगर आप नये रीडर है, तो इसके पहले के पार्ट्स भी ज़रूर पढ़े, तब आपको सारे रेफरेन्स आचे से समझ आएँगे.

स्टोरी कैसी लगी मुझे कॉमेंट्स में ज़रूर बताए. मैं सारे कॉमेंट्स पढ़ती हू. अगर आपकी कोई फॅंटेसी है, तो वो भी मुझे ज़रूर बताए.

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