पड़ोसी भैया की हॉट भतीजी पर नज़र

हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम अंजू रातोरे है. मैं उप के मुरादाबाद से हू. ये मेरी पहली चुदाई की स्टोरी है. मेरी आगे 26 साल की है. मैं प्राइवेट नौकरी करता हू. मेरी शादी हो चुकी है, और मेरी एक बेटी भी है. ये स्टोरी थोड़ी लंबी होने वाली है फ्रेंड्स. तोड़ा इंतेज़ार करना बस, मज़ा बहुत आएगा. सीधे अब स्टोरी पर आते है.

ये स्टोरी कब की है जब मेरी उमर 19 साल थी, और मैं पढ़ाई करता था. हमारी फॅमिली काफ़ी बड़ी है, क्यूंकी मेरे पापा के 4 भाई है. और हम सब एक साथ रहते है. मेरी फॅमिली में हम 3 लोग है, मम्मी, पापा, और मैं.

मुझे पतंग-बाज़ी का बहुत शौंक था, और मैं कॉलेज से आते ही सीधा च्चत पर चला जाता था पतंग उड़ाने. मम्मी मुझे बहुत दाँत-ती इस वजह से.

हमारे घर से 4 घर डोर एक भैया रहते थे. उनसे हमारे घर वालो की बहुत बनती थी. दिन भर आना-जाना होता रहता था. उन भैया का नाम संजीन था, और भाभी का नाम सुमन था. उनका 1 बेटा हुआ था अभी हाल ही में, तो भैया ने अपने भाई की बेटी सुनीता को अपने घर बुला लिया था घर के काम के लिए.

सुनीता उमर उस समय 20 साल होगी. वो देखने में गोरी तो नही थी. मगर उसका फिगर मस्त था. उसका साइज़ 34-28-32 था. सुमन का बेटा बहुत स्वीट सा था. बिल्कुल गोलू-मोलु जैसा था. उसका नाम गोलू ही रखा था, तो मैं उसे बहुत खिलता था.

एक बार जब मैं गोलू के साथ खेलने जेया रहा था उनके घर. जैसे ही मैं उनके घर गया, तो देखा गोलू सुनीता की गोद में था.

फिर मैने जैसे ही गोलू को अपनी गोद में लेने के लिए हाथ आयेज बदाया, तो मेरा हाथ सुनीता की बूब्स पर लग गया. पर ये सब अंजाने में हुआ. मगर मुझे कुछ अलग ही फील हुआ. फिर मैं गोलू के साथ थोड़ी देर खेला. उसके बाद भाभी को गोलू को दे कर अपने घर चला गया.

फिर शाम को अपनी च्चत पर पतंग उड़ा रहा था. तो मैने देखा सुनीता गोलू को लेकर अपनी च्चत पर आई थी. तभी मेरे दिमाग़ में सुनीता को देख कर उसके बूब्स जहा हाथ लगा था, वही ख़याल आया. फिर मैं पतंग अपनी वग़ैरा सब छ्चोढ़ कर उनकी च्चत पर चला गया.

सुनीता गोलू के लेकर च्चत पर ही थी. तो मैं सुनीता की ही गोद में गोलू के साथ खेलने लगा. इस बहाने मैने 2-3 बार सुनीता के बूब्स पर हाथ लगा दिया. उसे लगा की गोलू के साथ खेलने में लग गया होगा. मगर मुझे बहुत मज़ा आया. अब मैं रोज़

इसी तरह सुनीता के बूब्स पर हाथ लगाने लगा. मुझे बहुत मज़ा आने लगा था. फिर एक दिन मैं भाभी के घर गोलू के साथ खेलने गया तो मैने भाभी से पूछा-

मैं: गोलू कहा है?

तो वो बोली: वो अंदर कमरे में सो रहा है.

भाभी बाहर वाले कमरे में कपड़े प्रेस कर रही थी, तो मैं अंदर कमरे में चला गया. मैने देखा सुनीता और गोलू दोनो सो रहे थे, और लाइट भी ऑफ थी.

मैने सुनीता की तरफ देखा तो वो बहुत गहरी नींद में सो रही थी, और उसके बूब्स उपर-नीचे हो रहे थे.

उस टाइम सुनीता ने लोवर और त-शर्ट पहनी थी. वो बहुत ही ग़ज़ब की लग रही थी. मैं 5 मिनिट उसे ऐसे ही देखता रहा. मुझे पता नही क्या होने लगा. अलग ही जोश आ गया. मेरा लोवर में टेंट बनने लगा.

मैने तुरंत अपने लंड को सही किया, और बाहर आ कर भाभी को देखा. वो अभी भी प्रेस कर रही थी और कपड़े अभी बाकी थे. फिर मैं वापस कमरे में गया और गोलू के बराबर में बैठ गया, और उसके गले लगने लगा.

पर मेरी नज़र सुनीता के बूब्स पर थी. मैं उसे ही देखे जेया रहा था. फिर पता नही मुझे क्या हुआ, मेरा हाथ अपने आप उसके बूब्स की तरफ बढ़ने लगा. मुझे अंदर दर्र भी बहुत लग रहा था. मुझे पसीना आने लगा. जैसे ही मैने मेरा हाथ उसके बूब्स पर रखा, उसे बिना हिलाए ही रहने दिया.

मुझे कुछ अजीब सा ही होने लगा. मैने पहली बार किसी के बूब्स पर हाथ लगाया था. 2 मिनिट मैने वैसे ही रखे रहने दिया. जब देखा की वो सो ही रही थी, तो मैने उसके बूब्स को तोड़ा सा दबाया. क्या बतौ दोस्तों, मेरा लंड ऐसे उफान मारने लगा, जैसे अभी लोवर फाड़ कर बाहर आ जाएगा.

सुनीता के बूब्स इतने सॉफ्ट थे की क्या बतौ यार. फिर मैं धीरे-धीरे उसके लेफ्ट बूब को दबाता रहा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मगर ये मज़ा ज़्यादा देर का नही था. फिर मेरी थोड़ी हिम्मत बढ़ी. इतनी देर से सुनीता वैसे ही सो रही थी, तो मैने उसकी थोड़ी त-शर्ट उपर करी.

फिर मैं उसके पेट पर हाथ लगाने लगा. मुझे अलग मज़ा आ रहा था. मैने एक हाथ अपने लोवर में डाल लिया, और अपने लंड को सहलाने लगा, और दूसरा हाथ उसकी त-शर्ट के अंदर डालने लगा. जैसे ही मेरा हाथ उसके बूब्स पर लगा, मुझे महसूस हुआ की उसने अंदर ब्रा पहनी थी.

मैं ब्रा के उपर से उसके बूब्स दबाने लगा. मगर ये भूल गया था की वो सो रही थी. मैं तोड़ा ज़ोर से दबाने लगा, और अपना लंड सहलाने लगा. मुझे मज़ा आ रहा था. मेरा निकालने वाला ही था, इतने में मैने देखा की सुनीता की आँखें खुली थी, और वो मेरे हाथ की तरफ देख रही थी.

मेरी तो गांद ही फटत गयी. मैने तुरंत हाथ उसकी त-शर्ट से बाहर निकाला, और गोलू के बराबर में लेट गया. दर के मारे मेरी गांद फटत रही थी. क्या बतौ दोस्तों, आप समझ ही सकते हो. मेरा लंड जो अभी तक उफान मार रहा था, वो अब ऐसे शांत हो गया था, की क्या बतौ. 2 मिनिट मैं गोलू के बराबर में ही लेता रहा.

फिर मैने देखा सुनीता आँखें बंद करके वापस सो रही थी. मैं वाहा से जल्दी से उठा, और तुरंत अपने घर आ गया. मैं पूरा पसीना-पसीना हो गया था. मुझे अब बहुत बुरी तरह से दर्र लग रहा था, की कही सुनीता मेरी मम्मी को ना बता दे, या अपने भैया को ना बता दे. मैं सही में बहुत दर्र गया था. फिर मैने तुरंत अपनी बिके उठाई, और घर से निकल गया.

ओक फ्रेंड्स, बाकी अगले पार्ट में बतौँगा, की सुनीता ने मेरे घर पर बताया की नही, और सुनीता के साथ आयेज क्या हुआ.

अगर आपको मेरी ये स्टोरी अची लगी हो तो कॉमेंट में ज़रूर बताए. तो फ्रेंड्स, मिलते नेक्स्ट स्टोरी में.

यह कहानी भी पड़े  बेटे के खेल मे मा को आने लगे मज़े


error: Content is protected !!