पड़ोस की आंटी की खेतो में चुदाई की कहानी

अब मैं आता हू अपनी स्टोरी पे. हमारे घर के सामने एक आंटी रहती थी. उसका नाम बेवी था. दिखने में वो बहुत सुंदर थी. उसके बूब्स का साइज़ 34″ था, और उसकी गांद 36″ की थी. आंटी के आगे भी 34 थी, आंटी बहुत मस्त माल थी. सभी मोहल्ले वालो की उस पर नज़र रहती थी.

लेकिन वो बदनामी के दर्र से किसी को लाइन नही देती थी. उसके पति का बिज़्नेस था, जिसके चक्कर में वो अक्सर बाहर ही रहता था. उसका एक बेटा था, जो अभी स्टडी करता था. मैं जब भी आंटी को देखता तो मेरा लंड खड़ा हो जाता था. बहुत बार मैने उसके बारे में सोच के मूठ मारी थी.

अब मैं उसे छोड़ना चाहता था. लेकिन मुझे दर्र भी था की कही आंटी मेरे घर पे ना बता दे. और फिर मैने आंटी को छोड़ने का प्लान बनाया.

आंटी का एक लड़का था जो अभी 18 साल का था. मैने उससे दोस्ती कर ली, और हम एक साथ फिल्म दिखने और घूमने जाते थे. वो मेरे साथ खेलता भी था.

एक दिन वो मुझे अपने घर ले गया. जब उसने डोर नॉक किया, तो आंटी ने डोर खोला. जब मैने आंटी को देखा तू आंटी मस्त लग रही थी. उन्होने एक लोवर और लूस त-शर्ट पहन रखी थी, जिसमे उनके बूब्स का उभार सॉफ दिख रहा था.

मॅन तो कर रहा था, की साली को अभी छोड़ डू. बुत क्या कर सकता था. फिर मैं आंटी को नमस्ते की, और हम अंदर चले गये ड्रॉयिंग रूम में. आंटी ने हमे कोल्ड ड्रिंक दी. आंटी का लोवर बहुत टाइट था, तो उसमे उनकी गांद बहुत बड़ी और मस्त लग रही थी. वो भी हमारे पास ही सोफा पे बैठ गयी.

तभी अभी बोला: मैं वॉशरूम हो कर आया.

और वो चला गया. फिर मौके का फ़ायदा देख कर मैं आंटी से बातें करने लगा. मैं बार-बार आंटी के बूब्स देख रहा था, और आंटी को भी लगता था की मैं उनके बूब्स देख रहा था. फिर मैने आंटी से पूछा-

मैं: आंटी एक बात पूछो, आप बुरा तो नही मानोगी?

आंटी बोली: नही बोलो आप.

मैने कहा: आपको देख लगता नही की आप की शादी हो रखी है, और आपका एक बेटा भी है. आप तो बहुत यंग दिखते हो.

ये बात सुन कर आंटी शर्मा गयी और उन्होने कहा-

आंटी: ऐसी कोई बात नही है. बुत थॅंक्स.

मैने कहा: नही आंटी, ये सच है. आप बहुत यंग दिखते हो.

और वो फिर बोली: थॅंक्स.

फिर अभी आ गया, और उसने आंटी को बताया: मैं तो आपको इसका नाम बताना ही भूल गया. इसका नाम सूरज है, और ये मेरा अब बेस्ट फ्रेंड है.

आंटी बोली: सूरज आप क्या करते हो?

तो मैने कहा: मेरे पापा के खेत है, और मैं भी उनके साथ खेती करता हू.

वो बोली: मुझे भी खेत बहुत आचे लगते है. क्या मुझे आप अपने खेत दिखाओगे?

ये बात सुन कर मैं मॅन में ही सोचने लगा की इससे अछा मौका नही मिलेगा.

मैने कहा: हा आंटी, ज़रूर. आप जब चाहो मुझे बोल देना. मैं आपको अपने खेत दिखा दूँगा.

वो बोली: तो फिर कल चलते है.

तभी अभी बोला: कल तो मुझे काम है कॉलेज का. तो फिर आप चले जाना सूरज के साथ.

आंटी बोली: मैं अकेली कैसे जौंगी?

तो अभी बोला: सूरज आपको अपनी बिके पे ले जाएगा. पास में ही इनके खेत है.

फिर मैं बोला: हा आंटी, मैं अपनी बिके पे आपको ले जौंगा.

आंटी बोली: ठीक है, तो कल चलते है. तुम 12 बजे आ जाना.

ये बात सुन कर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही था. फिर मैने आंटी को नमस्ते की, और अभी को बाइ बोल कर घर आ गया. घर आ कर फिर मैने आंटी के नाम की मूठ मारी, और कल का प्लान बनाने लगा.

मैने पापा को बोला: आप कल शहर जेया कर घर का समान ले आना, और मैं खेत में काम देख लूँगा.

वो मान गये इस बात को लेकर. रात में मैं आंटी के बारे में सोचता रहा. सुबा मैं जल्दी तैयार होके पुर 12 बजे आंटी के घर चला गया. आंटी के घर का दरवाज़ा खुला था. शायद अभी घर से बाहर गया था तो इसलिए दरवाज़ा खुला था.

जब मैं अंदर गया तो आंटी अपने रूम से बाहर आ रही थी. मैं उन्हे देखा तो आंटी ने पटियाला सलवार-सूट पहना था, जिसका नेक डीप था. इसके कारण उनके बूब्स की लाइन दिख रही थी. आंटी को देख के मेरा लंड फिर खड़ा हो गया था. आंटी क्या मस्त लग रही थी. फिर मैने आंटी को नमस्ते की और बोला-

मैं: आंटी आप रेडी हो गयी?

वो बोली: हा बेटा, मैं हो गयी. बस घर को लॉक कर लू, फिर चलते है.

फिर मैने बिके स्टार्ट की, और आंटी मेरे पीछे बैठ गयी. आंटी के बूब्स मेरी पीठ को तुछ कर रहे थे, और मैं पागल हो रहा था. फिर हम दोनो खेतो की तरफ निकल गये. रास्ते में रास्ता खराब था, जिसके कारण बार-बार ब्रेक लगानी पद रही थी, और इसकी वजह से आंटी मेरे से चिपक रही थी.

फिर मैने आंटी को बोला: आप मुझे पकड़ लो कमर से. ये रास्ता तोड़ा खराब है.

फिर उन्होने मुझे पकड़ लिया जिसके कारण अब आंटी के बूब्स मेरी पीठ में धस्स रहे थे, और मेरा लंड खड़ा हो गया था. अब हम खेत में पहुँच गये. आंटी हारे-भरे खेत देख के बहुत खुश थी, और फिर वो गन्ने के खेत को देख के बोली-

आंटी: मुझे एक गणना चाहिए.

तो मैने उसे एक गणना तोड़ के दिया, और वो उसे चील कर उसका रस्स पीने लगी. फिर मैं आंटी को खेत दिखाते-दिखाते साथ में बातें करने लगा.

मैने कहा: आंटी आपके हज़्बेंड को तो मैने कभी देखा नही.

वो बोली: वो काम के चक्कर में बाहर ही होते है. घर पे कम ही रहते है.

तो मैने पूछा: क्या आपका दिल लग जाता है उनके बिना?

वो बोली: क्या करे, अब लगाना ही पड़ता है.

खेतो में गर्मी बहुत थी, और धूप के कारण आंटी को पसीना भी आ रहा था. तो मैने आंटी को कहा-

मैं: आंटी चलो मोटर पे चलते है.

हमारी मोटर खेतो के बीच में है, और वाहा कोई नही आता हमारे सिवाए. फिर मैं आंटी को लेकर मोटर पे चला गया. वाहा पानी वाली मोटर चल रही थी. वाहा हमने मोटर के पानी के लिए एक छ्होटा सा पूल भी बनाया था, तो आंटी उसे देख के बोली-

आंटी: मेरा इसमे नहाने का मॅन है. लेकिन मेरे पास कपड़े नही है एक्सट्रा.

तो मैं बोला: आंटी कोई बात नही. आप मेरी त-शर्ट और लोवर पहन कर नहा लो.

वो बोली: तो फिर तू क्या पहनेगा?

मैं बोला: मैं अंडरवेर में रह लूँगा. आप नहा लो. जब ये सूख जाएगे तो मैं पहन लूँगा.

आंटी बोली: ओक.

फिर आंटी मोटर वाले रूम में जेया के चेंज करने लगी. मैने भी अपनी त-शर्ट और लोवर खोल के आंटी को दे दिया. मेरा लंड तो पहले ही खड़ा था. जब आंटी ने अंडरवेर में मेरा लंड खड़ा देखा, तो वो उसे देखती ही रह गयी. 7 इंच का लंड पूरा तन्ना हुआ था.

आंटी उसे देख कर पागल हो रही थी. उसके मॅन में हलचल होने लगी थी. फिर आंटी जब चेंज करके बाहर आई, तो क्या लग रही थी. मेरी त-शर्ट उसको टाइट थी, और आंटी ने नीचे ब्रा भी नही पहनी थी, जिसके कारण उसके बूब्स सॉफ दिख रहे थे और उसकी गांद क्या मस्त लग रही थी.

फिर आंटी पूल में चली गयी, और मैं बाहर खड़ा था अंडरवेर में. आंटी मेरे लंड को देखे जेया रही थी, और मैं आंटी के बूब्स को. आंटी को भी पता चल गया था की मैं उनके बूब्स को देख रहा था.

तभी आंटी ने मुझे बोला: सूरज आ जाओ, तुम भी नहा लो.

तो मैं बोला: नही आंटी, आप नहा लो.

फिर आंटी ने बोला: आ जाओ, कोई बात नही.

फिर मैं भी पूल में चला गया. पूल छ्होटा होने के कारण हमारी बॉडीस टच कर रही थी एक-दूसरे से, और आंटी गीली हो चुकी थी. जिसके कारण त-शर्ट से उनके बूब्स दिख रहे थे. तभी मैने हिम्मत करते हुए आंटी की कमर को टच किया. बुत आंटी ने कुछ रेस्पॉन्स नही किया.

फिर मैं धीरे-धीरे आंटी की गांद पे हाथ रख कर हाथ फेरने लगा. आंटी ने तब भी कुछ नही बोला. शायद आंटी को भी मज़ा आ रहा था. फिर मैने मौके का फ़ायदा उठा कर आंटी के बूब्स को पकड़ लिया, और उन्हे मसालने लगा.

आंटी मुझे बोली: क्या कर रहे हो बेटा? ऐसे मत करो. छ्चोढो मुझे.

पर मैं तो पागल हो रहा था, और ज़ोर-ज़ोर से आंटी के बूब्स मसल रहा था. फिर मैं आंटी को अपनी तरफ करके उनको लीप किस करने लगा, और आंटी मुझे साइड पर कर रही थी. बुत मैं कहा रुकने वाला था. आज तो मौका मिला था छोड़ने का. फिर थोड़ी देर बाद आंटी भी शांत हो गयी, और मज़े लेने लगी.

कुछ देर बाद वो बोली: मुझे छ्चोढ़ दो, कोई आ जाएगा.

मैने बोला: यहा कोई नही आएगा.

आंटी फिर मुझे धक्का देकर मोटर वाले रूम में चली गयी. मैं भी रूम में चला गया. मैने अंदर से रूम लॉक कर दिया.

आंटी बोली: बेटा मुझे जाने दो, ये अची बात नही है. तुम मेरे बेटे जैसे हो.

मैं सीधा आंटी के होंठो पे अपने होंठ रख कर किस करने लगा, और साथ मैं एक हाथ उनकी छूट में डालने लगा. इससे वो मस्त होने लगी. फिर मैने उनकी त-शर्ट निकाल दी, और आंटी के 34″ के बूब्स अब मेरे सामने थे. मैं उन्हे मूह में लेके चूसने लगा. बहुत मज़ा आ रहा था. अब आंटी भी मेरा साथ दे रही थी.

तभी मैने आंटी की लोवर उतार दी, और अब आंटी मेरे सामने नगी थी. उनकी छूट पे एक भी बाल नही था, और बहुत चिकनी छूट थी आंटी की. मैं नीचे बैठ कर के आंटी की छूट को चाटने लगा, जिससे आंटी को बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर वो बोली: और आचे से चाट, बहुत मज़ा आ रहा है. बहुत दीनो बाद किसी ने मेरी छूट छाती है.
फिर कुछ देर चाटने के बाद आंटी ने मुझे खड़ा किया, और मेरा अंडरवेर उतार करके मेरा लंड अपने हाथ से मसालने लगी.

आंटी मेरा लंड देख के बोली: ये तो बहुत बड़ा है. ये तो मेरी गांद फाड़ देगा.

ये बोल कर आंटी मेरा लंड मूह में लेके सक करने लगी, और मैं भी आंटी के सिर पे हाथ रख के उसका मूह छोड़ने लगा. कुछ देर बाद मैने आंटी को नीचे लिटा कर उनकी टाँगो को उपर उठा के अपना लंड उनकी छूट पे सेट कर दिया. आंटी को पता चल गया था की अब उनकी हालत पतली होने वाली थी.

तभी मैने तोड़ा सा धक्का लगाया, जिससे मेरा आधा लंड अंदर चला गया. फिर मैने एक ज़ोर सा धक्का मारा जिससे मेरा पूरा लंड आंटी की छूट में चला गया. इससे आंटी की चीख निकल गयी.

वो बोली: मार दिया मुझे आहह. बाहर निकालो इसे.

बुत मैं कहा रुकने वाला था. तो मैने धक्को की स्पीड तेज़ कर दी. आंटी को अब स्वाद आने लगा था, और वो भी मेरा साथ दे रही थी.

वो बोल रही थी: छोड़ो मुझे छोड़ो, ज़ोर से छोड़ो. बहुत प्यासी हू मैं.

और आंटी अफ आ अफ आआ की आवाज़े निकाल रही थी. फिर कुछ टाइम बाद मैने आंटी को घोड़ी बना लिया, और पहले झटके में ही लंड छूट में डाल दिया. अब मैं तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था, जिससे आंटी की हालत पतली हो रही थी. आंटी एक बार झाड़ चुकी थी. मैने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, और अपना पानी आंटी की छूट के अंदर ही निकाल दिया.

फिर आंटी बोली: मुझे तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आया. अब तुम जब चाहो मुझे घर आके छोड़ सकते हो.

आयेज स्टोरी में पढ़िए, मैने कैसे आंटी के घर जाके उनकी प्यास बुझयी. मिलते है अगली स्टोरी में.

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