ऑफिस में नौकरानी की जबरदस्त चुदाई का किस्सा

दरवाज़ा बंद करते ही मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया,‌ और वो भी मुझसे बिल्कुल चिपक गई।

मैं उसको दीवार से चिपका कर उसके होठों को ज़ोर-ज़ोर से चूमने और चूसने लगा। सामने से वो भी मेरे होठों को अच्छे से चूम रही थी, और मेरा पूरा साथ दे रही थी।

क्या गज़ब तरीके से हम दोनों का ये होठों का चुम्बन चल रहा था। कामिनी ने फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी, और मैं उसकी जीभ चूसने लगा। हम दोनों अब होठों के साथ एक दूसरे की जीभ भी चूस रहे थे। मैंने कामिनी के दोनों हाथों को एक-दम कस कर अपने हाथों से पकड़ा हुआ था।

हम दोनो बेतहाशा एक-दूसरे के होंठों के रस को पिए जा रहे थे। फिर कामिनी की सांसें चढ़ने लगी तो हम दोनों अलग हुए, और कामिनी ने अपनी साड़ी उतार कर फेंक दी। मैंने भी तुरंत अपने कपड़े उतार दिए। कमरे में बिस्तर थोड़ा बड़ा था, और उसमे आराम से दो लोग लेट सकते थे।

मैं बिस्तर में नंगा लेट गया और कामिनी भी पूरी नंगी हो गई। मैं तो बस उसके नंगे भरे हुए बदन को एक टक देखता ही रहा। बिल्कुल चिकनी माल थी साली। भरा पूरा गदराया जिस्म जिसपे लटकते हुए उसके दोनो तरबूज़ जैसे बड़े स्तन कहर ढा रहे थे। उसके चूचे मोटे और भूरे रंग के थे। उसने मुझे खुद को घूरते हुए पाया तो मेरे पास बिस्तर में आ कर बोली-

कामिनी: क्या हुआ देव बाबू? कभी मेरी जैसी औरत का नंगा जिस्म नहीं देखे हो क्या?

उसकी बात पर मैं हंस दिया। मुझे छेड़ते हुए उसने मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और हिलाने लगी। मेरा लंड तो पहले से ही एक-दम सख्त और कड़क होकर मस्त खड़ा हुआ था। कामिनी मेरा लंड मुंह में लेके चूसने लगी। मुझे उसको बोलने की जरूरत भी नहीं पड़ी।

मैंने भी उसके मुंह में अपना लंड अंदर गले तक घुसा दिया, और अपनी कमर ऊपर-नीचे करके अपना लंड अच्छे से चुसवाया।

कामिनी मेरा लंड बहुत अच्छे से ज़ोर-ज़ोर से चूसे जा रही थी। मैं तो जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गया था। वो मेरा लंड 10 मिनट तक चूसती रही।

फिर मुझे लगने लगा कि शायद मेरा वीर्य निकल ना जाए, तो मैंने कामिनी को लंड चूसने से मना किया, और उसको बिस्तर पे लेटने को बोला। कामिनी बिस्तर पे लेटी हुई मुझसे बोली कि उसे मेरे लंड से ज्यादा प्यार हो गया था। उसको मेरा लंड बहुत पसंद आ गया था।

मैंने भी फिर कामिनी की टांगें खोल कर अपने कंधों पर रख ली। उसकी चूत बिल्कुल साफ और चिकनी थी। एक भी बाल नहीं था उसपे। मैंने अपने मुंह से ढेर सारा थूक निकाला, और उसकी चूत पर लगा कर उसकी चूत को और ज्यादा चिकना कर दिया।

उसकी चूत तो पहले से ही कामाग्नि में जलने के कारण गीली और चिकनी थी। मैंने उसकी चूत को हाथ लगाया तो कामिनी कामोत्तेजना में आहें भरने लगी। मैंने उसकी चूत के दाने को उंगली से सहलाना और रगड़ना शुरू किया। कामिनी काम वासना की आग में जलते हुए बस ज़ोर-ज़ोर से आहें भरती रही। आह ऊंह करके एक दम सेक्सी आवाजें निकाल रही थी।

उसकी चूत एक-दम गरम हुई रखी थी, और उसमें से पानी निकल रहा था। मैं चूत को चूसने के अपने काम में लगा हुआ था। कामिनी अपने दोनों स्तनों को मसलने लगी और चूचियों को गोल-गोल उमेठने लगी। मैं उसकी चूत के दाने पर अपनी उंगली गोल-गोल घुमा रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया।

उसकी चूत के दाने पर मैं अपनी जीभ घुमा रहा था, फिरा रहा था। कामिनी पूरी तरह से वासना की आग में गरम हो चुकी थी। उसकी आवाज़ से ऐसा लग रहा था कि अब वो कभी भी चरमसुख और चरम उत्कर्ष तक पहुंच जाएगी।

मैंने उसकी चूत में अपने हाथ की बीच की दो उंगलियों को घुसा दिया और अंदर ही उंगलियों को मोड़ कर उसकी चूत के अंदरूनी हिस्से को रगड़ने लगा।

ऊपर से अपने दूसरे हाथ के अंगूठे से चूत के दाने को तेज़ी से रगड़ने और मसलने लगा। कामिनी पागलों की तरह बहुत आहें भर रही थी। बीच-बीच में उसकी चीख भी निकल जाती थी। मैंने काफी देर तक उसकी चूत को मसला और रगड़ा। कामिनी ने अब ज़ोर-ज़ोर से आहें भरते हुए उसका बदन थोड़ा सा अकड़ा और एक जोरदार चीख के साथ वो मेरे मुंह में झड़ गई और ढीली पड़ कर शांत हो गई।

मैंने बस उसकी चूत को सिर्फ चाट कर और चूस कर उसको चरमसुख तक पहुंचा दिया। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के छेद पर रखा और लंड आसानी से अंदर घुसा दिया। पहले से ही एक-दम गीली और चिकनी चूत में लंड बड़े आराम से अंदर तक फिसलता चला गया।

मैंने फिर धीरे-धीरे अपनी कमर आगे-पीछे करके उसकी चूत की चुदाई करनी शुरू की। मेरा लंड कामिनी की चूत में अच्छा अंदर गहराई तक पूरा घुस चुका था।

मैं कामिनी के स्तनों को बहुत ज़ोर-ज़ोर से पूरी ताकत के साथ मसलने और दबाने लगा। और यहां नीचे से मेरा लंड उसकी चूत को जड़ तक ठोक रहा था।

मैंने अपनी गति अब धीरे-धीरे तेज़ करनी चालू की, और उसकी चूत में कस-कस कर धक्के लगा-लगा कर चोदता रहा। कामिनी भी बस अपनी इस बेतरतीब चुदाई से बहुत ज़ोर-ज़ोर से आवाजें निकाल रही थी। कामाग्नि में जलती हुई कराह रही थी।

उसकी ऐसी सेक्सी आवाज करने से मुझे भी बहुत जोश चढ़ गया। मैंने बहुत कस कस उसकी चूत की चुदाई करनी चालू कर दी। मैंने फिर कामिनी को चोदते हुए अपना फोन देखा तो उसमे ऑफिस के चालू होने का वक्त हो चुका था। समय 11 बजे से ऊपर हो चुका था।

तो मैं भी जल्दी-जल्दी कामिनी को चोदने लगा। कामिनी बोली कि, “जल्दी-जल्दी करिए देव बाबू। मेरे अंदर ही झड़ जाईए”।

इसीलिए मैं उसको तेज़ी से चोदता हुआ कुछ ही देर में उसकी चूत में अपना पानी भर देता हूं। कामिनी और मेरा बदन पसीने से पूरी तरह से भीग चुका था।

तो हम दोनों ने साथ में खुद को बाथरूम में साफ किया। कामिनी के पास एक गमछा था, तो उससे खुद को पोंछा और कपड़े पहन कर हम दोनों बारी-बारी नीचे चले गए।

किस्मत से अभी तक ज्यादा लोग नहीं आए थे। इसीलिए किसी ने हम दोनों को नीचे आते नही देखा। इसके बाद मैं और वो अपने-अपने काम में लग गए।

ठीक है दोस्तों। ये कहानी अभी यहीं तक है। इसके बाद मैंने कामिनी को बाहर एक होटल में बुलाया। वहां उसको अच्छे से जी भर कर चोदा, और उसकी गांड भी दबा कर मारी। अब वो कहानी मैं आपको और कभी बताऊंगा।

आप लोगों को ये कहानी कैसी लगी, कृपया कर मुझे मेल और कमेंट्स करके जरूर बताएं। मेरी मेल आईडी –

मुझे आपके विचार जानने का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा। खास कर मेरी कहानी पढ़ने वाली मेरी महिला पाठकों का। मुझे उम्मीद है कि आप सब को मेरी कहानी पढ़ कर मज़ा भी आएगा, और चुदाई की तलब भी आपके मन में हिलोरे मारेगी।

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