ऑफीस कोलीग के साथ वासना भरा रिश्ता

मेरा नाम विकी है. मेरी उमर 24 साल है. दिखने में आवरेज हू. मैं अपने घर में अकेला लड़का हू, और बहुत शाइ किसाम का इंसान हू. इसलिए एक-दूं मैं खुल कर नही बोलता. मुझे किसी और के साथ घुलने-मिलने में वक़्त लगता है.

मुझे लड़के भी पसंद है, पर मैने ये बात अपने तक ही रखी थी. मैने रीसेंट्ली ऑफीस जाय्न किया था, और वाहा मैं समय से मिला. उसकी उमर 25 साल है. दिखने में बहुत हॉट आंड सेक्सी है. हमारी जान-पहचान कामन कॉलीग्स के ज़रिए हुई. फिर डेली मिलने की वजह से हमारी बात होने लगी.

कुछ ऑफीस की पार्टीस में हम थोड़े क्लोज़ आ गये. समय को पता चल गया की मुझे लड़के भी पसंद है, तो उसने मेरे साथ फ्लर्ट करता शुरू कर दिया. वो हमेशा अकेले में फ्लर्ट करता, और देखते ही देखते उसने एक शाम अपने दिल की बात बताई की वो मुझे लीके करता था.

पर मैं अभी भी शुवर नही था, और हमेशा की तरह कन्फ्यूज़ था. मैं समझ नही पाया की कैसे रिक्ट करू. पर ऐसी सिचुयेशन में भी समय बड़ी शांत और मेचुरिटी के साथ मुझे हॅंडल करता था.

एक शाम मैं समय के साथ ब्रिड्ज पर घूमने गया. अकेले पा कर उसने मेरा हाथ पकड़ा. मेरा दिल ज़ोर से धड़कना शुरू हुआ. धीरे-धीरे उसने मुझे करीब खींच लिया. मेरा मूह अपने तरफ करके उसने मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए. उसने एक हाथ से मेरी गर्दन को पकड़ा, और दूसरे हाथ से मेरी कमर को. अपनी और खींचते हुए उसने मेरे होंठो को चूमना और चूसना शुरू किया.

मैं भी अपनी आँखें बंद करके उसके होंठो को अपने होंठो और मूह में मूह को महसूस कर पा रहा था. कुछ वक़्त बाद हम रुके, और एक-दूसरे से कुछ नही बोला. बस एक-दूसरे के हाथो में हाथ पकड़ कर घर वापस आ गये. घर आ कर मेरे दिमाग़ में उसी की बातें और किस याद आ रहा था.

मैं अपने आप को कंट्रोल नही कर पाया, और उसे याद करके मूठ मारने लगा. कमरे में अकेला था ही, तो वही पर अपना कम निकाल दिया. दूसरे दिन से हम वापस ऑफीस के बाद टाइम स्पेंड करने लगे. उसने धीरे-धीरे अपने रंग में मुझे रंग दिया था. एक रात उसने मुझे नाइट-आउट के लिए पूछा तो मैने भी हा कर दी.

उस शाम उसने मुझे बिके पर बिताया, और अपने घर ले गया. शाम को हमने उसके टीवी से ग़मे कनेक्ट करके खेली. बाहर हल्की बारिश होने लगी, तो उसने मुझसे बिके पर ड्राइव के लिए पूछा. मैं उसके पीछे बैठा, और हम ऐसे ही सिटी का चक्कर लगा कर वापस आ गये. घर आने के बाद हम गीले हो चुके थे. मैं उसके बेडरूम में चेंज करने गया. पीछे से उसने दरवाज़ा बंद किया, और मेरे करीब आया.

उसे इतना करीब पा कर मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी. उसने मेरी आँखों में अपनी आँखें डाली, और मुझसे पूछा-

समय: उस शाम की किस कैसी लगी?

मैं: अची.

मैं कुछ बोल नही पाया, और मुस्कुरा दिया. उसने मेरी हिचक समझी और एक और बार अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. इस बार मैने भी साथ दिया, और हमने एक-दूसरे को चूमा. हमारे पहले होंठ मिले, फिर एक-दूसरे की ज़ुबान मिली. उसके बाद हम एक-दूसरे से अलग हो गये. हम दोनो के लंड खड़े हो चुके थे.

मैने अपनी पीठ उसकी और कर ली क्यूंकी मुझे शरम आ रही थी. वो मेरे करीब आया और पीछे से मुझे पकड़ लिया. गीली होने की वजह से उसकी पंत चिपक चुकी थी. और मेरे बूम पर उसका खड़ा लंड मैं महसूस कर पा रहा था.

उसका लंड छूटे ही मेरी आँखें बंद हो गयी, और मूह से आ निकल गया. मैं शरम के मारे पानी-पानी हो गया. मुझे शरमाते देख उसने पीछे से दो-टीन बार आयेज-पीछे करके अपना लंड मेरे बूम पर दे मारा. मैं मुस्कुराया और वो अपने आप पर गर्व करने लगा. उसने मुझे अपनी गोद में उठाया, और बाल्कनी में ले गया.

बाल्कनी में से उसका पीछे का गार्डेन दिख रहा था, और चाँद की रोशनी मौसम को और रोमॅंटिक कर रही थी. उसने मुझे अपनी गोद में बिताया, और मैं भी छ्होटे बच्चे की तरह उससे लिपट गया. उसने मेरी आँखों में देखा, और मेरे लंड पर हाथ रख दिया. अभी मैने फिर अपनी आँखें बंद कर दी. पर इस बार उसकी नज़र मेरे चेहरे से नही हॅट रही थी.

समय: कितना शरमाओगे विकी. अभी तो मैने कुछ किया भी नही.

मैं: पता नही समय. मुझे तुम्हारे सामने क्या हो जाता है. ना कुछ बोल पाता हू, और ना तुम्हे किसी चीज़ के लिए रोक पाता हू.

समय: मुझे रोकने की हिम्मत तुममे नही है क्या?

मैं: नही समय, मैं तुम्हे रोक नही सकता, चाहे तुम कुछ भी कर लो.

समय: कुछ भी कर लो. अछा तो अभी तुम्हारी पंत में से तुम्हारे लंड को बाहर निकालता हू.

ये सुन के मैं चौक गया, क्यूंकी मैने कभी किसी लड़के के सामने चड्डी तो क्या, शर्ट तक नही उतारी थी.

समय: लेकिन एक शर्त है. तुम मेरी नज़रों से नज़रें मिलते रहना. अगर अपनी आँखें बंद की, तो मैं तुमसे बात नही करूँगा.

उसकी इस बात से मुझे बुरा लगा, की वो मुझसे बात नही करेगा. उसने मेरी और देखा, और मैने उसकी और. फिर उसने मेरी पंत के बटन खोले, और ज़िप को अनज़िप किया. उसने अपना हाथ मेरे पेट पर घुमाया, और मेरी चड्डी के अंदर एक उंगली डाली. फिर उसने मेरी हल्की झांतो को महसूस किया,नौर मुस्कुराया. उसने आँखों से मुझे छेड़ा.

फिर अपने हाथ मेरी चड्डी के अंदर डाले, और मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा. मैने भी उसके हाथ महसूस होते ही उसके हाथ के लिए अड्जस्टमेंट की. अपने लंड के साथ-साथ उसके हाथो को मेरे टट्टो तक पहुँचाया. समय और मैं एक-दूसरे को देख रहे थे, और नीचे वो मेरे लंड के साथ खेलने लगा. वो धीरे-धीरे करके उसे हिलने लगा और कुछ देर में मुझे लगा की मेरा गिर जाएगा.

मैने उसे बताया तो वो रुक गया. मैं भी कंट्रोल किया. कम तो नही निकला, पर प्री-कम वाइट कलर में उसके हाथ पर गिर ही गया. उसने अपना हाथ बाहर निकाला और अपने मूह से सब पी गया.

इसके आयेज क्या हुआ, ये आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. अगर आपको ये कहानी पसंद आई तो जवानिकजोश@आउटलुक.कॉम पर ज़रूर बताइए. आपकी ईद सेफ रहेगी.

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