एक नर्स के साथ चुदाई

आज मैं अपने जीवन की एक नर्स के साथ चुदाई हादसा सुनाने जा रहा हूँ. मैं पेशे से एक डॉक्टर हूँ और मेरे हॉस्पिटल मी बहुत ही नर्स काम करती है, तो जिस की मैं बात कर रहा हूँ उसका नाम है निशा. निशा शादी शुदा नर्स है मेरे से करीब 3 साल बड़ी . मैं 26 साल का और वह 29 साल की हैं .निशा का कोई बच्चा नही है और उसका पति सौदी अरब में काम करता हैं . निशा सभी नर्सों से बिल्कुल अलग थी लेकिन उसमे कुछ अलग तरह की कशिश थी जो मुझे उसकी तरफ़ खिचती थी . वो देखने मी सांवली थी और बड़े ही धीरे धीरे हथिनी की तरह मटका के चलती थी , उसके बड़े बड़े कूल्हे चलते वक्त उसके गांड का बहुत ही सेक्सी नज़ारा दिखाते थे.. उसकी आंखों मी झील की गहराई थी और जब वो मेरी तरफ़ देखती तो ऐसा लगता की मैं उसकी आंखों की गहराई में डूब रहा हूँ . उस से नजर मिले तो ऐसा लगता की जैसे मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा खड़ा हूँ और वो मेरे नंगे बदन को देख रही है . जब भी कभी हमारी आंखें चार होती तो वो तब तक देखती रहती जबतक मैं अपनी नजर हटा न लूँ . धीरे धीरे मैंने भी उसको देखना शुरू किया, मेरी हिम्मत बढ़ने लगी. वो हल्का हल्का मुस्कुराती तो बड़े अजीब अजीब से ख्याल आते . अक्सर उसकी आंखों और मुस्कराहट को देख के ख्याल आता की जैसे वो मेरे लंड को अपने मुहँ मे लेकर चूस रही है धीरे धीरे .अब तो बिल्कुल ऐसा हो गया है की उसका चेहरा सामने आते ही मेरे लंड को उसके मुहँ की गरमी महसूस होने लगती है और वो आहिस्ते आहिस्ते जागने लगता है और आराम से 5 -10 मिनट में तन कर खड़ा हो जाता है मेरे इस ७.५ इंच लंबे और मोटे लंड को पन्त के अन्दर काबू मे रखना मुश्किल हो जाता है.

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निशा मे और बाकी नर्सों मे एक अन्तर और है और वो ये की बाकि नर्सें जो मुझे सेक्सी लगती हैं उनको देख के मेरे लंड मे तुरंत तनाव आ जाता है पर निशा को देख कर दिल बड़ा शांत रहता है और जिस्म धीरे धीरे मजे से गरम होता है , लंड मजे से बिना उतावलेपन के खड़ा होता है और तबियत होती है की अच्छे से इत्मिनान से निशा के जिस्म को महसूस करूं , और 2 – 3 घंटे एक दुसरे से लिपटे रहे और बीच बीच मे चुदाई भी चलती रहे . शायद निशा का शांत स्वभाव भी एक कारन हो सकता है . उसको देखकर ही ऐसा महसूस होता की मैं पानी में तैर रहा हूँ . जहाँ तक चुचिओं की बात है , मैं चूची के लिए पागल हो जाता हूँ लेकिन चुन्चियाँ भी वैसी होनी चाहिए मुझे मीडियम साइज़ की जो मेरे हथेली मे समाँ जाए ऐसी चुन्चिया पसंद है..निशा इस मामले मे भी मेरे लिए ख़ास थी.यहाँ भी उसकी चूची मीडियम साइज़ की थी पर एक अन्तर था उसकी चूची उसके सीने के उपरी हिस्से मे थी एकदम कसी हुई और सामने खड़ी . बाकी नर्सो में चुन्चियाँ अक्सर सीने के बीच वाले हिस्से मे या निचले हिस्से मे थी . तो जब भी उसकी चुचियों के उभार के दर्शन होते तो दिल में ऐसा ख्याल आता की मेरा लंड उसके दोनों चुचियों के बीच से होकर उसके होठों की तरफ़ जा रहा है . मेरी टेबल कुर्सी के ठीक बायीं तरफ़ उसकी केबिन थी जिसमे एक मरीज होता था जिसका देखभाल करना निशा की जिम्मेदारी थी . केबिन के शीशे के दरवाजे से वो अक्सर स्टूल पे बैठ कर मुझे देखती . मैं भी टेबल पे एक दिन बायीं तरफ़ सिर रख कर उसे देखने लगा . हम दोनों एक दुसरे को देखते रहे और 15 मिनट के अन्दर मेरा लंड खड़ा हो चुका था . मैंने हिम्मत करी और सोचा की बात अब आंखों से आगे बढ़नी चाहिए और रिस्क लेने की ठान ली . मैंने अपनी चैन खोली और मेरे ७.५ इंच के मोटे फनफनाते लंड को पँट के चैन से बाहर निकाल लिया . सामने टेबल होने के वजह से बाकि केबिन की नर्सें मुझे देख नहीं सकती थी और सिर्फ़ निशा ही मुझे देख सकती थी शीशे से . उस दिन उसका बेद भी खली था . वो टेबल से उठ कर खड़ी हो गई और मेरे ताने हुए मोटे लंड को देख कर चौंक गई लेकिन फ़िर थोड़ा सकुचाई फिर एक गहरी मादक नजर से देखा और अपना स्टूल उठा कर खिड़की के तरफ़ चेहरा करके बैठ गई याने अब उसकी पीठ मेरी तरफ़ थी . जैसा की मेरा अंदाजा था वो गुस्सा तो नहीं हुई और उसके अंदाज से एक बात साफ था की व्हो नाराज भी नहीं थी .

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मैं अपने लंड को चैन से पीछे किया और उठ कर उसके केबिन मे गया . शीशे पे परदा लगा दिया और निशा के पीछे खड़ा हो गया , वो चुपचाप बाहर देखती रही . मैंने अपना लंड उसकी पीठ से सता कर दबाया और अपने दोनों हाथों से उसके कंधे और बांहों को सहलाने लगा. व्हो जोर जोर से साँस ले रही थी और धीरे से बोली, ‘डॉक्टर स्टॉप, प्लीज़ . ऐसे मत करो डॉक्टर ‘.

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