नाराज़ भाई ने की अपनी ही बहन की ताबाद-तोड़ चुदाई

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा था, की मेरे भाई की शादी थी. और मेरी बेहन हमारे घर में एक महीना पहले आ गयी थी. वो शादी के बाद बहुत सेक्सी हो गयी थी, और मुझे उसके लिए गंदे ख़याल आते थे.

फिर मैने ये बात दीदी को भी बता दी. मैं एक नौकर की तरह फील कर रहा था, और मुझे भी इंपॉर्टेन्स चाहिए थी. दीदी ने मुझे प्रॉमिस किया था, की वो मुझे वॅल्यू देंगी. संगीत की रात आ चुकी थी. अब कहानी आयेज बढ़ते है.

दीदी क्या लग रही थी. उन्होने ग्रीन लहगा आंड पिंक चुननार डाल रखी थी. अब हम सब स्टेज के पास गये तो वाहा पता चला की सिर्फ़ 8 डॅन्स ही लेने थे, और सब नही हो पाएँगे. क्यूंकी फिर दूसरे अरेंज्मेंट्स में प्राब्लम हो रही थी. तो फिर डिसाइड हुआ, की लड़की वालो की तरफ से 4 आंड लड़के वालो की तरफ से 4 डॅन्स होंगे.

अब वो 4 डॅन्स में जीजू ने मेरा और दीदी वाला डॅन्स काउंट नही किया, आंड उस वक़्त दीदी भी कुछ नही बोली. दीदी ने खुशी-खुशी जीजू के साथ डॅन्स किया. फिर सोलो डॅन्स भी किया, जैसे दीदी को मेरा डॅन्स कॅन्सल होने से कोई फराक नही पड़ा. जीजू मुझे चिढ़ा रहे थे ये बोल कर की-

जीजू: मैने बोला था ना मैं नही करने दूँगा डॅन्स.

मुझसे ये सब बर्दाश्त नही हो रहा था, तो मैं अपने कमरे में जाने लगा. दीदी ने मुझे कमरे में जाते देखा, तो दीदी भी मेरे पीछे-पीछे आई. मैं कमरे में बैठ के पानी पी रहा था, और ग्लास काँच का था. उतने में दीदी आई.

फिर दीदी ने दरवाज़ा खोला. मैने उसको देखते साथ ही काँच का ग्लास अपने हाथ में तोड़ दिया. मेरे हाथ से खून आने लगा. दीदी तुरंत दरवाज़ा लॉक करके मेरे पास आई और बोली-

दीदी: दानिश ये क्या पागलपन है?

मे (मेरी आँखों से आँसू निकल रहे थे): आपने धोखा दिया मुझे. मैने आपको पहले ही कहा था जीजू हमारा डॅन्स नही होने देंगे. लेकिन आप भी उनसे मिल गयी. मुझे धोका दिया आपने. मेरे एमोशन्स के साथ खेला है आपने.

दीदी: सॉरी मैं उस वक़्त कुछ नही कर पाई. मुझे उस वक़्त उनका डिसिशन सही लगा.

मे: आप मेरे कमरे से निकल जाओ.

दीदी: दानिश सॉरी ना, मेरे हाथ में नही था उस वक़्त.

मे: अभी है आपके हाथ में, आप यहा से चली जाओ. आपको मेरी फीलिंग की कुछ परवाह नही है. मैं जियु या मारू आपको उससे कोई फराक नही पड़ता, और ना ही अब पड़ना चाहिए. आप जाओ यहा से.

मैं ये सब बाते कर रहा था, तभी दीदी ने मुझे पट्टी कर दी थी, जिससे खून रुक चुका था.

मे: आप यहा से जाओ. एक काम करो, आप रूको, मैं उस छूतिए(जीजू) को भेजता हू. आप मेरे कमरे में ही उससे छुड़वा लो. कितने दिन हुए, आपको लंड की ज़रूरत होगी. मैं भेजता हू, आप यहा बैठो.

दीदी ने मुझे खींच के थप्पड़ मारा, और बोली-

दीदी: दानिश एक-दूं शांत हो जेया. सुनो, मुझसे ग़लती हुई है. मैं माफी माँग रही हू. दूसरा, मैं क्या करू तुम बताओ.

मे: आप यहा से चली जाओ.

दीदी: मैं यहा से कही नही जाने वाली. पूरी रात यही पे रुकूंगी. तुझे सोना है तो सोजा.

फिर मैं खड़ा हुआ, और दीदी को बोला: आप यहा से चली जाओ. वरना मैं-मैं अपनी लिमिट्स क्रॉस करूँगा.

दीदी: जो करना है कर. मैं यहा से नही जाने वाली.

मैं फ़ौरन दीदी का हाथ पकड़ के अपने करीब खींच के उनके होंठो को अपने होंठो में लेके चूसने लगा. दीदी बिल्कुल हिली नही. फिर मैने दीदी को कहा-

मे: आप जाओ यहा से, एक बार मैं शुरू हो गया, फिर आप चाहोगे तो भी मैं नही जाने दूँगा.

फिर मैने अपनी पंत उतार के दीदी को बेड पे धक्का देके गिरा दिया. मैने दीदी के दोनो पैर मेरे कंधे पे रखे, जिससे दीदी का लहंगा जांघों तक हॅट गया. फिर मैने अपना हाथ लहँगे के अंदर डाल के उनकी पनटी खींच ली.

दीदी की पनटी उतारने के बाद मैं उनका लहंगा खिसका के उनके दोनो पैरों के बीच में आ गया. दीदी की छूट कंप्लीट सवे की हुई थी. इधर मेरा लंड 7 इंच का एक-दूं कड़क खड़ा हो गया था.

फिर मैने बिना देरी किए अपना लंड दीदी की छूट पे रख के धक्का मारा. पहले धक्के में मेरा आधा लंड उनकी छूट में चला गया. मेरे ज़ोर से धक्का मारने की वजह से दीदी को बहुत पाईं हुई, जिससे उनकी चीख निकल गयी. और उनकी आँखों से पानी निकालने लगा.

फिर मैने दीदी की छूट में मेरा लंड तोड़ा बाहर निकाल के ज़ोर का धक्का मारा, जिससे दीदी तिलमिला उठी और उन्होने ज़ोर से चीख मारी.

दीदी: आहह मार डाला, धीरे करो.

उन्होने मुझे इतने ज़ोर से पकड़ा था, की उनके नाख़ून मेरी पीठ में घुस गये थे. अब मेरा पूरा लंड दीदी की छूट में था. फिर मैने धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया. अब मैं जान-बूझ के मेरा पूरा लंड बाहर निकाल के ज़ोर से धक्का मारता था, जिससे दीदी की चीख निकले.

दीदी की छूट बिल्कुल टाइट थी. उनको छोड़ते वक़्त मुझे बिल्कुल भी एहसास नही हुआ, की वो पहले चूड़ी हुई थी. दीदी की छूट बिल्कुल टाइट थी. मैं अब दीदी की छूट में लंड डाल के अंदर-बाहर करने लगा, आंड धीरे-धीरे धक्को की स्पीड बढ़ता जेया रहा था.

इस सब में अभी तक दीदी का साथ मुझे चुदाई में नही मिला था. लेकिन विरोध भी नही किया उन्होने. अब जैसे-जैसे मैं धक्के मार रहा था, वैसे-वैसे दीदी की आहा आ आ की आवाज़ निकल रही थी.

मैने और दीदी ने हमारा फर्स्ट रौंद साथ में पूरा किया था. पहले दीदी झाड़ गयी, और फिर तुरंत पीछे-पीछे मैने भी मेरा सारा माल दीदी की छूट में खाली कर दिया. फिर मैं थोड़ी देर ऐसे ही दीदी के उपर पड़ा रहा.

उसकी थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे धक्का देके मुझे अपने उपर से हटाया. फिर दीदी उठ के बातरूम में गयी. वो थोड़ी देर बाद वापस आके मेरी बगल में आँखें बंद करके लेट गयी.

मैने थोड़ी देर बाद दीदी के ब्लाउस को खोल के ब्लाउस उतार दिया. ब्लाउस उतारते ही मैने देखा दीदी ने ब्लॅक कलर की ब्रा पहनी हुई थी. फिर मैने ब्रा का हुक खोल के दीदी को अपनी तरफ घुमाया. मैं पूरा नंगा हो गया आंड दीदी के भी सारे कपड़े उतार दिए.

फिर मैं दीदी को रज़ाई में लेके उनके बूब्स के निपल्स को चूसने लगा. 10 मिनिट तक मैं उनके बूब्स के साथ खेलता रहा. फिर मैं वापस दीदी के पैर खोल के बीच में आ गया.

उसके बाद मैं फिरसे मेरा खड़ा लंड दीदी की छूट में डाल के छोड़ने लगा. 2 मिनिट के बाद दीदी के मूह से मोन्स की आवाज़ आने लगी.

दीदी: आअहह आअहह आउच मॅर गयी, धीरे कर, बस कर.

ये आवाज़े चालू हो गयी आंड मैं उन्हे छोड़ता रहा. फिर मैने उनको डॉगी-स्टाइल में भी छोड़ा, आंड अलग-अलग पोज़िशन में छोड़ता रहा. मैं सुबा 5 बजे तक उन्हे अलग-अलग पोज़िशन में छोड़ता रहा.

इस बीच मैं दीदी के अंदर 3 बार झाड़ चुका था. और 4 बार बाहर झाड़ चुका था.

मैं सुबा 12 बजे उठा, तो दीदी मेरे पास नही थी. फिर मैं सीधा बातरूम में नहा के फ्रेश होके नीचे गया. नीचे नाश्ता चल रहा था. दीदी मेरे पास नही आ रही थी, और मैं भी नही गया. दीदी नाश्ते की डाइस देने आई तो उनसे ठीक से चला नही जेया रहा था.

मैने दीदी को पूछा: ये पैर में क्या हुआ है? तुम ठीक से चल नही पा रही.

तो दीदी मुझे गुस्से से देख के चली गयी. लेकिन मेरा ध्यान उनपे ही था. फिर दीदी की सहेली ने जब पूछा की क्या हुआ था, तो दीदी बोली-

दीदी (हेस्ट हुए): छ्चोढ़ ना यार, कल का डॅन्स महँगा पद गया.

सहेली: क्यू? कोई चोट आई है?

दीदी: नही, तुझे लगता है ये चोट की पाईं है?

सहेली: नही, इसीलिए तो पूछा की क्या हुआ.

दीदी: डॅन्स के बाद तुम्हारे जीजू को रोक नही पाई. और सुबा 5 बजे तक उन्होने मुझे रग़ाद-रग़ाद के पेला है. नीचे पूरी सूजन हुई पड़ी है.

सहेली: अर्रे वाह, तू तो खुशनसीब निकली. इतना प्यार करने वाला काश मुझे भी कोई मिल जाए.

दीदी: अछा सुन, तेरी एक हेल्प चाहिए. तू प्लीज़ मेडिकल से अनवॉंटेड-72 टॅबलेट ला देना मुझे, और इस सूजन का इलाज भी.

सहेली: मतलब गुड न्यूज़ है क्या?

दीदी: हा होगी ही ना, प्रोटेक्षन उसे नही किया. और ना ही बाहर निकालने का कष्ट उठाया. तो 100 पार्सेंट होगी. लेकिन मुझे अभी बच्चे नही चाहिए. ना ही मैं अभी ये बताना चाहती हू.

उसके बाद दीदी ने शादी तक मुझसे कोई बात नही की. शादी के बाद दीदी घर पे एक दिन रुकी, और फिर वो अपने ससुराल चली गयी. अब वो ना ही मेरे फोन का आन्सर देती है, ना ही व्हत्साप्प पे मेसेज का. मुझसे बिल्कुल भी बात नही करती.

दोस्तों नेक्स्ट पार्ट में बतौँगा की दीदी को दोबारा कैसे मनाया मैने. और अपने बच्चे की मा भी बनाया.

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