हेलो दोस्तों, मेरा नाम दक्ष है. मैं मीरूत में रहता हू. मैं 23 साल का 5’7″ लंबा, सेक्सी बदन, फेर कलर, हेरलेस बॉडी, मुलायम गद्देदार गांद, मोटी-मोटी गोरी जाँघ, पिंक लिप्स और निपल्स, लंड के पास छ्होटे-छ्होटे हल्के बाल के साथ कुल मिला कर माल आइटम हू. गूगले पर “रोब क्विन गे पोर्नस्तर” सर्च कर लेना, पता चल जाएगा कैसा लगता हू.
जब मैं स्कूल टाइम में था, तब मुझे मेरे मेद्स के सिर बहुत आचे लगते थे. उस टाइम ही मुझे पता चला था की मुझे लड़के पसंद है. मेद्स के सिर को याद करके तो मैं बहुत बार गांद में उंगली कर लिया करता था, और स्प्ने में तो पता नही सिर ने मुझे कितनी बार छोड़ भी दिया था. ये कहानी मेरे पहले सेक्स की है.
चलो अब आते है कहानी पर. ये कहानी आज से 3 साल पहले की है. हुमारे घर में मैं, मेरे पापा, बड़ा भाई, बेहन और मम्मी रहते है.
मेरे नाना के घर पर छ्होटे मामा-मामी और उनके बच्चे नाना के साथ रहते है. मेरी नानी की डेत बहुत साल पहले ही हो गयी थी. उनका घर मीरूत के पास के ही गाओं में है.
मेरी मामा और मामी को मामी के माइके जाना था, क्यूंकी मामी की फॅमिली उनको कहीं घूमने ले जेया रही थी. इसलिए मामा का कॉल आया था की अगर 10 दिन के लिए मेरी मम्मी और हम वहाँ चले जाए तो अछा रहेगा.
पापा का ऑफीस में डेली लाते आना लगा हुआ था. भाई और बेहन के भी एग्ज़ॅम थे, इसलिए मम्मी उनको छ्चोढ़ कर नही जेया सकती थी. इसलिए मैने हा कर दी जाने के लिए. मेरी वाकेशन्स भी चल रही थी.
मैं अगले दिन बस पकड़ कर नाना के घर आ गया. मेरे आने के कुछ घंटे बाद मामा और मामी भी चले गये. अब पुर घर में नाना और मैं अकेले थे.
दोस्तों मेरे नाना का नाम धर्मवीर है. जैसा नाम है, वैसे ही वो खुद भी है, एक-दूं लंबे चौड़े, सावला बदन, बदन पर ना के बराबर बाल, उमर 58 साल है, लेकिन बदन ऐसा बनाया हुआ है जैसे कोई 38-40 का जवान आदमी हो. मेरे नाना आज भी रोज़ सुबा काई किलोमीटर दौड़ लगते है. मज़बूत बदन बना रखा है उन्होने. मूह पर लंबी मूचे रख रखी है. आज भी पूरी पर्सनॅलिटी में रहते है.
शाम हो गयी थी. हम दोनो ने छाई पी. उसके बाद नाना मार्केट से घर का कुछ समान लेने चले गये. तब तक मैने घर का सारा काम कर लिया. 2 घंटे बाद नाना घर आए. आज बहुत ज़्यादा ही गर्मी थी. मैं रसोई में आपने दोस्तों से कॉल पर बात करता-करता काम कर रहा था.
तभी बाहर कुछ गिरने की आवाज़ आई. मैं जल्दी से बाहर आया तो देखा नाना आपने रूम में सिर्फ़ कच्चे में खड़े थे. नाना बुड्ढे लोगों वाला लंबा सा कच्चा पहनते है, जिसमे नाडा होता है.
रसोई के दरवाज़े के पीछे से मैं नाना को देख रहा था. नाना को मैने कभी भी सिर्फ़ कच्चे में नही देखा था. हो सकता है शायद पहले घर पर सब होते थे, इसलिए वो इतना ओपन नही हो पा रहे थे.
वो ऐसे ही टवल लेकर बातरूम की तरफ जाते हुए बोले: दक्ष, मैं नहा कर आ रहा हू. फिर साथ में बैठ कर खाते है खाना.
नाना का बदन देख कर मेरे अंदर जैसे एक नया एहसास होने लग रहा था. मैं इतना खो गया था की पता ही नही चला की कॉल पर मेरा दोस्त मुझे कुछ बोल भी रहा था.
खाना बनते-बनते बस मैं नाना के बारे में ही सोच रहा था. तभी नाना की आने की आवाज़ आई. मैने जल्दी से कॉल रखी और खाना डालने लगा. तभी नाना रसोई में आ कर मेरी मदद करने लगे. नाना मदद करते हुए मेरे इतना करीब थे, की मुझे उनके बदन की खुश्बू तक आ रही थी. मैं बहुत ज़्यादा घबरा रहा था पता नही क्यूँ.
थोड़ी देर बाद हम दोनो नाना के रूम में जेया कर टीवी देखते-देखते खाना खाने लगे. नाना अभी भी कच्चे में ही थे. मेरा ध्यान बार-बार उन पर ही जेया रहा था.
नाना: क्या हुआ, खाना क्यूँ नही खा रहा?
मैं: वो, वो खा रहा हू.
नाना: कूलर चला ले, कितने पसीने आ रहे है तुझे. और इतनी गर्मी में ये क्या त-शर्ट पहनी हुई है. निकाल ले इसको.
मैने कूलर चला कर त-शर्ट निकली. मैं अब बनियान और शॉर्ट्स में बैठा खाना खा रहा था. मेरा बनियान तोड़ा लूस था, इसलिए मेरे मोटे-मोटे चुचे सॉफ-सॉफ लटकते हुए नज़र आ रहे थे. बीच-बीच में नाना टीवी देखते हुए मेरे चुचो को एक-दो बार देख चुके थे. नाना टीवी और मैं उनको ही देखे जेया रहा था.
हुँने जल्दी से खाना खाया, उसके बाद हम बेड पर लेट कर टीवी देखने लगे.
मैं: नानी तो बचपन में बहुत सारी कहानियाँ सुनती थी. आपको नही आती क्या?
नाना मेरे साथ लेते हुए थे. मैं नाना के पास चिपक गया. अपना एक हाथ उनकी छ्चाटी पर रख कर कहानी के लिए बोला तो नाना बातें करते हुए एक हाथ से मेरी पीठ सहला रहे थे. कुछ देर ऐसे ही करते-करते मैं नाना की बाहों में उनको महसूस कर रहा था.
नाना: दक्ष कल मुझे जल्दी जाना है, अब सो जाते है.
मैं: आप हमेशा ऐसा ही करते हो.
मैं नाराज़ होने का नाटक करने लगा, और अपना फेस दूसरी तरफ करके गांद नाना की और कर ली. नाना पीछे से दोनो हाथो से मेरी कमर से होते हुए पेट और फिर चुचो पर गुदगुदी करते हुए बोले-
नाना: नणु का प्यारा बेटा है, कल पक्का कहानी, ओके?
ये बोल कर नाना ने मुझे कस्स कर पकड़ लिया और गाल पर किस करके ऐसे ही मुझे पकड़े-पकड़े सो गये. बचपन में भी नाना नाराज़ होने पर मुझे ऐसे ही गुदगुदी करते थे. लेकिन आज तो नाना ने हाथ मेरी बनियान के अंदर से बाहर निकाला ही नही, और ऐसे ही सो गये.
नाना की ये हरकत ने मेरा लंड खड़ा कर दिया था. बहुत देर तक मुझे नींद ही नही आई. कुछ करने की कोशिश भी नही कर पा रहा था, इतना ज़ोर से पकड़ा हुआ था.
आधी रात में मेरी आँखें खुली तो देखा नणु का लंड कच्चे में बिल्कुल खंबे जैसा खड़ा था. मैने नणु की तरफ देखा. वो अभी भी सो रहे थे. मैने थोड़ी हिम्मत करते हुए अपना हाथ उनके खड़े लोड पर रखा. तभी नणु के बदन में एक अलग सा करेंट दौड़ा और वो अचानक घूमते हुए मेरे उपर अपना एक पैर रख कर, अपने एक हाथ से मेरे बदन को पकड़ कर, मेरे उपर आ गये.
मुझे लगा वो जाग गये थे. इसलिए मैने बोला: नणु, नणु.
लेकिन वो कुछ नही बोले. इस पोज़िशन में नाना का खड़ा लोड्ा मेरे पेट पर टकरा रहा था. मैने भी नाना को कस्स कर पकड़ लिया, और ऐसे ही सोने की कोशिश करने लगा. लेकिन अब नींद कहाँ आने वाली थी. फिर नैन भी नणु को कस्स कर पकड़े हुए लेता रहा.
सुबा के 5 बाज गये थे. नाना अभी भी मेरे उपर ही थे. तभी नाना के फोन में अलार्म बाज गया. नाना एक लंबी सी अंगड़ाई लेते हुए बेड से पैरों को नीचे लटका कर बैठ गये. फिर पीछे मूड कर मुझे देखा. मैं अभी भी सोने का नाटक ही कर रहा था. फिर अपने लोड को कच्चे में अड्जस्ट करने लगे.
मैं नाना का लंड देखना चाहता था, इसलिए मैं तुरंत जाग कर “गुड मॉर्निंग नाना” बोलते हुए सीधा बेड से उतार कर उनके सामने खड़ा हो गया. फिर नाना को ज़ोर से गले मिला.
नाना का लोड्ा अभी भी खड़ा ही था. वो मुझे तोड़ा पीछे करने लगे. तभी मैं उनकी एक जाँघ पर बैठ गया.
मैं: आज घूमने चले?
नाना: पहले मुझे वॉक पर तो जाने दे मेरे बाप.
हम दोनो ही हासणे लगे. नाना ऐसे ही खड़े हो कर बाहर चले गये. कच्चे से उनका लोड्ा ऐसे लटक रहा था, जैसे कोई लंबा मोटा खीरा हो. नाना रूम से बाहर जाते हुए बिना किसी शरम के खड़े लोड को खुजलते हुए चलते जेया रहे थे.
उनके वॉशरूम जाने के बाद मैं नाना के बदन की खुश्बू महसूस करते हुए अपने बदन से मस्ती करने लगा. मैने अपनी बनियान निकाल दी. फिर अपने पिंक निपल्स और मोटे-मोटे चुचो को दोनो हाथो से मसालने लगा. एक हाथ चड्डी के अंदर डाल कर, लंड से खेलते हुए, चुचो पर जीभ लगाने की कोशिश करते रहा.
5-10 मिनिट बाद नाना की बाहर से आवाज़ आई: बेटा मैं वॉक पर जेया रहा हू. तब तक सफाई कर लेना. नास्टा बाहर से लेकर अवँगा.
मुझे पता था नाना को आने में बहुत टाइम लगने वाला था. इसलिए मैने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और आयिल लेकर गांद में उंगलियाँ करने लगा. मेरी गांद में आराम से 3 उंगलियाँ ले लेता हू. गांद को छोड़ते हुए मैं अपना लंड हिला रहा था.
15-20 मिनिट फुल मज़े करने के बाद मैने मेरा माल अपने हाथ में निकाल कर पूरा निगल लिया.
मैं आपना माल बहुत बार पी चुका हू. पता नही कब दूसरों का पीने का मौका मिलेगा. मेरे जिस्म की गर्मी से मेरा बदन पूरा गीला हो गया था. फिर मैने अंडरवेर और शॉर्ट्स पहनी, और घर के आँगन में पंखा चला कर चारपाई पर लेट गया. 30 मिनिट बाद घर का गाते खुला, और नाना जी अंदर आए.