मिस सुजाता, मी स्कूल टीचर – 2

हे गाइस इट्स ःओतBओय्णिल,

मैने कुछ वक़्त पहले एक कहानी लिखी थी जिसका नाम था ‘मिस सुजाता, मी स्कूल टीचर’, आज मैं उसका सीक्वेन्स लिखने जेया रहा हूँ. जिन्होने वो सीरीस नही पढ़ी प्लीज़ पहले वो पढ़िए उसके ये पढ़ना.

आज मैं अपनी लाइफ मे काफ़ी सक्सेस्फुल हूँ. हुमारे फॅमिली बिज़्नेस को हॅंडल करता हूँ और साथ ही कुछ न्यू बिज़्नेसस स्टार्ट किए है जो काफ़ी अकचे चल रहे है.

मुझे स्टोरीस लिखने का काफ़ी शौक था इसलिए मैने अपने लाइफ के काफ़ी एक्सपीरियेन्सस यहाँ देसी कहानी पर लिखे ताकि आप लोग उन्हे एंजाय करे. और साथ ही मैं भी फ्यूचर मे अपने एक्सपीरियेन्सस को पढ़ के एंजाय कर साकु.

योउ नो मैं काफ़ी लकी रहा हू, कॉलेज, फ्रेंड्स, गर्लफ्रेंड्स, बिज़्नेस और आप सब रीडर्स ने मुझे वो सब दिया है जो मैने एक्सपेक्ट नही किया था. जहाँ भी गया जो भी किया उसने मुझे बहुत अक्चा रिटर्न दिया.

जब मैं रेग्युलर स्टोरीस लिखता था तब कुछ लोग ऐसे होते थे जिनसे मैं रेग्युलर छत करता था. वो अक्सर मुझे कहते थे के आप काफ़ी लकी हो जो इतनी लड़कियों के साथ आपने सेक्स किया है. और आज सोचता हू तो ये फील होता है.

हम बड़े होते है तब धीरे धीरे करके अपने प्रेज़ेंट मे रहने लगते है और बहुत सारे लोग हुमारा साथ छ्चोड़ के किसी और ग्रूप का हिस्सा बन जाते है.

हुमारा भी ऐसा ही होता है. नये लोग, नयी दुनिया लेकिन एक वक़्त आता है जब आप अपने पस्त के सारे लोगो को याद करते है फिर चाहे वो कही से भी हो. बचपन के दोस्त, स्कूल, कॉलेज, एट्सेटरा. और आज कल मेरे दिमाग़ मे कुछ यही चल रहा है.

मैं प्रेज़ेंट मे रहता हू लेकिन अपने पस्त को बहुत मिस करता हू. बहुत दिन से दिमाग़ मे चल रहा था के कोई तो ऐसा मिले जिसे मिलकर मुझे वो बोलने का मौका मिले के य्र वो दिन भी क्या दिन थे.

हर रोज सोचता था के फिर से स्कूल मे चला जाो और फिर से उन ही दोस्तो के साथ ज़िंदगी जी लून. क्या दोस्त थे वो… रोज झगड़ा करना, रोज फिर से बातें करना, टीचर से डरना और कोई एक ऐसी टीचर होती थी जो सब की फॅवुरेट होती थी.

एक और टीचर ऐसी होती थी जिनपर हर किसी का क्रश होता था. पता नही क्यू बस वो पसंद आती थी. तब उतना साँझ मे नही आता था के दिखने मे आक्ची है या फिर पढ़ती अक्चा है या अक्चा बिहेव करती है इसलिए पसंद है, लेकिन उन्हे देखते ही वो सीधा दिल मे उतार जाती थी. सोचता हू के आज वो सब एंजाय कर लू फिर एक बार.

आज शाम ऑफीस से घर आते वक़्त मुंबई मे बहुत ज़ोर की बारिश हो रही थी और देखकर लगता नही था के ये जल्दी रुकने वाली है. आक्च्युयली आज ऑफीस मे ज़्यादा कम नही था तो मैं जल्दी घर निकल गया. ट्रॅफिक मे अटक गया था और मैं अपने ख़यालो मे ही खोया हुआ था.

अचानक से दिमाग़ मे ख़याल आया के मौका भी है और वक़्त भी है तो क्यू ना एक चक्कर स्कूल की तरफ लगा डू? बस चेहरे पर एक मुस्कान आई और मैने गाड़ी स्कूल की तरफ घुमाई. अंदर से काफ़ी खुशी हो रही थी के मैं इतने सालो बाद स्कूल जेया रहा था.

कितना अजीब वक़्त होता है ना? जब हम स्कूल जाते है तब लगता था के क्यू ये रोज रोज जाना पड़ता है और जब बड़े हो गये तो फिर से स्कूल जाने का मॅन करता है.

कुछ वक़्त बाद मैं अपनी स्कूल पहुँच गया. बारिश अभी भी बहुत ज़ोर से हो रही थी और जिस वक़्त मैं वहाँ पहुँचा तब स्कूल च्छुतने का वक़्त हो चुका था. मैं स्कूल के कॅंपस मे था और गाड़ी मे बैठे ही देख रहा था.

कुछ ही देर मे स्कूल च्छुत गयी और बाकछे घर जाने के लिए निकल पड़े. उन्हे देखकर एक सुकून सा मिल रहा था. उनके चेहरे पर घर जाने की खुशी तो थी लेकिन उससे काई ज़्यादा बारिश मे भीगते हुए घर जाने की खुशी थी. मैं वहाँ के हर बाकछे मे खुद को ढूँढ रहा था.

फिर मैं बिना किसी परवाह के गाड़ी से बाहर आया और बारिश मे भीगते हुए स्कूल की तरफ भागने लगा. लगभग पूरा भीग चुका था लेकिन स्कूल आ गया इस बात की बहुत खुशी हो रही थी. मैं यहाँ वहाँ देखते हुए स्कूल मे जाने लगा. बहुत कुछ बदल गया था लेकिन मैं आज भी वो सब इमॅजिन कर रहा था.

कुछ टीचर मिले जो नये आए हुए थे इसलिए मैने किसी से बात नही की. मैं चाहता था के काश कोई तो मिले जिन्होने मुझे पढ़ाया था. दिमाग़ मे एक नाम बार बार आ रहा था लेकिन वो लेने की मुझमे हिम्मत नही हो रही थी. उनसे मिलने की बहुत तमन्ना थी लेकिन दर था के मिल गयी तो क्या जवाब दूँगा?

यहाँ वहाँ करते करते मैं अपनी क्लास मे आया जहाँ मैं बैठा करता था. मेरा वो खास 2न्ड बेंच जिसपर मैं बैठता था. मेरे साइड मे ही मेरे बेस्ट फ्रेंड्स बैठते थे और हम काफ़ी मस्ती करते थे. मैं अपनी यादो मे खोया हुआ था के अचानक से वहाँ कोई आया जिसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई और दर भी लग रहा था.

हन वो थी सुजाता माँ. जो लगभग हुमारे स्कूल के हर लड़के की क्रश थी. आज उनसे इतने सालो बाद अचानक से नज़रे मिली. उन्होने मुझे देखा और उनके चेहरे पर काफ़ी खुशी दिखी. उन्होने सामने के टेबल पर रखा हुआ उनका फोन उठाया और मेरे पास आकर खड़ी हुई.

सुजाता माँ (मुझे देखते हुए): ओह मी गोद! नील तुम यहाँ?

नील (मुस्कुराते हुए): हन.

सुजाता माँ: और इतने सालो बाद? कुछ काम था यहाँ?

नील: नही… बहुत दीनो से स्कूल की याद आ रही थी तो बस चला आया.

सुजाता माँ काफ़ी चेंज हो गयी थी. जब मैं स्कूल मे था तब वो अपनी जवानी से हम सभी बाकचो को दीवाना कर रही थी. और मैं उनकी जवानी का सबसे बड़ा शिकार बन गया था.

सुजाता माँ: ह्म मुझे पता था तुम एक ना एक दिन ज़रूर आओगे.

मैने गर्दन नीचे करके कहा-

नील: लेकिन मुझे कुछ ज़्यादा ही देर हो गयी यहाँ आने मे.

उन्हे मेरे जवाब से पता चल गया के मैं क्या कहना चाहता था. उन्होने झट से टॉपिक चेंज किया और कहा.-

सुजाता माँ: अरे तुम कितने भीग गये हो…

नील: हन बाहर गाड़ी पार्क की तब बहुत बारिश हो रही थी इसलिए भीगते हुए आ गया.

सुजाता माँ: ऐसे तो तुम बीमार पद जाओगे… चलो यहाँ से.

नील: कहा?

सुजाता माँ: कही भी… लेकिन पहले यहाँ से चलते है. वैसे भी स्कूल बंद होने का टाइम हो चुका है.

उनकी बात मे हन कहते हुए मैं उनके साथ चला गया. माँ ने च्चता लाया था तो हम दोनो साथ मे मेरी गाड़ी तक चले गये. गाड़ी मे बैठ गये और माँ ने कहा

सुजाता माँ: बहुत आक्ची गाड़ी है तुम्हारी.

नील: थॅंक्स.

सुजाता माँ: चलो मेरे घर… बहुत सालो बाद मिले हो तुमसे बहुत सारी बातें करनी है.

नील: अरे नही मा’आम फिर कभी अवँगा.

लेकिन मा’आम की बहुत इच्छा थी इसलिए मैं उनके घर चला गया.

सुजाता मा’आम मे बहुत सारे बदलाव आए थे. अब वो एक प्रॉपर भाभी दिखने लगी थी. आगे 35, रंग गोरा, हाइट 5.6 फ्ट., स्लिम फिगर. मा’आम ने सारी डाली हुई थी जिसमे वो पहले की तरहा ही खूबसूरत लग रही थी.

वक़्त के साथ उनका चेहरा आज भी बहुत सुंदर लग रहा था. घने बाल जो उनकी कमर तक आते थे, तीखे नैन नक्श. बूब्स जो पहले से काफ़ी बड़े लग रहे थे जिसपर मेरी नज़र बार बार जेया रही थी. चलते वक़्त मटकती हुई उनकी गांद पर आज भी मेरा दिल मरता है. सारी मे से सॉफ दिखाई देने वाली उनकी नाज़ुक सी पतली कमर मुझे बार बार देखने पर मजबूर कर रही थी.

मेरी आँखें बार बार उनकी नाभि को ढूँढ रही थी लेकिन उन्होने सारी थोड़ी सी उपर पहनी थी इसलिए मैं नही देख सका. जब हम दोनो एक रिलेशन्षिप मे थे तब मैं रोज उन्हे बेड पर लिटा के उनके उपर आकर उन्हे प्यार करता था.

हर जगह उन्हे चूमता और उनके जवान जिस्म को चाटने लगता था. उनकी गोल और खूबसूरत सी नाभि मे अपनी जीभ डाल के मा’आम को काफ़ी गरम कर देता था. लगभग ये रोज होता था, मा’आम तब अकेली रहती थी इसलिए मेरा जब भी उन्हे छोड़ने का मॅन करता मैं उनके घर चला जाता था.

सुजाता मा’आम बिल्कुल किसी मिड-एज्ड भाभी की तरहा बन चुकी थी जो आज अपनी जवानी से भी ज़्यादा हॉट लग रही थी. भगवान ने लड़कियों को बहुत ही खूबसूरती से बनाया है.

लड़कियों की खूबसूरती हर उमर मे बढ़ती ही जाती है और आप उन्हे जितना प्यार करो वो कम है. मा’आम को मेरे इतने पास देखकर मेरे लंड मे हलचल शुरू हो गयी थी. फिगर: 34-26-38

मैं मा’आम के साथ उनके घर चला गया. वो एक अपार्टमेंट मे रहती थी. हम दोनो उनके घर गये और मा’आम ने मुझे हॉल मे सोफे पर बैठने को कहा. मैं वहाँ उनका वेट करने लगा. थोड़ी देर बाद वो मेरे लिए पानी लेकर आई और मेरे साथ बैठ गयी.

नील: आपका घर बहुत अक्चा है.

सुजाता: थॅंक्स नील.

नील: आप घर मे अकेली रहती हो?

सुजाता: अरे नही… मेरी बेटी भी है ना साथ मे. वो मेरे मम्मी पापा के पास होगी, वो यही उपर वेल फ्लोर पर रहते है.

नील: ओह तो आपकी एक बेटी है?

सुजाता: हन… 7 साल की है अभी.

नील: और आपके हज़्बेंड?

सुजाता (तोड़ा सा नाराज़ होकर): नील आक्च्युयली कुछ साल पहले हुमारा डाइवोर्स हो गया.

उनकी बात सुनकर मुझे बहुत शॉक लगा. मैने उनसे वजह पूछी तो उन्होने बताया के उनके पति का किसी और से अफेर चल रहा था तो उस इंसान ने मा’आम को डाइवोर्स देकर उस लड़की से शादी कर ली.

कुछ देर तक बातें करने के बाद मा’आम ने कहा-

सुजाता: नील तुम वेट करो मैं फ्रेश होकर आती हूँ…

नील: यॅ यॅ… शुवर.

मैं उनका घर देखने लगा जहाँ मा’आम और उनकी बेटी की बहुत सारी फोटोस लगी हुई थी. कुछ फोटोस मा’आम की भी थी जब वो अपनी जवानी मे थी तब की, ट्रस्ट मे वो काफ़ी हॉट लग रही थी. मैं कुछ देर बाद बाल्कनी मे चला गया.

मेरे दिमाग़ मे एक ही बात थी के मा’आम जैसी खूबसूरत औरत होते हुए एक मर्द का बाहर कैसे अफेर चल सकता है? मुझे बिल्कुल यकीन नही हो रहा था. स्कूल मे जिस लड़की को हम अपने सपनो मे देखते थे आज वो इस हालत मे है.

कुछ देर बाद मा’आम बाल्कनी मे आई और वो टवल लेकर मेरे बाल सॉफ करने लगी. मैने माना किया लेकिन उन्होने मेरी एक ना सुनी. उन्होने सारी चेंज करके एक टशहिर्त डाली हुई थी जो ब्लॅक कलर की थी और नीचे वाइट कलर की लेगैंग्स थी. टशहिर्त काफ़ी लूस थी तो उनके बूब्स का उभर मुझे दिखाई दे रहा था. उन्होने अंदर शायद ब्रा भी नही डाली थी.

जब वो मेरे बाल सॉफ करने लगी तो मेरी नज़र उनके बूब्स पर थी, मुझे निपल्स भी टशहिर्त के उपर से दिखाई देने लगे. उनकी ड्रेसिंग सेन्स से मैं साँझ गया के वो आज भी मुझे पहले जितना ही करीब समझती है. वरना इतने सालो बाद कोई टीचर अपने स्टूडेंट से ऐसे कपड़ो मे नही मिलने आएगी.

कुछ देर बाद मा’आम कॉफी ले आई और हम दोनो बाल्कनी मे खड़े होकर कॉफी पीने लगे. मैं अपनी सोच मे था, उन्होने अब्ज़र्व किया और मुझसे पूछा-

सुजाता: नील, क्या सोच रहे हो?

नील: मुझे यकीन नही होता के आपका डाइवोर्स हो गया… और वो भी इस वजह से!

सुजाता: क्यू? नही हो सकता क्या?

नील: हन बुत आपके साथ तो होना ही नही चाहिए.

सुजाता: अरे लेकिन क्यू…?

नील: योउ नो मैं स्कूल मे था तो हुमारे स्कूल मे एक बहुत ही खूबसूरती जलपरी थी जो रोज स्कूल मे आकर ह्यूम पढ़ती थी. और हम सारे लड़के उसके दीवाने थे. इतना ही नही हुमारे सपनो मे भी वो आती थी और लड़के तो उससे शादी करने के सपने देखा करते थे.

मा’आम को पता था के मैं उनके बारे मे कह रहा था.

सुजाता (ब्लशिंग): नील वो दिन चले गये और काई साल बीट गये उन्हे. अब बहुत कुछ बदल चुका है.

नील: करेक्ट बुत आप उस इंसान को डिज़र्व नही करती.

मेरी बात सुनकर उन्हे काफ़ी खुशी हुई और उन्होने मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा-

सुजाता: एस, बुत तुम्हे तो डिज़र्व करती थी ना?

आपको क्या लगता है मा’आम के बोलने का क्या मतलब है? आयेज की कहानी नेक्स्ट पार्ट मे बतौँगा…

आपको ये पार्ट और सुजाता मा’आम कैसी लगी मुझे मैल करके बताना. लड़कियाँ और मॅरीड लॅडीस भी मुझे मैल करे छत के लिए. आपकी प्राइवसी का ख़याल रखा जाएगा.

तो बे कंटिन्यूड…

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