मेरी गाँव वाली मामी की कामवासना

दोस्तो, मैं कुन्दन हूँ, ये मेरा निक नेम है. मेरा गांव भोपाल के पास है. मैंने इंदौर से इंजीनियरिंग किया है और मैं देवास में नौकरी करता हूँ. मेरी हाईट 5 फुट 6 इंच है. मेरी उम्र 24 साल है. मेरे लंड का साईज 8 इंच से ज्यादा है. मैं बहुत कामुक इंसान हूँ.

मैं इस साईट पर अभी नया हूँ. मैं आपको अपने जीवन में घटी घटना बताना चाहता हूँ. ये घटना मेरे और मेरी मामी के बीच की है. इस घटना को मैं कहानी के रूप में पहली बार लिख रहा हूँ, अगर कोई गलती हो जाए, तो प्लीज़ माफ कर देना. ये सच्ची घटना है.

मैं काफी समय बाद अपने मामा के घर गया था. उनके घर मैं मामा मामी और उनके दो लड़के हैं. दोनों लड़के अपने मामा के यहां रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. मेरे मामा किसान हैं और मामी घर संभालती हैं. मेरी मामी की उम्र 32 साल है. वे भरे पूरे बदन की मालकिन हैं और बहुत सुंदर हैं. उनका नाम सीमा है.

जब मैं मामा के घर गया, तो मामा मामी मुझसे मिलकर काफी खुश हुए. हमने काफी देर तक बातें की, फिर खा पीकर सो गए.

सुबह मामा को फसल बेचने शहर जाना था, तो वो चले गए. वे दो दिन बाद वापस आने वाले थे. अब घर में मैं और मामी ही रह गए थे.

मैं शुरू से ही मामी को पसंद करता था और शायद मामी भी मुझे पसंद करती थीं. क्योंकि जब मैं उनके घर जाता था तो वे बहुत खुश हो जाती थीं. उनके सामने मैं जब भी जाता, तो वे अक्सर ब्लाउज पेटीकोट में मेरे सामने आ जाती थीं.
पर ऐसा मौका हमें पहली बार मिला था जब हम दोनों घर में अकेले थे.

सारा दिन ऐसे ही निकल गया. शाम को मामी खाना बना रही थीं. मैं भी वहीं खड़ा होकर उनसे बात कर रहा था. मामी जब कुछ सामान लेने को हुईं, तो उनकी गांड मेरे लंड को छू गई, जिससे मेरे बदन के रौंगटे खड़े हो गए. हालांकि उनके चेहरे पर कोई अलग भाव नहीं थे, मुझे ऐसा लगा, जैसे उन्होंने ये सब जानबूझ कर किया था.
वे अपने काम में लग गईं.

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कुछ देर बाद मैं बात करते हुए उनके पीछे खड़ा हो गया, जिससे मेरा लंड उनकी गांड को छू रहा था. मैं बहुत देर ऐसे ही खड़ा रहा. वो मुझे अपने महसूस करती रहीं. हम दोनों ही चुप थे, वो अपने काम करती रहीं. मैंने एक दो बार इसी चुप्पी की अवस्था में अपने खड़े होते लंड की नोक को उनकी गांड में लगाने की कोशिश भी की, जिससे मुझे उनकी कोई प्रतिक्रिया देखने को मिल जाए. ऐसा मैंने चार पांच बार किया, पर उन्होंने मुझसे न ही कुछ कहा और न ही वे मेरे आगे से हटीं.

जब उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैंने धीरे से उनकी कमर में अपना हाथ डाला और गांड पर लंड का दबाव बढ़ा दिया, जिससे उनकी आह निकल गई और वे थोड़ा कसमसा कर आगे को खिसक गईं. मैंने भी आगे खिसक कर उनकी गांड पर दबाव बनाया, तो वे पलट गईं.

मामी कहने लगीं- अगर किसी को पता चल गया, तो मेरी बहुत बदनामी होगी.
वे मुझे मना करने लगीं.
मैंने उनको अपनी तरफ खींचते हुए कहा- किसी को पता नहीं चलेगा.
मैंने उनको विश्वास दिलाया, तब जाकर उन्होंने हां कह दिया.

मैंने उन्हें अपने बाहुपाश में भर लिया. मामी ने मुझसे लिपटते हुए कहा- मैं तुम्हारे साथ काफी पहले से ये सब करना चाहती थी, पर मैं बदनामी से डरती थी. मुझे कभी तुमसे कहने का मौका भी नहीं मिला.
मैंने भी बताया- मामी मैं भी आपको बहुत पसंद करता हूँ.

उसके बाद मैंने उनको वहीं पकड़ कर उनके होंठ पर अपने होंठ रख दिए. मैं बहुत देर उनके होंठ चूसता रहा. वो मेरा साथ देती रहीं.

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फिर वे अलग हो गईं और बोलीं- ये सब खाना खाने के बाद लेना.
मैं मान गया और अलग हो गया.

कुछ देर बाद हम दोनों ने एक ही थाली में साथ में खाना खाया. मैं बड़े प्यार से उनको निवाला खिलाता रहा और वो मेरे होंठों से निवाला ले कर खाती रहीं. मामी भी मुझे अपने मुँह से खाने का कौर खिला देतीं, तो मैंने उनके पूरे होंठों समेत निवाले को खाते हुए अपने होंठों से दबाए रहता. उस खेल में हम दोनों को बड़ा मजा आ रहा था.

खाने के बाद मैंने देखा कि मामी की आंखें वासना से लाल हुई पड़ी थीं. वो किसी तरह से थाली लेकर उठीं और बर्तन समेटते हुए उठ गईं.

मैंने कहा- मैं कमरे में आपका इन्तजार कर रहा हूँ.
उन्होंने मुझे बस प्यार से देखा और सर हिला कर अलग हो गईं.

मैं उनके कमरे में जाकर टीवी देखने लगा. वे अपना काम खत्म करके रूम में आ गईं और मेरे साथ बेड पर बैठ गईं.

कुछ देर हमने इधर उधर की बातें की. फिर मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने पास खींच लिया. हम दोनों एकदम करीब होकर बातें करने लगे. हम दोनों की गर्म सांसें एक दूसरे से लड़ने लगी थीं.

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